दोस्त की गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स-2

Dost ki girlfriend ke sath sex-2

इस बात से मैं बहुत ही टूट सा गया क्योंकि मेरे खड़े अरमानों पर पानी फिरा जा रहा था.

मैं उदास सा हो गया और चुपचाप वापिस कुर्सी पर बैठ गया. ज्योति बार-बार बोल रही थी कि सॉरी फील मत करना … तुम्हारी तो कोई भी लड़की गर्लफ्रेंड बन जाएगी … बस थोड़ी कोशिश किया करो.

मैं बिलकुल चुप था … ज्योति को मेरी खामोशी बिल्कुल भी भा नहीं रही थी. वो बार बार मुझसे बात करने की कोशिश कर रही थी … लेकिन मेरा तो दिल ही टूट गया था.

थोड़ी देर बाद मेरा वो कमीना दोस्त आयुष आ गया … आते ही कमीने ने बोला- ले बे महेंद्र ये सीडी ले … अब जल्दी से सॉफ्टवेयर इनस्टॉल कर दे.

उस चूतिए को कौन बताता कि तेरी गर्लफ्रेंड के चक्कर में महेंद्र के खुद के सॉफ्टवेयर उड़ गए हैं.

मैंने सॉफ्टवेयर वाली सीडी ली और सारे के सारे सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में इनस्टॉल कर दिए. कम्पयूटर का सारा सेटअप करने के बाद मैंने अपने दोस्त को बाय बोला और उसके घर से तुरंत अपने आपको अनइन्सटॉल कर लिया.

प्रिय दोस्तों उस दिन मेरा लंड तरसता ही रह गया था. मैं 16 मार्च को दोस्त की गर्लफ्रेंड ज्योति को चोदने में असमर्थ रहा. वो मनहूस तारीख मुझे जीवन भर के लिए दिमाग में बैठ गई थी.

फिर 20 मार्च 2019 शनिवार 09:45 सुबह का समय था.

टन-टन-टन …
टन-टन-टन …
मैं बड़बड़ाया- कौन भोसड़ीवाला बार-बार दरवाजे का घंटा बजा रहा है.
“हैलो दरवाजा खोलियो महेंद्र गांधी..!”

मैंने सोचा कि यार ये आवाज तो कुछ जानी पहचानी-सी लग रही है, मैंने पूछा- कौन है?
“महेंद्र गांधी मैं ज्योति हूं …”

मैंने उसका नाम सुनते ही फटाफट दरवाजा खोल दिया और वो कमरे के अन्दर आ गयी. मैंने उसे हाय बोला और बैठने को कहा.

ज्योति हाय बोली और सोफे पर बैठ गयी. मैंने उसे पीने के लिए पानी दिया और आने का कारण पूछा.

ज्योति ने पानी पीने के बाद कहा- कल तुम कुछ ज्यादा ही उदास हो गए थे, इसलिए मैं तुमसे मिलने के लिए आ गयी. चूंकि तुम मेरे ब्वॉयफ्रेंड के दोस्त हो, तो मेरे भी दोस्त हुए ना!
मैंने कहा- चलो अच्छी बात है कि तुम मिलने आ गयी … मेरा तो रात भर से तुम्हारे बिना मन ही नहीं लग रहा था.
ज्योति- महेंद्र, तुम कौन से हमेशा से मेरे साथ रहते हो, जो रात भर तुम्हारा मेरे बगैर मन नहीं लगा था?
मैंने कहा- ज्योति तुम मेरे दिल को भा गयी हो.

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यह सुनकर ज्योति सोफे से उठकर मुझे कसकर अपने गले से लगा लिया और बोली- मैं तुम्हारे सच्चे प्यार के लायक नहीं हूं … क्योंकि मेरे आयुष के साथ शारीरिक सम्बन्ध हैं.
मैंने कहा- ज्योति, मुझे घंटा फर्क पड़ता है, जो तुम मुझे ये बता रही हो … मैं तुमसे प्यार करता हूं.

ये सुनकर ज्योति गदगद हो गयी और मेरे गालों पर चुम्बन ले लिया.

