साकार हुई कल्पना-1

(Sakar Hui Kalpna-1)

HotSexStory.xyz के सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार!
आज मैं महीनों नहीं, सालों बाद HotSexStory.xyz पर कुछ लिख रहा हूँ.
आज तक मैंने जो भी लिखा वो लगभग मेरी कल्पना ही थी जिसे मैं अपने हिसाब से लिखता चला गया। लेकिन आज जिसके बारे में लिख रहा हूँ वो कल्पना होते हुए भी हकीकत है।

HotSexStory.xyz की वजह से मुझे मिला यह एक हसीं तोहफा! एक नायाब श्रेष्ठ हिंदी कथाकार से परिचय, मेल का आदान-प्रदान, फिर फोन पर बातें- सब कुछ होता चला गया।
श्याम एक अनुभवी और बहुत उच्च कोटि का उत्तेज़क साहित्य लिखने वाले हैं। वे लीलाधर के नाम से लिखते हैं और अंतर्वासना पर उनकी कई विलक्षण कहानियाँ उपलब्ध हैं, जैसे-
स्वीटी या जूली
केले का भोज
शालू की गुदाई
लाजो का उद्धार
विदुषी की विनिमय लीला
जेम्स की कल्पना
वगैरह।
मैं ऐसे दुर्लभ व्यक्ति के उनके संपर्क में बना रहना चाहता था, और रहा भी।

एक बात हम दोनों में समान थी- और वो ये कि हमारी कहानियों की नायिका अक्सर हमारी पत्नी हुआ करती थी। उन्हें हम किसी गैर मर्द से संभोग करते देखने की चाहत रखते थे। इसलिए हम एक-दूसरे से अपनी अपनी पत्नियों का नग्न और कामुक वर्णन करने में संकोच नहीं करते थे।
लेकिन हम दोनों में एक बड़ा अंतर भी था- श्याम की पत्नी उनकी बिल्कुल दोस्त जैसी थी, उनकी कहानियाँ पहले वही पढ़ती थी और पास करती थी, जबकि मेरी स्थिति इसके एकदम विपरीत थी। जैसा कि ज्यादातर लोगों के साथ होता है, मैं अकेले अकेले ही सारे यौन ख्वाब देखने को मजबूर था।
इसलिए मेरी लिखी बातें जहाँ कोरी कल्पना होती थीं, श्याम की कल्पना एकदम हकीकत। उन्होंने एक पर पुरुष ‘जेम्स’ के साथ कल्पना के सम्भोग के बारे में एक कहानी ही लिख डाली थी
वह कहानी उनकी सच्ची घटना थी जिसे पढ़ कर मैं महीनों उत्तेजित रहा, बड़ी तीव्रता से कल्पना के साथ सम्भोग के रंगीन ख्वाब देखने लगा था।

कल्पना का दीवाना तो मैं तभी से हो गया था जब मैंने लीलाधर की कहानी ‘शालू की गुदाई’ पढ़ी थी। उस कहानी में उन्होंने उसकी चूत में गुदना गुदवाने का और क्लिटोरिस में रिंग पहनाने का ऐसा समाँ बांधा था कि मैं उसके बारे में उत्सुकता से भर गया था और उसके साथ सबकुछ करने के सपने देखने लगा था। लेकिन वे सपने कभी हकीकत में बदल जाएंगे ऐसा तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

कल्पना से इतने जुड़ाव की वजह यह थी कि श्याम ने दोस्ती के क्रम में मेरा भी परिचय कल्पना से करा दिया था और कल्पना से मेरी चैट होने लगी थी। धीरे धीरे सेक्सी चैट भी होने लगी।

उधर श्याम और मैं एक-दूसरे को अपनी पत्नियों के अर्धनग्न और पूर्णतया नग्न फोटो भी शेयर करने लगे थे। इसमें भी श्याम ने ही बाज़ी मारी, क्योंकि कल्पना खुलकर उनका साथ देती थी। उन तस्वीरों में मैं कल्पना के सौंदर्य से अभिभूत था।

अब ऐसी सुंदरी की उत्तेजक नग्न तस्वीरें देखने के बाद उसके साथ सेक्सी चैट भी कर रहे हों तो आपकी क्या हालत होगी आप अंदाजा लगा सकते हैं। लेकिन मैं श्याम को खुलकर यह बात बताता नहीं था क्योंकि मेरे पास साथ देने के लिए पत्नी नहीं थी।
लेकिन ‘जेम्स की कल्पना’ पढ़ने के बाद मैं इतना मजबूर हो गया कि एक दिन श्याम के सामने मैंने अपने मन की बात खोल दी।

आश्चर्य…

श्याम ने स्वीकार कर लिया। बस यह कहा कि मुझे कल्पना के साथ मधुर और संतुलित व्यवहार करना पड़ेगा। मेरी तो खूबी ही है कि मैं लड़की या महिला की सबसे ज्यादा इज्ज़त करता हूँ उनके साथ सलीके से पेश आता हूँ।
सुनकर मेरे तो जैसे पाँव के नीचे से जमीन ही निकल गई।
इतना बड़ा, असंभव ख्वाब क्या सच हो सकता है!
क्या मैं कल्पना के साथ सचमुच…?

