बाली उम्र की मीठी चुदास-3

(Bali Umar Ki Meethi Chudas- Part 3)

मेरी बीवी ने उस लड़की से पूछा- तन्नु, कैसा लगा? मजा आया?
वो बोली- आंटी, बता नहीं सकती, ऐसा मजा ज़िंदगी में पहली बार आया।

मैंने पूछा- क्या तुम दोनों ओरल सेक्स नहीं करते?
शाहिद बोला- अंकल मुझे तो पसंद है पर इसे नहीं, इस लिए मैं कभी कभी इसकी चाट लेता हूँ, मगर इसने कभी भी मेरा लंड नहीं चूसा है।
सीमा बोली- कोई बात नहीं, आज इसका भी उदघाटन करवा देंगे।

उसके बाद सीमा तन्नु को लेकर किचन में चली गई, ताकि दोनों पिस्ते छुहारे वाला गर्म दूध तैयार करके ला सके।

मैं और शाहिद दोनों नंगे ही बेड पर बैठे थे, मैंने शाहिद से पूछा- तुम्हारा लंड इतना गोरा कैसे है, मेरा देखो काला पड़ा है।
वो बोला- अंकल आपको चुदाई करते कितने साल हो गए, इसका तो अभी नया नया है, धीरे धीरे ये भी काला हो जाएगा।

मेरे मन भी एक विचार बार बार आ रहा था, सो मैंने शाहिद से कह ही दिया- यार मुझे तुम्हारा लंड बहुत अच्छा लगा, इधर तो दिखाओ ज़रा!
शाहिद मेरे पास आया तो मैंने अपने हाथ में उसका लंड पकड़ कर देखा, नर्म मुलायम, गोरा लंड, मुझसे रहा नहीं गया, और मैंने नीचे
झुक कर उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूस गया।

शाहिद हैरान हो कर बोला- अंकल, ये आप क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- अच्छी चीज़ खा कर देखने में क्या बुराई है!
और मैं फिर से शाहिद का लंड चूसने लगा, ज़्यादा तो नहीं मगर सिर्फ एक आध मिनट ही चूसा।

‘तुम मुझे बहुत अच्छे लगे शाहिद, दिल तो कर रहा है तुम्हारी गांड भी मार लूँ।
वो एकदम से बोला- अरे नहीं अंकल, ऐसा कोई शौक मुझे नहीं है।
मैंने कहा- डरो मत, मैं नहीं मारूँगा, पर अब तैयार रहना, तेरी आंटी की तसल्ली न हुई, तो वो तेरी गांड जरूर मार लेगी।
हम दोनों हंस पड़े।

इतने में सीमा और तन्नु भी आ गई। हम सब ने पिस्ते छुहारे वाला गर्म दूध पिया और चारों नंगे ही बेड पर बैठे, एक दूसरे को देखते, आपस में बातें करने लगे।
कोई 15 मिनट के ब्रेक के बाद सीमा बोली- तो अब दूसरी शिफ्ट शुरू की जाए?

मैंने कहा- हाँ, मैं तो तन्नु को चोदने के लिए मारा जा रहा हूँ।
तन्नु भी मुस्कुरा पड़ी।
‘मगर अब सब इसी बेड पे होगा’ मैंने कहा।

तो सीमा बेड पे एक साइड लेट गई और शाहिद उसके ऊपर लेट गया, सीमा ने अपनी टाँगें शाहिद की टाँगों से लपेट ली और अपनी बाहों से शाहिद को अपने पाश में ले लिया।

दोनों ने अपने अपने होंठ एक दूसरे से जोड़ दिये, मैं भी तन्नु को लेटा कर उसकी बगल में लेट गया, और अपनी एक टांग उसके ऊपर रखी और एक हाथ से उसका बूब पकड़ कर उसको चूसना शुरू किया, तन्नु मेरे सर के बालों में हाथ घुमाने लगी।
मतलब लड़की को मज़ा आ रहा था। मैंने बारी बारी से तन्नु के दोनों बूब्स चूसे।

उधर शाहिद भी सीमा के बूब्स से खेल रहा था, कभी ज़ोर से दबाता तो कभी मुँह में लेकर चूसता। सीमा भी नौजवान लौंडे के साथ कामुक खेल खेल कर खुश हो रही थी।

मेरा तो पूछो ही मत, इतनी कमसिन काली के कोमल बदन से खेलते हुये मैंने तो पता नहीं कितनी बार भगवान की शुक्रिया किया कि मैंने कब सोचा था कि ऐसे कोई 18 साल की लड़की मुझसे चुदने के लिए आ जाएगी।
वैसे तो दिल्ली में स्कूल जाने वाली लड़कियां भी आपको मिल जाएंगी, मगर वो तो प्रोफ़ेशनल होती हैं, यह तो एकदम से सीधी सादी, घरेलू लड़की!

