साकार हुई कल्पना-3

(Sakar Hui Kalpna-3)

श्याम ने कल्पना के पीछे जाकर दोनों हाथों से उन फीतों को पकड़ा और कल्पना को मुझे सामने से दिखाते हुए अपने दोनों हाथ नीचे करने शुरू कर दिए। कल्पना के नंगे कंधों पर ब्रा-स्ट्रैप और इनर गाउन की पतली रेशमी डोरियाँ प्रकट हो गईं।

मैं जल्दी जल्दी फोटो ले रहा था। धीरे-धीरे उन्होंने दोनों फीतों को कल्पना के वक्षों से नीचे खींच दिया। कल्पना के सीने आधी दूर तक ब्रा में और आधे इनर गाउन में ढके थे, मैंने नजदीक जाकर उस दृश्य के कुछ क्लोज अप फोटो लिए। वो अंतर्वस्त्र में मेरे एकदम नज़दीक थीं, उनकी साँसें भी तेज़ थी और मैं आवेग में था।
श्याम ने मुझे उस ऊपरी आवरण को उतार देने के लिए कहा।
मैं तो कब से उसके वस्त्र-हरण की इच्छा दबाए था, मैंने कैमरा रखा और कल्पना के जिस्म को स्पर्श करते हुए उस बेहद चिकने कपड़े को पेट, कमर और कूल्हों के नीचे उतारा और फिर उसे सरक कर नीचे फर्श पर गिर जाने दिया।

अब वो कामुक हसीना एक झीनी-सी नाइटी में थी जिसमे कंधे पर सिर्फ डोरी थी और क्लीवेज बहुत गहरा। अब बहुत कुछ दिख रहा था।
मैंने फिर कुछ फोटो लिए। यह सब कुछ मेरे लिए जन्नत के सामान था।

मैंने श्याम को बिस्तर पर आने को कहा और कल्पना को भी! दोनों बिस्तर पर आकर चिपक गए। श्याम ने अपने होंठ कल्पना के होंठों पे रख दिए, एक चुम्बन, फिर दूसरा, और फिर तीसरा। मैं क्लिक किये जा रहा था।
और फिर…

श्याम ने कल्पना का एक उभार उजागर कर दिया। एकदम बाहर उन्नत वक्ष, दूध का गोला, उस पर एक साँवला बड़े घेरे वाला चूचुक…
मेरी आँखें खुली रह गईं।
श्याम के चुम्बन होंठों से हटकर उस दूधिया उभार पर पड़ने लगे। यह सब देखकर मेरी बैचैनी बढ़ती जा रही थी।

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चूमते चूमते श्याम ने आहिस्ता से उस चूचुक को मुँह में खींच लिया। मैं नज़दीक से फोटो लेने के लिए बिस्तर पे चला आया। चूचुक पर कसे होंठों के कुछ क्लोजप लिए। चूचुक मुँह के अंदर होने से श्याम के होंठ वक्ष पर रखे हुए दिखाई देते थे। एक नायाब सेक्सी पेयर मेरे सामने कामुकता में लिप्त था।
कल्पना की अंदर वाली नाइटी छोटी थी, इसलिए उसके पैर भी उघड़ गए थे।

अब श्याम ने मुझसे कैमरा ले लिया और मुझे कल्पना को संभालने को कहा। मैं बयान नहीं कर सकता वह क्षण कितना अद्भुत था मेरे लिए…
कल्पना का एक अधखुला वक्ष उसकी ब्रा में फँसा हुआ था, इसलिए ब्रा को निकलना जरूरी था। मैंने बगल से हाथ डालते हुए उसे सीधा बैठाया फिर उसके घने बालों को आगे किया और उसकी अधनंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए उसकी ब्रा का हुक खोला।
उस सुन्दरी की ब्रा का हुक खोलने का सौभाग्य बहुत बड़ा था। इसे खोलना उनकी गरदन पर फीते की गाँठ खोलने से कहीं ज्यादा उत्तेजक था।

ब्रा के कप उसके उभार में फँसे हुए थे जो खींचने से भी नहीं निकल रहे थे। मैंने साहस करते हुए अपने हाथ उनके क्लीवेज में घुसा दिए और निकालने का बहाना करते हुए उसके समूचे बूब सहला लिया।
धन्य हो गया मैं!
कल्पना का सहयोग मेरी वासना को हवा दे रहा था। मैंने उसके हाथों को पूरा ऊँचा कर उसके बूब्स पर से ब्रा को हटाया और उसे जानबूझ कर ऊपर से निकाला। इस बहाने मैंने कल्पना की दोनों बगलों को जो बाल रहित थी, उनको सहला लिया।

