आंटी आंटी ऑनलाइन सेक्स के बाद बिस्तर पर चुदने लगी-2

(Aunty Online Sex Ke Bad Bistar Par Chudne Lagi-2)

मै कैम पर उसका फुला हुआ बुर देखकर पागल हो रहा था। बुर के दाने को वो तेजी से रगड़ रही थी। हम दोनो को काफी मजा आ रहा था। कुछ समय बाद हम दोनो झड़ गये। तीन दिन हर रात ऐसा ही चलता रहा। चौथे दिन सीमा का कॉल आया और वो बोली कि कल में घर पर अकेली हूँ, पति और देवर हजारीबाग से बाहर जा रहे हैं। तुम कल आ जाना मैं गेट खुला रखूंगी।पूरी रात मेरी बेचैनी में गुजरी। इस दौरान मैने उसे याद कर दो बार मूठ मारी और सुबह होने का इंतजार करने लगा।

सुबह जलदी ऊठकर तैयार हुआ और 12 बजने का इंतजार करने लगा। 12 बजते ही उसके घर पहुंचा तो देखा कि मेन गेट खुला हुआ है। मैं बेझिझक अंदर घुस.गया। सीमा मेरे सामने खड़ी थी। पूरी तैयारी से मेरा और मेरे लंड का इंतज़ार कर रही थी। वो नाइटी पहनी थी। वो मुझे अपने पारलर से सटे हुए कमरे में ले गयी। हम दोनो वहां लगे बेड पर बैठ गये और एक दूसरे से लिपटकर बेतहाशा चुमने लगे। मुझसे रहा नहीं गया और मैने उनकी नाइटी और पेंटी उतार दी। अब वो मेरे सामने नंगी थी। पहली बार देखने पर में और ज्यादा उनके बूब्स का दीवाना हो गया। उन्होंने अपनी चूत को शेव किया हुआ था, शायद सुबह ही हस्तमैथुन की वजह से उनकी चूत पर कई जख्म आ गये थे। बुर छोटा पर फैला और फूला हुआ था। मैंने पहले उनके सेक्सी होंठो पर एक लंबा किस किया, जिससे उनको नशा चढ़ गया। फिर मैंने उनकी चूत पर अपना एक हाथ रखकर उनकी चूत को मसला। अब वो मदहोश होती जा रही थी। फिर में उनको होंठ से लेकर उनकी चूत तक चूमता गया और काफ़ी ताक़त से अपने दाँत लगाता, तो वो चिल्लाती आहिस्ता से करो बहुत दिनों के बाद कोई मेरी प्यास बुझा रहा है।

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अब सीमा भी मेरे लंड को नहीं छोड़ रही थी और ताक़त से मसले जा रही थी। अब वो स्पीड से मेरे लंड की मालिश करती जा रही थी। अब मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने जल्दी से उनकी चूत से अपनी उंगली निकालकर अपना लंड डालना चाहा, लेकिन उनकी चूत काफ़ी दिनों से बंद थी इसलिए सता रही थी, लेकिन ये स्टील रोड भी अपना ज़ोर लगा रहा था। फिर जैसे ही मेरा लंड थोड़ा घुसा तो मैंने झटके देना चालू किया और 2-3 झटको के बाद मेरा लंड झट से अंदर चला गया। फिर वो जोर से चिल्लाई करो और ज़ोर से करो, में आज हर प्यास बुझाना चाहती हूँ, फिर बाद में मौका मिले या ना मिले। फिर मैंने अपनी स्पीड बढाई, तो मेरा लंड काफ़ी अंदर चला गया था और ऐसा लगता था कि जैसे उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा है और में लगातार झटके देता गया। अब मेरा पानी बाहर आने को ही था, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। फिर सीमा के चूसने से मेरे लंड का पानी बाहर इतनी स्पीड से आया कि जैसे 100 साल पुरानी शेम्पियन खुलती है। फिर मैंने सीमा को अपना पानी नहीं पिलाया, ये मुझको पसंद नहीं था। “Aunty Online Sex Ke”

