ससुर ने बहुरानी के तड़पते जिस्म को चोद कर शांत किया-1

मेरे प्यारे दोस्तों, आपका स्वागत है एक बहूत ही ज्यादा कामुक स्टोरी ले के आया हु, और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को यह बहुत पसंद आएगी और मेरी पिछली स्टोरी को इतना पसंद करने और इतने मेल करने के लिए आपका धन्यवाद। दोस्तों में इस साईट नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम को बहुत सालों से अपना समय देता आ रहा हूँ और मुझे इस पर बहुत सी कहानियाँ बहुत ही अच्छी लगी। अब में आपका टाइम समय खराब ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ।

मोहनलाल की पत्नी सुमित्रा की मौत 3 साल पहले हो गयी थी। अब वो 46 साल का एक असंतुष्ट आदमी था और अपने लण्ड की गरमी निकालने के लिए नई बूर की तलाश में था। उसका एक बेटा अविनाश और एक बेटी दीपा थी। बेटी की शादी गौतम के साथ हो चुकी थी जो कि फौज में काम करता था। गौतम की पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में थी और दीपा से अलग रहने पर मज़बूर था। दीपा 19 साल की जवान औरत थी.. गोरी चिट्टी, गदराया हुआ बदन, भारी बूरड़, भरी हुई चूचियाँ, मोटे होंठ, लंबा कद और कसरती जांघे। कई बार तो अपनी ही बेटी के जिस्म की कल्पना से उत्तेजित हो चुका था। वो एक ही शहर में होते हुए भी अपनी बेटी से कम ही मिलता क्योंकि वो नहीं चाहता था कि उसका हाथ अपनी ही बेटी पर लगकर इस पवित्र रिश्ते को तोड़ डाले।

अविनाश ने भी अपनी प्रेमिका मानसी से शादी करके घर बसा लिया था। मानसी एक साँवली 20 साल की लड़की थी.. बिल्कुल स्लिम, सेक्सी आँखें, लंबी टाँगें और भरा हुआ जिस्म। मानसी की ज़िद थी कि वो अलग घर में रहेगी.. तो अविनाश ने अलग घर ले लिया था। मोहनलाल अब अकेलेपन का शिकार हो रहा था कि अचानक एक दिन उसकी बहूरानी मानसी का फोन आया और वो बोली कि बाबूजी आप यहाँ पर चले आइए.. मुझे आपकी ज़रूरत है। अविनाश ने मुझे धोखा दिया है और में आपके बेटे से तलाक़ चाहती हूँ.. आप अभी चले आये बाबूजी।

तभी मोहनलाल जल्दी से अपने बेटे के घर पहुँचा तो देखा कि मानसी ने रो रो रोकर अपना बुरा हाल कर लिया था। फिर मोहनलाल उसके पास आया और पूछने लगा कि बेटी क्या हुआ? रोना बंद करो अब और मुझे पूरी बात बताओ बेटी.. तू घबरा नहीं.. तेरे बाबूजी हैं ना? शाबाश बेटी मुझे सारी बात बताओ? लेकिन मानसी कुछ नहीं बोली बल्कि उसने तस्वीरों का एक लिफ़ाफ़ा अपने ससुर की तरफ बढ़ा दिया। फिर मोहनलाल ने एक नज़र जब तस्वीरों पर डाली तो हक्का बक्का रह गया। अविनाश क़िसी पराई औरत को चोद रहा था और उसकी हर तस्वीर साफ थी और एक तस्वीर में वो औरत अविनाश का लण्ड चूस रही थी तो दूसरी में अविनाश उसकी गांड चाट रहा था, बूर चूम रहा था और तस्वीरें बिल्कुल साफ थी और उस औरत की शक्ल भी जानी पहचानी लग रही थी। वो औरत भी बहुत सेक्सी थी। गोरी, गदराया हुआ बदन, 25-26 साल की हसीना थी। फिर मोहनलाल बोला कि बेटी यह औरत कौन है? कब से चल रहा है ये सब कुछ?

