ससुर-बहू की चरमसुख की दास्तान 1

(Sasur-Bahu ki Charamsukh ki dastaan)

कभी कभी, पति के प्यार से हुआ संभोग वो शारीरिक, मानसिक और आत्मिक सुख नही दे पता, क्यूंकी औरत और औरत के जिस्म को उस मर्द और मर्दानगी की तलाश होती है, जो पहले उसकी योवन से भरपूर गर्म मादक प्रजनन युक्त जिस्म से मोहित होकर उसकी कामना को पूरी तरह भड़का कर बेशरमी, ज़िद्दिपन और बेरेहमी से भोगना चाहता हो, और बाद में उससे भावनात्मक दृष्टि से जुड़ कर बड़े ही गोपनीय और शातिर तरीके से इस नाजायज़ रिश्ते को बरकरार रखे|

मेरी ज़िंदगी की सच्ची कहानी शुरू करने से पहले, आप सभी पाठकों को शुभ सक्सेना, का नमस्कार|
मेरी उमर ५० साल है, सरकारी नौकरी से रिटाइर्ड हूँ, मेरा छोटा सा परिवार है , मैं, मेरी बीवी, मेरा बेटा, बेटी और नयी नवेली प्यारी बहू रानी|

मेरा परिवार बहू के आने से और भी ख़ुसनूमा हो गया है| बहू रानी ने प्रिवार और पति का ख़याल रखने में अच्छी तरह सामंजयस बनाया हुआ है| उसके आने से घर में सब कुछ शुभ होने लगा है और एक सकारात्मक उर्जा बनी रहती है|

अब मेरी बहू रानी के रंग रूप का चयन भी कर देता हूँ…..

बहू की उमर २६ साल है, गोरा, गदरिया जिस्म लिए ५’५ इंच कद है| बहू बिल्कुल सुहागन की तरह श्रींगार करते हुए घरेलू सारी में रहती है, बहू के गले में वो मंगलसूत्र, उसकी नाज़ुक, गोरी कलाइयों मे वो रंग बिरंगी चूड़ियां, वो जवान उभरे हुए कसे स्तन जो हुमेशा ब्लाउस में क़ैद रहते हैं जो कुछ ही सेकेंड में उपर नीचे होते है जब बहू रानी दौड़ कर बेटे को ऑफिस के लिए खाना पेक कर के देती है, दौड़ती बहू है, दिल मेरा धड़कता है| और बहू रानी के संगमरमर से भी खूबसूरत पैर जिनकी कुद्रती बनावट ही ऐसे है की किसी भी मर्द को बहू के पैरो का दीवाना बनाकर फीट फेटिश हो जाए, कसम से बहू के पैर इतनी खूबसूरत है की उन्हे किसी भी तरह के पेडीक्योर की ज़रूरत नही है| बहू रानी जैसे ही उठकर घर में काम करना चालू करती है उसकी चूड़ियों और प्याल की आवाज़ सुन कर मैं मंत्र मुग्ध हो जाता हूँ, उस आवाज़ वो सुन कर ऐसे ही खो जाता हूँ जैसे एक चकोर चाँद को देख कर|
जिस दिन बहू देर से उठती है, उसकी पायल और चूड़ी की आवाज़ सुनने की बेचानी होती रहती है, और सुनकर ही आराम लगता है|

मेरे बेटे की उमर भी बहू रानी की उमर की है, जिसकी शादी ३ माह पहले हुई है, लेकिन उसकी शादी की रात एक अनहोनी हो गयी थी|
शादी के फेरों के बाद जब बेटा बहू रानी के साथ घर प्रवेश करने आया, तभी अचानक पूरे घर में शॉर्ट सर्किट हो गया, और ३ घंटे लग गये, बेटा और मैं इस प्राब्लम को ठीक करने में लगे रहे, जिस वजह से रात के ३ बज गये, बेटा थक गया और अपनी सुहाग रात नही माना सका| मेरी बहू रानी के सारे अरमानो पे पानी फिर गया और वो अपनी सुहाग रात में अकेली रह गयी| सारी रात अपने पति के कामुख स्पर्श के लिए उसका मादक, खूबसूरत योवन रस से भरपूर जिस्म तरसता रहा, फिर सुबह के ४ बजे बहू को उस काम अग्नि को भुजानी के लिए ठंडे पाने से नहाना पड़ा|

