टीचर से सेक्स मार्क्स के चक्कर में-1

Teacher se sex marks ke chakkar me-1

मेरे प्यारे दोस्तो, मेरा नाम आशना है. मुझे उम्मीद है कि आप मुझे पहचान ही गए होंगे.

आप लोगों ने मेरी पहली सेक्स स्टोरी पढ़ी होगी, जिसमें मैंने अपने मामा के बेटे यानि अपने भाई के साथ ही चुदवाया था. मेरे साथ वो जो हुआ था, उसके आधार से ही मैंने अपनी सेक्स स्टोरी लिखी थी.

आज भी मैं आपके सामने मेरे जीवन की एक ऐसी ही हक़ीकत बताने जा रही हूँ. मैं ये किस्सा उस वक्त से शुरू करती हूँ, जब मैं अपने मामा के घर रहने गयी थी.

आप सभी को मालूम ही होगा कि आमतौर पर परीक्षा से पहले स्कूल में इंटरनल मार्क्स दिए जाते हैं … जो हमारे बोर्ड परीक्षा में भी गिने जाते हैं. हमारे स्कूल में भी इंटरनल मार्क्स दिए जाने वाले थे. और हमारे क्लास टीचर हम सबको इंटरनल मार्क्स की शीट पर साइन करवा रहे थे. पर मुझे पता था कि शायद मेरे और ईशिता, जो मेरी खास सहेली है … हम दोनों के मार्क्स शायद कम हों. क्योंकि हम दोनों ने स्कूल पूरी तरह अटेंड नहीं किया था.

हमारे क्लास टीचर ने सबको मार्क्स दे दिए और शीट पर साइन करवा लिए. लेकिन उन्होंने ईशिता और मेरे मार्क्स नहीं दिए. उन्होंने हम दोनों को स्टाफ रूम में मिलने को कहा और वो क्लासरूम से निकल गए.

हम दोनों स्कूल छूटने के बाद उनसे मिलने स्टाफ रूम में गई … वो अपना काम कर रहे थे. हमको देख उन्होंने हम दोनों को रुकने के लिए कहा.

हम दोनों को देख कर सर ने अपना काम जल्दी से पूरा कर लिया और हमसे बोले- आशना … ईशिता … मैंने तुम दोनों के इंटरनल मार्क्स सबके सामने नहीं दिए … पता है क्यों?? क्योंकि तुम दोनों के इंटरनल मार्क्स बहुत कम हैं. ऐसा समझो कि तुम दोनों स्कूल इंटरनल में पास ही नहीं हो.

यह सुनते ही ईशिता रोने लगी.

मैंने कहा- सर कुछ तो करो … यह हमारे पूरे साल का सवाल है, हम पास नहीं होंगे, तो हमारा पूरा साल बिगड़ जाएगा.
सर बोले- नहीं नहीं … पूरे साल तुम दोनों स्कूल से घंटा पार करके दूसरों के साथ घूमती रही हो, मुझे सब पता है. अब मैं कुछ नहीं कर सकता.

हम दोनों ने सर से बहुत विनती की, पर सर टस से मस नहीं हुए. हमने सर से यहां तक बोल दिया कि सर आप जो कहेंगे, हम वो करने को तैयार हैं … पर सर नहीं माने.

मैंने कहा- अच्छा सर … हम दोनों के मार्क्स तो हमें दिखा दीजिए.

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मेरी बात सुनकर सर ने हमें हमारे मार्क्स दिखाए … जिसमें ईशिता के 30 मार्क में से सिर्फ़ आठ थे ओर मेरे 30 में से उससे भी कम सिर्फ छह नम्बर आए थे.
हम दोनों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं.

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थोड़ी देर बाद हम दोनों वहां से घर चली गयी. घर जाते समय ईशिता बहुत टेंशन में थी. वो मुझसे बोली- आशना अब क्या होगा … हमने स्कूल बंक करके बहुत मज़े किए, पर अभी लग रहा है कि बहुत ग़लत किया यार.