श्याम क्लिक क्लिक फोटो ले रहे थे और बीच-बीच में निर्देश भी दे रहे थे। उनके बताए अनुसार मैंने कल्पना को पीछे से बाहों में कसते हुए उसके गाल से अपने गाल सटाकर उसके बूब्स पे हाथ रखकर फोटो खिंचाया।
वह फोटो बड़ा नायाब बन पड़ा है। श्याम ने वह तस्वीर मुझे दिखाई है।

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और फिर मुझे आदेश हुआ कि मैं नाइटी को कंधों पर से उतारकर वक्षों को पूरा आज़ाद कर दूँ। यह काम भी मैंने पूरी शिद्दत से किया। क्या कहूँ मुझे शब्द ही नहीं मिल रहे, मुझे कैसा महसूस हो रहा था।
(काश ये वाकया भी श्याम ही लिखते तो गज़ब लिखते।)

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टॉपलेस कल्पना को पीठ पर तकिए का सहारा देकर श्याम ने पलंग के सिरहाने बैठा दिया। मैंने सामने से उनके बूब्स सम्हाल लिए। मेरे लिए ये दुनिया की सबसे बड़ी फेंटेसी थी। मैं उनकी सेक्सी वाइफ के बूब्स सहला रहा था, दबा रहा था, वो भी उसके ही सामने… वे तस्वीरें ले रहे थे।
सिंगल पीस नाइटी कोई बाधा नहीं थी।

मैंने कल्पना के हाथ अपनी गर्दन में माला की तरह से पहन लिए और उसके मुँह को चूमते हुए उनके हाथ, बगलें, बूब्स, पेट और नाइटी में बाहर निकाली, उनकी जाँघों तक को सहलाने लगा।
अब काबू करना मुश्किल होता जा रहा था, कल्पना भी रह-रहकर मुझे बाँहों में भींच लेती थी, उत्तेजना उस पर भी हावी होती जा रही थी।

अब श्याम कैमरा छोड़कर हमारे पास आ गए। कल्पना को आहिस्ता-आहिस्ता हमने अपने बीच में लिटा दिया, जैसे वह कोई कीमती तोहफा हो। मैंने उस कीमती तोहफे की कीमती कवर (अंदरूनी नाइटी) को उसके कूल्हों से पेट और नितम्बों के रास्ते उसके जिस्म से अलग कर दिया।
अब कल्पना मात्र पैंटी में हम दोनों के बीच में थी, मैंने उसके दोनों हाथ को पकड़कर उठाया और उसके सर के ऊपर रख दिए। वह खुले स्तनों की वजह से हाथ उठाने देने में संकोच करने लगी तो श्याम ने मेरा साथ किया। वह मान गई।

सिर के ऊपर दोनों हाथ, खुले स्तन, सुतवाँ पेट, फैलते कूल्हे और कामदेव स्थल को छिपाए छोटी सी पैंटी। अप्सरा अपने सबसे मादक, सबसे उत्तेजक रूप में लेटी थी। श्याम और मैं अपने अपने हिस्से के दूधिया उभार को मसलने-दबाने में व्यस्त थे। कल्पना की आहें तेजी से बढ़ रही थीं। उसका समूचा जिस्म कसावट लिए हुए था, चिकना था, मादक था।

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थोड़ी देर में ही हमारा प्यार नाज़ुक दौर से आगे बढ़कर कठोर हो गया। कल्पना की आहें सीत्कार में बदल गईं। फिर भी, उसका सहयोग ज़ारी था। कमाल की लेडी है ये सच में।

मेरा मन उसकी चूचियों को चूसने का हो रहा था लेकिन श्याम क्या सोचेगा ये सोचकर खुद को कंट्रोल किया हुआ था। पाठक पढ़कर हँसेंगे कि कैसा आदमी हूँ, चूचियों को अच्छे से दबाने, मसलने के बाद उन्हें चूसने में संकोच? लेकिन इसे वही समझ सकता है जिसने थ्रीसम किया हो और ठीक से किया हो। दूसरी स्त्री को उसके पति के सामने करने के लिए सहमति का स्तर पता करते रहना जरूरी है।

खैर, मेरी मुश्किल खुद श्याम ने आसान कर दी, उन्होंने खुद ही शुरूआत कर दी। अब कल्पना का एक निप्पल श्याम के मुँह में और दूसरा मेरे मुँह में। और मैं तो पागल-सा दोनों हाथों से बूब्स को लगभग निचोड़ते हुए चूस रहा था।
दुनिया की बहुत कम खुशकिस्मत औरतें होती होंगी जिनके दोनों बूब्स एक साथ चूसे जाते हैं। कल्पना निश्चय ही इन सबको बहुत एन्जॉय कर रही होगी।
(कभी उससे बात होगी तो पूछूंगा कैसा लग रहा था।)

अगले भाग में कहानी समाप्त-

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