चुदाई की आग में जल रही प्यासी की प्यास-1

Chudai Ki Aag Me Jal Rahi Pyasi Ki Pyas-1

बात कुछ इस तरह है कि मैं अब भी दिल्ली में ही रहता हूँ, आजकल काम में ज्यादा फंसा होने की वजह से समय कम मिलता है तो छुट्टी के दिन ही सोशल मीडिया और ईमेल का उपयोग कर पाता हूँ.Chudai Ki Aag Me Jal Rahi Pyasi Ki Pyas

2-3 महीने बाद मैंने अपना एकाउंट खोल कर चेक किया तो बहुत सारे मेल थे, जिनमें एक मेल किसी सुष्मिता नाम से था, उसने मेरी कहानी पढ़ कर मुझे अपना मेल किया था और साथ में उसने मुझे अपना यूजर आइडी भेजी ताकि मैं उसको सोशल मीडिया पर ऐड कर सकूँ!

मेल बहुत पुराना था तो मैंने सोचा अब तक तो उसको याद भी नहीं होगा कि उसने मुझे ऐसा करने को बोला था, फिर भी अपने उत्तेजित लंड के कहने पर मैंने उसको रिक्वेस्ट भेजी वो तो जैसे इन्तजार में ही बैठी थी. 5 मिनट में मुझे पता चल गया कि उसने मुझे ऐड कर लिया है.

हमने बात शुरू करी तो पता चला वो हौज खास में रहती है, उसकी उम्र 37 साल है और उसके पति जयपुर में जॉब करते हैं, वो भी किसी प्राइवेट कम्पनी में जॉब करती थी, पति दूर था तो चूत में ठरक होना लाजमी था.
उसने बताया कि उसका पति महीने में एक या दो बार ही आता है पर फिर भी उसकी चूत की आग बुझाने में कामयाब नहीं था इसलिए वो जवानी की आग में जल रही थी… चूत की आग उसको अंदर अंदर जला कर राख कर रही थी.
वो चाहती थी कि कोई उसकी इस आग को बुझा कर उसको जवानी की मस्ती में डूबा दे और बात किसी को पता न चले!

पहले उसने ऑफिस में ही किसी से चुदाई करवाने की सोची, फिर इस डर से रुक गई की कहीं किसी को पता न चल जाये, और उसका यह डर मेरे लंड के लिए सही साबित हुआ.

कई दिनों तक बात करने के बाद जब उसको लगा कि मुझसे उसको कोई डर नहीं है, उसने एक पार्क में मिलने का प्लान बनाया.
मैं तो मन ही मन बहुत खुश था.

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आखिर टाइम आ गया, मैं दिए गये टाइम पर बताई हुई जगह पर पहुंच गया पर काफी इन्तजार करने के बाद भी कोई नहीं आया. मुझे लगा कि किसी ने मेरे साथ मजाक किया है और मैं वापस आ गया.
वापस आने के बाद मैंने उसको मेसेज किया जिसमें मैंने काफी कुछ गलत भी बोला.

काफी देर बाद उसका रिप्लाई आया कि वो देखना चाहती थी कि मैं कहीं किसी के साथ तो नहीं आया… ऐसा उसने अपनी सेफ्टी के लिए किया, और उसने मूवी का प्लान बताते हुए मुझे टिकट के फोटो सेंड किया जिसमें टाइम और दिन साफ़ साफ लिखा था.

मेरे मन में आया कि ना जाऊँ पर मेरे लंड ने एक बार फिर से मुझे जाने के लिए मजबूर कर दिया. बताये हुए दिन मैं मूवी हॉल में पहुंच तो गया पर मैं इस सोच में उलझा हुआ था कि पता नहीं कैसी होगी, कैसा फिगर होगा, चुची लटकी हुई होंगी, चूत फटी हुई होगी?
इसी सोच में मूवी का समय हो गया, मुझे लगा टिकट भी नकली है क्योंकि अब तक कोई नहीं आया था.

फिर मैंने सोचा क्यों न चेक किया जाये, चेक करवाने पर पता चला कि टिकट तो सही था. मैंने सोचा क्यों ना मूवी देख ली जाये, इतना दूर आने का कुछ तो फायदा हो!
मैंने अंदर एंट्री की और अपनी सीट पर जा कर बैठ गया, मेरे साइड वाली सीट अब भी खाली ही थी.

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मैं मूवी देखने में बिजी हो गया. करीब आधे घंटे बाद देखा तो एक औरत उसी सीट की तरफ आ रही थी, वो आकर मेरी साइड वाली सीट पर बैठ गई, मैं चुपचाप मूवी देखता रहा क्योंकि अँधेरे में कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था.