मैंने कहा- यार तू टेंशन मत ले, कुछ करते हैं … तू घर जा … ठीक है और टेंशन बिल्कुल मत करना.
हम दोनों अपने अपने घर चली गयी.

रात को मुझे यही सब सोच कर नींद नहीं आ रही थी … और मैं अपने रूम में बेड पर लेटी हुई थी.

तब मेरा भाई अर्पित वहां आया और मुझसे बोला- ओये … आज मेरी जान टेंशन में क्यों दिख रही है?

मैंने सारी बात उसे बताई … मेरी बात सुनकर वो हंसने लगा.

मैंने उससे कहा- तुम्हें बड़ी हंसी आ रही है … इधर जान सांसत में फंसी है.
उसने कहा- ऐसी छोटी सी बात पर तुम टेंशन लोगी, तो मुझे हंसी नहीं तो क्या रोना आएगा.
मैंने कहा- तो तुम ही मुझे बताओ कि मुझे क्या करना चाहिए?
उसने कहा- इंटरनल मार्क्स क्लास टीचर के हाथ में होते हैं … बराबर..!
मैंने कहा- हां … तो?
उसने कहा- तो क्या? चलो जाने दो … मैं कुछ सैटिंग करता हूँ, ठीक है … तुम्हारे क्लास टीचर से में मिलूँगा ओके! तुम टेंशन मत लो और तुम अपनी उस सहेली ईशिता को भी फ़ोन करके बोल दो कि टेंशन मत ले, मैं सब सैटिंग कर दूँगा … ठीक है?

यह बात सुनते ही मेरे मन को शांति हुई और ईशिता को भी मैंने फ़ोन करके बोल दिया.

अगले दिन जब मैं स्कूल से घर आई, तो अर्पित ने मुझे बुलाया और अन्दर अपने रूम में ले गया. उसने कहा- आशना … मैं आज तुम्हारे सर से मिला था.
मैंने पूछा- हां फिर क्या कहा सर ने?
वो बोला- चिंता करने की कोई बात नहीं … मैंने सब सैट कर दिया है.
मैं यह सुनकर बहुत खुश हो गयी.

उसने कहा- चलो तुम खुश तो हुई.
मैंने कहा- हां बिल्कुल!
तो उसने कहा- ठीक है, तो आज शाम को सात बजे तुम एकदम छोटे और सेक्सी कपड़े पहनकर तैयार हो जाना.
मैंने पूछा- क्यों?
उसने कहा- जिसने तुमको खुश किया है, उसे भी तो खुश करना है … समझी तुम?

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मैं यह सुनकर एकदम से हैरान रह गई.
मैंने कहा- अर्पित … क्या तुम ऐसा चाहते हो कि मैं अपने सर से चुदवाऊं?
उसने कहा- मैं नहीं चाहता, पर तुम्हारे सर तुमको चोदना चाहते हैं. तुम्हारे हरे भरे मम्मों के साथ खेलना चाहते हैं … तुम्हारी चुत मारना चाहते हैं.

यह सुनकर मैं एकदम से हैरान हो गई … और अर्पित से बोली कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि सर मेरे बारे में ऐसा सोचते हैं.

अर्पित ने कहा- यह सब सोचने का अब टाइम नहीं है. आज शाम सात बजे तुम तैयार रहना. मैं मम्मी पापा को बोल दूँगा कि हम दोनों फिल्म देखने जाने वाले हैं और रात को आने में थोड़ी देर भी हो सकती है.
मैंने अर्पित से कहा- पर यार … मैं नहीं कर सकूँगी … आख़िर वो सर हैं मेरे!
उसने कहा- तुमको पास होना है? तो सब भूल जा और उसे खुश कर दे … बस और कोई रास्ता नहीं है. मैं तो वहां तुम्हारे साथ रहूँगा ही.

यह सुनकर मैं अपने सर से चुदवाने के लिए तैयार हो गई.

शाम के छह बजे … मामा मामी सुन लें, ऐसे अर्पित ने मुझसे थोड़ा तेज स्वर में पूछा- आशना … एक मस्त फिल्म लगी है … देखने जाना है?

