तड़पती चूत को भांजे के लंड से चुदवाया-2

Tadapati choot ko bhanje ke land se chudwaya-2

फिर मैंने उससे थोड़ा गुस्से से बोला कि जल्दी से पानी को साफ करके कपड़े बदल ले वरना, तेरी तबीयत खराब हो गयी तो हमारे लिए भी मुसीबत खड़ी हो जाएगी, वो मेरे मुहं से यह शब्द सुनकर एकदम सहम गया.

अब में अंदर अपने रूम में जाने लगी तो में जब अपने कमरे का दरवाज़ा बंद करने आई तो मैंने देखा कि उस समय अज्जू अपनी गीली बनियान को उतार रहा था, तब उसकी नंगी पीठ को देखकर मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ और अब में हाल में आ गयी और कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए अपनी तिरछी नज़र से में उसको देखने लगी थी. फिर उसने अपनी पेंट को उतार दिया था और मैंने देखा कि उसकी वो अंडरवियर सफेद रंग की थी, जो पूरी गीली होने की वजह से अज्जू के शरीर से चिपक गयी थी.

अब मैंने देखा कि अज्जू का काला लंड अंडरवियर में मुड़ा हुआ मुझे साफ साफ नजर आ रहा था. वो बड़ा ही लंबा और मोटा भी था, वैसे तो वो उस समय ठीक तरह से खड़ा भी नहीं हुआ था और लंड के आसपास काले काले बाल भी मुझे नज़र आ रहे थे और उसके लंड का गुलाबी टोपा तो एकदम चमक रहा था. वो मुझे दिखने में दमदार मर्द का जवान लंड नजर आ रहा था, जिसको हर कोई औरत अपनी चूत में डलवाकर अपनी चूत की चुदाई के मज़े लेना चाहेगी, चाहे वो कितनी ही सती सावित्री क्यों ना हो?

और अब मेरी हालत एक जवान लड़के को अपने इतने करीब पूरा नंगा देखकर बहुत खराब हो गयी थी और में सपने में भी नहीं सोच सकी कि अज्जू इतना जवान है? और उसके गोरे भरे हुए बदन को देखकर में सभी रिश्ते पूरी तरह से भूल चुकी थी. दोस्तों अब मैंने मन ही मन में सोच लिया था कि आज रात को मुझे इसके साथ मज़ा जरुर लेना है फिर चाहे जो भी होगा देखा जाएगा, मुझे किसी भी बात की अब बिल्कुल भी चिंता नहीं थी.

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फिर अज्जू ने अपने कपड़े पहन लिए थे और फिर अज्जू बिस्तर पर आकर लेट गया. में अपने रूम में चली आ गयी और मैंने अपनी साड़ी, ब्लाउज, ब्रा, पेटीकोट को उतारकर एक मेक्सी को पहन लिया था. दोस्तों हमारा बाथरूम पीछे आँगन में था और उस समय रात के करीब 11 बज रहे थे. मैंने अज्जू को एक बार आवाज़ दी तो वो बोला हाँ जी मामी, मैंने उससे कहा कि मुझे पीछे पेशाब करने जाना है, लेकिन पीछे बहुत अँधेरा है इसलिए मुझे डर लग रहा है तू भी मेरे साथ में चल और वो मेरे साथ आ गया.

उससे इतना कहकर मैंने पीछे की लाइट को चालू कर दिया और बाथरूम के बाहर नाली के पास जाकर मैंने अपनी मेक्सी को अपनी कमर के ऊपर तक उठा लिया और फिर में धीरे से अपनी पेंटी को नीचे सरकाने लगी जिससे कि अज्जू मेरी गोरी चिकनी जांघे और गांड को बड़े आराम से देख सके और फिर में यह सब करके नीचे बैठ गयी.

उस समय अज्जू ठीक मेरे पीछे ही खड़ा हुआ था और फिर मैंने पीछे मुड़कर देखते हुए उससे बोला कि तू यहाँ से जाना मत. फिर वो बोला कि जी मामी और फिर जब मैंने पेशाब कर लिया उसके बाद में अज्जू की तरफ अपना मुहं करके खड़ी हुई और तब मैंने अपनी मेक्सी को कमर से ऊपर उठाकर में उसी के सामने जानबूझ कर पेंटी पहनने लगी जिसकी वजह से अज्जू को मेरी गोरी चिकनी साफ चूत दिख जाए और वो भी यह सब देखकर पूरी तरह से बहक जाए.

