सासू माँ के मुहं में लंड दिया-4

Sasu ma ke muh me lund diya-4

अब मुझे पूरा यकीन हो गया कि चिड़िया जाल में फंस चुकी है और इतने में मेरी सास ने उनके ठीक ऊपर अलमारी में से मुझे एक डब्बा उतारने को कहा, वैसे मुझे भी इसी मौके की मुझे तलाश थी. में उनके पीछे पहुंचकर उनसे सटे हुए हाथ ऊपर करके डब्बा उतारने की कोशिश करने लगा. वैसे तो डब्बा मेरी पहुंच में था, लेकिन मैंने ऐसा दिखाया कि मेरा हाथ वहां पर पहुंच नहीं रहा है इसलिए मैंने ऊपर उठने के लिए उनके कंधे पर हाथ रखा और इधर दूसरे हाथ से अपने लंड को पयज़ामे से ही उनकी गांड पर सटाया और फिर एक झटके से मैंने उनके कंधे को दबाते हुए ऊपर जाने का प्रयास किया, जिसके कारण मेरा लंड उनकी साड़ी में अंदर तक घुसता चला गया.

इस हरकत से मेरी सासू माँ एकदम से उछल पड़ी और अपने को मुझसे थोड़ा अलग हटाने के लिए अपने पैर के पंजो पर खड़ी हो गयी और थोड़ा आगे को झुक गयी. मैंने थोड़ा पीछे हटते हुए लंड को लोवर से बाहर निकाला और उनकी गांड पर फिर एक झटका मारा तो लंड खुला होने की वजह से अंदर तक घुस गया और उनके मुहं से एक हल्की सी चीख निकल गई. मैंने अब कंधे को और दबाते हुए ऊपर उठा तो मेरा लंड उनकी पीठ पर छू गया और अपने बदन पर नंगे लंड का स्पर्श वो भाँप गयी और एक सिसकी उनके मुहं से निकल पड़ी.

फिर मैंने डब्बा उतारा और नीचे आते वक़्त मैंने हाथ उनके बूब्स के नीचे से अंदर ले जाते हुए पेट को पकड़ा और ऐसा दिखाया कि में बॅलेन्स बनाने के लिए ऐसा कर रहा हूँ और नीचे आने के बाद में कुछ देर वैसे ही खड़ा रहा और मैंने सीधे हाथ से लंड को वापस लोवर में डाल लिया और जैसे ही में वहां से हटा तो मेरी सास ने अपनी साड़ी को ठीक किया और बाहर हॉल में चली गयी, वो यह देखने गई थी कि सुधा उठी तो नहीं है और वापस आने के बाद उनकी आँखो में एक अलग ही आग थी.

फिर मैंने भी अब ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा और उनके पीछे जाकर उन्हे गले से लगाया. मेरे दोनों हाथ उनके बूब्स पर सट रहे थे, लेकिन मैंने उन्हे पकड़ा नहीं था और जब सासू माँ ने मुझसे कुछ नहीं कहा तो मैंने एक हाथ उनकी गर्दन पर ले जाते हुए दूसरा हाथ उनकी पेंटी पर ले गया. में उन्हे गर्दन से पीछे झुकाते हुए उनके गालों को चूमने लगा और दूसरे हाथ को मैंने उनकी नाभि पर गोल गोल घुमाते हुए उनके पेट पर चुटकी काट ली. फिर सासू माँ ने थोड़ा विरोध दिखाते हुए कहा कि बेटा यह क्या कर रहे हो? यह सब बहुत ग़लत है.

फिर मैंने कहा कि मम्मी जी कुछ ग़लत नहीं है. में बस आपसे एक बार प्यार करना चाहता हूँ और अब में उनके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा. तो सास ने फिर से कहा कि अगर सुधा ने देख लिया तो क्या होगा? दोस्तों यह बात मेरे लिए ग्रीन सिग्नल थी, क्योंकि उन्हे बस अब पकड़े जाने का डर था. उन्हे मुझसे चुदवाने से कोई भी ऐतराज नहीं था. यह उनकी कही हुई बात से अब साफ हो चुकी थी. तो मैंने उन्हे भरोसा दिलाया मम्मी जी सुधा को कुछ पता नहीं चलेगा, क्योंकि दरवाजा बाहर से बंद है.

तो वो फिर भी नाटक करते हुए बोली कि लेकिन यह सब ग़लत है आप मेरी बेटी के पति है, तो इस बात पर मैंने कहा कि रात को आपने उसी बेटी और उसके पति को सेक्स करते हुए देखा है और मुझे पता है कि आप अंदर ही अंदर मुझसे चुदवाना चाहती है? तो मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो एकदम से चौंक गयी और मुझसे पूछा कि आपको कैसे पता चला?