पर अब मेरा मन मूवी में लग नहीं रहा था, बड़ी मुश्किल से मैं मूवी देखने का नाटक कर रहा था, कभी कभी मेरा हाथ उसके हाथ से छू जाता पर मैं फ़ौरन अपना हाथ हटा लेता.
इसी तरह मूवी का पहला पार्ट खत्म हुआ और लाइट्स चालू हुई. मैंने उसको देखा तो देखता रह गया… क्या मस्त मस्त चुची थी उसकी, गोरे गोरे बदन पर काला ब्लाउज, ऊपर से गला इतना बड़ा था मानो चुची दिखाने के लिए ही बनवाया हो, हाथ पैर इतने सफ़ेद जैसे कश्मीर से आई हो, होंठों पर लाल लिपस्टिक देख कर लग रहा था मानो किसी का खून पी कर रही हो, कटीली कटीली आँखों में काजल देख कर लग रहा जैसे कोई मॉडल फैशन शो में जाने के लिए तैयार हो कर बैठी हो, उसका फिगर 34-30-36 से कम नहीं था, उठी हुई गांड ऐसी कि मेरे लंड ने तो हिचकोले खाने शुरू कर दिए.

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बड़ी मुश्किल से मैंने लंड को दबा दबा कर कण्ट्रोल किया, पहली बार देखने के बाद मैंने अपनी नजर फेर ली तो उसने मुस्कुराते हुए बोला- पहचाना नहीं क्या?                                                                 “Pyasi Ki Pyas”
मेरे तो जैसे पैर जमीन पर नहीं थे, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि 37 साल की औरत ऐसी भी दिख सकती है, अपने आप को सम्भालते हुए मैंने उससे पूछा- आज भी ना आने का इरादा था क्या?
वो मुस्कुराई और बोली- देख रही थी कितना सबर है तुम्हारे अन्दर!

अब हम बात करने लगे थे तो उसने पूछा- मैं देखने में बुरी हूँ क्या जो तुमने अब तक मेरी तारीफ़ नहीं की?
मैं पहली बार भूल गया था कि क्या बोलना है, खैर जैसे तैसे करके मैंने उसका दिल खुश किया वो भी हंसने लगी, लाइट दोबारा बंद हो गई थी अब मुझमें हिम्मत आ चुकी थी, मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगा. उसको भी अच्छा महसूस हो रहा था तो उसने हाथ छुटाने की कोशिश भी नहीं की.

उसके बदन की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी, अब मेरा मन मूवी में न लगके चुदाई का प्लान बनाने में लग गया था, कैसे उसको चोदना है, कहाँ किस करना है, कैसे पकड़ना है, कैसे चुचे चूसने हैं, कहाँ काटना है, ये सब मेरे दिमाग में घूम रहा था.               “Pyasi Ki Pyas”

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इसी बीच मूवी खत्म हो गई, हम बाहर आ गये, उसने पूछा- कैसी थी मूवी?
मैंने बोला- ठीक थी!
तो वो मुस्कुराने लगी, बोली- मूवी में ध्यान भी था या बस ऐसे ही बोल रहे हो?
मैं समझ गया कि उसका इशारा किस तरफ है..

खैर मूवी के बाद हमने खाना खाया और बात करते रहे. इसी बीच मैंने पूछ लिया- कहाँ चलना है यहाँ से?
वो बोली- तुम्हें तो बहुत जल्दी है लगता है?
और मैंने हाँ में सर हिला दिया और पूछा- आपको जल्दी नहीं है क्या?
इतना कहना था कि उसके गोरे गोरे गाल शर्म से लाल हो गये.                                 “Pyasi Ki Pyas”

उसने बात काटते हुए इधर उधर की बात शुरू कर दी पर मैं भी कहाँ मानने वाला था, फिर से वही सवाल कर दिया, इस बार उसने जवाब में सर हिलाया और बोली- जल्दी तो है पर आराम से शाम तक का वक़्त है हमारे पास… अगर तुम्हें कोई काम हो तो तुम जा सकते हो, फिर कभी आ जाना, मुझे कोई परेशानी नहीं होगी.
मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा- इतने हसीन साथी का साथ छोड़ कर कैसे जा सकता हूँ?
तो वो फिर से मुस्कुरा दी.

अब उसने चलने का इशारा किया और मैं उसके साथ चल दिया.
चलते चलते उसने पूछ तुम्हें कोई जल्दी ना हो तो तुम आज रात मेरे घर रुक सकते हो!
मेरे तो जैसे मन में लड्डू फूट रहे थे, मैं आसानी से रुकने के लिए मान गया.

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