सोनी की सोनी-सोनी कुंवारी चूत 1

Soni ki soni soni kunwari chut-1

मैं हूँ प्रेम, वैसे तो मैं बड़ोडरा का रहनेवाला हूँ, पर पढाई के लिए अहमदाबाद में रहता हूँ। मेरी उम्र इक्कीस साल है, दिखने में साधारण कद-काठी का हूँ।

मेरी कहानियों को आपने पढ़ा और खूब पसंद किया, और मेल करके अपनी राय शेयर की, आप सभी को धन्यवाद।

खैर, यह तो हुई मेरी बात।

अब मैं आपको बताता हूँ उसके बारे में जो है इस कहानी की नायिका, नाम है सोनी। यह उसका निकनेम है, असली नाम नहीं बताऊँगा। हम उसे यहाँ सोनी के नाम से ही जानेंगे।

सोनी मेरे घर के सामने ही रहती है, वो मुझसे करीब तीन साल छोटी होगी। उसकी सुन्दरता असाधारण है, उसके पतले होंठों पर खिलती मुस्कुराहट किसी को भी अपना दीवाना बना दे।

चमकती आँखें, हमेशा चेहरे पर गिरती बालों की लट उसकी सुंदरता को और बढ़ा देती। बेहद सुडौल जिस्म जो सर्पिणी जैसा आकार लिये था। उसकी पतली कमर, उन्न्त वक्ष, हाय! कुल मिला कर चलता फिरता सेक्स बोम्ब।

अब उसकी और क्या तारीफ़ करूँ, वो इतनी मस्त थी कि उस पर लाइन मारने आसपास के मोहल्लों के लड़के दिन में कितने ही चक्कर लगाते।

हम बहुत अच्छे दोस्त हैं, हमारा रिश्ता मानो टोम और जेरी का था, ना एक-दूसरे के साथ रह पाते ना एक-दूसरे के बिना।

हमेशा लडते-झगडते रहते, वो अक्सर मेरे घर आया करती और हम अकेले में भी काफी देर तक बातें करते, हमारा अकेले में बैठना मेरे घर में सहज था।

खैर, यह सब चलता रहा, उसके बाद मैं अहमदाबाद चला गया पढ़ने। वो कभी-कभी मुझे कॉल कर दिया करती, कभी मैं उसको।

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अब कहानी पर आता हूँ, बात तब की है जब मैं दूसरे साल की छुट्टियों में घर गया था।

एक शाम जब मैं बाल्कनी में बैठा गेम खेल रहा था, मैंने सोनी को देखा, लाल-काले सलवार-कमीज़ पहने थी, जो बहुत अच्छी फ़िटींग में थी, उसकी फ़िगर साफ़ देखी जा सकती थी।

वो बाहर आंगन में झाड़ू लगा रही थी, जब वो झुकती तो उसके वक्ष के दर्शन हो जाते।

मैं ऊपर से देख रहा था, तो उसको सिटी मारी, वो तुरंत ऊपर देखने लगी, और मुस्कुराई। मैं भी मुस्कुराया और वो फिर से अपने काम में लग गई।

रात को मैंने उसे मैसेज किया, उसका जवाब आया, फिर हम यहाँ-वहाँ की बातें करने लगे।

फिर मैंने उसे मैसेज किया – एक बात बोलूँ तो बुरा मत लगाना।

उसका जवाब आया – हाँ, बोलो ना।

मैंने जवाब दिया – आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।

उसने कहा – क्यों, रोज़ नहीं लगती क्या?

मैंने लिखा – रोज़ लगती हो पर आज तो इतनी अच्छी लग रही थी कि दिल किया तुझे प्रपोज कर दूँ।

उसका जवाब आया – तो किया क्यूँ नहीं?