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फिर मानसी बोली कि बाबूजी क्या आप नहीं जानते इस औरत को? ये रीना है.. मेरी भाभी जिसको आपके बेटे ने फंसाया हुआ है। आपका बेटा मुझसे और मेरी सग़ी भाभी से शारीरिक संबंध बनाए हुए है। तभी मोहनलाल कहने लगा कि यह शरम की बात है उसको मर जाना चाहिए.. जो अपनी बहन समान भाभी को चोद रहा है और दिन रात उसके साथ चिपका रहता है। तभी मानसी बोली कि हाँ बाबूजी और में यहाँ करवटें बदलती रहती हूँ। तभी मोहनलाल की नज़र अब अपनी बहूरानी के रोते हुए चेहरे पर से ऊपर नीचे होते हुए सीने पर जा रुकी। मानसी का कमीज़ बहुत नीचे गले का था और उसके सीने का उभार आधे से अधिक बाहर खनक रहा था। तभी बूब्स की गहरी घाटी देखकर ससुर का दिल बहक उठा और मोहनलाल जानता था कि जब औरत के साथ बेवफ़ाई हो रही हो तो वो गुस्से और जलन में कुछ भी कर सकती है। इस वक्त उसकी बहूरानी को कोई भी ज़रा सी हमदर्दी जता कर चोद सकता था और अगर कोई भी चोद सकता था तो फिर मोहनलाल क्यों नहीं? और ऐसा माल बाहर वाले के हाथ क्यों लगे? और बेटे की पत्नी उसके बाप के काम क्यों ना आए?

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फिर मोहनलाल बोला कि बेटी घबरा मत.. में हूँ ना तेरी हर तरह की मदद के लिए। बोलो कितने पैसे चाहिए तुझे.. दस लाख, बीस लाख.. में तुझे इतना धन दूँगा कि तुझे कोई कमी ना रहेगी और कभी अविनाश के आगे हाथ नहीं फैलने पड़ेंगे। बस तुम मेरे घर की इज़्ज़त रख लो और अविनाश की बात किसी से मत कहना और तुझे जब भी किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे बुला लेना। गोपी ने कहा और अपनी बहूरानी को बाहों में भर लिया। रोती हुई बहूरानी उसके सीने से चिपक गयी और जब मानसी का गरम जिस्म ससुर के साथ लिपटा तो एक करंट उसके जिस्म में दौड़ गया जिसका सीधा असर उसके लण्ड पर हुआ। तभी 45 साल के पुरुष में पूरा जोश भर गया और उसने अपनी बहूरानी को सीने से भींच लिया और उसके गालों को सहलाने लगा।

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उधर जवान बहूरानी ने जब इतने दिनों के बाद आदमी के जिस्म को स्पर्श किया तो उसकी बूर में भी एक आग सी मच गयी और वो एक मिनट के लिए भूल गयी कि मोहनलाल उसका पति नहीं बल्कि पति का बाप था। मोहनलाल ने बहूरानी को गले से लगाया हुआ था और फिर वो सोफे पर बैठ गया और मानसी उसकी गोद में। जब अपने ससुर के लण्ड की चुभन बहूरानी के बूरड़ पर होने लगी तो बहूरानी भी रोमांचित हो उठी और वैसे भी ससुर ने पैसे देने का वादा तो कर लिया था। अब उसकी जिस्मानी ज़रूरतों की बात थी तो वो सोचने लगी कि क्यों ना अविनाश से बदला लेने के लिए उसके बाप को ही अपने जाल में फंसा लूँ? बाबूजी का लण्ड तो बहुत मोटा ताज़ा महसूस हो रहा है.. अगर मदारचोद अविनाश ने मेरी भाभी को फंसाया है तो क्यों ना में उसके बाप को अपना पालतू चोदू आदमी बना लूँ? और वैसे भी बुजुर्ग आसानी से पट जाते हैं और फिर औरत को एक जानदार लण्ड तो चाहिए ही। अब तरकीब लगानी है कि ससुर जी को कैसे लाईन पर लाया जाए? और उसके लिए खुल जाना बहुत ज़रूरी है। तभी मानसी अपनी स्कीम पर मुस्कुरा उठी और कहने लगी कि मेरे प्यारे बाबूजी, आप कितना ख्याल रखते हैं अपनी बहूरानी का? में आपकी बात मानूँगी और घर की बात बाहर नहीं जाने दूँगी.. यह बात कहते हुए उसने प्यार से अपने ससुर के होंठों को चूम लिया। मोहनलाल भी औरतों के मामले में बहुत समझदार था और जनता था कि उसकी बहूरानी को चोदने में कोई मुश्किल नहीं आएगी। तभी उसका लण्ड उसकी बहूरानी के बूरड़ में घुसने लगा तो बहूरानी भी शरारत से बोली कि बाबूजी ये क्या चुभ रहा है मुझे? शायद कोई सख्त चीज़ मेरे कूल्हों में चुभ रही है। फिर मोहनलाल बड़ी बेशर्मी से हंस कर बोला कि बेटी तुझे धन के साथ साथ इसकी भी बहुत ज़रूरत पड़ेगी.. धन बिना तो तू रह लेगी लेकिन लण्ड के बिना रहना बहुत मुश्किल होगा.. मेरी प्यारी बेटी को इसकी ज़रूरत बहुत रहेगी और बेटे का तो ले चुकी है अब अपने बाबूजी का भी लेकर देख लो और अगर तुझे खुश ना कर सका तो जिसको मर्ज़ी अपना यार बना लेना।