फिर मैंने उनको उनकी पेंटी की पूरी कहानी को उन्हे बता दिया और कहा कि में आज आपको चुदाई का पूरा मज़ा दूँगा. मेरे मुहं से चुदाई शब्द सुनते ही उन्होंने नज़र हटाते हुए कहा कि ऐसा मत करो. अब मैंने अपने सीधे हाथ को उनके पेट से सरकाते हुए उनके पेटीकोट के अंदर ले गया. मेरा हाथ उनकी चूत तक पहुंच गया था तो उन्होंने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया और शरमाते हुए मुझसे मना करने लगी, लेकिन मैंने ज़ोर से उनके हाथ को झटक दिया और उनकी चूत पर घने और घुंघराले बालों को हाथ में पकड़कर खींचा तो वो उछल पड़ी और उसके मुहं से आईईईईईईइ की आवाज़ निकल गयी. फिर मैंने उन्हे मेरी तरफ घुमाया और उनके ब्लाउज को मेरे सीधे हाथ से खोल दिया. अब मैंने ब्रा को एक झटके में बाहर निकाल दिया और अब उनके दोनों बूब्स बिल्कुल आज़ाद होकर ऊपर नीचे हिलने लगे. दोनों बूब्स पपीते के आकर के थे और भरे हुए थे. उन पर गोल काला धब्बा बहुत ही मादक लग रहा था, उनके निप्पल बड़े और बाहर को निकले हुये थे.

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फिर मैंने थोड़ा झुककर उनके निप्पल को मुहं में भरा और चूसने लगा. उनके गोरे गोरे बूब्स पर काले गोल घेरे में बड़े निप्पल बहुत सेक्सी लग रहे थे और उधर में एक हाथ से लगातार उनकी चूत को सहला रहा था. वो जोश से पागल हुई जा रही थी और अपने सर को दोनों कंधो पर झटके दे रही थी. उनके बाल उनके चेहरे पर गिर आए थे और चेहरा पूरा ढल गया था और करीब पांच मिनट तक निप्पल और बूब्स को चूसने के बाद में उठा और मैंने उनके बालों को पीछे करके उनके होठों को चूम लिया.

मेरे इतना करते ही वो मेरे मुहं को अपने होठों में लेकर चूसने लगी. वो मुझे बहुत जानदार किस किए जा रही थी और अपनी जीभ को बार बार मेरे मुहं में अंदर तक डाल रही थी और में उनकी जीभ को चूस रहा था. करीब पांच मिनट चूमने और चाटने के बाद मैंने उनको खुद से अलग किया तो उन्होंने मेरे होठों पर हल्का सा दाँत से काट लिया. सासू माँ सेक्स की जबरदस्त भूखी और अनुभवी खिलाड़ी लग रही थी. अब मैंने उनको उठाकर ऊपर बैठा दिया और उनके पैरों को फैलाकर उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया. उनके गोरे पैरों के बीच काली झांटो में उनकी चूत बिल्कुल छुपी हुई थी. मैंने झांटो को हटाते हुए उनकी चूत के दर्शन किए और फिर नीचे बैठकर अपनी जीभ को उनकी चूत के होंठो पर सटा दिया. वो मदहोशी में पागल हो गयी और अपने दोनों हाथों से अपनी दोनों निप्पल को मसलने लगी.

मैंने थोड़ी देर तक उनकी चूत के होंठो को चाटा और फिर हाथ से चूत को फैलाकर जीभ को अंदर डाल दिया. उनके मुहं से ऊईईईईईई माँ निकल पड़ा और वो सिसकारियाँ भरने लगी और में लगातार जीभ से उनकी चूत को चोदे जा रहा था. फिर मैंने उनकी चूत के ऊपरी दाने को दाँत से पकड़ा और चूसते हुए खींचा और फिर ज़ोर से छोड़ दिया. इस हरकत ने मेरी सास को और अधिक दीवाना बना दिया और उन्होंने मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत में और अंदर तक सटा दिया. उन्होंने अपनी जाँघो को मेरे सर पर जकड़ लिया, जिससे मेरा सर उनकी दोनों जाँघो में फंस गया और में लगातार उनकी चूत को चूस रहा था जैसे कोई मशीन लगी हुई है. अब उनकी चूत पूरी गीली हो गयी और तब मैंने अपने हाथ की दो उँगलियों को उनकी चूत में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगा. में अब पूरी रफ़्तार से उंगली से उनकी चूत को चोदने लगा और वो मादक आवाज़े निकालने लगी. ओह्ह्ह्हह माँ हे भगवान आहह उईईईईईईईईईई उफ्फ्फ्फ़ और मेरे पूरे हाथ पर उनकी चूत का पानी लगा हुआ था और तब मैंने हाथ को बाहर निकालते हुए उनके मुहं में दे दिया. जिसे सास ने आईसक्रीम के कोन की तरह चूसना शुरू कर दिया.

 

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