साकार हुई कल्पना-2

(Sakar Hui Kalpna-2)

हम अपनी कार से जयपुर भ्रमण पर निकल पड़े। मैं सोचकर आया था कि जयपुर का अधिकतर हिस्सा मैं उन्हें आज ही घुमा दूंगा। आज मैं ऑफिस से छुट्टी लेकर आया था और कल मेरे पास उतना वक्त नहीं था। शाम को मैंने एक राजस्थान थीम के सुप्रसिद्ध और महंगे रिसोर्ट का सोच रखा था। रास्ते में नार्मल बातें ही होती रहीं। मैं सभ्यता से पेश आ रहा था, बिना वजह कल्पना को देखने या स्पर्श करने से बच रहा था। उनके कैमरे में तस्वीरें भी उन दोनों के ही ले रहा था।

और फिर हम एक एकांत वाले पार्क में पहुंचे। वहाँ मेरा संयम थोड़ा थोड़ा डिगने लगा। क्या हम सिर्फ नार्मल बातें ही करते रहेंगे? पहल तो करनी ही थी… तो मैंने जान बूझ कर श्याम की लिखी कहानियों का जिक्र किया, और वो भी केले का भोज का!
कल्पना शरमा भी दी और मुस्कुरा भी दी।
माहौल बदलने लगा।
मैंने शालू की गुदाई की चर्चा छेड़ी, क्योंकि यही वह कहानी थी जिसमें श्याम ने कल्पना के नग्न जिस्म, उसकी योनि, नितम्बों आदि का खुलकर बखान किया था। सुनकर वे और शर्मा गईं, लेकिन रुख सकारात्मक लगा। अब कल्पना अपने कैमरे और मोबाइल की तस्वीरों में मुझे भी शामिल कर रही थीं। उन्होंने कुछ सेल्फी ली हम तीनों की!

घूमने का एक फेज़ पूरा हो चुका था हम गेस्ट हाउस पहुँचे, साथ लंच किया। अब हम सब काफी कम्फ़र्टेबल हो गए थे।

शुरुआत फोटो से हुई। मैंने उन्हें मोबाइल से मेरी एक पाठिका, जो दिल्ली में रहती है और जिससे हाल ही में मेरा सेक्स सम्बन्ध बना था, उसकी कुछ तस्वीरें दिखाईं। उसकी कुछ सामान्य कपड़ों में और कुछ अर्द्धनग्न और पूरी नग्न तस्वीरें मैं श्याम से पहले ही शेयर कर चुका था। शायद वे तस्वीरें श्याम ने कल्पना को भी दिखा दी थीं।
दिल्ली वाली ने अपने चूत की बहुत ही उत्तेजक शेविंग मुझसे कराई थी। मैंने उसकी पिक्स दिखाई। चूत पर लगी साबुन की झाग और फिर शेविंग के बाद साफ चमकती चूत।

कल्पना ने उन तस्वीरों को बिना विचलित हुए सामान्य भाव से देखा, एक बार हल्के से बोली- अच्छी हैं।

श्याम ने कल्पना के अर्धनग्न फोटो दिखाए। इस दौरान कल्पना हमारे नज़दीक ही बैठी हुई थी, वह शरमा रही थी लेकिन श्याम को नहीं रोक रही थी खुद के ऐसे फोटोस दिखाने में।
सच में वाइफ हो तो ऐसी… एक दो फोटोज में वे बिल्कुल अनावृत योनि के साथ पैर फैलाकर लेटी हुई थी।
मैंने उस पिक को ज़ूम करके देखा तो कल्पना और लजा गई। मेरा दिल उस पर उमड़ने लगा।

अब माहौल में उत्तेजना और गर्मी आने लगी थी। मैंने सोचा, यही समय है कुछ पहल करनी चाहिए, मैंने कहा- चलिए, मैं आप लोगों के कुछ नजदीकियों वाले फोटो लेता हूँ।
लेकिन श्याम बोले- मैं लेता हूँ। तुम दोनों बहुत चैट करते हो, एक बार साथ बैठकर देखो, तुम दोनों कैसे लगते हो।
कहकर उन्होंने कल्पना का हाथ पकड़ा और उसे लाकर मेरे पास बिठा दिया।

कल्पना की संकोच भरी हँसी से ‘ये क्या कर रहे हैं?’ की आवाज मेरे कान में संगीत की तरह बज गई।
मैं एक बात यहाँ और जोड़ दूँ कि कल्पना की आवाज भी बहुत अच्छी है। फोन पर उनकी आवाज बहुत ही सुंदर लगती थी।
कल्पना शरमाई पर ज्यादा विरोध नहीं किया।

