सेक्सी धोबन और उसका बेटा-20

Sexy Dhoban Aur Uska Beta-20


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माँ के भारी शरीर के कारण मैं उतने ज़ोर के धक्के ऩही लगा पाया जितना लगा सकता था. मैने माँ को बाँहो में भर लिया और उसके कान के पास अपने मुँह को ले जा कर फुसफुसते हुए बोला “ओह माँ जल्दी कर ना, और धक्का मार ना, अब ऩही रहा जा रहा है,,,,,जल्दी से मारो ना माँ “. माँ ने मेरे चेहरे को गौर से देखते हुए मेरे होंठो को चूम लिया और बोली “थोरा दम तो लेने दे साले, कितनी देर से तो चुदाई हो रही है, थकान तो होगी ही”

“पर मा मेरा तो लंड लगता है फट जाएगा, मेरा जी कर रहा है की खूब ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाऊं ”
“तो मार ना, मैने कब माना किया है, आजा मेरे उपर चढ़ के खूब ज़ोर ज़ोर से चुदाई कर दे अपनी माँ की, बजा दे बाजा उसकी बुर का” कह कर माँ धीरे से मेरे उपर से उतर गई. उसके उतरने पर मेरा लंड भी फिसल के उसकी चूत से बाहर निकल गया था मगर माँ ने कुछ ऩही कहा और बगल में लेट कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया. मेरा लंड एकदम रस से भीगा हुआ था और उसका सुपदा लाल रंग का किसी पाहरी आलू के जैसे लग रहा था. मैने अपने लंड को पकड़ा और सीधा अपनी माँ के जाँघो के बीच चला गया. उसकी जाँघो के बीच बैठ कर मैं उसकी चूत को गौर से देखने लगा. उसकी चूत फूल पिचक रही थी और चूत का मुँह अभी थोडा सा खुला हुआ लग रहा था, बुर का गुलाबी छेद अंदर से झाँक रहा था और पानी से भीगा हुआ महसूस हो रहा था. मैं कुछ देर तक अपलक उसके चूत की सुंदरता को निहारता रहा.

माँ ने मुझे जब कुछ करने की बजाए केवल घूरते हुए देखा तो वो सिसकते हुए बोली “क्या कर रहा है, जल्दी से डाल ना चूत में लंड को ऐसे खड़े खड़े खाली घूरता रहेगा क्या, कितना देखेगा बुर को, अबे उल्लू देखने से ज़यादा मज़ा चोदने में है, जल्दी से अपना मूसल डाल दे मेरे चोदु भरतार, अब नाटक मत चोद” माँ ने इतना कह कर मेरे लंड को अपने हाथो में पकड़ लिया और बोली “ठहर मैं लगाती हूँ साले” और मेरे लंड के सुपरे को बुर के खुले छेद पर घिसने लगी और बोली “बुर का पानी लग जाएगा और चिकना हो जाएगा समझा , फिर आराम से चला जाएगा” मैं माँ के उपर झुक गया और अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लिया अपने जीवन की पहली चुदाई के लिए. माँ ने मेरे लंड को चूत को छेद पर लगा कर स्थिर कर दिया और बोली “हाँ अब मारो धक्का और पेल दो चूत में”

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मैने अपनी ताक़त को समेटा और कस के एक ज़ोरदार धक्का लगा दिये मेरे लंड का सुपदा तो पहले से भीगा हुआ था इसलिए वो सटाक से अंदर चला गया उसके साथ साथ मेरे लंड का आधा से अधिक भाग चूत की दीवारो को रगाडता हुआ अंदर घुस गया. ये सब अचानक तो ऩही था मगर फिर भी माँ ने सोचा ऩही था कि मैं इतनी ज़ोर से धक्का लगा दूँगा इसलिए वो चौंक गई और उसके मुँह से एक घुटि घुटि सी चीख निकल गई. मगर मैने तभी दो तीन और ज़ोर के झटके लगा दिए और मेरा लंड पूरा का पूरा अंदर घुस गया. पूरा लंड घुसा कर जैसे ही मैं स्थिर हुआ माँ के मुँह से गलियों की बौछार निकल परी “साला , हरामी… क्या समझ रखा है रे, कमीने, ऐसे कही धक्का मारा जाता है, सांड की तरह से घुसा दिया सीधा एक ही बार में माधरचोद.., धीरे धीरे करना ऩही आता है तुझे, साले कमीने पूरी चूत छिल गई मेरी, बाप है कि घुसाना ही ऩही जानता और बेटा है कि घुसाता है तो ऐसे घुसाता है जैसे की मेरी चूत फाड़ने के लिए घुसा रहा हो, हरामी कही का”