प्रतिउत्तर में मैंने भी पहले तो उसके माथे पर चुम्बन लिया, फिर उसके दोनों गालों को चूमने लगा. वो चुपचाप मेरे साथ लिपटी हुई थी.

मैंने बिना समय बर्बाद किए उसे बेड पर लेटा दिया और उसके गालों को चूमने लगा. वो मुझे अपनी बांहों में भरे हुए थी. कुछ समय गालों को चूमने के पश्चात मैंने अपने होंठों को उसके लाल-लाल रसीले होंठों पर जमा दिए.

मैं अमेरिकन स्टाइल में उसके होंठों को दबा-दबा कर चूस रहा था. कुछ देर तो वो बिना कुछ किए चुपचाप लेटी रही. लेकिन अब वो भी मेरा सहयोग देने लगी. मैं लगातार उसके होंठों पर जीभ घुमा-घुमा कर उसके लाल रसीले होंठों का रसपान कर रहा था.

दस मिनट तक लगातार उसके होंठों को चूसने के बाद मैंने उसके कानों को चूमना शुरू कर दिया. अब वो मचलने लगी. होंठों पर चुम्बन करने के बाद वो गर्म भी हो रही थी, लेकिन एकाएक कानों को चूमने पर वो ओर भी गर्म होने लगी.

ज्योति के मुँह से सिसकारियां छूट रही थीं- आआआआ … उम्हह … आआह …

उसके कानों पर चुम्बन करने के साथ-साथ मैं अपने हाथ में ज्योति का हाथ लेकर मसल रहा था. उसकी कानों की लौ को चूमने के बाद मैंने थोड़ा नीचे आने का सोचा.

मैंने एकाएक उसके गले पर चूमना शुरू कर दिया. अब तो ज्योति का कोई हाल ही नहीं था, वो पूरी तरह गर्म हो गई थी. मैं लगातार उसके गले व कानों के नीचे अपने गर्म होंठों से चुम्बन ले रहा था.

फिर मैंने उसे थोड़ा ऊपर उठाकर उसका कुर्ता उतार दिया. उसने दिखाने मात्र के लिए थोड़ा बहुत विरोध किया. लेकिन वो चुपचाप लेटी रही.

कुछ ही समय में ज्योति सिर्फ ब्रा और सलवार में मेरे सामने लेटी हुई थी. उसकी ब्रा से उसके गोल-गोल स्तनों के नुकीले दूध साफ़ दिखाई दे रहे थे.

वो बोली- महेंद्र सिर्फ देखता ही रहेगा या मेरे दूध को दबाएगा भी.

मैंने बिना कोई जवाब दिए, अपने एक हाथ को धीरे-धीरे उसके गोल-गोल स्तनों पर घुमाना शुरू कर दिया. ज्योति के मुँह से सिसकारियां छूट रही थीं- आआआह … उम्मह उम्मह मेरे बोबों को पी ले महेंद्र राजा.

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मैंने यह सुनकर झट से उसकी ब्रा को फाड़ दिया. अब ज्योति के मम्मे आजाद हो गए थे. ज्योति के स्तन एकदम गोरे थे. उसकी चुचियों को ब्रा में से ही रगड़ने के कारण वे एकदम लाल हो गयी थीं.

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मैंने बिना देर किए उसकी एक चुची को अपने मुँह में भर लिया और होंठों में दबाकर चूसने लगा. उसकी दूसरी चुची को प्यार से अपने हाथ से मसलने लगा.

ज्योति सिसक रही थी- आआआह … महेंद्र मेरी जान … आह दबा-दबा कर पी ले मेरी रसभरी चुचियों को …

मैं बारी-बारी से उसकी गोरी-गोरी चुचियों को अपने मुँह में लेकर चूम और चूस रहा था. ज्योति मेरे बालों में अपना हाथ फिरा रही थी और मेरे मुँह को अपने स्तनों पर जोर-जोर से दबा रही थी.

मैं लगभग दस मिनट तक उसकी चुचियों को अपने हाथों व होंठों से दबाता रहा. उसके बाद मैं उसके पेट पर आ गया.

मैंने उसके पेट पर जैसे ही अपने हाथ को रखा, तो एकाएक उसकी सिसकारी छूट गई- आआआह उम्म्मह..

