मेरी बहन ने मुहं काला किया-2

Bahan ne muh kala kiya-2

फिर मेरी माँ ने अब दीदी की फटी हुई चूत को देखकर अब रोना और अपना सर पीटना शुरू किया और वो अब उससे कहने लगी कि छिनाल उसके साथ चुदाई के मज़े लेकर आ गयी और अब यहाँ पड़ी मुझे नाटक दिखा रही है, जब उसका लंड लिया था तब तो तुझे बहुत मज़े आ रहे थे, अब क्यों चिल्ला रही है? देख उसने तो तेरी चूत की बहुत जमकर चुदाई की है, चल अब उठकर देख कुतिया तेरी चूत तो अब फट गई है और खून के साथ उसका वीर्य भी तेरी चूत से बाहर निकलकर तेरी जाँघो पर बह रहा है, बहुत शौक है ना तुझे चूत चुदवाने का देख रंडी देख तूने आज उससे तेरा मुँह काला करवा लिया, चल अब बात की उसने तुझे चोदने से पहले उसके लंड पर निरोध लगाया था कि नहीं? या उसने बीना कंडोम लगाए ही तेरी चूत में उसका लंड डाल दिया.

अब मुझे बता जल्दी से उसने क्या किया? तो मेरी दीदी ने रोते हुए कहा कि उसने निरोध लगाए बिना ही मुझे घोड़ी बनाकर अपना लंड ज़ोर से एक धक्का देकर पूरा अंदर डाल दिया और जब मैंने उसका विरोध किया तो उसने मुझसे कहा था कि कंडोम लगाकर चोदने से चुदाई का मज़ा नहीं आता है, इसलिए उसने मुझे निरोध लगाए बिना ही चोद डाला.

मुझे बहुत दर्द हुआ और मैंने उसको मना किया, लेकिन उसने मेरी एक भी बात नहीं मानी और वो मुझे चोदता रहा और में चीखती चिल्लाती रही. फिर मेरी माँ ने कहा कि रंडी जब तुझे उसने अपना मोटा लंड डालकर चोदा था तब क्यों तू इतना नहीं चिल्लाई? और अब मेरे सामने पड़ी पड़ी रो रही है, नाटक करती है छिनाल, साली उसने तो दिल खोलकर तेरी कुंवारी चूत की चुदाई करके मज़े लिया है, रांड तू तेरी पेंटी कहाँ पर छोड़कर आई है?

अब मेरी दीदी कुछ भी नहीं बोली बस रोती रही और दर्द से करहाती रही, मेरी माँ ने उसको जबरदस्ती उठाकर बाथरूम में ले जाकर नहलाया और फिर वहीं पर माँ ने दीदी की चूत में अपनी उंगली को डाल डालकर पानी को अंदर घुसाकर रगड़ रगड़कर दीदी की चूत पानी से धोकर साफ किया, क्योंकि माँ को डर था कि कहीं उस लड़के का वीर्य राधिका के गर्भाषय के अंदर चला गया हो तो शायद उसकी बेटी गर्भवती हो सकती है और उसके नज़ायज़ बच्चे की माँ बनकर मेरी दीदी हमारी भी इज्जत को खराब कर देती.

अब मेरी दीदी मेरी माँ के उसकी फटी चूत में पानी के साथ अपनी ऊँगली को डालने की वजह से बहुत ही ज़ोर से चिल्ला थी और छटपटा रही थी, वो दर्द से कराह रही थी और सिसकियाँ मार मार कर रो रही थी. फिर बहुत देर चली और उस धुलाई के बाद मेरी माँ उसको कमरे में ले आई, उसको एक चादर से ढाक दिया और एक पलंग पर लाकर बहुत बेरहमी से पटक दिया.

फिर मैंने देखा कि मेरी दीदी अपनी पहली चुदाई की वजह से दूसरे दिन भी उस बिस्तर पर से उठ नहीं पा रही थी और चलना फिरना तो बहुत दूर की बात थी, वो उससे हिला भी नहीं जा रहा था और मेरी दीदी को पलंग पर सम्पूर्ण नंगी देखकर और उसकी गोरी गोरी लाल टमाटर की तरह सूजी हुई चूत को देखकर मुझे भी चुदाई की इच्छा हुई और अब मेरी भी कामवासना भड़कने लगी थी और में मन ही मन सोचने लगा था कि में अपनी रंडी दीदी को अभी इस समय चोद दूँ, लेकिन मुझमें उतनी हिम्मत नहीं थी कि में उसकी चुदाई कर सकता.

