अंकल ने मुझे लंड पर बैठाया-1

Uncle ne mujhe land par bethaya-1

हैल्लो दोस्तों, में अंजलि एक बार फिर से हाजिर हूँ आप सभी चाहने वालों के सामने अपनी एक और सच्ची घटना को लेकर. दोस्तों आज में घर पर बिल्कुल अकेली हूँ और यह कहानी में बिल्कुल नंगी होकर लिख रही हूँ और में बीच बीच में अपनी चूत और गांड में पेन्सिल को डालकर सेक्स भी करूँगी. क्या करूँ? मेरी शादी जो अब तक नहीं हुई है, इसलिए अभी तो मुझे पेन्सिल से ही काम चलमना पड़ेगा, तो चलो अब आगे बढ़ते है.

में अपने कॉलेज प्रेसीडेंट के यहाँ से आने के बाद में आते ही सो गयी. क्या करूँ? बहुत तक जो गयी थी. में उस रात को इतनी बार जो चुदी थी कि मेरी चूत और कूल्हे दोनों में बहुत दर्द हो रहा था, वहां पर मेरी बहुत जमकर चुदाई हुई.

फिर में अगले दिन उठी और नाश्ता करने के लिए गयी. अब की बार मैंने एक छोटी सी पेंट पहन रखी थी और उसके ऊपर टाईट टॉप.

अब में अंकल को अपनी मटकती हुई गांड को दिखाती हुई बैठ गयी. में साफ देख रही थी कि अंकल का लंड मेरी गांड और एकदम गोल आकार के उभरे हुए बूब्स के देखकर ललचाने लगा था, जिसकी वजह से वो तुरंत उठकर खड़ा हो चुका था और हम लोग उस दिन सोफे पर नाश्ता कर रहे थे कि तभी नाश्ता करते समय राज ने मुझसे कहा कि वो आज अपने किसी जरूरी काम की वजह से दिल्ली से बाहर जा रहा है और वो कल तक वापस आ जाएगा और फिर वो नाश्ता करके चला गया, लेकिन अंकल अब भी वहीं पर बैठे हुए थे और वो अपनी नजर से मुझे चोरी चोरी कभी मेरी तरफ तो कभी मेरे बूब्स की तरफ देख रहे थे, जो कि मेरी उस टाईट टी-शर्ट से कुछ ज्यादा ही उभर रहे थे. अब मैंने मन ही मन सोचा कि चलो ना क्यों थोड़े से मज़े और भी ले लिए जाए.

उस वक़्त अंकल ने एक सिंपल पजामा ही पहन रखा था और मैंने चुपके से अपनी पेंट की चेन को खोल दिया और फिर धीरे धीरे मैंने अपने पैर ऊपर की तरफ करके टेबल पर इस तरह से रख लिए कि जिसकी वजह से मेरी चूत हल्की सी दिखने लगे और में कुर्सी पर अख़बार लेकर पढ़ने का नाटक करने लगी. में अब चुपके से देखने लगी कि अंकल मेरी चूत की तरफ देखकर अपना लंड मसल रहे थे. फिर थोड़ी ही देर में उनका पजामा गीला सा हो गया और लंड नीचे बैठ गया जिसको देखकर में तुरंत समझ गयी कि उनके लंड ने ज्यादा जोश में आकर अपना वीर्य छोड़ दिया है.

फिर मैंने अंकल से पूछा क्यों अंकल क्या हुआ आपका पजामा एकदम ऊपर था फिर गीला हुआ और फिर नीचे बैठ गया? तो अंकल मेरी बात को सुनकर हंसने लगे और बोले कि अरे यह सब प्राक्रतिक है और यह कहते हुए उन्होंने एकदम से ही अपने लंड को पेंट से बाहर निकाला जो वीर्य से पूरा गीला था और अब वो अपने लंड की तरफ इशारा करके कहने लगे कि यह बेवकूफ क्या करे? यह बार बार तुम्हे देखकर जोश में आकर खड़ा हो जाता है और कुछ देर बाद अपना पानी छोड़कर ठंडा होकर नीचे बैठ जाता है.

