चालक बनने के चक्कर में चुद गई-2

Chalak banne ke chakkar me chud gai-2

अब तो हम सप्ताह में दो या तीन दिन पार्क में रहते, में रिंकू से बहुत खुल गई थी. जिस दिन वो मुझे पार्क में बुलाता तो उस दिन में जानबूझ कर ब्रा पहनकर नहीं जाती, जिसकी वजह से रिंकू आराम से मेरे बूब्स को देख सके और दबा सके, वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर चूसता और मुझे बहुत मज़ा आता.

एक बार रिंकू और में पार्क में थे, रिंकू मेरे ऊपर लेटकर मेरे बूब्स को चूस रहा था और एक हाथ से दबा रहा था और में मज़े में डूबी हुई थी और मुझे पता ही नहीं चला कि कब उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और अपना एक हाथ मेरी पेंटी के अंदर डाल दिया, वैसे तो में कभी उसे ऐसा नहीं करने देती थी, लेकिन आज में मज़े मज़े में उसे रोक ही नहीं पाई और वो मेरी चूत से खेलने लगा.

पहली बार मेरी चूत पर किसी मर्द का हाथ लगा था तो में बहुत गरम हो गई और उस वजह से मेरी चूत पानी छोड़ने लगी, मुझे मेरी नस नस में करंट सा दौड़ता हुआ महसूस हो रहा था, ऐसा मज़ा मुझे आज तक नहीं मिला था. अब उसने मेरी चूत में उंगली डाल दी और फिर आगे पीछे करने लगा.

फिर कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे शरीर का पूरा खून मेरी चूत के आस पास आ गया है और मेरा एकदम से प्रेशर बन गया. मैंने रिंकू का हाथ पकड़कर उसको रोकने की कोशिश की, लेकिन में रोक नहीं पाई और मुझे ऐसा लगा कि में सलवार में ही सू-सू कर दूँगी और एकदम से फ्री हो गई, मेरे मुहं से आआहह की आवाज़ निकली और में एकदम निढाल सी होकर लेट गई. मुझे देखकर रिंकू ने पूछा क्या पहली बार था? तो मैंने कहा कि हाँ पहली बार था.

फिर उसने मुझसे कहा कि अब तुम्हारी बारी है और उसने अपनी पेंट की चैन को खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया, इससे पहले मैंने कभी लंड नहीं देखा था और में मन ही मन सोच रही थी, क्या बच्चों की नूनी इतनी बड़ी हो जाती है? मेरे देखते ही देखते रिंकू ने अपना हाथ अपने लंड पर साफ किया, जो मेरी चूत के पानी से गीला हो गया था.

में तो एक टक होकर लंड को देख रही थी, रिंकू ने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और लंड पर रख दिया और मैंने उसका लंड पकड़ लिया. फिर उसने ऐसे ही अपने लंड को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया. में उसे देख रही थी और मेरे हाथ में उसका लंड था.

तभी उसने मुझसे कहा कि अब तुम करती रहो, जब तक में फ्री नहीं हो जाता और फिर में उसके सामने बैठकर उसके लंड को आगे पीछे करने लगी और वो मेरे बूब्स के साथ खेलने लगा. करीब दस मिनट के बाद मेरा हाथ थकने लगा, लेकिन वो फ्री होने का नाम नहीं ले रहा था. मैंने उससे कहा कि क्या है तुम तो फ्री हो ही नहीं रहे? तो उसने मुझसे कहा कि जान एक बार मुहं में ले लो.

अब मैंने उससे पूछा कि तुम यह क्या बोल रहे हो, अगर तुम फिर से ऐसे बोले तो में हाथ में भी नहीं पकडूँगी. तब उसने मुझसे कहा कि फिर तुम चूत में डालने दो, में थोड़ी देर में ही फ्री हो जाऊंगा.

फिर मैंने कहा कि ना में ऐसे ही करती रहूंगी, तुम फालतू की मांग ना रखो, वरना में यह भी नहीं करूँगी तो वो बोला अच्छा रहने दो बस पांच मिनट और फिर वो मेरे बूब्स को चूसने लगा और में उसके लंड को हिलाती रही और करीब दस मिनट के बाद उसके लंड ने एक पिचकारी छोड़ी, जो सीधा मेरे पेट गिरी में उसके लंड को छोड़ने लगी तो उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ लिया और लंड को तेज़ तेज़ हिलाने लगा.

मैंने देखा कि उसके लंड से बहुत सारा सफेद चिकना पदार्थ निकलकर उसके और मेरे हाथ पर आ गया और वो भी थककर बैठ गया. फिर मैंने मेरे रुमाल से उसका माल साफ किया और हम घर की तरफ़ चल दिए.