ये सुनकर मामा ने ही सामने से कह दिया- हां क्यों नहीं … जाओ जाओ.
मैंने भी हंस कर बोला- चलो चलते हैं.
अर्पित ने कहा- तुम तैयार हो जाओ … हम सात बजे निकलते हैं, ठीक है.

मैंने भी हां में अपना सिर हिला दिया और अपने रूम में चली गई. मैं तैयार होने लगी और ठीक सात बजे में तैयार हो गई.

जैसे ही अर्पित ने कहा था, मैंने वैसे ही छोटी स्कर्ट और एकदम छोटी टी-शर्ट डाली हुई थी.

मैंने सेक्सी दिखने के लिए अन्दर ब्रा पहनना भी उचित नहीं समझा. मैंने खुद को आईने में देखा, तो उस टी-शर्ट में मेरे आधे मम्मे दिख रहे थे … और मेरी पूरी नंगी टांगें एकदम सेक्सी दिख रही थीं.

अब मैं बिल्कुल तैयार थी. मैं नीचे उतरी और कोई मुझे देखे नहीं, वैसे जल्दी से कार में बैठ गई … क्योंकि ऐसे कपड़ों में मामा और मामी मुझे जाने नहीं देते. थोड़ी देर तो अर्पित भी मुझे देखता रह गया और बोला- यार क्या माल लग रही हो तुम आशना … तुम्हारे सर तुमको चोदें, उससे पहेले शायद में ही तुम्हें ना चोद डालूं.

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ये कह कर वो हंसने लगा.

मैंने उससे कहा- अब बातें करना छोड़ो वरना मुझे मामा मामी देख लेंगे … और ऐसे कपड़ों में मुझे तुम्हारे साथ आने ही नहीं देंगे.

अर्पित ने झट से कार चालू की और हम दोनों सर के घर की ओर निकल गए.

थोड़ी ही देर में हम सर के घर के बाहर पहुंच गए. सर का घर बहुत बड़ा था. फिर अर्पित ने दरवाजे की बेल बजाई … और सर दरवाजा खोलने आए.

हम दोनों को देख सर एकदम से बोले- आओ आओ … अर्पित आओ … आशना … बैठो … हम दोनों वहां सामने सोफे पर बैठ गए.

मैं देख रही थी कि सर की नज़र सिर्फ़ मुझ पर ही थी. वो मेरे मम्मों और मेरी नंगी टांगें ही देख रहे थे. वो मेरी तरफ देखते अर्पित से बातें करने लगे. मैंने देखा कि सर के घर पर कोई नहीं था. सर जहां बैठे थे, उनके पास वहां एक बोतल और एक गिलास भी रखा था. मैं समझ गई कि सर दारू का नशा कर रहे थे.

सर ने मेरी निगाहों का पीछा किया और हम दोनों से भी पूछा- आप दोनों भी मुझे कंपनी दो ना.
सर के कहते ही अर्पित ने तो तुरंत हां बोल दिया … पर मैं ये सब नहीं पीती थी, तो मैंने सर से सीधे ना बोल दी.

मेरे जवाब से वो दोनों एक दूसरे के सामने देख हंसने लगे. वे दोनों दारू पीने लगे. अर्पित ने मुझे इशारा किया तो मैंने खुद के जिस्म की नुमाइश करना शुरू कर दी. सर मेरी अंगड़ाई लेती जवानी को देख कर अपना नशा बढ़ाने में लगे थे. वे मुझे देख कर अपना लंड भी सहला रहे थे. थोड़ी देर में उनकी बोतल खत्म हो गई.

सर ने कहा- अर्पित, आशना पीती तो नहीं है, पर हमारे लिए बोतल तो ला सकती है ना!
अर्पित बोला- हां … क्यों नहीं … आशना … हमारे लिए बोतल तो ला दो.
अर्पित के कहने से मैंने कहा- ठीक है.
ये सुनते ही सर बोले- आशना … ऊपर सीढ़ी चढ़ते ही पहला रूम आएगा, वो मेरा बेडरूम है … वहां बाहर ही टेबल पर बोतल रखी है, उसे तुम ले आओ.

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