शाकाल और नंगी हसीनाएँ-2

(Shakal Aur Nangi Haseenayen-2)

रीता और गीता अब नंगी थीं।

रंजना ने भी अपनी स्कर्ट उतार दी, रंजना की चूत पाव रोटी की तरह फूली हुई थी। मैंने रूचि के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया था।

रूचि ने खुद अपना पेटीकोट नीचे सरका कर उतार दिया उसकी चूत से पानी बह रहा था। रूचि की चमचमाती चिकनी चूत नंगी हो गई थी।

रूचि मेरे से धीरे से बोली- मुझे चोद दो ! बहुत खुजली हो रही है।

रीता, गीता और रंजना भी नंगी हो गई थीं, अब कमरे में उमा के अलावा हम सब लोग नंगे थे। मैं और शाकाल बीच बीच में एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे और ड्रिंक पीते हुए अपनी अपनी हसीनाओं को मसल रहे थे।

शाकाल बोला- राजीव जी, क्यों न एक एक बार अपनी अपनी हसीनाओं की चूत चोद ली जाय। चल रीता और गीता जरा मेरा लौड़ा चूस ले।

शाकाल ने रूचि से कहा- तू भी रंजना के साथ लौड़ा चूस, मज़े कर, शरमा नहीं ! नहीं तो तुझको मैं खुद भी चोदूँगा और अपने 4-5 गुण्डों से और चुदवा दूँगा।

रूचि ने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया, उधर गीता ने शाकाल का लण्ड मुँह में ले रखा था। रूचि लपालप मेरा लौड़ा चूसने लगी। इधर रंजना मुझसे चिपक कर मेरे होंठ और जीभ चूस रही थी।

मेरे होंटों से जीभ हटाते हुए रंजना बोली- मुझे भी अपना लौड़ा चुसवाओ ना ! मेरा मन बहुत कर रहा है आपका लौड़ा चूसने का।

मैंने रूचि को हटा दिया और लौड़ा रंजना के मुँह में घुसा दिया। रूचि मुझसे चिपक कर बैठ गई।

शाकाल ने रीता की चूत में अपनी उंगली घुसा रखी थी और उसकी चूत मसल रहा था। गीता शाकाल का लण्ड चूस रही थी।

उमा रूचि से बोली- तू थोड़ा अब शाकाल जी का लण्ड चूस ले। शाकाल जी बड़े शरीफ आदमी हैं अपनी बात पर अडिग रहते हैं। कोई और होता तो तेरी चूत के मज़े ले चुका होता।

उमा ने रूचि को उठाकर शाकाल के लौड़े पर घोड़ी बना दिया और शाकाल ने रूचि के मुँह में अपना लौड़ा डाल दिया। रूचि पूरी गरम थी, उसने एक पालतू कुतिया की तरह उमा की बात मानी और शाकाल का लण्ड मुँह में ले लिया। रूचि नया लण्ड बड़ी मस्ती से आनन्द लेते हुए चूस रही थी।

रंजना के चूतड़ों पर मैं उत्तेजित होकर तबला बजा रहा था। रंजना लपालप मेरा लौड़ा चूस रही थी।

उमा के कहने पर गीता मेरी बगल में आकर बैठ गई थी, लौड़ा चुसवाते चुसवाते मैं गीता के दूध मलने लगा। चारों औरतें रण्डियाँ बनी हुई थीं। दस मिनट बाद हम सब अलग हो गए लेकिन लौड़े अभी भी हमारे खड़े हुए थे। चारों औरतें चुदने के लिए कुलमुला रही थीं।

शाकाल बोला- राजीव, जरा अपनी रूचि की चूत तो चोद दो, हम भी तो देख लें कि यह चुदते हुए कैसी आहें भरती है।

उमा बोली- शाकाल जी, आप मुझे आज मंच पर नाचने वाली नंगी हसीनाओं के नाम बता दो, मैं उन्हें नाचने का अभ्यास कराती हूँ ! इस बीच आप लोग इन कुतियों से मज़ा लो।

