देवर जी ऐसे मत करो कुछ कुछ होता है

Devar Ji Aise Mat Karo Kuchh Kuchh Hota Hai

मेरे प्यारे दोस्तों मेरा नाम विशाल है, मैं दिल्ली में रहता हु, मेरी शादी को हुए अभी चार महीने ही हुए है, मैं अपनी वाइफ के साथ एक छोटे से किराये के मकान में रहता हु, मेरे निचे के फ्लोर में एक एक कपल रहता था, उनके दो छोटे छोटे बच्चे थे और भैया एक कंपनी में जॉब करते थे, मैं उनको भाभी और मेरी पत्नी उनको दीदी कहती थी, वो काफी व्यबहार की औरत थी, वो देखने में काफी सुन्दर और मध्यम कद का शरीर था, उनका सेक्सी बदन हमेशा वो अपने और खिचती थी, काफी घुले मिले रहते थे, कभी कभी हमलोग एक ही बेड पे एक ही रज़ाई में घंटो बैठकर बाते करते थे, Devar Ji Aise Mat Karo Kuchh Kuchh Hota Hai.

मेरी पत्नी एक दिन बोली की एक बात जानते है, निचे जो दीदी रहती है वो कहती है, की तुम्हारे भैया मुझे दो तीन महीने में एक बार सेक्स करते है, मैं हैरान हो गया एक मैं था जो रोज रोज सेक्स करता था, ऐसा हो सकता है क्या जो दो तीन महीने में एक बार सेक्स करता हो? जबकि भाभी का भरा हुया बदन जब वो साड़ी पहनती थी तो गजब की सुन्दर लगती थी, साइड से आँचल की निचे ब्लाउज में उनकी चूचियाँ तनी हुयी रहती थी,पेट उनका सुराही के तरह लगता था और साड़ी जब वो कमर के आस पास घूमता तो उनकी चूतड़ बहार की और होता था, गजब की सुन्दर थी, मुझे बड़ी ही हॉट लगती थी |

कुछ दिन बाद वो निचे से मकान खाली करते वो कुछ दूर पे शिप्ट हो गयी, मैं एक दिन सुबह जब ऑफिस के लिए निकला तो काम का बहाना बना के थोड़ा पहले निकल गया, और उनके घर पहुंच गया, उनका घर दो फ्लोर का था ऊपर वो रहती थी और निचे उनका मकान मालकिन रही थी मकान मालकिन सुबह सुबह चली जाती थी पति पत्नी क्यों की वो दोनों स्कूल में टीचर थी. भैया को भी दूर जाना होता था इसलिए वो 8 बजे ही घर से निकल जाते थे, और भाभी के दोनों बच्चे स्कूल चले जाते थे, ये बात भाभी ने बताई, वो अकेली घर में थी, मैं जब गया तो वो थोड़ा हड़बड़ा गयी क्यों की आज मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं थी.                                       “Devar Ji Aise Mat Karo”

मैं उनके यहाँ बेड पे बैठ के बाते करने लगा, फिर वो चाय बनाई फिर दोनों साथ साथ चाय पी, मुझे लग रहा था की आज मौक़ा है उनको चोदने का, पर बात कहा से शुरू करूँ ये बात समझ नहीं आ रहा था, इस वजह से काफी देर हो गया, मुझे ऑफिस भी जाना था, इस वजह से जल्दी जल्दी सोच रहा था की उनको बोल ही दू पर ये समझ नहीं आ रहा था की कहा से बात स्टार्ट करू और क्या कहु? मैंने हिम्मत करके बात छेड़ दी मैं कहा भाभी आज आप बड़े ही सुन्दर लग रही हो, तो वो बोली क्यों आज ही क्यों क्या कल नहीं लग रही थी? और हसने लगी, मैंने कहा नहीं नहीं आप तो रोज ही सुन्दर लगती हो, पर आज आप ज्यादा सुन्दर लग रही हो, वो बोली अच्छा जी, आपके भैया तो आज कह रहे थे तुम सुन्दर नहीं हो, पर आप तो तारीफ़ कर रहे है, मैंने कहा तारीफ तो उन्ही को किया जाता है जो तारीफ़ के काबिल रहता है. फिर मैंने कहा आज तो आपको चूम लेने का मन कर रहा है,                             “Devar Ji Aise Mat Karo”

