चालू शालू की मस्ती-2

(Chalu Shalu Ki Masti- Part 2)

और वह गाड़ी के आगे बोनट की तरफ गया और बोनट खोल कर देखने लगा, बाहर हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था और मुझे जल्दी से जल्दी अपने पीहर पहुँचना था. लेकिन अभी तो आधा सफर बाकी था. और यह गाड़ी बीच में ही धोखा दे गई.

आपको तो पता है जैसे कि औरतों की आदत होती है जहाँ मौका मिला वहा सजना और सँवरना शुरू कर देती है, मैंने भी आदत के अनुसार अपने बेग से छोटा सा कांच और लिपिस्टिक निकाली और होंठों पर लिपिस्टिक लगाने लगी तभी मैंने देखा कि उस आदमी का ध्यान गाड़ी सही करने में कम था और मुझे लिपिस्टिक लगाते हुए देखने में ज्यादा था, वह गौर से मेरे होंठों को और मेरे वक्ष स्थल को देख रहा था, यह बात मैंने नोट की की।

मैं कांच में से ही उसको देखने लगी, जैसे ही हमारी नज़रे आपस में मिली तो उसने नजरें झुका ली और बोनट के के अंदर झांकने लग गया.

आपको तो पता ही है मैं तो खेली-खाई हुई हूं, मैंने उसकी नजरों को ताड़ लिया कि वह मुझे किस नजर से घूर रहा है. उसकी नजरें साफ साफ यह बयान कर रही थी कि अगर मैं उसको मिल जाऊं तो वो अभी मुझे इस बरसात में बोनट पर ही पटक कर जोर जोर से मुझे चोद दे।

मुझे भी शरारत सूझी, मैंने लिपस्टिक को अपने बैग में रखा और फेस पाउडर निकाल कर लगाने लगी और उसको चोरी नज़रों से उसको देखने लगी, वो भी मुझे तिरछी नज़रों से देखने लगा।
मैंने गाड़ी का दरवाजा खोला और बरसात में ही बाहर आ गई और उसको पूछा- क्या प्रॉब्लम है, कुछ पता चला?
जैसे उसने मुझे बाहर देखा तो अचानक से बोला- अरे मैडम! आप बार क्यों आ गई? प्लीज आप अंदर जाइये में बताता हूं आपको, आप भीग जाएंगी पूरी!
मैंने कहा- कोई बात नहीं!

वो बोला- प्लीज आप अंदर जाइये, बरसात बहुत तेज है, आप भीग जाओगी पूरी।
उसने मेरी कार का गेट खुला और मुझे अंदर जाने का बोला. मैं वापस कार के अंदर आ गई, लेकिन इतनी तेज बरसात के कारण में पूरी तरह भीग चुकी थी।

वो वापस बोनट की तरफ गया, मैंने कांच में अपना चेहरा देखा तो मेरा फेस पाउडर पूरी तरह भीग चुका था तो मैंने छोटा सा तौलिया अपने बैग से निकाला और मुंह को साफ किया. मेरी साड़ी पूरी तरह भीग चुकी थी और मेरे बदन से चिपक गई थी. एक तो सर्दी की शाम और ऊपर से बारिश के कारण में पूरी भीग चुकी थी तो मुझे तेज सर्दी लगने लगी और मेरा शरीर कांपने लगा. मैंने अपने कांच में से उसको देखा और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिर लिया और तौलिए से अपने बूब्स के ऊपर का भाग पौंछने लग गई.

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मेरी इस हरकत को वह बड़े गौर से और तिरछी नजरों से देख रहा था. मैंने उसकी चोरी पकड़ ली वह एकदम सकपका गया और बोनट नीचे करके मेरे पास आया और बोला- मेडम गाड़ी के कार्बुरेटर में कुछ प्रॉब्लम है.
“ओह्ह! अच्छा अब क्या होगा पवन?”
पवन बोला- तो अभी गाड़ी को गेरेज ले जाना पड़ेगा.
मैंने कह दिया- ठीक है.

फिर उसने अपनी कार से मेरी कार को टोचन किया और धीरे-धीरे करके मेरी गाड़ी को अपने गैरेज लेकर आ गया.

जब तक हम गैरेज पहुंचे तब तक काफी अंधेरा हो चुका था और बरसात भी बंद हो चुकी थी. उसके गैरेज में काम करने वाले सभी जा चुके थे उसका मकान या यूं कह लो कि रूम भी गेरेज के अंदर ही था।

वो गैरेज में गाड़ी छोड़ कर बाहर निकला और मेरी गाड़ी का दरवाजा खोला. उसने मुझे बाहर आने को बोला और खुद अपने रूम की तरफ गया, बाहर बरामदे की लाइट ऑन की और रूम का ताला खोलने लगा.
मैं जैसे ही बाहर आई और दो कदम चली ही थी कि अचानक वहां पड़े हुए सामान से मुझे ठोकर लगी और मैं गिरते गिरते बची, मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया.

मेरे मुंह से जैसे ही उसने आहहह … की आवाज सुनी तो एकदम पीछे की तरफ देखा अचानक मेरे गिरे हुए पल्लू से उसे मेरे बड़े बड़े बड़े बूब्स नजर आए. उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह बिना आंख झपकाये मेरे बूब्स को देखता रहा.
मैंने फिर एक बार उसकी चोरी पकड़ ली लेकिन अबकी बार उसने नजर नीचे नहीं की बल्कि मेरे बूब्स को घूर कर देखता रहा. मेरे बूब्स की घाटी में नजर गड़ा दी. मैंने भी अपना पल्लू सही नहीं किया और उसे यह नजारा देखने दिया.

