ट्रैन में चोदा बहन की बुर उसकी मर्ज़ी से-12

Train Mein Choda Bahan Ki Bur Uski Marji Se-12

इसी क्रम में मैं उसकी गाँड़ की गुलाबी छेद देख ललचाया और बोला, “गाँड मरवाओगी गुड्डी… एक बार प्लीज.”। वो बोली अभी नहीं, बाद में अभी प्रेशर बना हुआ है और अगर तुम बोले होते तब पहले से तैयारी कर लेती, एक दिन पूरा जूस पर रहने के बाद गाँड़ मरवाने में कोई परेशानी नहीं होती है, अभी तो वो थोड़ा गंदा होगा।” मैंने फ़िर कहा, “बड़ा मन है मेरा…” और मैं उसकी गाँड़ की छेद को सहलाने लगा। वो मुझसे चुदाते हुए बोली, “ठीक है, अभी ९ बजे जब मार्केट खुलेगा तो दवा दूकान से एक दवा मैं नाम लिख कर दुँगी ले आना। उसके बाद उसको अपने गाँड़ में डाल कर मैं पैखाना करके अपना पेट थोड़ा खाली कर लूँगी तो तुम दोपहर में मेरी गाँड़ मार लेना, जाने से पहले।” मैं आश्चर्य में था, साली क्या-क्या जुगाड़ जानती है… सेक्स के मजे लेने का और मजे देने का भी। मैं तो उसका मुरीद हो गया था।

अब चैन से मैंने खुब प्यार से चुमते-चाटते गुड्डी को चोदा और वो भी खुद मन से आवाज निकाल निकाल कर चूदी। फ़िर जब मेरा निकलने वाला हुआ तो मैं बोला, “मुँह खोले, सुबह-सुबह मेरा माल से दिन की शुरुआत करो। वो भी खुब मन से मेरा अपने मुँह में गिरवा कर निगल गई और बोली अब मैं जा रही हूँ बाथरूम… तुम अब स्वीटी को जगाओ, बोलो कपड़ा-वपड़ा पहने, रूम साफ़ करने वाली बाई ७ बजे आ जाएगी।” उसको जाते देख मैं फ़ुर्ती से उसके आगे जा कर बाथरू में घुस गया, “मुझे बहुत जोर से पेशाब लगा हुआ है, वो तो तुमको चोदने के चक्कर में मैं रुका हुआ था। वो मेरे साथ हीं आई पर कमोड पर बैठने के लिए इंतजार की कि मै पहले पेशाब करके चला जाऊँ।

फ़िर उसने दरवाजा बन्द कर लिया घड़ी में सवा छः बजे थे और मैं बिस्तर पर जा कर बाएँ करवट स्वीटी की पीठ से चिपक कर उसके बदन पर अपना दाहिना हाथ और पैर चढ़ा कर प्यार से पुकारा, “स्वीटी…स्वीटी, अब कितना सोना है, सुबह हो गई है।” वो कुनमुनाई और मेरे तरफ़ घुम गई और फ़िर मेरे सीने में अपना सर घुसा कर आँख बन्द कर ली। मैंने उसके पीठ को सहलाना शुरु किया और वो मेरे से और ज्यादा चिपक गई। अब मैंने उसके चेहरे को अपने हाथ से थोड़ा उपर उठाया और फ़िर उसके होठों को हल्के से चुमने लगा। वो भी अब सहयोग करने लगी तो मैंनें अपने दाहिने हाथ को उसकी जाँघों के बीच में पहुँचा दिया और फ़िर उसको बोला, “थोड़ा जाँघ खोलो ना रानी….तुम्हारी बूर को भी तो जगाना है”।