दूसरे दिन, मैं रोज़ की तरह सुबह ६ बजे उठ कर धार्मिक पुस्तक पढ़ रहा था, जहाँ औरत की योवन शक्ति का धर्म के अनेक कथाओ में ज़िक्र हुआ है, की किस तरह एक औरत ने ही ऋषि विश्वामित्र जैसे योग पुरुष बाल ब्रह्मचारी की तपस्या को अपने योवन रस से भरपूर गोरे, गरम, गदरिया जिस्म से भंग कर दिया था| तभी बहू रानी को
बाथरूम से निकलते हुए देखा, बहू रानी नहा कर आई थी, उसने अपने अप्सरा जैसे बेदाग गोरे, चिकने, गदरिया, भीगे जिस्म को एक लंबी तौलिए से छुपा कर रखा था, तौलिए को टाइट बढ़े रखने की वजह से बहू की गांड का उतार – चढ़ाव, वो भरे हुए योवन रस से भरपूर स्तन, और वो गोरी नंगी चर्बिदार, चिकनी टांगे मेरी कामना को भड़का कर सारी मरियादा को पार करने को मजबूर कर रहे थे|
फिर भी मेरे अंदर के ससुर ने मुझे संभाला और मैने बहू रानी को देखते हुए मुस्कुरा कर बोला, गुड मॉर्निंग बहू रानी, बड़ी प्यारी लग रही हो,
बहू अपने उन गीले बलों को एक तरफ किए हुए कुछ बालों को कान के पीछे करते हुए, मुझे देख कर मुस्कुराइ और मेरे पास आने लगी,और बोली- गुड मॉरिंग पापा जी….

बहू की वो योवन चाल, मुझे स्लो मोशन में दिख रही थी, मैं उसके गदरिया गोरे जिस्म के हर एक इंच को घूर रहा था, उपर से नीचे|

बहू का वो सुंदर कातिल सुहागन चेहरा, मेरे मूड की तरह खिले हुए बड़े टाइट सुडौल स्तन, कमसिन कमर और वो नाज़ुक, कुद्रती खूबसूरत पैर नाज़ुक चाँदी की पयल में मेरी कामना को बार बार भड़का रहे थे|

बहू रानी आशीर्वाद लेने नीचे झुकी, उसके बड़े, गोरे सुडौल स्तन तौलिए से आज़ाद होने को तरसने लगे, उस पल मैने भगवान से बस एक ही दुआ माँगी की किसी भी तरह बहू रानी की तौलिया खुल जाए…..

लेकिन ऐसा नही हुआ, बहू रानी बोली- ससुर जी मैं तैयार हो कर आपके और मम्मी जी के लिए चाय बना देती हूँ|
मैने मुस्कुरा कर बहू रानी के कंधो पे हाथ फेरते हुए कहा- बहू रानी तू आराम से तैयार हो ले, हम वैसे सास – ससुर नही हैं, जो अपनी बहू पे हुकुम जमाए, तेरे पिताजी को ये ही बोल कर तुझे इस घर की बहू बनाया, की तू पहले हुमारी बेटी है बाद में बहू रानी है|

बहू ये सुन कर बोहोत खुश हुई और उसे शायद मेरा ये स्पर्श उस पहली पानी की बूँद की तरह लगा, जो बरसो प्यासा रहने की बाद मिलती है| बहू की आँखें कुछ सेकेंड के लिए बंद हो गयी, जैसे ही मेरे हाथों का स्पर्श उसे अपने कंधो पर महसूस हुआ| मैं समझ गया की सुहाग रात अकेली जाने से, उसकी कामना भड़की हुई है, और उसके जिस्म का एक एक अंग तरस रहा है मर्द के स्पर्श के लिए|

मैं शुरू से खुले विचार रखता हूँ, और ये मानता हूँ, की कोई भी इंसान ग़लत नही होता, बस अलग होता है, उसकी परिस्थिति उसे वो बनाती है जो वो होता है| ये ही वजह है की मैने अपनी बीवी और बच्चों पे कभी अपने विचार, आचरण और आदर्शो को नही थोपा|

इसलिए, परिवार के सभी सद्स्य मुझसे खुल कर अपनी बात कर लेते हैं, ये ही कारण है, की मेरे बच्चे मेरे इतनी इज़्ज़त करते हैं|

मुझे पता था की मेरे बेटे की शादी की रात, शॉर्ट सर्किट हो जाने की वजह से वो अपनी सुहाग रात नही माना पाया, जिसका दुख और तड़प बहू की आँखों में झलक रही थी|

इसलिए अपने खुले स्वभाव के चलते, मैने बहू की आँखों में देखते हुए पास आ कर संवेदना से उसके हाथों में हाथ फेरते हुए बोल दिया- बहू कल रात में लाइट की प्राब्लम होने की वजह से तू अपनी सुहागरात नही माना पाई ना? बहू मुझे तेरे दुख का एहसास है|

मेरी बात सुन कर, बहू रानी के चेहरे में दुख और तड़प दोनो सॉफ नज़र आ रही थी, और मेरे हाथ बहू के गोरे, मुलायम हाथों पे महसूस कर के अंजाने में उसकी आँखें बंद होने लगी और वो बोली – म्‍म्म्मम पापा जी, कितना ख़याल है आपको मेरा, हाँ ये तो रात के ३ बजे कमरे में आए, और आते ही साथ सो गये….