बूब चूसते चूसते मैंने उसकी चूत के दाने को अपनी उंगली से हल्के हल्के मसलना शुरू किया, इससे तन्नु के मुँह से मैंने 2-3 बार आह और सी सी की आवाज़ सुनी। मैंने यह भी महसूस किया कि तन्नु की चूत गीली गीली होने लगी है।

मैंने कहा- तन्नु बेटे, अपने अंकल का लंड अपने हाथ में पकड़ो और इसे दबाओ।
उसने मेरा लंड अपने छोटे से नर्म हाथ में पकड़ा… उसके गोरे हाथ में मेरा लंड और भी काला लगा मगर वो पकड़ के दबाने लगी, तो मुझे भी मज़ा आने लगा।

1 मिनट और उसके बदन से खेलने के बाद मैंने कहा- तन्नु घोड़ी बनोगी, मैं तुम्हें पीछे से चोदूँगा।
तन्नु उठ कर घोड़ी बन गई, मैंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत पे रखा और सीमा को इशारा किया।

सीमा उठी और उसने शाहिद को नीचे लेटा दिया- शाहिद, मेरी चूत चाटोगे बच्चे? सीमा बोली।
‘जी बिल्कुल!’ शाहिद बोला तो सीमा शाहिद के मुँह के ऊपर जा बैठी और अपनी चूत उसने शाहिद के मुँह पे सेट की, जिसे शाहिद अपनी जीभ से चाटने लगा।

जब मैंने अपना लंड तन्नु की चूत में डाला तो लंड का टोपा अंदर जाते ही तन्नु के मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकला।
‘क्या हुआ’ मैंने पूछा।
वो बोली- दर्द हुआ, आपका तो मोटा है।
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सच में ऐसे फीलिंग आई जैसे किसी कच्ची कली को पहली बार चोद रहा हूँ। मैंने और ज़ोर लगा कर अपना और लंड उसकी चूत में घुसेड़ा, तो हर झटके के साथ उसके दर्द का एहसास मुझे सुनने को मिला, और इस बात ने मेरे लंड में और अकड़ पैदा की।

मगर बिल्कुल कुँवारी भी नहीं थी वो, इसलिए, हल्की सी परेशानी से ही सही, मगर मेरा सारा लंड लड़की अपनी चूत में ले गई। और मुझे ऐसे लगा जैसे किसी ने मेरा लंड कस के अपनी मुट्ठी में पकड़ रखा हो, एकदम टाईट चूत।

मैंने भी कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई, बड़े आराम से धीरे धीरे अपना पूरा लंड तन्नु की कुँवारी चूत (खैर मेरे लिए तो कुँवारी जैसी ही टाईट थी) में घुसा कर चोदने का आनन्द ले रहा था।

थोड़ी देर चुदाई के बाद, तन्नु को को भी मज़ा आने लगा, वो खुद भी अपनी कमर आगे पीछे हिलाने लगी थी। अब मौका देख कर मैंने उसको थोड़ा सा आगे को खिसकाया और तन्नु का मुँह शाहिद के लंड के ऊपर कर दिया, जो सीमा की चूत की खुशबू से तन कर सूखी लकड़ी की तरह से सख्त हो रहा था।

मैंने तन्नु से कहा- तन्नु, शाहिद का लंड अपने मुँह में लेकर चूसो।
मेरे कहने की देर थी कि तन्नु ने बिना कुछ सोचे, शाहिद का लंड पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया, उसे और कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, कामाग्नि में जल रही एक नौजवान लड़की इतनी गर्म हो चुकी थी कि इस वक़्त तो वो कुछ भी कर जाती।

शायद उसने भी बहुत से ब्लू फिल्मों में या अभी थोड़ी देर पहले सीमा को शाहिद का लंड चूसते देख था, तो वो भी वैसे ही स्टाइल मार मार के लंड चूसने लगी।
शाहिद तो मुँह उठा उठा कर सीमा की चूत चाट रहा था।

मैंने सीमा से पूछा- कैसा लग रहा है?
वो बोली- पूछो मत यार, बस मर जाने को जी कर रहा है।
मैंने कहा- तो मर जा, मगर मरने से पहले, कच्चा चबा जा इस लौंडे को!