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वो अब आँख खोल कर देखी और फ़िर धीरे से मेरे कान में बोली, “बहिन-चोद…, रंडीबाज…” और मुस्कुराई। मैंने उसकी बात का बुरा नहीं माना और आराम से उसकी बूर को सहलाने लगा। जल्दी हीं उसकी बूर पानी छोड़ने लगी, तो मैं उसके उपर चढ़ गया। स्वीटी ने अब अपने हाथ से मेरा लन्ड पकड़ा और फ़िर उसको अपने बूर में घुसा लिया और फ़िर बोली, “चोदो मेरे राजा….अपनी रानी को आज चोद कर उसके पेट से राजकुमारी पैदा कर लो…. बहिन-चोद”।

उसकी ऐसी बातें सुनकर मेरा खून उबलने लगा और फ़िर मैंने जोर-जोर से उसकी बूर में धक्के लगाने शुरु कर दिए। वो अब बीच-बीच में मुझे गाली बक रही थी, और साथ हीं साथ जैसे रात में मस्त हो कार हल्ला कर करके गुड्डी चुदी थी वैसी हीं चीख-चिल्ला कर खुब मस्त हो कर मेरी बहन चुदवा रही थी। मैंने भी उसको कहा, “ले साली खाओ धक्का… आज तुम्हारी बूर फ़ाड़ देंगे, साली हमको गाली दे रही हैं मादरचोद की औलाद….” मेरी गाली उसकी गाली से ज्यादा जबर्दस्त थी।

वो अब कुछ समय तक शान्त रहीं सभ्य की तरह चुदी और फ़िर बोली, “रूक साले हरामी… बहिन-चोद, रुक अब थोड़ा। हमको पलटने दो, फ़िर कुतिया के जैसे चोदना हमको हरामजादे।” मैंने लन्ड बाहर खींच कर उसको पलटने का मौका दिया, और उसी समय गुड्डी आ गई और बोली, “वाह यहाँ तो भाई-बहन में गाली की अंताक्षरी हो रही हैं मजा आ गया यह सब सुन कर….”। स्वीटी अब मुस्कुराते हुए बोली, “हाँ ये हरामी आज हमको चोद के मेरे पेट से अपना बच्चा पैदा करेगा साला… सोचें हो कि तुम उसका मामा लगोगे कि बाप लगोगे।”

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गुड्डी बड़ी आराम से बोली, “तुम इसके लिए एक बेटी पैदा कर देना… ये जनाब उसको चोद के बेटा पैदा करेंगे तो फ़िर सब ठीक हो जाएगा, दोनों रिश्ते से नानाजी कहलाएँगे”, इस बात पर दोनों रंडियाँ हँस पड़ी और मैं खीज गया और अपनी सारी खीज अपनी बहन की बूर पर निकाला। मेरे धक्कों से अब वो कराह रही थी और मैं था कि उसके पेट के नीचे से अपना हाथ निकाल कर उसको अपने जक्ड़ में ले कर उसको लगातार गालियाँ देता हुआ चोदे जा रहा था, “साली रंडी ले चुद मादर-चोद, साली कुतिया ले चुद मादर-चोद, कमीनी कुत्ती…ले चुद मादर-चोद…”। तभी वो खलास हो गई और फ़िर थोड़ा शान्त हो कर बोली, “जब निकालना होगा तब बाहर कर लीजिएगा भैया…”। मैं अभी भी जोश में था सो बोला, “अब भैया याद आ रहें हैं और अभी जब गाली दे रही थी तब..
अब देखो साली कैसे तुम्हारे बूर में अपना माल गिरा कर तुमको बिन-ब्याही माँ बनाता है तुम्हारा भैया…”। मेरी इस बात पर तो उसके होश उड़ गए। मैंने उसको कहा भी यह बात एक दम गंभीर अंदाज में, सो वो डर गई थी। वो अब गिड़गिड़ाने लगी। मैं उसको अपनी गिरफ़्त में लेकर चोदे जा रहा था। जब मेरा निकलने वाला हुआ तो मैंने कहा, “एक शर्त पर तुमको माँ नहीं बनाऊँगा… तू अपने मुँह में डलवा और सब निगल जा।” वो तुरन्त मान गई, “लो मैं अभी से मुँह खोल दी, जब चाहो घुसा देना झड़ने से पहले…”, मैं अब अपना लन्ड उसकी बूर से निकाल कर जल्दी से उसके सामने आ गया और फ़िर स्वीटी के मुँह डाल दिया। अपने हाथ से ५-७ बार हिला कर मैंने अपना सारा माल अपनी बहन स्वीटी के मुँह में गिरा दिया और न चाहते हुए थोड़ा मुँह बनाते हुए उसको वो सब निगलना पड़ा।