उसके ऐसे जवाब से मैं दंग रह गया और जवाब दिया – तो अब करता हूँ ना। आई लव यु।

उसने लिखा – लव यु टु।

फिर क्या था, हमार अफेयर शुरू हुआ। यहाँ मैं अफेयर शब्द इसलिए डाल रहा हूँ क्यूंकि मैं उससे प्यार नहीं करता और ना वो मुझसे करती है।

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वह मुझसे और मैं उससे काफी छेड़छाड़ किया करते, कभी फ़्लाईग किस तो कभी आँख मारना हमारी रोज़ की बात थी। पर मेरी नजरों में ये कोई सिरियस बात नहीं थी, नाही मैं उसे उस नजरिये से देखता था।

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मैं उसे मेरा माल कह कर ही बुलाता था, बेशक जब कोई ना सुन रहा हो। और उसे इस नाम से कोई दिक्कत नहीं थी, उल्टा जब मैं उसे मेरा माल कहता तो उसे अच्छा लगता था।

बात फ़रवरी की है जब कई डे मनाये जाते हैं, जैसे रोज़ डे, हग डे, किस डे, चोकलेट डे वगैरह।

तो वह रोज़ मुझे मैसेज किया करती अलग-अलग दिन (डे) के मुताबिक। तो जब किस डे था तो उसने मैसेज किया हैपी किस डे और किसिंग कपल का फ़ोटो भेजा। मुझे शरारत सूझी तो मैंने सामने से जवाब दिया – ऐसा कैसा किस डे मनाया, जबकी किस किया ही नहीं तो?

उसका जवाब आया – म्म्म्म्मुह्ह्ह्ह्ह्हा।

मैंने फिर मैसेज किया – ये क्या झूठ-मूठ की पप्पी दे रही है, मुझे तो असली वाली चाहिए।

तो उसका जवाब आया – आज शाम को, पक्का।

शाम को मैंने मैसेज किया – अपना वादा याद है ना?

उसका कोई जवाब नहीं आया, मैंने भी फिर मैसेज नहीं किया।

और मैं सोफ़े पर बैठ कर मोबाईल में गेम खेलने लगा, कुछ देर बाद वह मेरे घर आई और मेरे सामने सोफ़े पर बैठ गई। पर हम अकेले नहीं थे, मेरा भाई और मम्मी भी थी।

मैंने उसकी तरफ़ देखा, और उसको चुम्मी का इशारा किया, वो मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराये जा रही थी।

कुछ देर बाद मम्मी बाहर गई, और भाई भी ऊपर कमरे में गया। जैसा कि मैंने पहले बताया हमारा अकेले में बैठना सहज था।

मैंने उससे पूछा – ओय, मेरी चुम्मी का क्या हुआ?

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उसने शर्माते हुए जवाब दिया – अभी नहीं बाद में।

मैंने कहा – बाद में कब? सब आयेंगे तब? और मैं खडा हो गया।

सोनी – ठीक है, पर गालो पर मिलेगी, होंठों पर नहीं।

मैंने कहा – ना, मुझे तो होंठों पर चुम्मी चाहिए, ऐसी फ़्रोड किस नहीं।

वो खडी हो गई और बोली – नहीं, ये चाहिए तो लो वर्ना मैं चली।

मैं मुँह बनाते हुए – ओके, चलो वो ही देकर जा।

सोनी – ठीक है, पर तुम आँखें बंद कर लो। मैंने ज्यो ही आँखें बंद की उसने मेरे गालों को चुमा। उसके कोमल होंठ मेरे गालों को चुम रहे थे मैं उनके बारे में सोच रहा ही था की अचानक उसने मेरे होंठों को चुम लिया।

पता नहीं मुझे क्या हुआ, पर जैसे मैं कहीं खो सा गया, जब मुझे होश आया मैंने आँखें खोली तो वो कांड करके फ़रार होती दिखी।

मैं सोफ़े पर बैठ गया और सोचने लगा कि अभी क्या हुआ, मुझे बार-बार वो पल याद आता जब उसके होंठों का स्पर्श मेरे होंठों को हुआ था, बड़ा ही दिलकश अहसास था वो।

कहानी जारी है ..

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