श्याम ने हम दोनों की कुछ नार्मल तस्वीरें लीं। इस दौरान ‘थोड़ा और पास हो जाओ, थोड़ा और पास…’ कहते हुए मुझे कल्पना से एकदम सटा दिया। ख्वाब में कितने दिन से देख रही सुंदरी को इतने पास देखकर मैं उत्तेजित के साथ नर्वस भी हो रहा था।
उन्होंने मुझे अपना हाथ कल्पना के कंधे पर रखने को कहा, मैंने कुछ हिचकते हुए कंधे पर हाथ रखा। श्याम ने कुछ तस्वीरें लीं, इस दौरान एक बार श्याम ने खुद ही मेरा हाथ पकड़कर कल्पना के कंधे पर अच्छे से रख दिया।
अब मुझे लग ही रहा था कि श्याम ने खुद ही कह दिया कि मैं आलिंगन करूँ।

मैं सन्न रह गया… सोचा, मना करूँ। लेकिन मेरे पैंट में हो रही हलचल ने मुझे चुप करा दिया। मैंने कल्पना को दोनों हाथों के घेरे में ले लिया।
श्याम इन नजदीकियों को कैमरे में क़ैद कर रहे थे। कल्पना के जिस्म की कोमलता और कसावट मुझे मजबूर कर रही थी। जब श्याम ने बोला चुम्बन के लिए… तो इस बार मैंने देर नहीं की। आलिंगन को कसते हुए मैंने उनके गाल पर एक चुम्बन ले लिया।
न जाने कल्पना ने क्या सोचा होगा मेरी इस हरकत पर। कभी पूछूंगा उनसे!

अब मैंने सुझाव दिया कि बेडरूम में चलना चाहिए। मैं कुछ फोटो लूँगा आप दोनों के!

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हम सही दिशा में जा रहे थे। मैं कल्पना की तहे-दिल से तारीफ़ करना चाहूँगा। वे इन तमाम बातों के दौरान न तो कहीं चीप लगीं न ही कहीं अनिच्छुक। शर्म और मैच्योरिटी की एकदम सही मात्रा, जो औरत को बहुत ही आकर्षक बना देती है।

मुझसे मुक्ति मिलते ही वे तैयार हो गईं- ठीक है, मैं चेंज कर के आती हूँ।
हम सभी ड्राइंग हॉल से निकलकर बेडरूम में चले आए।

जब वे चेंज कर के आईं तो मैं देखता ही रह गया, ठगा सा रह गया। वो उसी नाइटी में थी जिसमें मैंने उनके कई उत्तेजक फोटो देख रखे थे। गहरे गुलाबी रंग का लिनन का टू पीस गाउन। बाहरी पीस के दो फीते छातियों को ढकते हुए गले से ऊपर जाकर गरदन पर बंधते थे। मेरी दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं और मेरा लंड बेकाबू होने लगा।
श्याम और कल्पना जी, मैं क्षमा चाहूँगा लंड और चूत जैसे शब्दों के प्रयोग के लिए, क्योंकि ये सब लिखते हुए मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही है। प्लीज़ माइंड मत करना!

कैमरा अब मेरे पास था, मैंने उस अप्सरा के फोटो खींचने शुरू किये। वो अपनी उसी मादक बंद होंठों वाली मुस्कान के साथ पोज़ दे रही थीं।
श्याम मुझे निर्देशित कर रहे थे। श्याम अच्छे फोटोग्राफर हैं। यह मुझे उनकी पहले भेजी गई तस्वीरों से पता था।

अब मैंने कैमरा रखा और नज़दीक जाकर सुंदरी की गरदन पर से वह गाँठ खोल दी जिसे खोलने की इच्छा मेरे मन में कब से गाँठ जमाए बैठी थी। वे तस्वीरें जिसमें कल्पना उस गाँठ को खुद से खोल रही थी और खुलने के बाद नंगी पीठ दिखा रही थी, श्याम ने पहले मुझसे शेयर की हुई थीं।
गाँठ खुली और मैं एक क्षण के लिए गरदन पर की उस जगह को और अपने हाथों में पकड़े फीतों को हसरत से देखता रहा। इच्छा थी कि खुद ही कल्पना के बदन से यह गाउन उतारूँ, मगर मैं फोटोग्राफर की भूमिका में था, मैंने फीते छोड़कर कैमरा संभाल लिया।

आगे की कहानी अलगे भाग में पढ़े-