शैली की शानदार गुलाबी चूत

Shaili ki shandar gulabi chut

हाय दोस्तो,

मेरा नाम जितेन्द्र है।

आज मैं आपके साथ अपनी सच्ची कहानी शेयर करने जा रहा हूँ। मैं आगरा, कमला नगर-मुगल रोड का रहने वाला हूँ।

मेरी उम्र सताईस साल है, रंग गोरा और कद 5 फुट 6 इंच है। मैं नीली आँखों वाला हट्टा-कट्टा जवान हूँ और मेरा सात इन्ची लम्बा व ढाई इन्च मोटा लण्ड है।

मैं इलैक्ट्रीशियन का काम दयालबाग स्थित एक प्राइवेट दुकान पर पिछले आठ साल से करता हूँ, वहाँ दुकान के आस-पास कई गर्ल्स कालेज और हास्टल है, इसलिए वहाँ दिन-भर लडकियों का आना-जाना लगा रहता है।

अब सीधे कहानी पर आता हूँ…

बात आज से लगभग तीन साल पहले की है, जब मैं 24 साल का था।

एक दिन दुकान पर एक लडकी आई, जिसका नाम शैली था। उसने मेरे मालिक को कंप्लेंट लिखवाई कि उसका गीजर खराब हो गया है। मेरे मालिक ने मुझे जाने के लिए बोला तो मैं उसके साथ जाने के लिए तैयार हो गया।

वह बोली – अभी तो मैं कुछ काम से जा रही हूँ, आप शाम के समय आ जाना, मुझे अपना मोबाइल नम्बर दे दो… मैं रूम पर पहुँच कर आपको कॉल कर दूँगी, तब आप आ जाना…

इतना कहकर उसने मेरा नम्बर अपने मोबाइल में फीड किया और वहाँ से चली गई।

शाम को करीब 5 बजे मेरे नम्बर पर उसका कॉल आया और मैं उसके रूम पर पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर मैंने बेल बजाई तो अन्दर से कोई दूसरी लडकी आई, जिसने मुझे बताया कि वो शैली की रूम पार्टनर दीपिका है और शैली अभी कहीं चली गई है।

उसने कहा कि आप गीजर चैक कर लो, और मुझे बाथरूम का गेट दिखा दिया।

गीजर बाथरूम की दुछत्ती पर लगा हुआ था, मैं उसपर गीजर चैक करने चढ गया।

मुझे अभी करीब 10 या 15 मिनट हुए थे, इतने में बाथरूम में शैली अपने कुछ कपडे हाथ में लेकर घुस आई और एक-एक करके अपने कपडे उतारने लगी।

फिर वो शावर चालू करके नहाने लगी। साबुन लगाते-लगाते वो अपने बूब्स को धीरे-धीरे दबाते-मसलते हुए नहा रही थी।

कुछ देर बाद वो अपनी चूत में उंगली करके सिसकारियाँ लेने लगी। उसकी आँखें अब काफी नशीली हो रही थी और उसके मुँह से आह्हहहहह… आह्हहहहह… की हल्की-हल्की आवाजें आ रहीं थी।

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मैं ये सब देख कर वहीं ऊपर बैठा अपने हाथ में अपना लण्ड लेकर मुठ्ठ मार रहा था कि अचानक मेरे मोबाइल की घण्टी बजी, जिससे शैली एका-एक चोंक उठी, और उसने एक-दम मेरी ओर देखा।

उसे मेरा लण्ड भी दिखाई दे गया जो कि मेरे हाथ में था। मैं रूकता उससे पहले ही मेरे लण्ड से वीर्य की पिचकारियाँ छूट कर उसके गुलाबी, नरम मोटे चुचों पर जा गिरी, जिससे वो घबरा गई और उसे साफ करते हुए मेरे मोटे लण्ड को टकटकी लगाते हुए ऐसे देखने लगी जैसे मानो उसने कब से मोटा लण्ड नहीं देखा हो।

कुछ देर हम एक-दूसरे को यूँही देखते रहे फिर वो एकदम से बोली – अपने इस लण्ड को हाथ में लेकर वहीं बैठे रहोगे कि अब नीचे भी आओगे।

उसकी इस तरह की बात से मैं घबरा गया।

मैंने कहा – इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है, आप एकदम से आकर के नहाने लगीं आपके इस सुन्दर गोरे नंगे बदन को देखकर आख़िर कौन अपने आपको रोकता।

शैली ने बोला – चलो, अब तो तुम कुछ कर सकते हो।

फिर उसने मेरा हाथ पकड कर अपने गोरे-गोरे चुचों पर रख दिया और मसलने को कहा, मैं तो मानो कि स्वर्ग में पहुँच गया था।

मैंने उसके बूब्स धीरे-धीरे मसलना चालू किया और शैली गरम होने लगी और मेरे लण्ड को सहलाते हुए मुझे इधर-उधर चूमने लगी।

फिर उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिये। मैंने भी उसकी चूत में उंगली डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा, जिससे वो और भी गरम हो गई और आह्हह… आह्हह… आह्हह… करते हुए मेरे बालों में उंगलियाँ फिराते हुए कहने लगी – जितेन्द्र, तुमने तो मुझे स्वर्ग के दर्शन करा दिए।

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इतना कहकर वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरे लण्ड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी।

उसके इस तरह लण्ड चूसने से मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैंने अपने सारे कपडे उतार कर शैली को वहीं जमीन पर लिटा लिया और 69 की अवस्था बनाते हुए, उसकी चूत की गुलाबी झिल्लियों को चूमने लगा और अपनी जीभ को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा।

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इससे उत्तेजित होकर उसके मुँह से आह्हह… आह्हह… की आवाज़ें आने लगी।

वो कहने लगी – अब कंट्रोल नहीं हो रहा, जल्दी से अपना लण्ड मेरी चिकनी चूत में डालो और मुझे स्वर्ग का आनन्द दो।

मैंने उससे अब पूछा – आपने पहले कभी सैक्स किया है?

