सामूहिक चूत चुदाई का आनंद 2

Samuhik chut chudai ka anand-2

ये बातें सुन कर संजय बोला – अरे बाबली, तू चिंता मत कर, अन्दर भी घुस जायेगा और तुझे भी मज़ा आएगा।

जवानी का नशा और वासना की आग अब अपना नंगा-नाच नाच रही थी और एक ही बेड पर सब नंगे हो चुके थे और चुदाई का सफ़र शुरू होने वाला था।

संजय दीपिका की चूचियाँ चूस रहा था, पहले एक किस उसके होंठों पर की और उसके बाद उसकी नंगी चूत के होंठों को अपनी दोनों हाथ से पकड कर उसकी चूत को खोल कर देखने लगा… उसकी गुलाबी रंग की चूत बहुत मस्त लग रही थी।

संजय ने अपना संयम खोते हुए अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिए और उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ डाल दी…

उसके ऐसा करने से दीपिका के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी और उसे मज़ा आने लगा, इन दोनों को देख कर बलदीप ने अपना लण्ड रजनी के हाथ में दे दिया।

दूसरी और संजय ने दीपिका को अपने लण्ड को उसके पूरे शरीर पर फेरने के लिए कहा।

अब सभी पूरी तरह सेक्स के नशे में मदहोश थे…

अब संजय ने दीपिका की दोनों टाँगें अपने कन्धों पर रख दी और लण्ड को उसकी चूत पर सहलाने लगा।

अब दीपिका की तड़प लण्ड लेने के लिए और बढ़ने लगी और उससे रहा न गया, वो संजय को बोली – आहह… मेरी जान, अब रहा नहीं जाता… प्लीज, अपने इस लण्ड को मेरी चूत के अन्दर डालो…

यह सुन कर संजय ने अपना लण्ड उसकी चूत में डालना शुरू कर दिया, ऐसा करने से उसे दर्द होने लगा और वो दर्द के मारे सिसकने लगी।

संजय ने एक झटका लगाया और अपने लण्ड का सुपाडा दीपिका की चूत में डाल दिया। दीपिका को थोडा दर्द हुआ और रजनी की चीख निकल गई…

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दीपिका के होंठों को संजय ने अपने होंठों से दबा लिया और अपने लण्ड का दबाब जारी रखा, उसने दीपिका के बूब्स अपनी छाती से दबा कर रखे थे और अपने लण्ड का दबाब उसकी चूत पर लगातार डालते जा रहा था।

संजय ने अब जोर सा एक झटका मारा और अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में डाल दिया।

इस बार दीपिका के मुँह से जोर से चीख निकली, मगर उसके होंठ संजय के होंठों में होने के कारण उसकी चीख बाहर नहीं निकल पाई।

संजय लगातार झटके पर झटका लगाता जा रहा था, अब तक दीपिका समान्य हो चुकी थी और उसको भी मजा आने लगा था…

उसको नॉर्मल देख कर संजय ने उसके होंठों को छोड़ दिया और उसके गालों पर किस करने लगा।

अब वो बेधड़क लण्ड चूत के अंदर-बाहर करने लगा था।

इधर बलदीप ने रजनी को अपने लण्ड पर बैठाया हुआ था और रजनी भी अब तक मजे से चुद रही थी…

बलदीप ज़ोर-ज़ोर से रजनी की चुचियाँ दबा रहा था।

जब दीपिका ने रजनी की तरफ देखा तो आंख मार कर बोली – बधाई हो आज आप कली से फूल बन गई हो…

रजनी ने कहा – अरे!!! हम तो कब से फूल बन चुके हैं। दीपिका ये सुनकर दंग रह गई और बोली – क्या, तुम पहले से ये सब कर चुके हो? मगर तुमने पहले तो कभी इस बात का ज़िक्र नहीं किया।

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रजनी बोली – सब्र करो, सब बता दूँगी… अभी तू चुदाई का मज़ा ले… ये देख साले कितने बड़े लौड़े आज हम दोनों को एक साथ चोद रहे हैं…

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रजनी अब पूरी मस्ती में आ गई थी इसी लिए वो गालियाँ बोल रही थी…