शाकाल बोले- उमा आज शरीफ औरतों में शीतल और कुसुम नाचेंगी और रण्डियों में रचना और रेशमा नंगा नाच करेंगी ! सब लड़कियाँ कमरा नम्बर नौ में मिलेंगी। अगले शनिवार को मुझे रण्डी सपना और निशा को नंगा नचवाना है। इन दोनों को लेकर साथ आना इनका नाच मुझे देखना है और इनको चोदना भी है।

इसके बाद उमा बाहर चली गई।

रूचि गर्म हो रही थी और उसकी आँखें मुझे चोदने का निमंत्रण दे रही थीं। मैंने उसको गोद में उठाकर सामने खाली पड़े सोफे पर लिटा दिया और उसकी चूत में लण्ड घुसा दिया। रूचि की चुदाई शुरू हो गई थी अब उसकी चूत बज़ रही थी। रूचि आह ! ऊह ऊह ! मज़ा आ गया ! कर के चिल्ला रही थी। रूचि सेक्स की मस्ती में नहा रही थी।

मेरे धक्कों से रूचि की चूचियाँ मस्त ऊपर नीचे झूल रही थीं। शाकाल रंजना को लण्ड चुसवाते हुए शराब पी रहा था और रूचि की चुदाई और आहों का मज़ा ले रहा था।

दो मिनट बाद शाकाल ने अपना लण्ड रंजना के मुँह से निकाल लिया और रूचि के सर की तरफ से आकर रूचि की नंगी चूचियाँ अपने हाथों में दबा ली और उसके चुचूक मसलते हुए चूचियाँ दबाने लगा।

रूचि का आनन्द दुगना हो गया था।

शाकाल ने थोड़ी देर के लिए अपना हाथ हटाया तो रूचि ने दुबारा पकड़ कर दूधों पर रख लिया। रूचि आहें भरती हुई बोली- शाकाल जी, मसलो ! और मसलो ! बड़ा मज़ा आ रहा है।

शाकाल ने रूचि की चूचियाँ मसलते हुए उसके होंटों पर होंठ रख दिए।

रूचि की चुदाई जोरों पर थी।

तभी शाकाल ने मुझे कुछ इशारा किया। मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया। हम दोनों ने रूचि को छोड़ दिया।

रूचि एक पागल कुतिया बनी हुई थी, चिल्लाते हुए बोली- चोदो राजा ! चोदो ! रुक क्यों गए? चोदो न ! बड़ा मज़ा आ रहा है ! चोदो ! जल्दी चोदो ! फाड़ दो इस कमीनी को ! बहुत खुजली हो रही है। चोदो, जल्दी चोदो।

शाकाल बोला- रानी, यह तो थक गया !कहो तो मैं चोद दूँ?

रूचि गर्म थी, बोली- लण्ड डालो ! कोई भी डाल दो ! चोदो ! चोदो ! जल्दी चोदो ! मुझसे रहा नहीं जा रहा है।

शाकाल ने उसे गोद में उठा कर जमीन पर घोड़ी बना दिया और अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया और बोला- चिंता न कर ! तुझे चोद चोद कर वो मज़ा देंगे कि तू बार बार मेरे अड्डे पर आएगी।

मैंने अपना लण्ड दुबारा उसकी सुरंग में डाल दिया था। रूचि शाकाल का लण्ड लपालप चूस रही थी, शाकाल उसके बाल प्यार से सहला रहा था। दो दो लौड़ों से रूचि खेल रही थी।

शाकाल बोला- राजीव जी, औरत को असली मज़ा लण्ड ही देता है, जरुरत है उसे गर्म करने की। मेरे अड्डे पर जितनी शरीफ औरतें आती हैं सब लण्ड की भूखी होती हैं। इन सब के पति इन्हें गर्म किए बिना चोदते हैं इसलिए इनको असली चुदाई का मज़ा मिल नहीं पाता।