शैली ने कहा – नहीं, सैक्स नहीं किया… बस उंगली और कैंडल से ही अपनी चूत की आग को शांत किया है, इतने बडे लण्ड के दर्शन तो पहली बार हुए हैं…

फिर मैंने उसकी चूत में एक-एक उंगली करके तीन उंगलियाँ डालीं और अन्दर-बाहर करने लगा, जिससे लण्ड को चूत में जाने में ज्यादा परेशानी ना हो।

अब मैंने अपने लण्ड के सुपाडे को शैली की चूत पर सटा दिया और हल्के-हल्के जोर लगाते हुए अपने लण्ड के सुपाडे को शैली की गुलाबी चूत पर दबाब दिया, जिससे सुपाडा शैली की गुलाबी चूत को फैलाता हुआ अन्दर घुसा।

शैली की गुलाबी चूत से खून की धार बह निकली और वो दर्द से करहाते और रोते हुए बोलने लगी – जितेन्द्र, बहुत दर्द हो रहा है… जरा आराम से करो।

मैं वहीं रूक गया और उसके चुचे मसलते हुए अपने लण्ड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा और फिर एक और दबाब देते हुए थोडा सा लण्ड शैली की चूत के अन्दर घुसाया और उसने मुझे कस कर अपनी बाहों में जकड लिया।

उसके मुँह से सेक्सी दर्द भरी आवाजें आ्आ… आअअअअ… उफ्फ… फफ्फ्फ्फ्फ्… आ्आ… निकलने लगीं तो मैंने अपने होंठ उसके नरम-रसीले होठों पर रख दिए और उन्हें चूसने व काटने लगा, जिससे उसका दर्द कुछ थम सा गया और फिर शैली कहने लगी – जितेन्द्र, थोडा तेज-तेज करो ना।

मैंने शैली की गुलाबी चूत पर दबाब बनाते हुए अपने 7 इन्च के लण्ड को पूरा का पूरा शैली की गुलाबी चूत में डाल दिया, जिससे उसे बहुत दर्द हुआ और उसके मुँह से चीख के साथ-साथ उसकी प्यारी-प्यारी आँखों से आंसू बहने लगे और फिर मैं धीरे-धीरे अपने लण्ड को अन्दर-बाहर करते हुए स्पीड बढाने लगा।

थोडी देर के बाद शैली को भी मजा आने लगा और शैली कहने लगी – जितेन्द्र, और जोर से करो ऐसा कहते हुए उसके मुँह से आह्हह… उऊऊऊऊ… उऊऊऊऊ… उऊऊऊऊ… आह्हह… की आवाज़ें आ रहीं थीं, जिससे मेरा जोश और बढता जा रहा था।

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मैंने उसकी चुदाई 15 मिनट तक नहीं रोकी, फिर भी वह बोल रही थी फक मी… जितेन्द्र, फक मी… फक मी… फक मी हार्ड… जितेन्द्र, मुझे नहीं पता था कि चूत को लण्ड से चुदवाने में इतना मजा आता है… और वो भी तुम्हारे जैसे वलिष्ठ, लम्बे, मोटे लण्ड से चुदवाने में तो मुझे मजा आ गया…

अब मैंने उसे और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया और वो भी अपनी गाण्ड उठा-उठा कर खूब चुदवा रही थी।

फिर मैंने उससे बोला – शैली, मेरा काम होने वाला है तो वह बोली – मेरा तो 2 बार झड चुका है।

मैंने कुछ देर और चुदाई करते हुए अपना सारा वीर्य शैली की गुलाबी चूत में डाल दिया, जिससे उसे बहुत गर्माहट महसूस हुई और मेरा सारा वीर्य शैली की गुलाबी चूत में लबालब भर गया और वीर्य शैली की गुलाबी चूत से बाहर टपकने लगा।

वो उसे अपने हाथ से अपनी चूत पर सहलाते हुए मलने लगी जैसे मानो कि कोई मसाज क्रिम लगा कर मसाज कर रही हो और फिर वो मेरे लण्ड को चूसने लगी।

उसने मेरा लण्ड चाट-चाट कर साफ कर दिया और मुझसे लिपट कर कहने लगी – अगली बार कब चोदोगे मुझे, अब तो मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी हूँ और हमेशा तुम्हारे लण्ड से चुदवाना पसन्द करूँगी।

फिर हम दोनों जैसे ही बाथरूम से बाहर आये तो हमने देखा कि शैली की रूम पार्टनर जिसका नाम दीपिका था वो अपनी चूत को जीन्स के ऊपर से सहला रही थी और अपने चुचे दबा रही थी।

हमें एकदम से बाहर देखकर वो अपने आपको संभालने लगी…

दोस्तो, ये कहानी अगले भाग में…

इन्तजार करें…

पर हाँ अपनी राय से मुझे अवगत जरूर कराएं…

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