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अब मैंने देखा कि अज्जू की आखों में थोड़ी सी शरम थी, लेकिन वो मेरी बिना बालों की चूत और नंगी जांघो को अपनी आखों से चोरी चोरी देख रहा था, लेकिन वो वापस जाकर सो गया. अब में भी अपने रूम में आ गई और फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि अज्जू को आवाज़ देकर में अपने पास ही बुला लेती हुई, लेकिन मुझे थोड़ा सा डर भी लग रहा था कि कहीं मुझसे यह सब करते हुए कुछ ग़लत तो नहीं हो रहा है, लेकिन मेरी सांसे बड़ी तेज़ तेज़ चल रही थी और नीचे मेरी वो चुदाई के लिए पागल चूत चिल्लाकर कह रही थी कि उसको अब वो लंड चाहिए, उसको बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था और इस वजह से मेरी भी हालत पागलों जैसी हो गयी थी.

अब में उठकर बैठ गयी और मैंने देखा कि उस समय अज्जू के कमरे की लाइट जल रही थी. फिर मैंने धीरे से उठकर अज्जू के रूम के पास जाकर अंदर झांककर देखा, तो वो उस समय उल्टा होकर सो रहा था.

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फिर मेरा हाथ अपने आप अपनी चूत पर जाने लगा था और मुझे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि में कैसे शुरुआत करूँ? अपनी चुदाई के लिए उसको कैसे कहूँ?

तभी मैंने ध्यान से देखकर महसूस किया कि अज्जू अब कुछ हिल रहा है, जैसे एक आदमी औरत के ऊपर चढ़कर उसकी चुदाई करते समय हिलता है वो वैसे ही हिल रहा था और फिर मुझे समझते ज्यादा देर नहीं लगी कि वो मेरी नंगी जांघो को और साफ चूत को देखकर इतना उत्तेजित हो गया है इसलिए वो यह सब कर रहा था.

अब वो अपने लंड का पानी बाहर निकालने की पूरी तैयारी में है. तभी मैंने समय गँवाए बिना में अज्जू के रूम में तुरंत चली गयी और मैंने देखा कि अब अज्जू ने धीरे से अपनी आखें खोलकर मुझे देखा और वो सोने का नाटक करने लगा था.

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में कुर्सी पर जाकर बैठ गयी और मैंने सोचा कि में भी देखूं कि अब अज्जू हिलता है या नहीं यदि हिलेगा तो उससे में पूरी तरह खुलकर चुदने के लिए कह दूँगी, लेकिन करीब दस मिनट में भी वो साला बिल्कुल भी नहीं हिला और अब मेरी हालत पहले से भी ज्यादा खराब हुए जा रही थी. मुझे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ?

अब रात के करीब एक बज चुके थे. फिर मैंने टीवी को चालू कर दिया और में देखने लगी तभी अज्जू अपनी आखों को मसलता हुआ उठकर बैठ गया और वो मुझसे पूछने लगा कि क्या हुआ मामीजी आज आप सो क्यों नहीं रही हो? तो मैंने उससे कहा कि पता नहीं क्यों मुझे आज नींद ही नहीं आ रही और मेरे कुछ दुख रहा है?

अज्जू ने मुझसे पूछा कि क्या आपका सर दर्द हो रहा है? मैंने कहा कि नहीं मेरा पूरा ही शरीर दर्द कर रहा है. अब अज्जू पूछने लगा कि आपकी तबीयत तो ठीक है ना? मैंने कहा कि हाँ ठीक ही है. अब अज्जू मुझसे बोला कि क्या में आपकी कुछ मदद करूँ? तब मैंने उससे कहा कि प्लीज़ मेरे पैर दबा दे हो सकता है कि मुझे कुछ आराम मिल जाए.

बाकि कहानी अगले भाग में-

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