सेक्सी मौसी की चुदाई-1

Sexy mausi ki chudai-1

देसी फैमिली सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैं अपनी मौसी के घर गया तो मेरा मन बहकने लगा. सेक्सी मौसी को चोदने के लिये मैंने क्या किया? कैसे अपने लंड की प्यास बुझायी?

कैसे हो मेरे प्यारे पाठको? सभी के लौड़े फनफना रहे होंगे? पाठिकाओं की चूतों को भी मेरे लंड का सलाम। मेरा नाम दीक्षांत है. मैं उम्मीद करता हूं कि पाठिकाओं की चूत और चूचियों की मालिश हो रही होगी. अगर नहीं हो रही है तो अपनी चूत में उंगली करना शुरू कर दीजिये क्योंकि जल्दी ही आपकी चूत को मैं गर्म करने वाला हूं.

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अपनी मौसी की चुदाई की स्टोरी के द्वारा सभी गर्म चूतों का मैं पानी निकालने की कोशिश करूंगा. इसलिए मैं अब ज्यादा समय न लेते हुए अपनी देसी फैमिली सेक्स कहानी शुरू करता हूं.

जाड़े का मौसम था. मैं अपनी मौसी के यहाँ जाने के लिए घर से निकल पड़ा. दिसंबर महीने में बाइक चलाने का अनुभव तो आप में से भी कईयों ने किया होगा.

ठंड में 40 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जब मैं मौसी के पास पंहुचा तो ठंड के कारण मेरी हालत ख़राब हो रही थी. शाम के पांच बज चुके थे. अँधेरा होने लगा था.

मेरे पहुंचने पर मौसी ने मुझे गले से लगा लिया. चाय वगैरह पीने के बाद मैं आग के सामने बैठ गया ताकि बदन को थोड़ी गर्माहट महसूस हो सके. सर्दी के कारण मेरी कंपकंपी छूट रही थी.

अब आगे बढ़ने से पहले मौसी के बारे में भी जान लीजिये.
मेरी मौसी की उम्र चालीस साल के आसपास है. उसको देखने से जरा सा भी पता नहीं चलता कि वो इतनी उम्र की होगी और तीन बच्चों की मां होगी.

पांच फीट की हाइट और गोरा रंग. मस्त भरा हुआ बदन और बड़ी बड़ी दो चूचियां जो एकदम से मौसी को क़यामत बनाती हैं. मैं बहुत बार मौसी को याद करके मुट्ठ मार चुका था.

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मेरे मौसाजी दिल्ली में रहते थे जो तीन चार महीने में एक बार आते थे या मौसी ही उनके पास चली जाया करती थी. चूँकि मैं अपनी मौसी का लाडला बेटा था इसलिए मौसी मुझे बहुत मानती थी. मेरी हर बात का ख्याल रखती और मुझे खूब पैसे भी देती थी.

मैं मौसी से फोन पर भी खूब बातें किया करता था. कभी कभी डबल मीनिंग बातें भी हो जाया करती थीं. वो बस हंस कर टाल दिया करती थी. मगर मुझे बड़ा अच्छा लगता था.

तो उस दिन ठंड ज्यादा होने के कारण हमने जल्दी ही खाना खा लिया और मौसी ने मेरा बिस्तर अपने ही रूम में एक अलग चारपाई पर लगा दिया. बाकी बच्चे दूसरे रूम में सो रहे थे.

बच्चों के अलग सोने का कारण था कि मैं और मौसी आपस में बहुत बातें किया करते थे. इससे बच्चों को सोने में परेशानी हो जाती इसलिए बच्चों को उन्होंने दूसरे रूम में सोने के लिए बोल दिया.

मैं मौसी के साथ किचन में बातें कर रहा था. जल्दी जल्दी काम ख़त्म करने के बाद मौसी ने कहा कि ठण्ड ज्यादा है, अब जल्दी से बिस्तर पर चलते हैं.

वो आगे आगे चल दी और मैं भी मौसी के पीछे पीछे रूम में आ गया. दरवाजा बंद करके हम अपने अपने बिस्तर पर जल्दी से रजाई में घुस गए. काफी ठंड लग रही थी. रजाई भी ठंडी लग रही थी.

मैं बिस्तर पर लेटे लेटे मौसी से बातें करने लगा. कमरे में नाईट बल्ब जल रहा था. मैंने जान बूझकर रजाई को अपने ऊपर से हटा दिया. पांच मिनट में ही मेरा पूरा शरीर ठंडा हो गया.

फिर मैंने मौसी से कहा- मौसी मुझे बहुत तेज ठंड लग रही है. मेरा शरीर ठंड से कांप रहा है.
वो तुरंत उठी तो मैंने झट से अपने ऊपर रज़ाई को डाल लिया और कांपने का नाटक करने लगा. मौसी ने मुझे एक और कम्बल दे दिया.