फिर मैंने बिल्कुल अंजान बनकर उनसे पूछा अब क्या होगा? तब उन्होंने कहा कि कुछ नहीं इसका इलाज़ मेरे पास है, में बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ कि यह क्या चाहता है, लेकिन वो इलाज अभी नहीं हो सकता, इसका इलाज में आज रात को कर दूंगा और इतना कहकर वो उठ गए और मेरे कूल्हों को दबाकर अपने ऑफिस जाने के लिए चले गये.

अब में तुरंत समझ गई कि अंकल आज मेरी चुदाई करने के पूरे मूड में है और उनका लंड लेने में बहुत मज़ा आएगा और मैंने मन ही मन में सोचा कि यार तो फिर क्यों ना अभी से ही अपनी आज रात की होने वाली उस चुदाई की तैयारी कर ली जाए यह बात सोचकर में बहुत खुश होकर बाजार चली और गयी मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था और फिर में वहाँ से एक सूट लेकर आ गई उसके साथ में बिकनी और ब्रा भी थी और वो तीनों ही जालीदार थे, वो नाईट सूट मेरे घुटनों तक का था और फिर घर पर आकर मैंने उस ब्रा को कैंची से काटकर इतना छोटा कर लिया कि वो बस मेरे बूब्स को हल्का सा ही ढक सके और बिकनी को मैंने गांड की तरफ से काटकर एक धागा सा बना दिया जिसकी वजह बस मेरी गांड का छेद ही चुप जाए, लेकिन मैंने चूत की तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया.

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फिर रात को खाना खाने के समय में जब उनके सामने अपने वो कपड़े पहनकर पहुंची, जिनमें में बहुत हॉट सेक्सी दिख रही थी. फिर अंकल मुझे अपनी खा जाने वाली नजर से घूर घूरकर देखते ही रह गये और उनकी नजर मेरे गोरे जिस्म से हटने को तैयार ही नहीं थी और फिर मैंने उनसे पूछ लिया की क्यों में इस ड्रेस में कैसी लग रही हूँ?

अंकल ने कहा कि तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो इतने कम कपड़े तुम्हारे ऊपर ठीक है, लेकिन अगर तुमने कपड़े पहन ही नहीं रखे होते तो तुम और भी ज्यादा अच्छी लगती, अंजलि तुम इतने कम कपड़े क्यों पहनती हो?

फिर मैंने कहा कि पता नहीं अंकल जब मर्द मेरी चूत को, कूल्हों को और मेरे बूब्स के घूरते है तो मुझे उनको यह सब करता हुआ देखकर बहुत मज़ा आता है और मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है और उसके बाद हम दोनों खाना खाने लगे.

फिर अंकल बोले की अंजलि तुम्हे याद है कि जब तुम छोटी थी तब तुम कैसे मेरी गोद में बैठकर खाना खाती थी, आज भी वैसे ही खाओ ना, मैंने कहा कि अभी लो और फिर में उनकी गोद में जाकर बैठ गई, लेकिन में जानबूझ कर इस तरह से बैठी कि मेरी गांड का छेद ठीक उनके लंड के ऊपर एकदम सही निशाने पर आ जाए. में अब महसूस कर सकती थी कि मेरे उनकी गोद में बैठते ही कैसे उनके लंड का आकार बढ़ने लगा था?

फिर थोड़ी देर के बाद अंकल ने खाना खाते समय जानबूझ कर मेरे ऊपर दाल को गिरा दिया जो मेरे कपड़ो से मेरे बूब्स तक जा पहुंची और उन्होंने मुझसे कहा अरे यार प्लीज मुझे माफ़ करना लाओ में साफ कर दूँ और अब वो मेरे बूब्स के ऊपर से डाल को साफ करने के बहाने से मेरे बूब्स को दबा दबाकर मज़े लेने लगे और में बिल्कुल शांत उसको देखती रही. कुछ देर बाद उन्होंने डाल को साफ कर दिया.

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