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इसके बाद मैं और स्वीटी नहा लिए और गुड्डी बोली कि वो गाँड मराने के बाद में नहाएगी। उसने अपने लिए दो दवा का नाम लिख कर दिया और कहा कि मैं अपने लिए एक वियाग्रा लेता आउँ क्योंकि लन्ड का खुब टाईट होना जरुरी है गाँड़ में घुसने के लिए।। जब दवा ले कर करीब १० बजे मैं लौटा तो देखा कि पास के कमरे में टिका हुआ बंगाली परिवार की दोनों बेटियाँ मेरे कमरे में बैठ कर मेरी बहन और गुड्डी से बातें कर रही हैं। ऐसा लग रहा था जैसे उन सब की पुरानी पहचान हो। मेरे लिए तो उन दोनों का वहाँ होना KLPD था, पर उन दोनों को जब मैंने मुझे देख कर मुस्कुराते देखा तो मैं झेंप रहा था। स्वीटी मुझे अब बोली, “विक्रम (मेरा असली नाम), ये दोनों अभी करीब दो घन्टे अकेली हीं हैं यहाँ।

इनके मम्मी-पापा कुछ काम से गए हैं करीब २ बजे तक लौटेंगे सो अकेले रुम में बोर होने से अच्छा है कि हम सब से बातें करें, यहीं सोच कर ये दोनों यहाँ आ गई हैं।” मैं टेंशन में था कि अब गाँड़ मराई के प्रोग्राम का क्या होगा कि तभी उन में से बड़ी बहन ने कहा, “आप परेशान मत होईए… हम १०-१५ मिनट में अपने रुम में चले जाएँगे, फ़िर आप-लोग फ़्री होंगे तब हम आ जाएँगें। असल में रुम में टीवी भी नहीं है न सो हम इधर चले आए।” मैंने अब अचकचा कर उन दोनों को और फ़िर स्वीटी को देखा, तो गुड्डी बोली, “कल के आपके जोश से बाहर तक सब आवाज गया था जब ये दोनों खाने के बाद ऐसे हीं बाहर तहल रहीं थीं। उसी के बारे में अभी हम सब बात कर रहे थे।

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इन लोगों को सब मालूम है, वो तो गनिमत है कि इनके मम्मी-पापा यह सब नहीं जानते, नहीं तो इन दोनों का कोर्ट-मार्शल कर देते हम लोग से बात करने पर। इन दोनों को अभी का हमारा प्रोग्राम पता है।” मैं अब थोड़ा रेलैक्स करके बोला, “अरे नहीं ऐसी जल्दी भी नहीं है तुम दोनों बैठो और थोड़ा गप-शप कर लो। हम लोग को आधा घन्टा काफ़ी है। असल में मेरे लिए यह पहला अनुभव होगा, सो मैं थोड़ा तनाव में था।” मैं अब गौर से उन दोनों बहनों को देखा। बड़ी वाली थोड़ी मोटी थी, कुछ ज्यादा हीं सांवली, करीब ५’ लम्बी ३६-२८-३६ की फ़ीगर होगी। १९-२० के करीब उमर लग रहा था, उसका नाम था ताशी, बी०ए० फ़ाईनल में थी। उसकी छोटी बहन भी सांवली हीं थी पर खुब दुबली-पतली, लम्बी थी ५’५”। चुच्ची तो जैसे उसको था हीं नहीं, ३०-२१-३२ की फ़ीगर होनी चाहिए। उसका नाम आशी था और वो १२वी० में थी।

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