“माफ़ कर देना माँ , मगर मुझे ऩही पाता था की तुम्हे चोट लग जायेगी , तू तो जानती है ना की ये मेरी पहली चुदाई है” कह कर मैने माँ की दोनो चुचियों को अपने हाथो में थाम लिया और उन्हे दबाते हुए एक चुचि के निपल को चूसने लगा. कुछ देर तक ऐसे ही रहने के बाद शायद माँ का दर्द कुछ कम हो गया और वो भी अब नीचे से अपनी गांड उचकाने लगी और मेरे बालो में हाथ फेरते हुए मेरे सिर को चूमने लगी. मैने पूरी तरह से स्थिर था और चुची को चूसने और दबाने में लगा हुआ था, माँ ने कहा “हाँ बेटा, अब धक्का लगाओ और चोदना शुरू करो अब देर मत करो तेरी माँ की प्यासी बुर अब तेरे लंड का पानी पीना चाहती है”.

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मैने दोनो चुचियों को थाम लिया और धीरे धीरे अपनी गांद उछलने लगा. मेरा लंड मा के पनियाए हुए चूत के अंदर से बाहर निकालता और फिर घुस जाता था. माँ ने अब नीचे से अपने चुतद उछालना शुरू कर दिया था. दस बारह झटके मारने के बाद ही बुर से गछ गछ,,,,फ़च फ़च की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी. ये इस बात को बतला रहा था की उसकी चूत अब पानी छोड़ने लगी है और अब उसे भी मज़ा आना शुरू हो गया है. माँ ने अपने पैरो को घुटनो के पास से मोड लिया था और अपनी टांगों की कैंची बना के मेरे कमर पर बाँध दिया था.

मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरते हुए उसके होंठो और गालो को चूमते हुए उसके चुचियों को दबा रहा था. माँ की मुँह से सिसकारियों का दौर फिर से शुरू हो गया था और वो हांफते हुए बडबडाने लगी “हाय मारो, और ज़ोर से मारो राजा,छोड़ो मेरी चूत को, चोद चोद के भोसरा बना दो बेटा, कैसा लग रहा है बेटा चोदने में मज़ा आ रहा है या ऩही, मेरी बुर कैसी लगा रही है तुझे बता ना राजा, अपनी माँ की बुर चोदने में मज़ा आ रहा है या ऩही, पूरा जड़ तक लौदा पेल के छोड़ो ..राजा और कस कस के धक्के मार के पक्के माधरचोद बन जाओ, बता ना राजा बेटा कैसा लग रहा है माँ की चूत में लंड डालने में”

मैने धक्का लगाते हुए कहा “हाँ मेरी रानी.. बहुत मज़ा आ रहा है, बहुत कसी हुई है तुम्हारी बुर तो, मेरा लंड तो एकदम फस फस के जा रहा है तेरी बुर में, ऐसा लग रहा है जैसे किसी बॉटल में लकड़ी का ढक्कन फसा रहा हू, है क्या सच में मेरा बापू तुझे चोद्ता ऩही था क्या, या फिर तुम उस को चोदने ऩही देती थी, तुम्हारी चूत इतनी कसी हुई कैसे है माँ , जबकि मेरे दोस्त कहते थे कि उमर के साथ औरतो की चूत ढीली हो जाती है, है तुम्हारी तो एकदम कसी हुई है”.

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इस पर माँ ने अपने पैरो का शिकंजा और कसते हुए दाँत पीसते हुए कहा “साला तेरा बाप तो गान्डू है, वो क्या खाक चोदेगा मुझे, उस गान्डू ने तो मुझे ना जाने कब से चोदना छोड़ा हुआ है, पर मैं किसी तरह से अपने चूत की खुजली को अंदर ही दबा लेती थी, क्या करती किस से चुदवाती? , फिर जिसके पास चुदवाने जाती वो कही मुझे संतुष्ट ऩही कर पाता तो क्या होता, बदनामी अलग से होती और मज़ा भी ऩही आता, तेरा हथियार जब देखा तो लग गया की तू ना केवल मुझे संतुष्ट कर पाएगा बल्कि, तेरे से चुदवाने से बदनामी भी ऩही होगी, और तू भी मेरी चूत का प्यासा है फिर अपने बेटे से चुदवाने का मज़ा ही कुछ और है, जब सोच के इतना मज़ा आ रहा था तो मैने सोचा की क्यों ना चोदवा के देख लिया जाए”

कहानी जारी है……

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