शादीशुदा चूत में मेरा लण्ड-1

Shadishuda choot me mera lund-1

मैंने इस वेबसाइट पर सारी कहानियाँ पढ़ी हैं और आज मैं अपनी एक सच्ची कहानी लिखने जा रहा हूँ।

मैं 25 साल का लड़का हूँ, मेरी हाईट 5’5″ इंच है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ।

मैं जॉब करने के लिए दिल्ली में आया था और रहने के लिए मैंने एक फ्लैट किराये पर लिया।

मैं यहाँ पर नया था तो ज्यादा कुछ नहीं जानता था क्योंकि मैं पंजाब से हूँ और दिल्ली में पहली बार आया था।

कहानी शुरू होती है जब मैं अपने फ्लैट में रहने आया तो मैंने देखा कि मेरे आस पास का माहौल बहुत ही अच्छा है और मुझे भी अब रहने में बहुत अच्छा लग रहा था।

मेरे फ्लैट के सामने वाले फ्लैट में एक परिवार रहता था, पति, पत्नी और उनके दो बच्चे।

उनकी उम्र भैया की 30 साल और भाभी की 28 साल होगी, रंग गोरा और उसके बूब्स तो क्या यार ! देखकर हर आदमी का लण्ड खड़ा हो जाए और पास जाकर मुँह में भर ले।

सामने वाली भाभी देखने में साली सेक्सी बॉम्ब दिखती थी।

फिर जब से मैंने उसे देखा था उस दिन से उससे दोस्ती करना चाहता था और मेरी दोस्ती भी जल्दी ही हो गई क्योंकि उसने मुझे पीने का पानी लेने के लिए खुद ही बोल दिया और कहा- कोई चीज चाहिए हो तो बोल देना।

उसके पति ने भी कहा- कुछ काम हो तो आप मुझे बता देना।

मैंने कहा- ठीक है, कोई भी काम होगा तो आपको ही बोलूँगा।

फिर धीरे धीरे दिन गुजरने लगे फिर मेरी और उसकी दोस्ती भी बढ़ने लगी क्योंकि उसका पति सुबह जाता था और देर रात को आता था।

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बच्चों के स्कूल जाने के बाद वो फ्री हो जाती थी और मैं भी फ्री ही रहता था।

कम्पनी का काम तो मैं ऐसे ही लैपटॉप से मेल कर देता था और फिर उससे बात करता रहता था।

तभी एक दिन हम बात कर रहे थे कि उसने कहा- मुझे तुम कम्प्यूटर चलाना सिखा दो, मेरे घर में पीसी है लेकिन बहुत दिनों से बंद पड़ा है।

वो रोज़ अपना काम खत्म करके मेरे यहाँ पर आ जाती और कंप्यूटर सीखने लगी।

इस तरह हम बहुत अच्छे दोस्त हो गये और एक दूसरे को छूना और हाथ पकड़ना आम बात हो गई।

वो भी अब कुछ नहीं कहती थी।

अब मुझे पूरा स्पोर्ट करती थी और फिर एक दिन मैंने कहा- तुम्हारी आँखें बहुत अच्छी हैं।

उसने कहा- मुझे पता है।

फिर मैंने कहा- तुम्हारे गाल भी बहुत अच्छे हैं।

उसने कहा- मुझे पता है।

फिर मैंने कहा-  तुम्हारी आँखें बहुत अच्छी है क्योंकि इनसे तुम मुझे देखती हो।

तभी वो बोली- मैं तो सभी को देखती हूँ इन आँखों से।

मैंने कहा- मेरी तरफ़ देखकर कहो।

तब वो शरमा गई और आँखें बंद कर ली।

मैं खड़ा होकर उसके पास गया और उसकी आँखों पर चूम लिया लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और शरमा गई।

मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, चुम्बन करने लगा लेकिन उसने कोई विरोध नहीं किया, मैं लगभग 5-6 मिनट तक उसके होंठ चूसता रहा।

मेरी बेकरारी बढ़ती जा रही थी, मैं उसे ज़ोर ज़ोर से चुम्बन करने लगा।

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उसको थोड़ा अजीब सा लगा और उसने मुझे पीछे धकेल दिया, वो उठकर खड़ी हो गई, कहा- तुम यह क्या कर रहे हो?

फिर वहाँ से अपने बाल ठीक करके चली गई।

मैं सोच रहा था कि अब क्या होगा। मैंने बाहर जाकर देखा तो उसके फ्लैट का दरवाजा बंद था।

मैं अपने काम पर चला गया।

जब शाम को वापस आया तो मैंने उसे देखा वो अपने बच्चों को पढ़ा रही थी। उसने मुझे स्माइल दी और मैंने भी स्माइल दी।

अचानक उसने कहा- अगर आपको पानी चाहिए तो ले लो।

मैंने कहा- हाँ !

मैं पानी लेने चला गया। तभी वो रसोई में पानी देने आई तभी मैंने उसे पीछे से अपनी बाँहों में ले लिया, उसकी गर्दन पर चूम लिया।

उसने मुझे ज़ोर से धक्का दिया और कहा- क्या पागल हो? कोई देख लेगा।

मैंने कहा- आई लव यू डीयर रमोला ! मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं बस यह जानता हूँ कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।

उसने कहा- क्या किसी को प्रपोज ऐसे करते हैं? शायद तुम्हें मालूम नहीं किसी लड़की को कैसे प्रपोज करते हैं?

मैंने कहा- मुझे मालूम है, कल 12 बजे तुम मेरे यहाँ आना, वहाँ मैं तुम्हें बताऊँगा कि कैसे प्रपोज करते हैं।

मैं घर जाकर कल का इंतज़ार करने लगा। मैंने सारी रात जागकर काटी क्योंकि कल मैं उसे चोदने वाला था। मेरा लण्ड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

अगले दिन 12 बजे से पहले ही वो आ गई और मैंने उसे एक रोज़ दिया, कहा- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।

उसने कहा- मैं तो शादीशुदा हूँ।

मैंने कहा- मुझे कुछ मालूम नहीं, मैं बस तुमसे प्यार करता हूँ।

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मैंने उसे अपनी बाँहों में ले लिया, थोड़ी देर तक उसे अपनी छाती से लगा कर रखा वो भी अपना सर मेरी छाती से लगाकर आँखें बंद करके मुझे कसकर पकड़ कर खड़ी रही।

तभी मैंने थोड़ी देर बाद उसका चेहरा अपने हाथ में लिया फिर उसके होंठों को देखा।

उसने कहा- क्या देख रहे हो?

मैंने कहा- ये होंठ जो गुलाब की तरह हैं, मुझे इनका रस पीना है।

उसने आँखें बंद कर ली, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और पता ही नहीं कितनी देर तक उसके होंठ पर अपने होंठ से चूमता रहा और अपनी जीभ उसके पूरे मुँह में घुमाता रहा।

फिर जैसे ही मैंने उसके होंठों पर अपने दाँतों से काटना शुरू किया तो उसने कहा- प्लीज काटो नहीं, निशान पड़ जायेंगे।

मैंने उसे अपने बेड पर लेटा दिया और उसके ऊपर आ गया, उसके गालों पर पागलों की तरह चूमाचाटी करने लगा।

वो भी पागल होती जा रही थी, वो भी मुझे चूमने लगी।

मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे किया और उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा।

उसने कहा- नहीं!

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लेकिन मैं भी कहाँ मानने वाला था, मैंने उसके बूब्स को ब्लाउज की कैद से आज़ाद कर दिया और उसकी ब्रा के ऊपर ही अपना मुँह रख कर ऊपर से ही चूमने लगा।

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