सविता भाभी को कार चलाना सिखाया-1

हैल्लो दोस्तों, आप सभी को मेरी तरफ से धन्यवाद. दोस्तों मेरा नाम ऋषि गुप्ता है और आज में आप सभी को अपनी Savita bhabi in hindi Chudai ki kahani  सुनाना चाहता हूँ और यह बात एक साल पहले की है, दोस्तों मैंने अपना कॉलेज ख़त्म किया और में नौकरी की तलाश में दिल्ली गया हुआ था और फिर कुछ दिन ढूंढने के बाद मेरी नौकरी दिल्ली की एक प्राइवेट कम्पनी में लगी.
में दिल्ली में एक फेमिली के यहाँ पर किराए से रूम लेकर रह रहा था और में हर रोज ऑफिस से शाम को 6-7 बजे तक आता था और यहाँ पर आए हुए मुझे कुछ दिन ही हुए थे, लेकिन दिल्ली के कुछ मस्त, सेक्सी, माल देखकर मेरा हाल बहाल था. में जिधर भी देखता मुझे उधर ही मस्त मस्त लड़कियाँ दिखती. कभी किसी के छाती दिखती, तो कभी किसी की चूत, कभी किसी बड़ी बड़ी गांड और यह सब देखकर तो मेरी जान ही निकल जाती. में तो यह सोचता कि बस अभी पकडूं और चोदना शुरू कर दूँ, लेकिन क्या करें? इतनी आसानी से चीज़े नहीं मिलती, इस सबको पाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है. यह सब देखकर मेरा दिमाग़ घूमने लगता और में सोचता कोई मुझे भी ऐसा माल मिल जाए में रोज सुबह शाम उसे चोदूँ और उसे बहुत मज़े दूँ. तो ऑफिस से सीधा घर पर आते ही में पॉर्न फिल्म देखने बैठ जाता था और अपना लंड बहुत ज़ोर ज़ोर से हिलाता था, लेकिन अब मेरी प्यास दिनों दिन और बड़ती ही जा रही थी.

तो अचानक से एक दिन ऑफीस जाते समय मेरी नज़र सामने वाले घर पर पड़ी, वहां पर एक भाभी रहती थी. उनका नाम सविता था, उनकी कुछ समय पहले तलाक हो चुका था और वो दो साल से यहाँ पर रह रही है और नौकरी कर रही है, लेकिन अकेले ही रह रही थी, क्योंकि उनके दोनों बच्चे उनके पति के साथ रहते थे और उनके बच्चे उनको हर शुक्रवार को मिलने आते और शनिवार को वापस चले जाते.

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दोस्तों कुछ भी कहो, लेकिन जब मैंने सविता भाभी को पहली बार देखा तो में तो दंग रह गया, वो क्या एकदम सेक्सी माल थी उन्हे देखकर ऐसा लगा कि जैसे वो जन्नत से उतरकर आई है और उन्हे कोई भी एक बार देख ले तो एक बार क्या हजार बार उन्हे चोदने की सोचे. दोस्तों में उस दिन तो भूल गया था कि मुझे ऑफिस जाना था बस उन्हे ही देखता रहा, जब तक वो ऑफिस के लिए नहीं निकल गयी. दोस्तों में तुम लोगों को सविता भाभी का फिगर के बारे में क्या बताऊँ? ऐसी कायनात मैंने कभी कहीं नहीं देखी और वो बड़ी मुश्किल से देखने को मिलती है, लेकिन वो भी किस्मत वालों को. उनका फिगर का साईज़ 38-26-40 और उनका वजन 53-56 किलो होगा.

फिर उस दिन से तो में रोज ऑफिस 15 मिनट लेट पहुंचता था, वो हर रोज ऑफिस मेट्रो ट्रेन से जाती थी. तो एक दिन ऑफिस से वापस आते समय मैंने उन्हे देखा वो शायद ऑफिस से मार्केट गई और वहां से आ रही थी और उनके पास बहुत सारा सामान था और वो उसे बहुत मुश्किल से उठा पा रही थी. तो में उनके पास गया और उनको पूछ कि क्या में आपकी कुछ मदद करूं? पहले तो उन्होंने कहा कि नहीं सब ठीक है में खुद कर लूंगी. तो मैंने उनको कहा कि आपके पास बहुत सामान है में आपकी थोड़ी मदद कर देता हूँ और इतना सारा समान आप अकेले नहीं उठा पाओगे और ऐसा करने से आपको हो सकता है कि कमर दर्द हो जाए, लेकिन वो आनाकानी करने लगी. मैंने कहा कि प्लीज आप मुझे ग़लत मत समझो, में आपका समान लेकर कहीं भाग नहीं जाऊंगा.