फिर वो थोड़ी नाराज़ हुई, लेकिन अब उसकी गांड की बारी थी। अब वो गांड नहीं मरवाना चाहती थी, क्योंकि वो डरती थी कि कही गांड बड़ी हो गयी तो कया होगा। लेकिन में आज मानने वाला नहीं था। उसे पता ही नही था की मैं उसका रंडीपना का पुरा इतिहास जानता हू। मैं भी अंजान बनते हुये बोला कि तेरे जैसी गदराई और दुधारू माल को नहीं चोदना नाइंसाफी है। तुम अगर कहो तो तेरा पानी निकाल दूं। हर दिन तुमहें चोदूं। सीमा- मैं भी तेरे से चुदना चाहती हूं। जब से तुमहे देखा है मेरी बूर गरम हो गयी है। तुम जोर से चोदो। उसको सुनाने के उद्देश्य से मैंने सीमा से पूछा- सीमा जब मेरा लंड तुम्हारी चूत के अन्दर बाहर होता है तो मज़ा आता है? तो बहुत सेक्सी आवाज में सीमा ने कहा- राजा इतना मज़ा इससे पहले कभी नहीं आया। मैंने सीमा से पूछा कि क्या तुमने पहले कभी सेक्स किया है तो उसने हां बोल दिया। मैंने उससे पूछा किस के साथ किया है। उसने कहा आप गुस्सा हो जाओगे तो मैंने कसम खा कर कहा गुस्सा नहीं करूंगा। उसने कहा कि मैंने प्रोफेसर, प्रिंसिपल, कई लड़के, पुलिसवाले व उसके तीन दोस्त, बस के ड्राइवर व कंडक्टर, अनगिनत दुकानदारों से सेक्स किया है। “Aunty Online Sex Ke”

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मुझे एक बार बहुत गुस्सा आया लेकिन मैंने खुद पर काबू किया। मैंने उससे पूछा कि उसने इतने मर्दों से संबंध क्यों बनाया।उसने कहा पति और देवर की कमजोरी की वजह से उसे अलग अलग लंड लेने का चस्का लग गया। जब भी कोई अच्छा मर्द उसको दिखाई देता है तो वो फिसल जाती है। उसकी आग तब तक शांत नहीं होती जब तक वो उस मर्द से चुदाई नहीं करती। मैं उसकी बातें सुनता हुआ उसका चेहरा देख रहा था। अब मुझे सीमा में एक गर्म रंडी दिख रही थी जो मेरा बिस्तर गर्म करने वाली थी।तभी सीमा ने अपनी जीभ मेरे मुंह में धकेल दी और मेरी जीभ को चाटने लगी। मैं एक हाथ से सीमा के बूब्ज़ दबाते हुए उसकी जीभ को चूसने लगा। हम दोनों एक-दूसरे के मुंह में जीभ डालकर घुमाने लगे और एक-दूसरे की जीभ का रस चूसने लगे। हम एक-दूसरे के होंठ चूम कर, दांतों से होंठों को काटकर और जीभ को एक-दूसरे के मुंह में डालकर रसपान करने लगे। हम पर इतनी मस्ती छा गई थी कि सब कुछ भूल कर चूमा चाटी कर रहे थे। सीमा ने मेरी गोद में सिर घुमा लिया और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। उसके नर्म रसीले होंठों का स्पर्श पाकर और उसके मुंह कई गर्मी महसूस करके मेरा लंड और भी फड़फड़ाने लगा। मैं सीमा के बूब्ज़ मसलते हुए लंड चुसाई का मजा लेने लगा।

मैंने सीमा को बेड पर लेटा दिया और उसके नाजुक, मुलायम और चिकने पेट को चूमने और चाटने लगा। वो नीचे लेटी हुई मचल रही थी। जब मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगता तो सीमा मस्ती में मचलती हुई मेरे बाल नोचने लगती। अब मैं उसके बूब्ज़ चूसने और दबाने लगा। उसके बूब्ज़ मुझे बहुत सेक्सी लग रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत की हूर का मजा ले रहा हूं। मैंने सीमा के निप्पलों को चूसते हुए अपनी एक उंगली उस की चूत में घुसा दी। सीमा मस्ती से चहक उठी और वो मेरे सिर को अपने बूब्ज़ पर दबाते हुए अपनी गांड उठा उठाकर उंगली चूत में लेने लगी। मैं सीमा की चूत में उंगली हिलाते हुए उसके बूब्ज़ व निप्पलों को दांतों से काटने लगा। मेरे चूसने और काटने से सीमा के बूब्ज़ पर लाल निशान बन गए लेकिन उसको बहुत मजा आ रहा था।

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