वो बोली अच्छा कल चूम लेना एक बार मैं आपके भैया से पूछ लुंगी फिर या तो आप कल अपने पत्नी के साथ आना और चूम लेना, वो हंस रही थी, मुझे थोड़ी घबराहट हुयी पर मैं अपने आप को सम्हाला, फिर बोला उनके सामने नहीं चूमना अगर अभी देती हो थो ठीक है नहीं तो कोई बात नहीं, तो वो बोली क्या डर गए? हिम्मत नहीं है उन दोनों के सामने चूमना मैंने कहा नहीं चूम सकता उनके सामने, वो बोली अच्छा जी मुझे अकेले चूमने में मज़ा आएगा, मैंने कहा आपकी मर्ज़ी मुझे तो आज आप बड़ी ही सुन्दर लग रही हो और चूमने का मन कर रहा है इसमें क्या बुराई है, वो बोली हाँ जी कोई बुराई नहीं है किसी दूसरे की पत्नी को चूमने में. मैंने कहा कोई जबरदस्ती नहीं है, आपकी चीज़ है इसलिए आपसे पूछ रहा हु.                                                               “Devar Ji Aise Mat Karo”

वो खड़ी हो गयी और गेट के पास जाके इधर उधर देखि फिर कमरे का दरवाजा थोड़ा सटा दी करीब 6 इंच दरवाजा खुला था, और वो दीवाल के साइड में खड़ी हो गयी ग्रीन सिग्नल था, मैं उनके पास पहुंच गया और उनकी आँखों में देखा वो चूमने का इंतज़ार कर रही थी, पहले मैंने उनके सर पे किश किया फिर गाल पे फिर होठ पे, मेरा लंड खड़ा होने लगा, मैं किश कर रहा था, मेरा हाथ उनके चूची पे पड़ा और दबा दिया, वो सिहर गयी वो बोली ये गलत है, प्लीज ऐसा मत करो और मैं फिर दोनों चूचियों को दबाने लगा,और किश कर रहा था, वो परेशान हो रही थी और सिहर रही थी अंगड़ाई ले रही थी, फिर वो बोली ये बात मैं आपके पत्नी को और भैया को बताउंगी, मैं डर गया और उनको छोड़ दिया बोला प्लीज मत बताना उनलोगो को, तो वो बोली नहीं नहीं बताना पडेगा, की आप क्या करते हो जब मैं अकेली होती हु, मैं वह से जल्दी ही निकल गया.                                       “Devar Ji Aise Mat Karo”

ऑफिस पहुंचा मुझे किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था डर रहा था पता नही क्या होने बाला है, करीब २ घंटे बाद फ़ोन आया और रिसेप्शन से कहा की आपके लिए फ़ोन है मैं फ़ोन पिक किया भाभी थी, मैं हैल्लो कहा उधर से बोली हां मैं बोल रही हु, आपने क्या किया मेरे साथ, मैंने कहा भाभी मैंने तो कुछ भी नहीं किया जो गलती हो गयी माफ़ करना अब कुछ ऐसा नहीं होगा, बोली क्यों ऐसा नहीं होगा मैं चाहती हु की ऐसा हो, आप जल्द मेरे पास आ जाओ नहीं तो सच में बता दूंगी अगर नहीं आये तो मैंने कहा ठीक है मैं आता हु, मैं ऑफिस से छुट्टी लिया बहन बना के की वाइफ का तबियत ख़राब है मैं २ घंटे में आ जाऊंगा और सीधा उनके घर पहुंचा,                    “Devar Ji Aise Mat Karo”