मैने बहू के हाथों पे और हक से हाथ फेरते हुए कहा- बहू, मेरी और सभी परिवार की तरफ से माफी माँगता हूँ, क्यूंकी तू घर की लक्ष्मी है, अगर उसी की पहली रात अकेली जाए, तो यह अशुभ माना जाता है, लेकिन अगर तू दिल से माफ़ कर दे, तो इसका प्रभाव नही पड़ेगा|

ये बोलकर मैं बहू को प्यार और संवेदना से देखते हुए, हाथों पे हाथ फेरने लगा….

ऐसा लगा रहा था, की बहू मेरी बातों को सुन कम रही है और महसूस ज़्यादा कर रही है, शायद यह सुहाग रात सूनी जाने की वजह से उसकी कामना और तड़प उसे ऐसा करा रही थी|

बहू कुछ सेकेंड्स के लिए आँखें बंद कर के मेरी बातों में खो गयी, मैने फिर पूछा बहू के हाथों को ज़रा ज़ोर से पकड़ते हुए – बहू रानी कहाँ खो गयी?

बहू उस मदहोशी से निकल कर बोली – सस्स्सस्स ससुर जी मैं बोहोत किस्मत वाली हूँ की इस जैसे परिवार की बहू बनी और आप जैसे ससुर जी मिले, जिन्हे मेरे दुख और दर्द का इतना ख़याल है, माफ़ करने जैसे कोई बात ही नही है, ज़िंदगी में ये सब तो होता रहता है ससुर जी, लेकिन बोहोत किस्मत वाली बहू को आप जैसे ससुर मिलते है|

यह सुन कर मैं बहू की समझदारी, शब्दों की बारीक पकड़ और स्नेह से आकर्षित और खुश हुआ और तुरंत मुस्कुराते हुए बहू को गले लगा लिया|

बहू का गोरा, गदरिया और मादक जिस्म मेरे अंग अंग में महसूस हो रहा था, ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो काम अग्नि को मैने अपनी बाहों में लिया हुआ है, उपर से बहू के सुहागन जिस्म की वो मादक, नशीली महक मेरे अंदर के मर्द को बेकाबू होने की संकेत दे रही थी, बहू के बड़े, सुडोल, गोरे स्तन उसकी तौलिए से मेरी छाती पे निरंतर महसूस हो रहे थे, मानो चिल्ला कर कह रहे हों – हूमें आज़ाद कर दो ससुर जी|

बहू भी आँख बंद कर के कुछ सेकेंड्स के लिए मुझसे गले लगी रही, शायद उसकी कामना भी काबू में हो रही थी मेरे मर्दानी स्पर्श और बाहों से…

मैं जनता था की बहू की सूनी सुहगरात की वजह से बहू रानी की कामना उफान पे है, लेकिन जल्दबाज़ी कर के मैं बहू को खोना नही चाहता था, इसीलिए मैने खुद बहू को अलग किया और मुस्कुरा कर देखने लगा|

कुछ देर बाद, परिवार की परंपरा के अनुसार, जहाँ घर की नयी बहू, सब के लिए कुछ मीठा बनाकर दिन की शुरआत करती है, बहू रानी गाजर का हलुआ बनाकर डिनर टेबल पे लाई और हम सभी को बारी बारी परोसने लगी, जब मुझे परोस रही थी तभी मैं अपनी बाई तरफ मुड़ा जिस वजह से मेरा हाथ बहू के मुलायम पेट पे छू गया. जिसे चू कर ऐसा लगा की मानो बहू का पेट योवन अग्नि उगल रहा हो|

बहू की धीमी सिसकी निकल गयी- उफफफफ्फ़…..

मैने तुरंत कहा- बहू रानी ग़लती से हो गया, माफ़ करना, बहू बोली – कोई बात नही ससुर जी हो जाता है, आपकी ग़लती नही थी, मैं आ गयी अचानक परोसने|

मैने मुस्कुरा कर बहू की आँखों में देखने लगा, बहू भी खो गई कुछ सेकेंड के लिए….

बहू डिनर टेबल के अराउंड मेरे जस्ट सामने बैठ कर नाश्ता करने लगी, बेटा उसके बाजू में बैठ था, और मेरी बीवी, मेरे बाजू में बैठी थी| मेरी बेटी कोटा पढ़ने गयी थी, तो हॉस्टिल में रहती थी|

बहू ने लाल रंग की होम्ली सारी पहनी हुई थी और वो क्रॉस लेग कर के सारी में बैठी हुई थी| मुझे अपने तजुर्बे से ये मालूम था की जब औरत क्रॉस लेग कर के बैठ ती है, तब नीचे से उसके कपड़े का कुछ हिस्सा उपर उठ जाता है, कपड़े जैसे सारी, गाउन और मेक्सी…

मैने बस एक अंदाज़ा लगया की बहू रानी भी शायद क्रॉस लेग कर के बैठी होगी, मैने अपने चम्मच को टेबल के नीचे फेक दिया, और अपने बेटे से कहा- उफ़फ्फ़ ऊओ, बेटा ये चम्मच गिर गया मेरा…..