फिर उसी दिन मेरी माँ ने उसको एक लेडी डॉक्टर के पास ले जाकर गर्भ निरोधक गोलियां खिलाई, वरना वो अपने कुंवारेपन में ही गर्भवती हो जाती और उस लड़के के नज़ायज़ बच्चे की माँ बन जाती. फिर उसके बाद जब भी मेरी दीदी को कोई अच्छा मौका मिलता तो वो चुपचाप घर से बाहर निकलकर उस लड़के के पास जाकर उससे अपनी बहुत मस्त जमकर चुदाई करवाकर आती और जब भी वो अपनी चुदाई करवाकर आती, तब ठीक तरह से चल नहीं पाती थी, वो अपनी गांड और कुल्हे मटका मटकाकर चलती थी, क्योंकि वो लड़का अपना 6 इंच का कड़क लोहे जैसे लंड से मेरी दीदी की चूत की बहुत बुरी तरह से चुदाई करता था और मुझे यह सब इसलिए मालूम है, क्योंकि वो लड़का मेरे पड़ोस में रहता था और वो उम्र में मुझसे बड़ा था, लेकिन हम सबसे उसकी बहुत अच्छी दोस्ती थी.

वह अपना लंड हर कभी बाहर निकालकर हम सबको दिखता था, उसका लंड मोटा, लंबा, काला रंग का था और लंड के आसपास ऊपर नीचे उसके बहुत सारे झाट के बाल थे, वो हमेशा मुझसे कहता था कि तेरी दीदी की तो में बहुत मस्त जमकर चुदाई करता हूँ, ज़रा तू अभी घर पर जाकर अपनी दीदी की चूत तो देखकर आ, तुझे भी मेरी बात का विश्वास हो जाएगा.

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फिर में उसकी गंदी नंगी बातें सुनकर एकदम गुस्से से तिलमिला उठता था, लेकिन में कुछ नहीं कर सकता था, क्योंकि मेरी दीदी ही खुद अपनी मर्जी से उसके पास जाकर अपनी चुदाई उससे करवाती है तो में क्या कह सकता था? एक दिन सुबह में अंदर के रूम में अचानक से चला गया. दोस्तों हमारे अंदर के रूम में ही नहाने धोने के लिए एक छोटा सा बाथरूम बना हुआ है और फिर अंदर जाते ही मैंने देखा कि मेरी सेक्सी दीदी मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी हुई है.

उस समय उसके गोरे गदराए बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था, लेकिन उसकी गोरी चूत पर बहुत सारे हल्के काले रंग के झांट के बाल थे. अब उसके बूब्स भी पहले से आकार में ज्यादा बड़े बड़ी गोलाई लिए हुए सुडोल और बहुत सुंदर दिख रहे थे. अब दीदी के बूब्स पहले से ज़्यादा बड़े बड़े और पपीते के आकार के बड़े थे और मस्त थे. में अपनी दीदी को संपूर्ण नंगी देखकर एकदम भोचक्का रह गया और बिल्कुल बोखला गया और मेरी दीदी राधिका भी मुझे अचानक से अपने सामने देखकर शरमा गयी और उन्होंने शरम से लाल होकर अपना मुँह नीचे करके अपनी आँखे नीचे की तरफ झुका ली, वो चुपचाप खड़ी रही और में उनको ऊपर से लेकर नीचे तक घूर घूरकर देखता रहा.

अब मेरे दिलो दिमाग़ में उस हॉट सेक्सी को अपने सामने पूरी नंगी देखकर कामवासना का भूत सवार हो गया था, जिसकी वजह से में अब अपनी दीदी से ही संभोग करने के लिए मानो उतावला होकर पागल सा गया और फिर में अपनी ही दीदी की चुदाई करने के लिए तड़पने लगा, लेकिन मजबूर था, क्योंकि तभी अचानक से बाहर रसोई घर से मेरी माँ के चिल्लाने की आवाज आने लगी, जिसकी वजह से में अपने जोश में आ गया, वो बोली कि तेरी दीदी अंदर वाले कमरे में स्नान कर रही है और उस आवाज को सुनकर अपनी नींद से उठकर मुझे मजबूर होकर वापस बाहर लोटना पड़ा. दोस्तों जिसका मुझे आज भी बहुत खेद और दुख है कि मैंने अपनी जिंदगी की पहली चुदाई का उस दिन वो मौका मेरे हाथ से निकल गया, लेकिन उस दिन के बाद से मेरी दीदी का मेरे लिए व्यहवार एकदम बदल चुका था, ना जाने क्यों मुझे वो अपनी तरफ आकर्षित करने के नये नये मौके ढूंढने लगी थी? और में उनकी सुंदरता को देखकर दिन पे दिन पागल होने लगा था.

//समाप्त//

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