सीमा शाहिद के मुँह से उठी और नीचे आ गई, उसने भी तन्नु के साथ साथ, शाहिद का लंड चूसना शुरू कर दिया। लंड चूसने में दौरान सीमा ने कई बार तन्नु को होंठों पे किस किया, उसके होंठ चूसे भी, अब शायद तन्नु को किसी भी काम के लिए कहा जाता तो वो मना नहीं करती।
सीमा ने शाहिद का लंड तन्नु के मुँह से लिया, और खुद उसके ऊपर बैठ गई, और बड़े आराम से शाहिद का सारा लंड उसकी चूत निगल गई।
शाहिद बोला- ओह आंटी मज़ा आ गया, कभी सोचा भी नहीं था कि जिस औरत को मैं इतना पसंद करता हूँ, एक दिन उसको चोदने का मौका भी मिलेगा।

सीमा बोली- क्या तुम मुझे पहले भी कभी मिले हो?
वो बोला- कमाल है? आप भूल गई मुझे, मगर मैं नहीं भूला! दो साल पहल एक शादी में आप मुझसे मिली थी। जब पार्किंग में आपने मुझे लंड खड़ा करके दिखने को कहा था, मैं नहीं कर पाया था। मगर आज देखो मेरा पूरा खड़ा है और आपकी चूत में है।

सीमा एकदम से बोल पड़ी- अरे यार, जब से तुमको देखा है, मुझे तुम कुछ जाने पहचाने से लग रहे थे, मगर याद नहीं आ रहा था कि तुम्हें पहले कहाँ देखा था। अच्छा तो तुम वो लड़के हो?

शाहिद बोला- जी, वही हूँ, मगर मैंने उसके बाद भी आपका पीछा नहीं छोड़ा था, आपके पीछे आपके घर तक आया, आपका घर देखा, फिर फेसबुक पर आपको ढूंढा, फिर जब आपका बीवी बदल ग्रुप मिला तो आप लोगों से दोस्ती की। तब जा कर आज का दिन मेरी ज़िंदगी में आया है।

मैंने पूछा- तो क्या तन्नु सच में तुम्हारी बीवी है, या वैसे ही कोई दोस्त या गर्ल फ्रेंड को ले आए?
तन्नु बोली- नहीं अंकल हमारी बकायदा शादी हुई है।
मैंने कहा- बेबी तुम तो बोलो ही मत, बस चुपचाप मेरा लंड खाओ, मैं भी कभी ज़िंदगी में यह नहीं सोच सकता था कि मुझे एक ऐसे खूबसूरत जिस्म को चोदने का मौका मिलेगा। सच में जी करता है, यह चुदाई कभी खत्म ही न हो!

कह कर मैं थोड़ा और ज़ोर से उसकी चूत को भोंसड़ा बनाने के लिए धक्के मारने लगा। जब भी मेरी कमर तन्नु के पिछवाड़े पे जाकर चोट करती ‘फट्ट, फट्ट’ की आवाज़ आती, और उधर सीमा शाहिद के लौड़े पर उछल कूद कर रही थी, उसकी ‘ठप ठप’ की अलग आवाज़ आ रही थी।

बीच बीच में मैं सीमा के साथ भी थोड़ी बहुत छेड़छाड़ कर लेता था।

तन्नु और सीमा दोनों झड़ चुकी थी मगर हम दोनों अभी भी टिके हुये थे। झड़ने के बाद तन्नु को चूत बिल्कुल ड्राई हो चुकी थी, सो उसकी चूत और भी टाईट लगने लगी।
शायद उसको मुश्किल हो रही थी मगर मुझे मज़ा आ राया था।