मैं उस दिन का इंतजार करने लगा। श्याम अपनी नौकरी में बहुत व्यस्त रहनेवाले जीव थे, मौका आते आते दो साल लग गए।
बहरहाल उस दिन के बाद हम अक्सर मिलने की प्लानिंग बनाने लगे। दिल्ली श्याम का भी आना जाना होता था और मेरा भी इसलिए वहीं मिलने की योजना बनाते थे। मैंने श्याम से बस एक प्रॉमिस ले लिया था कि मैं कल्पना के मादक सामीप्य में तुम्हारी मौजूदगी में ही जाऊँगा, अकेला नहीं। लोग अपनी शादीशुदा प्रेयसी के आगोश में उसके पति से छुपकर सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन मुझे श्याम पर भरोसा था- हद से ज्यादा भरोसा। इसलिए मैं उनकी मौजूदगी में अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकता था।

और फिर वो दिन आ ही गया- वे दोनों जयपुर घूमने के लिए आ रहे थे।
जयपुर- मेरा शहर।

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एक आलीशान गेस्ट हाउस के बाहर जब पहली बार श्याम को देखा तो सच बताऊँ मैं उनका रौब-दाब वाला व्यक्तित्व देखकर घबरा गया। गज़ब की हाइट, गज़ब का आत्मविश्वास। इधर मैं एक औसत लम्बाई का सरल इंसान जो बोलने में भी थोड़ा-थोड़ा हकलाता है। मुझे देखने वाले ही समझ जाते हैं कि मैं कितना नर्वस हो जाता हूँ। उन्हें देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि ये मर्द कलात्मक यौन साहित्य लिखने वाला हो सकता है। एक तो सिचुएशन ही नर्वस करने वाली थी, श्याम की कड़क फौजी जैसी पर्सनैलिटी को देखकर मेरी मधुर मिलन की संभावनाएँ दम तोड़ने लगीं।

जो भी हो, हम ऊपर रूम में गए। साधारण सफ़र इत्यादि की बातें होती रही, लेकिन मेरा धड़कता हुआ दिल कल्पना के दीदार की प्रतीक्षा कर रहा था। मेरी स्थिति किशोर की सी हो रही थी जो कॉलेज के बाहर धड़कते हुए अपनी चहेती लड़की का इंतजार करता है।

और फिर कल्पना अवतरित हुई- शानदार महंगा गाउन पहने हुए जिसमें गहरे नीली पृष्ठभूमि पर पीले फूल बने हुए थे, हाथों में नई-नवेली दुल्हन की तरह मेहंदी लगाए हुए और चेहरे पर हमेशा की तरह बंद होंठों वाली मुस्कान लिए हुए। उन्होंने मेरा अभिवादन किया।

उनकी भव्यता, सौम्यता और गरिमामय व्यक्तित्व को देख कर मैं ख़ासा प्रभावित हुआ। लेकिन इस गरिमामय व्यक्तित्व के साथ वह सब कुछ हो पाएगा जैसा मैं और श्याम सोच रहे थे मुझे बिल्कुल भी न तो मुमकिन लग रहा था और ना ही मुनासिब। कोई महिला बहुत आकर्षक और सेक्सी लगने के साथ-साथ इतनी सम्भ्रांत और गरिमापूर्ण भी लगे यह आश्चर्यजनक था।
मैंने मन को समझाया कि ज़िन्दगी में सेक्स ही सब कुछ नहीं है। एक सभ्रांत खुले विचारों के जोड़े से दोस्ती भी अच्छी है।

उन्होंने ब्रेकफास्ट मंगवा रखा था। हमने साथ नाश्ता किया। एक छोटा सा परिचय बना और मेरी धड़कन संभली। कल्पना कपड़े बदलकर आईं। मैं पुनः उन नए कपड़ों में मन ही मन उनकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सका।

यह कहानी कुल चार भागो में है, आगे की कहानी अलगे भाग में पढ़े-

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