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अभी भी मैं नाटक करता रहा. मैंने मौसी को अपना हाथ दिया और उनको छूने के लिये कहा. उनसे कहा कि देखो कितना है ठंडा है, गर्म ही नहीं हो रहा है.

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उन्होंने मेरे ऊपर कम्बल डाल दिया और बोली- कोई बात नहीं बेटा, अभी गर्म हो जायेगा. इतना बोलकर वो फिर अपने बिस्तर पर जाकर लेट गयी और मेरी शादी के विषय में बात करने लगी.

मैंने कहा- अभी मुझे शादी नहीं करनी है मौसी. अभी तो मेरे खेलने-खाने और एन्जॉय करने के दिन हैं.
फिर मौसी मुझे लड़कियों के बारे में बताने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दोबारा कम्बल हटा दिया. जब मेरा पूरा शरीर ठंडा हो गया तो मैंने मौसी से कहा- मौसी मुझे ठंड लग रही है.

अब मौसी भी परेशान हो गयी कि मुझे इतनी ज्यादा ठंड कैसे लग रही है! वो उठ कर मेरे पास आयी और मेरे बदन को छूकर देखा. मेरा बदन कम्बल हटाने की वजह से एकदम ठंडा हो चुका था.

मौसी घबराने लगी कि कहीं मुझे ज्यादा सर्दी न पकड़ ले. उसको चिंतित देखकर मैं और ज्यादा कांपने का नाटक करने लगा.
वो बोली- ऐसा करते हैं कि डबल बेड पर सो जाते हैं. साथ में सोने से ठंड नहीं लगेगी.

दोस्तो, अब अंधे को क्या चाहिए? दो आँखें! मेरी मनोकामना पूरी होते देख मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा. मैं तुरंत उठा और मौसी के साथ उनके बिस्तर पर सोने चला गया.

मुझे लगा कि मैं और मौसी एक रज़ाई में सोयेंगे लेकिन मेरी किस्मत में अभी और इंतजार करना था. मौसी ने मेरी रज़ाई और कम्बल को मेरे ऊपर डाल दिया और खुद अपनी रज़ाई में सो गयी. काम न बनता देख मैं फिर से कांपने लगा.

मौसी ने पूछा- क्या हुआ बेटा डीडी? तुम्हें इतनी ज्यादा सर्दी कैसे लग रही है?
मैंने कहा- पता नहीं मौसी, मुझे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है.
मैं जानबूझकर अपने दांत किटकिटाने लगा.

अब मौसी से नहीं रहा गया तो उन्होंने अपनी रज़ाई को दूसरी तरफ कर दिया और मेरी रज़ाई में घुस गयी और मेरी बाँहों को कस कर पकड़ लिया. मेरे मन में चुदाई के ख्याल जोर मारने लगे.

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मेरी मौसी बहुत सीधी-सादी हैं. मैं जनता था कि मैं चाहे जो भी करूँ, मौसी किसी को बताने वाली नहीं हैं. फिर भी एक अनजाना सा डर था जो मुझे रोक रहा था. मैंने मौसी के पैर में अपना पैर सटाया तो मेरे शरीर में झनझनाहट सी होने लगी.

धीरे धीरे मेरा लंड खड़ा हो गया और मौसी की चूत के ऊपर दबाव बनाने लगा. हम दोनों बात करने में मशगूल थे और मेरा लंड मौसी की चूत में जाने की तैयारी कर रहा था. हम दोनों का मुँह पास में ही था.

मेरी गर्म सांसों का अहसास मौसी को हो चुका था. वो भी मेरे और करीब आना चाहती थी. मौसी ने मेरी कमर पर हाथ रख दिया. अब हम बात करना बंद कर चुके थे और दोनों के बदन में एक आग सी जलने लगी थी.

हमारे शरीर के अंग आपस में मिलकर एक दूसरे से बात करना चाह रहे थे. मैं थोड़ा सा मौसी की तरफ और खिसका तो मेरा लंड सीधा मौसी की चूत के ऊपर टच होने लगा.

मौसी ने अपना हाथ मेरी कमर पर से हटाकर मेरे चूतड़ पर रख दिया. तो मैंने भी अपना एक हाथ मौसी के चूतड़ पर रख दिया.
हाय! ऐसा लग रहा था की लंड फट जायेगा. मेरी सांसें तेजी से चलने लगीं. मौसी की सांसें भी मुझे महसूस हो रही थीं.

मैंने उनके बदन को सहलाते हुए उनके चूतड़ों को अपने लंड की तरफ खींचा तो मौसी अपने आप मेरी तरफ सरक आयीं. मैं अपना हाथ मौसी के चूतड़ों से खिसकाता हुआ ऊपर कंधे तक ले लाया.

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