चलती ट्रैन में मेरी चूत फटी-3

Chalti train me meri chut fati-3

जीजू ने फिर मेरी बुर को टटोला। मेरी बुर इस समय पूरी तरह रस से भरी हुई थी फिर भी जीजू ने ढ़ेर सारा थूक उस पर लगाया और अपने लंड को मेरी बुर पर रखा।

उनके गर्म सुपाड़े ने मेरे अंदर आग दहका दी।

फिर उन्होंने टटोल कर मेरी बुर के मुहानें को देखा और अपनी उंगली से मेरी बुर की फाँकों को एक-दूसरे से अलग कर अच्छी तरह सुपाड़ा बुर के मुँह पर रखने के बाद मेरी जांघें पकड़ कर हल्का सा धक्का दिया मगर लंड अंदर नहीं गया बल्कि थूक से चिकनाहट के कारण ऊपर की ओर हो गया।

उस समय मेरी साँसे थम गए थी।

जीजू ने इसी तरह एक-दो बार और कोशिश किया वो आसपास की सवारियों की वजह से बहुत सावधानी बरत रहे थे।

इस तरह जब वो लंड न डाल सके तो खीझ कर अपने लंड को मेरी बुर के आसपास मसलने लगे। मैंने अब शरम त्याग कर मुँह खोला और उन्हें सवालिया निगाहों से देखा।

वो बड़ी बेबस निगाहों से मुझे देख रहे थे। मैंने सिर और आंखों के इशारे से पूछा, क्या हुआ?

तब वो थोड़े से नीचे झुक कर धीरे से फुसफुसाये, आस पास सवारियां मौजूद हैं, इसलिये मैं आराम से काम करना चाहता था कि तुमको दर्द न हो मगर इस तरह होगा ही नहीं, थोड़ी ताकत लगानी पड़ेगी।

तो लगाओ न ताकत जीजू, मैं उखड़े स्वर में बोली।

ताकत तो मैं लगा दूंगा परंतु तुम्हे कष्ट होगा क्या बरदाश्त कर लोगी?

आप फ़िक्र न करें, कितना ही कष्ट क्यों न हो मैं एक उफ़ तक ना करूंगी। आप लंड डालने में चाहे पूरी शक्ति ही क्यों न झोंक दें।

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तब ठीक है, मैं अभी अंदर करता हूँ जीजू को इतमिनान हो गया और इस बार उन्होंने दूसरी ही तरक़ीब से काम लिया।

उन्होंने उसी तरह बैठे हुये मुझे अपनी टांगों पर उठा कर बिठाया और दोनों को अच्छी तरह कम्बल से लपेटने के बाद मुझे अपने पेट से चिपका कर थोड़ा सा ऊपर किया और इस बार बिल्कुल छत की दिशा में लंड को रखकर और मेरी बुर को टटोलकर उसे अपने सुपाड़े पर टिका दिया।

मैं उनके लंड पर बैठ गयी। अभी मैंने अपना भार नीचे नहीं गिराया था। मैंने सुविधा के लिये जीजू के कंधों पर अपने हाथ रख लिये।

जीजू ने मेरे कूल्हों को कस कर पकड़ा और मुझसे बोले, अब एकदम से नीचे बैठ जाओ।

मैं मुस्कुराई और एक तेज़ झटका अपने बदन को देकर उनके लंड पर चिपक कर बैठ गयी।

उधर जीजू ने भी मेरे बदन को नीचे की ओर दबाया। अचानक मुझे लगा जैसे कोई तेज़ धार का खंजर मेरी बुर में घुस गया हो।

मैं तकलीफ़ से बिलबिला गयी। क्योंकि मेरी और जीजू की मिली जुली ताकत के कारण उनका विशाल लंड मेरी बुर के बंद दरवाज़े को तोड़ता हुआ अंदर समा गया और मैं सरकती हुयी जीजू की गोद में जाकर रुकी।

मैंने तड़प कर उठना चाहा परंतु जीजू की गिरफ़्त से मैं आज़ाद न हो सकी। अगर ट्रेन में बैठी सवारियों का ख्याल न होता तो मैं बुरी तरह चीख पड़ती।

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मैं मचलते हुये वापस जीजू के पैरों पर पड़ी तो बुर में लंड तनने के कारण मुझे और पीड़ा का सामना करना पड़ा।

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मैं उनके पैरों पर पड़ी-पड़ी बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगी।

जीजू मुझे हाथों से दिलासा देते हुये मेरी चूचियों को सहला रहे थे।

करीब दस मिनट बाद मेरा दर्द कुछ हल्का हुआ तो जीजू कूल्हों को हल्के-हल्के हिला कर अंदर बाहर करने लगे।

फिर दर्द कम होते-होते बिल्कुल ही समाप्त हो गया और मैं असीमित सुख के सागर में गोते लगाने लगी। जीजू का लंड मेरी बुर में अंदर बाहर हो रहा था तो मुझे बहुत ही ज्यादा सुख और ख़ुशी मिल रही थी|

जीजू धीरे से लंड खींच कर अंदर डाल देते थे। उनके लंड के अंदर-बाहर करने से मेरी बुर से पानी निकलने से चपक-चपक की अजीब-अजीब सी आवाज़ें पैदा हो रही थीं।

मैंने अपनी कोहनियों को बर्थ पर टेक कर बदन को ऊपर उठा रखा था और खुद थोड़ा सा आगे सरक कर अपनी बुर को वापस उनके लंड पर धकेल देती थी।

इस तरह से आधे घंटे तक धीरे-धीरे से चोदा चादी का खेल चलता रहा और अंत में मैंने जो सुख पाया उसे मैं बयान नहीं कर सकती।

जीजू ने तोलिया निकाल कर पहले मेरी बुर को पोंछा, जो खून और हम दोनों के रज और बीज से सनी हुई थी उसके बाद मैंने उनके लंड को पोंछा और फिर बारी-बारी से बाथरूम में जाकर फ़्रेश हुये और कपड़े पहने।

मेरे पूरे बदन में मीठा-मीठा दर्द हो रहा था। यहीं से हम दोनों जीजा-साली न होकर प्रेमी-प्रेमिका बन गये।

अब जब भी जीजू घर आते हैं तो मैं उनसे विनती करती हूँ कि मेरे साथ अच्छी तरह से सेक्स करके मुझे खुश करें, मुझे भी उनका इंतज़ार रहता है।

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जब एक बार कोई लडकी अच्छी तरह किसी लड़के से चुदवा ले तो उसे हमेशा चुदवाने का बहुत मन होने लगता है|

जब ज्यादा दिन हो जाते हैं तो अपने बुआ के लड़के के साथ कभी-कभी सेक्स कर लेती हूँ|

वो एक दोस्त की तरह हमारा साथ हमेशा देता है| वह भी बहुत बेरहमी से अपना लंड मेरी बुर में बिना तेल या थूक लगाये डालता है जिसके कारण बहुत दर्द होता है|

उसको तो लंड चुस्वाने में मजा आता है| मैं कुछ बोल नहीं पाती हूँ क्यूँकि वो मेरा सारा राज सबको बता देगा|

इसका फायदा उठा कर वह मेरी गांड भी मारता है जिसके कारण मैं दर्द से तड़प उठती हूँ|

दोस्तो, ये मेरी सच्ची घटना है| आपको कुछ कहना या बताना हो आप मेरे ईमेल पर अपनी राय भेज सकते है।

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