बैंड, बाजा और चुदाई: भाग 1

Band, Baja aur chudai-1

बैंड, बाजा और चुदाई: भाग 2

नमस्ते सभी को आज मैं आप लोगों को अपनी पेहली और सच्ची कहानी बताने जा रही हूँ , जो की मेरी सहेली की शादी में हुई चुदाई के बारे में हैं , आशा करती हूँ,आप लोगों को मेरी यह कहानी पसंद आएगी ।
मेरा नाम सुषमा हैं , मैं 28 साल की हूँ और मैं छत्तीसगढ़ में रहती हूँ , मेरी फिगर की साइज 38–32–40 हैं और दिखने में मैं काफी सेक्सी माल हूँ ।
इसीलिए मेरे एक आशिक़ नहीं,बल्कि बहुत से आशिक़ हैं , तो ये बात पिछले साल की हैं , जब मेरी सहेली नमिता मुझे एक खुश खबरि दी और खुश खबरि ये थी की , उसकी शादी होने वाली थी।
वो भी एक एनआरआई बंदे से , पर वो उस शादी से खुश नहीं थी , नमिता मुझे बताई की वो किसी और से प्यार करती हैं और उसी से शादी करना चाहती हैं ।
मैं उस गद्दी को समझे की , लड़का पैसे वाला हैं और क्या चाहिए पर वो मुझे बोली ,” पैसे से प्यार नहीं ख़रीदा जा सकता हैं “, मैं नमिता को समझने की लाख कोशिश की ।
पर वो मेरी बात सुनी नहीं , तो मैं थोड़ी शंका में थी और मैं नमिता से पूछी की ,

मैं,” वैसे तुम किस्से प्यार करती हो ज़रा उसका नाम बताओगी?”
नमिता,”मैं बिलास से प्यार करती हूँ ।”
मैं हैरान हो कर बोली ,” क्या…? तुम उस रंडी बाज़ से प्यार करती हो?”
नमिता,”ऐसे मत बोलो ना , वो अब बदल गया हैं और वो मेरे अलावा किसी और को प्यार भी नहीं करेगा ।”
मैं ,” अरे पगली तुम उसे जानती नहीं वो कितना गिरा हुआ हैं ।”

पर नमिता मान नहीं रही थी , बिलास असलमें अबल नंबर का दोगला लड़का हैं और बहुत सी लड़कियों की ज़िन्दगी तभा कर चूका हैं और मैं नहीं चाहती थी की नमिता बर्बाद हो जाए ।
नमिता मुझसे पूछी की ,

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नमिता ,” क्या तुम भागने में मेरी मदत करोगी?”
मैं,”अच्छा ठीक हैं , वैसे कब हैं तेरी शादी?”
नमिता,” चार दिन बाद हैं ”
मैं,”ठीक हैं ,मैं दो दिन बाद तेरे घर आती हूँ , मिल कर कुछ सोचेंगे।”
नमिता,” सुक्रिया यार , आखिर तुम मुझे समझी ।”
मैं,”सुक्रिया बाद में बोलना ।”

नमिता मेरे घर से 5 की°मि° दूर रहती थी और काफी रहिस परिवार से तलूक रखती हैं , इसीलिए मैं दो दिन बाद सज–धज के नमिता के घर गई , मैं उस दिन हरे रंग की साड़ी और सामने की तरफ डीप कट ब्लाउज पहनी थी ।
जहाँ से मेरी टाइट चूचियां साफ झलक रही थी , मैं जब नमिता के घर आई ,उसी समय नमिता के ठरकी चाचा हरीश से मेरी रूबरू हुई और वो मुझे देख बोले ,

हरीश,”आ गई तुम सुषमा , बिजली गिराने ।”
मैं ,”हाँ , चाचा जी , लगता हैं आपको मेरी ही इंतज़ार थी ।”
हरीश,” उफ्फ्फ मुझे चाचा मत कहो , मुझे हरीश कहो न , अभी तो मैं जवान ही हूँ ।”
मैं हँसते हुए बोली ,” हाँ , वो तो मुझे पता हैं आप जवान हैं , क्या आप मेरी सूटकेस कमरे तक पहुंचने में मदत करेंगे?”
हरीश ,” तुम कहो तो मैं तुम्हें भी उठा लूँ?”
मैं,” ना–ना अभी नहीं ।
हरीश जी हरामी अंदाज़ में बोले ,” फिर तो रात में ही उठाने दो गी मुझे?”