मैं अब कहां रुकने वाला था. मैंने उसके पेट पर अपने हाथ व होंठों को घुमाना शुरू कर दिया. उससे अब रुका नहीं जा रहा था, क्योंकि वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी. उसकी लगातार सिसकारियां छूट रही थीं.

वो बार-बार बोल रही थी- डियर महेंद्र, मुझे अब और मत तड़पा … मुझे चोद ले महेंद्र … आआआह मेरी चूत में अपने लंड को डाउनलोड कर दे.

मैंने कहा- कुछ देर और रुक जा मेरी जान … सिस्टम को रिफ्रेश तो कर लेने दे पगली.

अब पोजिशन ये थी कि मैं ज्योति की दोनों टांगों के बीच में था. यारों क्या चूत थी उसकी. ज्योति की चुत एकदम फूली हुई गोलाकार व बदामी रंग की थी. उसकी चूत पर हल्के हल्के भूरे बाल थे. मैंने उसकी चूत के अगल-बगल व जाघों पर चुम्बन लिया, तो वो उछल पड़ी.

मैंने कसकर ज्योति को पकड़ लिया और उसकी चूत पर चुम्बन करने लगा. ज्योति तो बेहाल हो चुकी थी. वो सिसक रही थी … और चुदने के लिए तड़प रही थी.

मैंने अपनी एक उंगली ज्योति की चूत में डाल दी. अपनी एक उंगली को मैं उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा. साथ ही मुँह से मैं ज्योति की नाभि के आसपास चूमने लगा. मैंने अपनी जीभ ज्योति के नाभि में डाल दी.

अब तो ज्योति उछल पड़ी और खुद को मुझसे छुटाने की कोशिश करने लगी.

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मैंने अपनी दूसरी उंगली भी ज्योति की चूत में डाल दी.
ज्योति की चूत बहुत ही टाइट थी … मैं दोनों उंगलियों से ज्योति की चुदाई कर रहा था और ज्योति बेचारी सिसक रही थी- आआआह … मेरी चूत फट जाएगी महेंद्र!
मैंने कहा- ऐसे कैसे फट जाएगी … कोई पहली बार थोड़ी ना घुसी है.

लगातार पांच मिनट तक दोनों उंगलियों से उसकी चुदाई करने पर ज्योति की चूत ने पानी छोड़ दिया.

फिर मैंने ज्योति की चूत का रस अपने लंड पर लगाया … ज्योति मेरे लंड को देख कर घबरा गयी और बोली कि आह … इतने बड़े लंड से तो मैं मर ही जाऊँगी.

मैंने ज्योति की दोनों टांगों को फैलाकर अपने लंड को उसकी चूत पर रखा. फिर मैंने धीरे से ज्योति की चूत में अपना लंड डालना शुरू किया.

चूंकि वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और उसकी चूत भी पूरी तरह उसके चुत के रस से चिकनी थी, इसलिए मेरा लंड बिना कोई रुकावट के उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा अन्दर चला गया.

उसकी चीखें निकलना शुरू हो गईं, इसलिए मैं थोड़ा रुका और उसे चूमने लगा.

अब मैं रुकने की हालत में नहीं था, इसलिए मैं अपने लंड को ज्योति की चूत में अन्दर-बाहर करने लगा.

इससे उसको भी कुछ पल बाद आराम मिलने लगा और वो भी चुदाई में मेरा भरपूर सहयोग देने लगी. वो अपने चूतड़ों को उठा-उठा कर चुदवा रही थी … सच में बहुत ही मजा आ रहा था.

थोड़ी देर बाद वो जोरदार चीख के साथ झड़ गयी. मैं लगातार चुदाई करता रहा. कोई दस मिनट की चुदाई के बाद मैंने भी अपना वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया.

जब मैं उसके ऊपर से हटा, तो ज्योति ने दुबारा मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मुझे अपनी बांहों में कसकर जकड़ लिया.

कुछ समय तक ऐसे ही एक दूसरे पर पड़े रहने के बाद हमने अपने-अपने कपड़े पहने.

अब जब भी मुझे टाइम मिलता है, मैं दोस्त की गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स, पलंगतोड़ प्यार करता हूं.

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