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मैंने उन्हे अपना पूरा परिचय दिया, मेरा नाम ऋषि है और में यहाँ पर दिल्ली में नौकरी करता हूँ और आपके घर के सामने वाले घर में किराए से रहता हूँ और तब जाकर वो मानी और उन्होंने कहा कि में सविता हूँ, में भी नौकरी करती हूँ और फिर में उनका सामान लेकर उनके साथ चल दिया. तो हमने पूरे रास्ते बहुत बातें की और फिर में उनके घर पहुंचा. मैंने वो सारा सामान उनके दरवाजे पर रख दिया और उन्हे बाय कहकर जाने लगा, तभी उन्होंने कहा कि रुको ऐसे कहाँ जा रहे हो? चलो अंदर आ जाओ और ठंडा पानी पी लो.

मैंने कहा कि नहीं बस में अब चलता हूँ, लेकिन में मन ही मन कह रहा था कि पिलाना है तो जानेमन एक बार अपने बूब्स में भरा हुआ अमृत पिला दे. फिर भाभी बोली कि धन्यवाद इतनी मदद करने के लिए. मैंने कहा कि कोई बात नहीं, आपको जब भी मेरी मदद चाहिए हो आप मुझे याद कर लें. फिर उन्होंने एक स्माइल दी और बोला कि ठीक है और भाभी के पास एक कार भी थी. मैंने उनसे पूछा कि आपको मैंने कभी कार चलाते हुए नहीं देखा, ऐसा क्यों? तो सविता जी बोली कि वो मुझे कार चलानी ठीक से नहीं आती है बीच बीच में बंद हो जाती है.

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तो मैंने कहा कि आप सीख क्यों नहीं लेते? तो वो बोली कि मुझे कोई सीखने वाला नहीं है और बाहर जो सिखाते है वो बहुत पैसे माँगते है. तो मैंने झट से कहा कि आप क्यों इतना परेशना हो रहे हो? में आपको कार चलाना सिखा दूँगा. मुझे बहुत अच्छे से आती है. तो भाभी एकदम खुश होकर बोली कि क्या सच तुम सिख़ाओगे मुझे? तो मैंने कहा कि हाँ फ्री और कोई चार्ज भी नहीं, तो वो बोली कि फिर कब से शुरू करना है? मैंने कहा कि शनिवार से शुरू करते है और फिर में वहां से जाने लगा.

उन्होंने पूछा कि जाने की इतनी जल्दी भी क्या है? तो मैंने कहा कि जल्दी तो नहीं है, लेकिन कोई मुझे लगा कि देर हो रही होगी और आपको भी सोना होगा और वैसे भी अब रात के 9:00 बज गये है. तो वो बोली कि तुम्हे कहाँ दूर जाना है? सामने ही तो जाना है. तो मैंने कहा लेकिन में अभी तक आपके लिए एक अजनबी हूँ और ऐसे भी अच्छा नहीं लगता कि में आपके यहाँ पर इतनी रात तक रुकूँ और कोई भी मुझे देखेगा तो कुछ भी गलत समझ लेगा. तो वो बोली कि हाँ यह बात तो ठीक है. अब तुम जाओ, हम अगले दिन मिलते है और फिर मैंने कहा कि ठीक है और में वहां से चला आया.

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तो अगले दिन में सुबह 7:00 बजे ही उन्हे गुड मोर्निंग बोलने के लिए उनके घर पर पहुंच गया और मैंने दरवाजे पर लगी हुई बेल बजाई और फिर जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला तो में उन्हे देखता ही रह गया. वो क्या मस्त माल लग रही थी? उन्होंने गोल्डन कलर का एक गाऊन पहना हुआ था. उसके अंदर ब्रा नहीं थी, जिसकी वजह से उनके बूब्स उसमें से उभरे हुए दिख रहे थे, लेकिन उन्होंने एक जालीदार चुन्नी से अपनी छाती को छुपा रखा था, लेकिन फिर भी जालीदार चुन्नी होने की वजह से मुझे वो सब दिख रहा था और उनकी गाऊन सिर्फ़ घुटनों से ज़रा सा नीचे तक ही थी और उसके नीचे कुछ भी नहीं था, जिसकी वजह से उनकी गोरी गोरी जांघे देखकर मेरा तो मन मचल रहा था और लंड एकदम तन गया था.