उसके मुँह से मादार-चोद और बहन-चोद जैसी गालियाँ सुन कर बलदीप के साथ-साथ संजय भी बहुत मस्त हो गया और उन्होंने दोनों को एक-दूसरे की तरफ मुँह करके घोड़ी बना लिया और दोनों की चूतों में लण्ड डाल कर जोरदार चुदाई शुरू कर दी।

रजनी और दीपिका भी आपस में किस कर रही थीं, और एक-दूसरी के मम्मो को भी हाथों से सहला रही थीं।

दोनों एक साथ दो मर्दों से चुद रही थीं…

बलदीप का लौड़ा बहुत स्पीड से रजनी की चूत को फाड़ रहा था और इधर दीपिका की जवान चूत में संजय का लौड़ा घुसा हुआ था।

अब दोनों चूतें बहुत जोरदार तरीके से चुद रही थीं। कमरे में उनकी सिसकारियाँ की आवाजें गूंज रहीं थीं।

बलदीप ने एक जोरदार झटका, रजनी की चूत में लगया और बोला – ले सा… ली… मादर चोद… बहन… की… लौ… ड़ी… देख।। आज तू अपनी दोस्त के सामने चुद रही है… कुतिया… की औलाद… मज़ा आ रहा है या नहीं…

ये सुन कर रजनी बोली – चोद सा…ले… चो…द… आह्ह्ह… अम्म्म्म्म्म्म्म्म्म… आ… आ… आ… आ… आ… हाँ… ऐसे ही… ऐसे ही… चोद… सा।ले… ले… मार… मेरी… चूत… गाण्ड फाड़ दे मेरी… रंडी हूँ मैं… बहुत बड़ी छीनाल हूँ… मेरी चुदक्कड़ चूत में साली हमेशा आग लगी रहती है… देख… दीपिका… साले का… लौड़ा… आ…

उनकी बातें सुनकर दीपिका और संजय भी उनकी बातों में शामिल हो गए…

दीपिका बोली – चोदो… सा… लों… चोदो हमें… अ… पनी… कु… ति… या… बना कर चोदो… हमें… आआह्ह्ह।। हाँ… ऐसे ही मार मेरी और जोर से मार… एक साथ दो-दो लौड़े डाल दो, हम दोनों रंडियों की चूत में… आह्ह… चोदो, चोदो, चोदो… तुम्हारी बहन की चूत… चोदो अपनी माँ-बहन के दलालों… दिखाओ कितना दम है तुम्हारे लण्ड में…

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संजय भी बोला – बलदीप चल दिखा देते हैं, इन दो पैसे की रंडियों को अपनी मर्दानगी… इन सालियाँ की बदल-बदल कर बहन चोदते हैं… बोलो, साली रांडो… ऐसी मर्दानगी दिखाएँगे की अपने घर की सारी औरतों को नंगा कर के लाओगी, हम दोनों से चुदवाने…

रजनी बोली – जो… मर्जी करो… जैसे मर्ज़ी करो… बस हम छिनालों की चूत की आग बुझाओ… बदल-बदल कर क्या, दोनों एक ही चूत में दोनों लण्ड घुसा दो… रंडिया बना दो, हम दोनों को… नंगा करके चोदो, बीच सड़क पर… गाण्ड फाड़ दो, हम दो बहनों की… आहह… आह… चोद… चोद, चोद… उम्म्म्मममममममममममममम… आ आ आ आ आ आ… ऐसे ही… ऐसे ही…

इस तरह चारों अब पूरे जोर शोर से चुदाई कर रहे थे और सभी बेहद गन्दी-गन्दी गालियाँ देते हुए एक साथ चुदाई का मज़ा ले रहे थे…

यक़ीनन, आप में से कई लोगों को उनकी किस्मत से रशक हो रहा होगा…

दोस्तो, ये तो सच्चाई है कि चुदाई जितनी गंदी हो उतनी ही मज़ेदार होती है, परंतु हमारा ये चुदाई का बेहद मज़ेदार और गंदा सफ़र अभी ख़तम नही हुआ है…

हम और आप अगले भाग मे फिर चलेंगे, अंतिम पड़ाव की और…

तब तक आपकी राय मेरी लिए बहुमूल्य है…

आपका दोस्त
रवि

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