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वो मेरे बूब्स को घूर रहा रहा था तो मैंने नोटिस किया उसकी पैन्ट में उसका मोटा हथियार बड़ी तेजी से अपना आकार ले रहा है, उसके पैंट में उसका लंड पूरी तरह आकार ले चुका था।
हम दोनों की आपस में नजरें मिली, उसके चेहरे पर चमक आ गई और वह अचानक से मेरे पास आया, बोला- शालिनी जी, आपको कही लगी तो नहीं?
मैं भी खड़ी हो गई तो और पल्लू से वापस अपने बड़े बड़े बूब्स को ढक दिया और उसकी पैन्ट के ऊपर लंड पर नजर गड़ा कर सामने मुस्कुरा कर बोली- लगी तो मेरे है पर हलचल कहीं और हुई शायद!
वह भी मुस्कुरा कर बोला- चलिए अंदर!
उसके बोलने का अंदाज ऐसा था जैसे मुझे चुदाई के लिए अंदर आने का बोल रहा हो.

इस हॉट कहानी के पहले भाग में आपने पढ़ा कि भरी सर्दी में शाम के समय जयपुर हाईवे पर मेरी कार खराब हो गयी और एक मकैनिक के साथ उसके गेराज में चली गयी.
अब आगे:

यह कहानी आप HotSexStory.xyz में पढ़ रहें हैं।

मैं उसके पीछे पीछे उसके रूम में गई और अंदर जाते ही उसने बोला- सॉरी थोड़ा गंदा है.
मैंने कहा- ईट्स ओके.
उसने अपने बेड को साफ किया और बोला- आप यहां बैठिए, तब तक मैं देखता हूं कि कार्बोरेटर में क्या प्रॉब्लम है.

उसके बाहर जाते ही मैंने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और अपने बालों को सुखाने लगी. मैं पूरी तरह भीग चुकी थी, मैं धीरे धीरे अपने बालों को सुखा रही थी और साड़ी के पल्लू को भी सुखा रही थी.
वह बाहर से धीरे धीरे मुझे देख रहा था, मेरी नजरें एक बार फिर उससे मिली और मैंने उससे पूछा- गाड़ी कितनी देर में सही हो जाएगी?
वह मुझसे बोला- मैडम इंजन में कुछ प्रॉब्लम है, नया ऑयल डालना पड़ेगा।

मुझे उसकी यह द्विअर्थी बातें समझ में आ गई थी, मुझे पता चल गया वो किस इंजन और किस ऑयल की बात कर रहा है.
मैंने भी उसके सामने मुस्कुराते हुई द्विअर्थी बाण छोड़ा और बोली- तुम मेरी गाड़ी के इंजन में अपना नया ऑयल डाल दो. जो भी खर्चा होगा, मैं मैं दे दूंगी।
शायद वह भी मेरी इस द्विअर्थी बात का मतलब समझ चुका था।

मैं वापस से अपने बालों को सुखाने लगी और अचानक से वो अंदर आया और बोला- अरे मैडम! आप तो बहुत गीली हो चुकी हो।
मैंने कहा- हां, वो तो है.
वो बोला- तो एक मिनट रुकिए, आपको तौलिया देता हूं.

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उसने मुझे तौलिया दिया और जाते समय पूरा दरवाजा खोल कर चला गया. शायद अब वह भी मेरे शरीर की सुंदरता के दर्शन करना चाहता था।

मैं अब उसके सामने ही तौलिए से अपने शरीर को पौंछने लगी और बालों को सुखाने लगी. फिर मैंने उसकी तरफ देखा और अपनी साड़ी को अपने घुटनों से ऊपर कर लिया अपने पैरों को भी पौंछने लगी.

हमारी नजरें बार बार मिल रही थी. वह भी मुझे देख कर भी मुझे देख देख कर मुस्करा रहा था और मेरी नजरों से बचाकर अपने टाइट लंड को अपनी पैंट के अंदर एडजेस्ट कर रहा था.
लेकिन मैंने उसको ऐसा करते हुए देख लिया और एक कातिल मुस्कान उसकी तरफ छोड़ दी.

मैं अपना शरीर धीरे-धीरे पौंछ रही थी ताकि वह मेरे शरीर के दर्शन ठीक से कर सके. मैं भी रह रह कर उसके टाइट लंड को निहार रही थी.

अचानक मुझे जोर से छींक आई तो वो बोला- शालिनी जी आप ठीक तो हो?
मैं बोली- हाँ!
उसने कहा- लगता है बारिश में भीगने की वजह से आपको जुकाम हो गया है, आप कहो तो मैं आपको आपके घर छोड़ सकता हूँ, आपकी गाड़ी मैं सुबह पहुँचा दूंगा।
मैं जोर से हँसी और बोली- घर?
“हाँ घर … आप कहो तो?”
“पता है … मेरा घर यहाँ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है, चलोगे?”
वो चौंका और बोला- डेढ़ सौ किलोमीटर?
मैंने कहा- ह्म्म्म!

वो एकदम चुप होकर गाड़ी में अपना काम वापस करने लग गया.
कुछ देर बाद वो वापस बोला- लेकिन आपके कपड़े? वो तो पूरे गीले हो चुके हैं.
मैंने कहा- हाँ वो तो है.
“अगर आप ज्यादा देर के इन्ही कपड़ों में रही तो आपको सर्दी लग जाएगी.”

मैं बोली- मेरी गाड़ी में बैग पड़ा है, क्या तुम वह मुझे दे सकते हो?
तो उसने गाड़ी में से बैग निकाला और मुझे देने आया.

कहानी जारी रहेगी.
आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताना!

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