थोड़ी देर बाद शाकाल ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया, इसके बाद शाकाल ने सोफे पर गीता के हाथ रखकर उसे घोड़ी बनाया और उसकी चूत चोदने लगा।

रूचि की चूत पाँच मिनट चोदने के बाद मैंने गाढ़े वीर्य से भर दी। शाकाल का भी लण्ड गीता की चूत में खाली हो गया था।

रूचि और मैं शाकाल के साथ सोफे पर ढेर हो गए। रूचि तो शाकाल की गोद में ही लेट गई, आह भरती हुई बोली- आज तो जन्नत का मज़ा आ गया। शाकाल जी, आप भी मेरी चूत मार लेते।

शाकाल बोला- मैं वादे का पक्का हूँ, मैंने उमा से वादा किया है कि आज तेरी चूत मेरे अड्डे पर राजीव के अलावा कोई नहीं मारेगा। मेरा मन तो तुझे चोदने का बहुत कर रहा है, तू अगले शनिवार को आ जाना, धंधे पर भी बैठने के मज़े ले लेना और मुझे भी अपनी चूत की सेवा का मौका देना, राजीव से दुगना मज़ा दूँगा।

शाकाल वीर्य से भरा सुपारा रूचि के होंटों पर फिराया और उसको पुचकारते हुए बोला- थोड़ा लण्ड चाट ले, बड़ा मज़ा आएगा !

रूचि ने जीभ निकाल कर मज़े से दो मिनट तक उसका लण्ड चाटा।

इस बीच रंजना ने एक एक छोटा पेग मुझे, शाकाल और रूचि को दे दिया और बोली- पी लो, अभी तो रात शुरू हुई है।

रूचि मेरे और शाकाल के बीच चूत चौड़ी करके नंगी लेटी हुई थी, उसने शाकाल का हाथ अपनी चूत पर रख लिया और बोली- आप बहुत अच्छे आदमी हैं, मैं एक बार आपके अड्डे पर शरीफ रण्डी पक्का बनूँगी और आपसे अपनी चूत चुदवाऊँगी।

रूचि शराब पीते पीते शाकाल से अपनी चूत सहलवा रही थी। अब उसकी सारी शर्म उतर गई थी, उसे रण्डीबाजी में मज़ा आ रहा था।

आधे घण्टे के बाद उमा अन्दर आ गई और बोली- अब थोड़ा नंगे नाच का मज़ा ले लो। हमारी रण्डियाँ सपना और निशा नग्न नृत्य के लिए तैयार हैं। राजीव, देखोगे तो मस्त हो जाओगे।

उमा ने रीता और गीता को बोला- तुम लोग बाहर जाओ और धंधा करो।

दोनों बाहर चली गईं। रूचि, रंजना, सपना, निशा और उमा पाँच औरतें अब कमरे में थीं।

सपना और निशा के आने के बाद कमरे में गाना “निंबुआ दबाई तो बड़ा मज़ा आई” चलने लगा। सपना और निशा लहंगा-ब्लाउज में नाच रही थीं। दोनों दुबली पतली और इकहरे बदन की रण्डियाँ कम और कॉलेज गर्ल ज्यादा लग रहीं थीं। उनकी चूचियाँ छोटी छोटी एक बड़े नीबू जितनी थीं। निशा और सपना बार अपना ब्लाउज उठातीं और चूचियाँ हिलाकर फिर ढक लेतीं।

हम और शाकाल भी उनके साथ नाचने लगे थे और बार बार उनके ब्लाउज में हाथ डाल कर उनकी चूचियाँ दबा रहे थे। दोनों बहुत चालू थी, 2-3 बार चूचियाँ दबवा कर दूर भाग जाती थीं।

उमा ने हमे सोफे पर बिठा दिया और बोली- कुत्तो, थोड़ा नाच देख लो फिर आराम से बजा लेना।

कहानी जारी रहेगी।

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