देवर से चुदवाकर सर्दी से भरा दिन काटा-2

Devar se chudwakar shardi se bhara din kata-2

इसी समय मेरी चूत अपना रस छोड़ने लगी। महेश तो जैसे बेकाबू हो गया था। उसकी हरकते बता रही थी की आज वो मुझे कई तरह से चोदेगा। 5 7 मिनट मेरा देवर जीभ लगाकर मेरी बगलों को चाटता रहा। फिर मादक तरीके से मेरे दूध मुंह में लेकर दबाने लगा। इस तरह से करने से मुझे बड़ी राहत मिल रही थी। बाहर बहुत सर्दी थी इसलिए महेश की सारी शरारते मुझे बहुत भा रही थी। मेरी चूची उसके मुंह में घुसी हुई थी। वो बस चूसे जा रहा था। रुकना तो जैसे उसको आता ही नही था। मैं “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” बोलकर सिसकियाँ लेने लगी। लाल पेटीकोट के भीतर मेरी पेंटी चूत के रस से गीली हो गयी थी।

“अह्हह्हह… महेश!! मेरे देवर!! चूसो और चूसो मेरे स्तनों को!! आज मुझे अपनी बीबी समझकर चोदो तुम” मैं कहने लगी

महेश चूसते चूसते सिर हिला दिया। फिर हाथो से दूसरी वाली चूची को दबाने लगा। फिर उसने दूसरी चूची भी मुंह में ले ली और ऐसे चूसा जैसे मेरे हसबैंड पीते थे। मेरे अंदर काम की ज्वाला धधक गयी। मैंने दोनों हाथो से महेश को पकड़ लिया और उसे अपने सीने में स्तनों के उपर दबाने लगी। ऐसा करने से उसे बड़ा अच्छा लगा। मेरे दूध की निपल्स को महेश से उँगलियों से बड़ी देर तक मसला और मेरी चींखे निकलवा दी। फिर बड़े ही कामुक अंदाज से मेरी लाल पेटीकोट की डोरी खोल दी और उतार दिया। महेश मेरी गीली रस से सनी पेंटी को देखने लगा। मैं झेंप गयी। सोचने लगी की क्या सोचेगा की उसकी भाभी कितनी बड़ी चुदक्कड औरत है। पराये मर्द ने दूध क्या पीया, चूत में ही झड़ गयी।

“पैर खोलिए भाभी!!” महेश बोला

मैंने ऐसा ही किया। फिर इकदम से वो मेरी चूत को पेंटी के उपर से चाटने लगा। मेरी भरी हुई योनी की दरारे उपर से दिख रही थी। महेश जल्दी जल्दी जीभ लगाने लगा। मेरे बदन में सिर से पाँव तक बिजलियाँ कौंधने लगी। जिस्म तपने लगा। मैं काम की अग्नि में जल रही थी। चुदने को प्यासी हो गयी थी। इसी बीच महेश ने जल्दी से मेरी पेंटी पर अधिकार कर लिया और जल्दी से उतार दी। मैं शर्म से पानी पानी होने लगी। जिस मेरे खूबसूरत भोसड़े को आजतक मेरे पति से देखा था वो आज मेरा देवर महेश देख रहा था। मेरे बाल सफा चिकने और खूबसूरत भोसड़े का दीदार आज महेश कर रहा था।

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कितना खूबसूरत था मेरा चूत का बगीचा। वो टुक टुक करके देखे जा रहा था। मेरी चूत का बड़ा सा दाना, चूत के खुले पट(ओंठ) उसका स्वागत तहे दिल से कर रही थी। मेरा दिल अब तेज तेज धडक रहा था। फिर उसने वही किया जिसका बड़ा इंतजार था। मेरी गुलाबी चिकनी बुर को देखता रहा….देखता रहा, फिर उस पर कूद पड़ा। जीभ लगा लगाकर ऐसे चाटने लगा जैसे कोई चाशनी से भरी गुझिया खाने को मिल गयी हो। मैं अंगराई लेकर “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..”” करने लगी। देवर तो जीभ लगा लगाकर चाटने लगा और मुझे अपनी गांड उठाने पर मजबूर कर दिया। इसी कमोत्त्जेना में मैंने उसके सिर को पकड़कर चूत में दबा दिया। बहुत आनन्द मिला मुझे।