और वो मेरी सूटकेस को कमरे की तरफ लेकर जाने लगे , नमिता के चाचा जी से मैं पहले भी चुदाई हूँ और सच कहूँ तो मुझे वो पसंद हैं ,हरीश जी मेरी सूटकेस को कमरे में लेकर गए ।
और मैं मान ही मान सोचने लगी की , नमिता और उस हरामी बिलास की पोल खोल दूँ , क्यूंकि नमिता के परिवार वाले बहुत अच्छे हैं और कई बार उन्होंने मेरी मदत भी किये हैं ।
नमिता अभी नहीं समझ रही हैं , पर बाद में पछताएगी , मैं झूट नहीं बोलूंगी पर बिलास के चक्कर में मैं खुद भी फंस चुकी हूँ , उसका मान जब भर जायेगा तब वो उसे कुछ नहीं समझेगा ।
कुछ देर बाद नमिता आई और मुझे अपने कमरे में लेकर गई , नमिता दरवाज़ा बंद की और मुझसे पूछी ,

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नमिता ,” तो बताओ क्या सोची हो तुम?”
मैं,”अभी तक तो कुछ नहीं,पर मैं तुम्हे संध्या तक ज़रूर बता दूंगी ठीक हैं ।
नमिता ,” क्या? अभी तक तुम नहीं सोची हो?
मैं,”थोड़ा इंतज़ार करलो , मैं कुछ अच्छे से सोच कर तुम्हे बताउंगी ।”
नमिता,”अच्छा ठीक हैं , पर ये बात हम दोनों के बिच रहना चाहिए ।”
मैं,”हाँ , तीसरा कोई होना भी नहीं चाहिए , ठीक हैं मैं ज़रा नाहा कर आती हूँ , तुम तब तक बिलास से बात करो , अच्छा लगेगा ।”

और मैं नमिता के कमरे से निकल कर अपने कमरे में गई और जैसे मैं कमरे में घुसी हरीश जी ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया और मुझे बाँहों में भर लिया ।
मैं चौंक कर बोली ,” हरीश जी , आप अभी तक यहीं हैं?”
हरीश,” तुम्हें देख कहीं जाने का मान नहीं हैं मेरा ।

और हरीश जी ने मेरी चूचियों को मसलन सुरु कर दिए , जिससे मैं भी मूड में आने लगी , पर मुझे डर थी की , कहीं कोई आ ना जाएं , इसीलिए मैं हरीश जी से कहने लगी ,

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मैं,”हरीश जी , रात तक रुकिए न , अभी कोई आ जायेगा तो दिक्कत हो जाएगी ।”

हरीश जी ,मेरी चूचियों को चूमते हुए मेरी , चूचियों की दरार को चाटते हुए बोले की ,

हरीश,”तो चलो बाथरूम में , कोई आएगा तो भी पता नहीं चलेगा , बस तुम आवाज़ कम निकलना।”
मैं,”समझने की कोशिश कीजिये न हरीश जी ।”

पर हरीश जी सुने नहीं और मेरी , साड़ी को खींचने लगे , मैं गोल–गोल घूमने लगी और मेरी साड़ी उतरने लगी और मैं पेटीकोट में आ गई , तब हरीश जी मेरे पास आये और मेरी पेटीकोट की डोरी को भी खोल दिए ।
मैं उस समय सिर्फ हरी पेंटी में थी और हरीश जी , मुझसे चिपक के , मेरी गांड को दबाने और सहलाने लगे और मुझे बोले की ,

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हरीश,”उफ्फ्फ , कितना मस्त हैं तुम्हारी गांड सुषमा , जी कर रहा हैं इन्हे खा जाऊं ।”
मैं,” वो तो आप खाने वाले ही हो हरीश जी ।”
हरीश,”हाँ मेरी छमक छल्लो।”

और हरीश जी एक दम से मुझे गोद में उठा लिए और मुझे बाथरूम में ले गए और उतारते ही मेरी होंठ को चूमने लग गए और साथ में मेरी गांड को मसलने लगे ।
मुझे मदहोशी छाने लगी थी और मैं भी खुद को रोक नहीं पा रही थी , हरीश जी मेरी गांड को दबाते हुए पीछे से मेरी पेंटी आधी उतर कर गांड की दरार पर सेहला रहे थे और मैं ,

“ईईईसस…आह! उउफफफ”,कर सिसक रही थी।

फिर हरीश जी मुझे एक दम से पीछे घुमाए और मेरी पीठ को चूमने और चाहते हुए ब्लाउज की हुक को खोलने लगे और ब्लाउज पूरी खुलते ही , हरीश जी ब्लाउज उतर फेंके ।
और एक दम से मेरी चूचियों को पीछे से दबोच लिए और उन्हें मसलते हुए मुझसे पीछे से रगड़ने लगे , मैं हरीश जी के शाक्त लंड को महसूस कर रही थी और मज़ा भी आ रही थी मुझे ।
और तभी हरीश जी मेरी पीठ को चाटते हुए नीचे जाने लगी और मेरी गांड तक आते ही हरीश जी मेरी गांड को चूमने लगे और चाटतेने लगे तब मैं और भी मदमस्त होने लगी और ,

“ईईईईईससससस… उउफफफ! कराने लगी और हरीश जी को बोली की ,

मैं,” ईईईसस… हरीश जी आपकी यही अंदाज़ मुझे दिवानी बना देती हैं,ईईईसस… उफ्फ.”
हरीश ,” और मुझे तुम्हारी गांड दीवाना बना देता हैं , सुषमा।

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