अब तो हम जब भी पार्क में जाते हमारा यही काम होता और वो अपने लंड को मेरी चूत में डालने की बहुत ज़िद करता, लेकिन में उसे अंदर नहीं डालने देती थी, लेकिन वो हाथ से ही सहलाकर मुझे शांत किया करता, वो हमेशा मुझे हाथ से करने के नुकसान बताता, वो बताता कि इससे आदमी सेक्स के काबिल नहीं रहता और उसका लंड खड़ा होना बंद हो जाता है, इसलिए लड़को को ऐसा नहीं करना चाहिए और हमेशा चूत में लंड को डालना चाहिए.

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मैंने उससे वादा किया कि में गर्मियो की छुट्टियों के बाद उसे सब कुछ करने दूँगी और उसके साथ ही रहकर मैंने अच्छे से जाना कि लड़को की नज़रे हमेशा हमारे बूब्स को और गांड को घूरती रहती है, पहले में इस तरफ़ कभी ध्यान नहीं देती थी, लेकिन अब में स्कूल में भी ध्यान देती, जब भी कोई लड़का मुझसे बात करता है तो ज्यादातर समय उसकी नज़र मेरे बूब्स पर होती थी और अंदर ही अंदर यह सब मुझे अच्छा लगता था, इसलिए में टाईट शर्ट और स्कर्ट पहनकर स्कूल आती और मैंने सभी डिजाईन की भी फिटिंग ब्रा और वैसे ही कपड़े पहने, जिससे मेरे बूब्स और गांड एकदम मस्त दिखे, जैसा कॉलेज की लड़कियां करती है और इससे मेरी सुन्दरता पर चार चाँद लग गये, लेकिन इस सबके बीच मैंने घर पर भी एक बात पर ध्यान दिया कि मेरा भाई भी जब में उसकी तरफ़ नहीं देख रही होती तो वो मेरे बूब्स को और मेरी गांड को घूरता.

में आपको बताना भूल गई कि मेरे घर में नीचे मम्मी, पापा का बेडरूम है और गेस्ट रूम है, मेरा और भाई का रूम ऊपर है और हमारे दोनों के रूम में एक बेड लगा हुआ है और भाई के रूम में एक कंप्यूटर भी है. में जब भी अपने भाई के रूम में जाती तो कंप्यूटर के पास जमीन पर कुछ पीले रंग के दाग होते, जो मुझे हमेशा मिलते थे, लेकिन मैंने हमेशा ही उनकी तरफ इतना ध्यान नहीं दिया.

अब स्कूल में गर्मियों की छुट्टियाँ होने वाली थी और स्कूल का आखरी दिन था और उस पूरा दिन में रिंकू की बाहों में रही. मेरा उससे अलग होने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था, क्योंकि मुझे पता था कि अब पूरे महीने हमारी बात नहीं हो पाएगी और ना ही हम मिल पाएँगे, इसलिए मेरी तो आँखो से आँसू आने लगे और उसने बड़ी मुश्किल से मुझे चुप करवाया और घर आते वक़्त भी में उससे चिपककर बैठी रही. उसके बाद में घर पर आ गई. करीब 2-3 दिन तो मेरा मन ही नहीं लगा, लेकिन फिर टी.वी. और भाई के साथ बातें करने के बाद मूड ठीक हो गया. घर पर मम्मी पापा के ऑफिस चले जाने के बाद में और भाई ही बचते, इसलिए में पूरा दिन अपने भाई के आसपास ही रहती और टी..वी. देखती या फिर सोती.

दिन में ज्यादा सोने की वजह से कई बार रात को नींद नहीं आती. फिर एक दिन ऐसे ही मुझे रात को नींद नहीं आ रही थी तो मैंने सोचा भाई को देखती हूँ, वो क्या कर रहा है, अगर जगा हुआ है तो कुछ देर में उसके साथ बैठ जाउंगी. फिर मैंने दरवाजा खोलकर भाई के रूम की तरफ़ देखा तो उसके रूम की लाईट जली हुई थी, इसलिए मैंने जाकर उसके रूम का दरवाजा बजा दिया.

भाई ने करीब पांच मिनट के बाद दरवाजा खोला तो उसके रूम से अलग सी बदबू आ रही थी और यह बदबू में पहचानती थी, फ्री होने के बाद माल से ऐसी बदबू आती थी. अब भाई ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ तो मैंने उससे कहा कि कुछ नहीं मुझे नींद आ रही थी, इसलिए मैंने सोचा कि में आपके रूम में चलती हूँ.

भाई ने कहा कि हाँ तुम अंदर आ जाओ और में अंदर आई तो सबसे पहले मेरी नज़र कंप्यूटर टेबल के पास गई, कुर्सी के नीचे कुछ गीला सा लग रहा था, जैसे अभी अभी सफाई की हो और में तुरंत समझ गई कि भाई अभी कुछ देर पहले ही फ्री हुआ है.

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