सेक्सी धोबन और उसका बेटा-13

Sexy Dhoban Aur Uska Beta-13

“चल ठीक है चूस लेना, और क्या करेगा”
“ओह और………. पता नहीं …”पता ऩही ये क्या जवाब हुआ पता ऩही, जब कुछ पता ऩही तो माँ पर डोरे क्यों डाल रहा था?”
“ओह माँ मैने पहले किसी को किया ऩही है ना इसलिए मुझे पता ऩही है, मुझे बस थोडा बहुत पता है, जो कि मैने गाँव के लड़कों के साथ सीखा था”
“तो गाँव के छोकरों ने ये ऩही सिखाया कि कैसे किया जाता है, खाली यही सिखाया कि माँ पर डोरे डालो”
“ओह माँ तू तो समझती ही ऩही… अरे वो लोग मुझे क्यों सिखाने लगे कि तुम पर डोरे डालो, वो तो… वो तो तुम मुझे बहुत सुंदर लगती हो इसलिए मैं तुम्हे देखता था”
“ठीक है चल तेरी बात समझ गई बेटा कि मैं तुझे सुंदर लगती हू पर मेरी इस सुंदरता का तू फायदा कैसे उठाएगा उल्लू ये भी तो बता दे ना, कि खाली देख के मूठ मार लेगा”

” माँ , ऩही मैं तुम्हे चोदना चाहता हूँ , माँ तुम सीखा देना, सीखा दोगी ना ?” कह कर मैने बुरा सा मुँह बना लिया”
“हाँ मेरा बेटा देख तो माँ की लेने के लिए कैसे तड़प रहा, आजा मेरे प्यारे मैं तुझे सब सीखा दूँगी, तेरे जैसे लंड वाले बेटे को तो कोई भी माँ सीखना चाहेगी, तुझे तो मैं सीखा पढ़ा के चुदाई का बादशाह बना दूँगी, आजा पहले अपनी माँ की चुचियों से खेल ले जी भर के फिर तुझे चूत से खेलना सिखाती हूँ बेटा”
मैं माँ के कमर के पास बैठ गया और माँ तो पूरी नंगी पहले से ही थी मैने उसकी चुचियों पर अपना हाथ रख दिया और उनको धीरे धीरे सहलाने लगा.

मेरे हाथ में शायद दुनिया की सबसे खूबसूरत चुचिया थी. ऐसी चुचिया जिनको देख के किसी का भी दिल मचल जाए. मैं दोनो चुचियों की पूरी गोलाई पर हाथ फेर रहा था. चुचिया मेरी हथेली में ऩही समा रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में घूम रहा हू. माँ की चुचियो का स्पर्श ग़ज़ब का था. मुलायम, गुदज, और सख़्त गठीलापन. ये सब अहसास शायद अच्छी गोल मटोल चुचियों को दबा के ही पाया जा सकता है. मुझे इन सारी चीज़ो का एक साथ आनंद मिल रहा था. ऐसी चूची दबाने का सौभाग्य नसीब वालो को ही मिलता है इस बात का पता मुझे अपने जीवन में बहुत बाद में चला जब मैने दूसरी अनेक तरह की चुचियों का स्वाद लिया.

माँ के मुँह से हल्की हल्की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी और उसने मेरे चेहरे को अपने पास खीच लिया और अपने तपते हुए गुलाबी होंठो का पहला अनूठा स्पर्श मेरे होंठो को दिया. हम दोनो के होंठ एक दूसरे से मिल गये और मैं माँ की दोनो चुचियों को पकडे हुए उसके होंठो का रस ले रहा था. कुछ ही सेकेंड्स में हमारे जीभ आपस में टकरा रहे थे. मेरे जीवन का ये पहला चुंबन करीब दो तीन मिनिट्स तक चला होगा. माँ के पतले होंठो को अपने मुँह में भर कर मैने चूस चूस कर और लाल कर दिया. जब हम दोनो एक दूसरे से अलग हुए तो दोनो हाँफ रहे थे. मेरे हाथ अब भी उसकी दोनो चुचिया पर थे और मैं अब उनको ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था. माँ के मुँह से अब और ज्यादा तेज सिसकारिया निकलने लगी थी.

माँ ने सिसकते हुए मुझसे कहा ” ओह ओह स्स्सि……शाबाश .. ऐसे ही प्यार करो मेरी चुचियो से, हल्के हल्के आराम से मसलो बेटा, ज्यादा ज़ोर से ऩही, ऩही तो तेरी माँ को मज़ा ऩही आएगा, धीरे धीरे मसलो ”
.मेरे हाथ अब माँ की चुचियों के निपल से खेल रहे थे. उसके निपल अब एकदम सख़्त हो चुके थे. हल्का कालापन लिए हुए गुलाबी रंग के निपल कड़े होने के बाद ऐसे लग रहे थे जैसे दो गोरे गुलाबी पहाड़ियों पर बादाम की गिरी रख दी गई हो. निपल के चारो ओर उसी रंग का घेरा थे. ध्यान से देखने पर मैने पाया कि उस घेरे पर छोटे छोटे दाने से उगे हुए थे. मैं निपलो को अपनी दो उंगलियों के बीच में लेकर धीरे-धीरे मसल रहा था और प्यार से उनको खींच रहा था.

जब भी मैं ऐसा करता तो माँ की सिसकियाँ और तेज हो जाती थी. माँ की आँखें एकदम नशीली हो चुकी थी और वो सिसकारी लेते हुए बुदबुदाने लगी “ओह बेटा ऐसे ही, ऐसे ही, तुझे तो सीखने की भी ज़रूरत ऩही है रे, ओह क्या खूब मसल रहा है मेरे प्यारे , ऐसे ही कितने दिन हो गये जब इन चुचियों को किसी मर्द के हाथ ने मसला है या प्यार किया है, कैसे तरसती थी मैं कि काश कोई मेरी इन चुचियों को मसल दे . प्यार से सहला दे, पर आख़िर में अपना बेटा ही काम आया, आजा मेरे लाल” कहते हुए उसने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चुचियों पर झुका लिया. मैं माँ का इशारा समझ गया और मैने अपने होंठ माँ की चुचियों से भर लिए. मेरे एक हाथ में उसकी एक चूची और दूसरी चूची पर मेरे होंठ चिपके हुए थे.

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मैने धीरे धीरे उसके चुचियों को चूसना शुरू कर दिया था. मैं ज्यादा से ज्यादा चूची को अपने मुँह में भर के चूस रहा था. मेरे अंदर का खून इतना उबाल मरने लगा था कि एक दो बार मैने अपने दाँत भी चुचियों पर गड़ा दिए थे, जिस से माँ के मुँह से अचानक से चीख निकल गई थी. पर फिर भी उसने मुझे रोका ऩही वो अपने हाथो को मेरे सिर के पीछे ले जा कर मुझे बालो से पकड़ के मेरे सिर को अपनी चुचियों पर और ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी और दांत काटने पर एकदम से घुटि घुटि आवाज़ में चीखते हुए बोली “ओह धीरे बेटा, धीरे से चूसो चुछी को ऐसे ज़ोर से ऩही काटते है”,

फिर उसने अपनी चूची को अपने हाथ से पकडा और उसको मेरे मुँह में घुसाने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी चूची को पूरा का पूरा मेरे मुँह में घुसा देना चाहती हो और कहा “ओह राजा मेरे निपल को चूसो ज़रा, पूरे निपल को मुँह में भर लो और कस कस के चूसो राजा.. जैसे बचपन में दूध पीने के लिए चूस्ते थे”.

कहानी जारी है……

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