तभी मोहनलाल का हाथ सीधा बहूरानी की बूब्स पर जा टिका और बहूरानी मुस्कुरा पड़ी और उसने अपने ससुर के लण्ड पर हाथ रखा तो लण्ड फूंकार उठा। पेंट में तंबू बन चुका था। तभी मानसी समझ गयी थी कि अब बेटे के बाद बाप को ही अपना पति मान लेने में भलाई है। फिर मोहनलाल ने बहूरानी के सर पर हाथ फैरते हुए कहा कि रानी बेटी अब ज़िप भी खोल दो ना और देख लो अपने बाबूजी का हथियार और अपने कपड़े उतार फेंको और मुझे भी अपना खज़ाना दिखा दो। तभी बहूरानी ने झट से ज़िप खोल दी और बाबूजी की अंडरवियर नीचे सरकाते हुए लण्ड को अपने हाथों में ले लिया और कहने लगी कि बाबूजी आपका लण्ड तो आग की तरह दहक रहा है.. लगता है माँ जी के जाने के बाद से यह बेचारा प्यासा है। खैर अब में आ गयी हूँ इसका ख्याल रखने के लिए। ये बहुत बैचेन हो रहा है अपनी बहूरानी को देख कर। फिर मोहनलाल ने भी अब अपना हाथ कमीज़ के गले में डालकर मानसी की बूब्स भींच ली और उसके निप्पल को मसलने लगा। तभी जल्दी जल्दी दोनों प्यासे जिस्म नंगे होने को बेकरार हो रहे थे और बहूरानी ने ससुर की पेंट नीचे सरका दी और उसके लण्ड को किस करने लगी। फिर मोहनलाल बोला कि बेटी तेरे बाबूजी का कैला कैसा है स्वाद पसंद आया? लेकिन बहूरानी तो बस कैला खाने में मग्न हो चुकी थी। फिर मानसी बोली कि बाबूजी मेरा मन तो कैले के साथ आपके आंड भी खा जाने को कर रहा है.. कितने भारी हो चुके है यह आंड.. इनका पूरा रस मुझे दे दो आज बाबूजी प्लीज।

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तभी मोहनलाल बोला कि इनका रस तुझे मिल जाएगा लेकिन उसके लिए तुमको पूरा नंगा होना पड़ेगा और अपने बाबूजी को अपने जिस्म का हर अंग दिखना पड़ेगा ताकि तेरे बाबूजी तुझे प्यार कर सकें। अपनी बेटी के अंग अंग को चूम सकें, सहला सकें और अपना बना सकें। बेटी आज मुझे अपने जिस्म की खूबसूरती दिखा दो। मुझे तो कल्पना करने से ही उतेज्ना हो रही है। मेरी रानी बेटी.. आज तेरी फिर से सुहागरात होने वाली है अपने बाबूजी के साथ। आज हम दो जिस्म एक जान हो जाने वाले हैं। बेटी क्या घर में विस्की है? लेकिन मुझे अपनी किस्मत पर विश्वास नहीं हो रहा.. अपनी रानी बेटी को आज नागन रूप में देखकर कहीं में मर ना जाऊ? में अपना मन मज़बूत करने के लिए दो घूँट पी लूँ तो बहुत अच्छा होगा। आज मेरी अप्सरा जैसी बेटी मेरी हो जाएगी बेटी तुम कपड़े उतार लो और ज़रा विस्की ले आना मानसी मुस्कुराती हुई उठी और दूसरे रूम में चली गयी।

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