जैसे ही उनका घर पहुंचा वो बोली अंदर आ जाओ मैं गया तो भाभी बेड पे बैठी थी, मैं वह जा के खड़ा हो गया तो वो बोली क्यों अब ऐसा नहीं करोगे करना पडेगा मैं जो चाहूंगी करना पडेगा और वो कड़ी हो गयी मेरे होठ को अपने होठ से जीभ से चाटने लगी, मुझे कस के पकड़ ली और किश करने लगी, मैंने कहा अब तो किसी को नहीं बताओगे, बोली नहीं मेरी आग बुझाते रहो किसी को नहीं बताउंगी, मैं उनको सहयोग करने लगा, वो अपने ब्लाउज का हुक खोल दी और मेरा बाल पकड़ की अपने ब्रा के बीच में मेरे मुह को चिपका ली और रगड़ रही थी, मुझे सांस लेने में कठिनायी होने लगी फिर मैंने किसी तरह से उन्हें छुड़ाया, फिर मैं उनके बूब को दबाने लगा और ब्रा का हुक खोल दिया,

बड़ा बड़ा दोनों चूच मेरे सामने लटक रहे थे बारी बारी से मैं पी रहा था और दबा रहा था, वो आह आह आह आह ऊह ऊह ऊह कर रही थी, मेरे राजा मुझे शांत कर दो प्लीज, मैंने चुदना चाहती हु, कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी, पी लो मेरा चूच पी लो मेरा चूच एयर किश कर रही थी मेरे माथे को और उंगलिया फिरा रही थी मेरे बालो पे सारे का पल्लू निचे गिरा हुआ था मैंने उनकी साडी खोल दो और पेटीकोट का नाड़ा खीच दिया, वो सिर्फ ब्लैक कलर की पेंटी में थी.

वो बेड पे लेट गयी मैंने भी उनके ऊपर चढ़ के किश करने लगा वो मेरे लंड को पकड़ रही थी पेंट के ऊपर से फिर मैंने पेंट खोल दिया मैंने सरे कपडे उतार दिए वो तो मेरे लंड को चार पांच बार ऊपर निचे की फिर मुह में लेके आइसक्रीम की तरह चाटने लगी, उह्ह्ह उह्ह्ह उह्ह्ह कर रही थी, फिर मैंने उनके छूट पे जीभ रखा वो सिहर गयी मैं उनके छूट के चाटने लगा, छूट से नमकीन नमकीन पानी निकल रहा था, वो सी सी सी सी सी कर रही थी. फिर मैंने उनके होठ को चूसा उनके कांख में बाल थे दोनों हाथ को ऊपर उठा दिया गजब की दिख रही थी,                                                                                              “Devar Ji Aise Mat Karo”

बड़े बड़े चूच, कांख में बाल, मोटी मोटी बाहें गोरा शरीर, गुलाबी होठ मैंने अपना लंड को छूट के छेद पे रखा और पेल दिया छूट में , उनकी आवाज़ निकलकी “हाय हाय हाय” बस क्या था धक्के पे धक्का लगाए जा रहा वो मदहोश हो गयी गांड उछाल उछाल के चुदवा रही थी, मैंने उनको कई पोजीशन में चोदा, करीब १ घंटे तक चोदने के बाद दोनों खल्लाश हो गए फिर करीब दस मिनट तक पकड़ के सोये रहे फिर वो रुमाल गीला करके मेरे मुह पे लगे लिपिस्टिक को पोछी, और बोली ये बात किसी को मत बताना, हम दोनों आज से एक दूसरे की वासना को इसी तरह से शांत किया करेंगे मुझे बहुत मज़ा आया, जब भी मन करे सुबह ९ बजे २ बजे के बीच आ जाना मैं हमेशा इंतज़ार करुँगी |