बेटे ने कहा – पिताजी मैं उठा देता हूँ…

मैने कहा- बेटा, अभी तेरा बाप बूढा नही हुआ है, मैं उठा लूँगा तू नाश्ता कर….

ये बोल कर मैं टेबल के नीचे जैसे ही गया, वो हसीन नज़ारा ये ही बयान कर रहा था की मेरा अंदाज़ा कितना सही था, किसी ने सच ही कहा है, की तजुर्बे से बड़ा कुछ नही होता….

मेरी जवान बहू रानी ने सारी में क्रॉस लेग ही कर के बैठी हुई थी, उसकी नंगी, गोरी, चर्बिदार टाँगों को देख कर मेरे मू और लंड दोनो में पानी आ गया, उसने अपने कुदरती खूबसूरत पैरों में घर की फ्लिप-फ्लॉप पहनी हुई थी|

मैं हिम्मत कर के टेबल के और अंदर गया और उसके पैरों के पास आ कर लगातार बहू के पैरों और टाँगों की खूबसूरती को देखता रहा, हिम्मत कर के अपने मुख को बहू रानी के पैरों के पास कर के, उनकी कुद्रती महक लेने लगा, टाँगों से ले कर पैरों तक मैं महक लिए जा रहा था, कसम से मित्रों, मेरी बहू रानी की टाँगों की वो महक बोहोत नशीली थी|

मन तो कर रहा था, की बहू की टाँगों को आइस-क्रीम की तरह चाट जाऊ, लेकिन किसी भी तरह अपने अंदर के ससुर को जगाए रखा, और कुछ देर महक ले कर , उपर आ गया|

अभी भी वो हसीन नज़ारा और नाक में बहू की टाँगों की वो कुद्रती महक महसूस हो रही थी, मैं अब बहू को लगातार देखने लगा, बहू अपनी सास से खाने की बात कर रही थी की पहली बार, गाजर का हलुवा बनाया है, सब को पसंद आना चाहिए, कुछ देर बाद बहू की नज़र मुझपे पड़ी, मैं उसे लगातार हलुवा खाते हुए देख रहा था|

बहू ने इशारे से पूछा, क्या हुआ ससुर जी?

मैने भी इशारे से, नीचे हलूवे की तरफ इशारा करते हुए कहा- अच्छा बना है हलुवा…..मुस्कुरा दिया…

बहू प्यार से मुस्कुराए और होंठों को हिलाते हुए इशारे से बोली – टैंक यू ससुर जी ….

अब मैने तये कर लिया था, की जब तक अपनी बहू रानी के गरम, गोरे, गदरिया योवन रस से भरपूर जिस्म को भोग नही लेता तब तक शांत नही रहूँगा|

मेरे बेटे ने तभी सब को बताया, की आज रात उसने घर में मूवी का प्रोग्राम रखा है, जहाँ सब परिवार के लोग साथ में बैठ कर मूवी एंजाय करेंगे|

मैने तभी बहू रानी और बीवी को कहा, की बेटे के प्रोग्राम में कोई कमी नही होनी चाहिए, और सब अच्छे से एंजाय कर सके, इसलिए सब लोगों के बैठने का इंतीज़ाम सोफे पे नही, नीचे बिस्तर लगा कर करेंगे, जिस से सब आराम से मूवी देख सकें|

मैने बहू को मुस्कुराते हुए स्नेह से कहा – बहू रानी, तू आज पॉपकॉर्न और जूस बना लेना, आज मज़ा करेंगे सभी …..

बहू ने मुस्कुराते हुए हामी भरते हुए कहा- जी ससुर जी , आप चिंता ना करें, मैं सब तैयारी कर लूँगी….

बहू किचन में जाने लगी, और मेरी कामना और भड़क ने लगी, उसकी मोटी उभरी मटकती हुई गांड को देख कर, उसकी गांड को देखते हुए, आज रात मोवी नाइट के बारे में होने वाले, कामना के शातिर खेल के बारे में सोचने लगा…..

मित्रों, आगे की कहानी अगले भाग में, आप सभी पाठकों का इंतज़ार कर रही है| अगर आपको मेरी ये सच्ची कहानी पसंद आई, तो मैल ज़रूर करिए और अपने विचार ज़रूर शेयर करें|

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