“भाभी!! आज आपकी चूत की चटनी को पी लूँगा” वो बोला

“पी लो महेश!! मैं तो कबसे इस पल का इंतजार कर रही हूँ” मैंने कहा

उसके बाद वो जीभ लगा लगाकर मेरी चूत की चटनी को चाटने लगा। मेरा रोम रोम पुलकित हो रहा था। मेरे जिस्म के सबसे सम्वेदनशील हिस्से पर वो ऐसे चाट रहा था की मुझे सर्दी में गर्मी महसूस होने लगी। देवर ने तो दिसम्बर के मौसम में जून वाला मजा दे दिया। मुझे पूरे बदन में बिजली का करेंट सा लगने लगा। जैसे हजारो चींटे मुझे एक साथ काट रहे हो। मैं भी अपने दोनों पैरो को अच्छे से खोलकर चूत की शराब पिला रही थी। महेश ने कोई 15 मिनट तक मेरी चुद्दी चाट चाटकर लाल कर दी। फिर मेरे उपर लेटकर चूत में लंड घुसाकर जल्दी जल्दी चोदने लगा। महेश का लौड़ा 8” का था और 3” मोटा था। जल्दी जल्दी वो मुझे पेलने लगा। गपागप चोद रहा था।

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““हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….यस यस महेश !! फक मी सुपर हार्ड.. सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” मैं कहने लगी

अब वो और जोश में आ गया और इतनी तेज तेज चूत में लंड सप्लाई करने लगा की पूरा पलंग चर्र चर्र करने लगा। मेरी चूत का तो हलुवा बना रहा था। महेश का लंड बड़े अच्छे ने मेरी बुर का भंजन कर रहा था। वो मेरे दोनों हाथो को पकड़कर पका पक मुझे पेल रहा था। मैं भी पूरी तरह से उसकी गिरफ्त में आ गयी थी। मेरी 34” की सुडौल और तनी चूचियां पुरे गर्व से किसी गेंद की तरह उछल रही थी। महेश मेरी फुद्दी की तरफ देख देखकर चोद रहा था।

“ले रंडी!! आज तेरी चूत को इतना फाडूगा की तुजे आज के बाद कभी सर्दी नही लगेगी। जब भी ठंड लगे मेरे पास लंड खाने आ जाना भाभी जान!!” महेश बोला और उसने मेरे बाए गाल पर एक हल्का सा किस कर दिया। फिर से चूत में घपाघप लंड दौड़ाने लगा।

कितनी अजीब बात थी अपने ही कमरे में अपने ही बिस्तर पर गैर मर्द से चुद रही थी। तरह तरह की उलटी सीधी बाते मेरे दिमाग में दौड़ रही थी। महेश मेरे बदन को किसी मुर्गी की तरह नोच रहा था। शायद मैं भी ऐसा ही चाहती थी। उसके सामने पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर पड़ी हुई थी। वो मेरी चूत के दाने को ऊँगली से घिस घिसकर लंड डालकर चोद रहा था। मैं सिर्फ “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की सेक्सी आवाजे निकाल रही थी। मेरी एक एक हड्डी और एक एक पसली चटक रही थी। महेश का बदन मुझसे भारी और विशाल था। वो मुझे किसी खिलौने की तरह खा रहा था। कभी मेरी बायीं टांग उठाकर चोदता, तो कभी मेरी दाई टांग को अपने कंधे पर रखकर पेलता। अब तक वो मेरी बुर में 100 150 धक्के तो आराम से दे चूका था। फिर उसने अपना लंड निकाल लिया और किनारे ही लेट गया। उसका लौड़ा बड़ा गुलाबी गुलाबी और तना हुआ दिख रहा था।

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“ओह्ह भाभी!! तेरी चूत का जवाब नही!! कितनी चिकनी बुर है तेरी!! मेरा लंड तो दौड़ता ही चला गया उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… महेश बोला

मैं बैठ गयी और उसके लंड से खेलने लगी। फिर हाथ से मुठ दे देकर मुंह में लेकर चूसने लगी।

“अई…अई…अई…..मजा आ रहा है भाभी!! चूसो!! इसे तुम अच्छे से चूसो” मेरा देवर महेश कहने लगा

मैं भी मुंह में ले लेकर हाथ से मुठ दे देकर चूस रही थी। इस लंड ने मुझे जन्नत की सैर करवाई थी। अब मेरा नम्बर था इसे मजा देने का। मैं लंड के साथ साथ महेश की गोलियां भी अच्छे से चूस दी। फिर उसने मुझे कुतिया बनाकर मेरी गांड चोदी। दोस्तों मेरी सर्दी इसी तरह दूर हुई। जब जब ठंड लगती थी देवर को कमरे में ले जाकर लंड खा लेती थी।

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