तभी उन्होंने मुझे गुड मोर्निंग कहा और बोला कि ऐसे क्या देख रहे हो? क्या कभी कोई लड़की नहीं देखी? तो मैंने कहा कि मैंने लड़की तो बहुत देखी, लेकिन आप जैसी कभी नहीं देखी. इतनी सुंदर, सेक्सी और हॉट नहीं देखी. तो वो बोली कि क्या? मैंने कहा कि सॉरी में कंट्रोल नहीं कर पाया, इसलिए सब बोल दिया, मेरा मतलब था कि मैंने आपसे ज्यादा सुंदर लड़की इस दुनिया में नहीं देखी. आप तो एकदम परी हो. तो वो यह बात सुनकर थोड़ी शरमा गयी और कुछ नहीं बोली. मैंने पूछा कि क्या हुआ?

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वो बोली कि कुछ नहीं बहुत दिनों के बाद मुझसे ऐसा किसी ने बोला है तो मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा है और फिर में उनके करीब गया और अपने हाथ से उनका मुहं ऊपर किया और उनकी आँखो में आंखे डालकर मैंने उनसे कहा कि आप बहुत सुंदर हो और आपसे ज्यादा सुंदर लड़की इस पूरे जहाँ में नहीं है. में यह सब कुछ अपने दिल से कह रहा हूँ और फिर एक मीठी सी हवा हमारे पास गुज़री जिससे उनके मुहं पर हंसी आ गई और उन्होंने कहा कि धन्यवाद और बोली कि क्यों आज तुम्हे ऑफिस नहीं जाना? और अब मुझे भी जाने दो.

मैंने उनको कहा कि मेरा आज ऑफिस जाने का मन नहीं है और में सोच रहा हूँ कि आज ऑफिस से छुट्टी ले लूँ और आपको आज से ही कार चलाना सिखा दूं. तो वो बोली कि मन तो मेरा भी जाने का नहीं कर रहा है, तभी मैंने कहा कि तो फिर क्या? ले लो छुट्टी, में आज कार चलाना भी सीखा दूँगा, सोचना क्या है? तो बोली कि ठीक है और मैंने कहा कि हम फ्रेश होकर एक घंटे में मिलते है.

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वो बोली कि ठीक है और एक घंटे बाद में उनके घर पर पहुंचा और डोर बेल दबाई तो उन्होंने दरवाजा खोला, मेरी तो आँखे और मुहं खुला का खुला रह गया, वो क्या कमाल लग रही थी? वो लाल कलर की गहरे गले वाली ड्रेस में थी. उसमे उनके बूब्स और भी बड़े मस्त लग रहे थे और वो ड्रेस उसके शरीर से एकदम चिपकी हुई और पीछे का हिस्सा उभरा हुआ लग रहा था, उसकी चूत और उसके बूब्स तो मुझे पागल ही कर रहे थे. मेरा लंड उन्हे देखकर एकदम तन गया था.

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तो में एकदम उल्टा घूमा और एक हाथ से लंड को ठीक किया और उनसे बोला कि चलो शुरू करते है आपकी सवारी, मेरा मतलब है कि कार चलाना. तो उन्होंने मुझे तिरछी नज़रों से देखा और स्माइल दी, मैंने उन्हे छेड़ने के लिए कहा कि आप तो सुपरहॉट माल लग रही हो. तो वो बोली कि तुम भी यार अच्छा मज़ाक करते हो और शरमा गयी और में उन्हे थोड़ा शहर से बाहर एक खाली जगह पर ले गया वहां पर लोग अक्सर कार सीखने आते है. तो मैंने उनको कहा कि अब आप ड्राइव करोगे और में आपको बताऊंगा, वो ड्राइवर सीट पर आकर बैठी और गाड़ी को चलाना शुरू किया. उन्होंने पहले तो कुछ झटके दिए और उस टाईम में उन्हे कुछ नहीं बता रहा था. बस उनके बूब्स और उनकी स्माइल उनके होंठो पर ध्यान दे रहा था और में तो बस इन ख्यालों में खोया हुआ था कि कब इनकी मस्त जवानी का दीदार करूँगा? और यह सोचकर मेरा लंड खड़ा था और जींस फाड़कर बाहर आने को तैयार था. तो वो एकदम ज़ोर से बोली कि क्या सोच रहे हो? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं बस थोड़ा तुम्हारे बारे में सोच रहा था और फिर उसने यह बात सुनते ही एकदम से कार रोकी और वो एकदम झटके से आगे की तरफ जाने लगी. तो मैंने उनको एकदम से रोका और मेरा एक हाथ उनके दोनों बूब्स के बीच में था. उस झटके की वजह से उनके बूब्स मेरे हाथ से एकदम दबे हुए थे.

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