करीब 12-15 मिनट की चुदाई के बाद शाहिद जवाब दे गया, जब वो बोला- आंटी मेरा होने वाला है।
तो सीमा एकदम से उसके ऊपर से उतरी और उसका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और हाथ से उसकी मुट्ठ मारने लगी। जब शाहिद के लंड से वीर्य की पिचकारियाँ फूटी तो बहुत सारा माल तो सीमा ने अपने मुँह में लिया और पिया, थोड़ा सा उसने तन्नु की तरफ भी गिराया जो तन्नु के चेहरे और बालों पे गिरा, मगर तन्नु ने कोई घिन नहीं की।

तन्नु की टाईट चूत चोदते चोदते मेरा भी एक बार पानी निकलने को हुआ था, मगर मैंने तब चुदाई रोक कर उसे गिरने से बचा लिया और मुझे थोड़ा और समय मिल गया। मगर अब तन्नु को चोदते हुये मुझे एक और ख्याल आया कि अगर मैंने अपना वीर्य इसके अंदर ही गिरा दूँ, तो हो सकता है यह मेरे से प्रेग्नेंट हो जाए, और कल को मेरे बच्चे को जन्म दे।

बस यही सोच कर मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और जब मेरा माल छूटा तो मैंने अपना लंड तन्नु की चूत से बाहर नहीं निकाला और अंदर ही वीर्यपात करवा दिया।
गर्म माल के अंदर गिरते ही मैं निढाल हो गया और तन्नु के ऊपर ही गिर गया।

थोड़ी देर बाद नॉर्मल हुआ, मैंने उठ कर देखा, तन्नु उसी तरह उल्टी लेटी थी और उसकी गुलाबी चूत से मेरा वीर्य थोड़ा सा बाहर चू गया था।

मैं उठ कर बाथरूम में चला गया, वापिस आया तो शाहिद और तन्नु अपने अपने कपड़े पहन रहे थे।
मैंने कहा- क्या हुआ, चले क्या?
शाहिद बोला- कोई और भी प्रोग्राम है क्या?

मैंने कहा- यार अभी तो एक एक बार हुआ है, एक बार और कर लेते हैं।
शाहिद बोला- अंकल कर तो लेते, मगर अभी हमें कहीं जाना है, आप बस इतना करो कि हमें भी अपने क्लब में शामिल कर लो ताकि हम दोनों भी नए नए लोगों से मिल सकें और उन सबका प्यार पा सकें।

मैंने कहा- उसकी चिंता तुम मत करो, तुम दोनों हमारे ग्रुप में शामिल हो चुके हो। अगली बार जब ग्रुप की मीटिंग होगी तो तुम्हें काल करूंगा।

उसके थोड़ी देर बाद दोनों चले गए।
उनके जाने के बाद थोड़ी देर बाद हम दोनों मियां बीवी बेड पर नंगे ही लेटे रहे।

‘क्या सोच रहे हो?’ सीमा ने पूछा।
‘मैं सोच रहा हूँ कि मैंने तो कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि इतनी सुंदर और इतनी कमसिन लड़की के साथ सेक्स करने का मज़ा लूँगा। मेरा अभी एक बार और उसके साथ सेक्स करने का मन था। या फिर एक पूरी रात मैं उसके साथ बिताता।’

सीमा बोली- उसके साथ तो आप पूरी ज़िंदगी बिताओगे, मैंने देखा आपने अपने वीर्य उसकी योनि में ही गिराया, अगर उसको बच्चा हुआ तो आपका ही होगा। हाँ पर यह बात मैं भी ज़रूर कहूँगी कि शाहिद जैसा सुंदर, शरीफ और प्यारा लड़का मुझे भी नहीं मिल सकता था। मुझे भी उसके साथ सेक्स करके बहुत मज़ा आया।

‘हाँ, ये बात तो है!’ मैंने कहा- अपनी से काफी कम उम्र के पार्टनर के साथ सेक्स करने का अपना ही मज़ा है और अगर पार्टनर भी आपका पूरा साथ दे, मज़ा कई गुना बढ़ जाता है।

‘तो अब अपनी हमउम्र पार्टनर के बारे में क्या विचार है?’ सीमा बोली।
मैंने उसकी आँखों में देखा और कहा- इसको तो मैं हर वक़्त चोदना चाहूँगा!
कह कर मैंने सीमा को दबोच लिया।

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