दोस्त की माँ को दोनों ने ठोका-3

Dost ki maa ko dono ne thoka-3

अब मैंने एक हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और अपने हाथ को घुमाने लगा. वो मुझसे कुछ नहीं बोल रही थी, लेकिन मुझे अब वो जींस की पेंट पहनने से बहुत ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी और उस बात को वो बहुत अच्छी तरह से समझ गयी इसलिए वो मुझसे बोली कि अगर तुम्हे गर्मी महसूस हो रही है तो तुम अमित का ट्राउज़र पहन लो, मैंने तुंरत कहा कि हाँ यह ठीक है. अब में फट से खड़ा हो गया वो मेरे पीछे आई और उसने मुझे अमित का ट्राउज़र दे दिया और टी-शर्ट भी दे दी.

मैंने उसके सामने ही अपनी शर्ट को उतार दिया वो इस पल की राह देख रही थी क्योंकि में हर रोज कसरत करता हूँ इसलिए मेरा शरीर और मेरे मसल्स बहुत अच्छे आकार के थे और जैसे ही मैंने अपनी शर्ट को उतारा वो मेरा कसा हुआ बदन को देखती ही रह गयी. उसने पास आकर मेरी छाती पर हाथ लगाया और बोली कि तुम्हारा बदन तो मस्त है.

तभी अमित ने उसे आवाज देकर बुला लिया और में कपड़े बदलकर वापस चला गया तो नेहा बैठी हुई मेरी राह देख रही थी. अब उसे भी मेरे साथ चुदाई करने की इच्छा हो रही थी और में जैसे ही कुर्सी पर बैठा वो फट से मेरी गोदी में आकर बैठ गयी और मैंने भी कपड़े बदलते समय अपनी अंडरवियर को उतार दिया था इसलिए मेरा लंड नेहा की गांड का ज़्यादा अच्छी तरह से महसूस हो रहा था और अब में उसकी जाँघ पर हाथ फेर रहा था और धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को ऊपर उठा रहा था.

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तभी नेहा ने मुझसे कहा कि अभी नहीं, अगर अचानक से अमित यहाँ पर आ गया तो वो हमे इस हालत में देख लेगा. अब में उनके कहते ही तुरंत रुक गया और फिर मैंने अमित की तरफ देखा तो वो अपनी एक किताब को अपने सामने रखकर पढ़ाई करने के बहाने से मुठ मार रहा था. अब मैंने नेहा की वो बात मान ली और में बंद हो गया.

दूसरे दिन मैंने उसके घर पर जाने से पहले ही अमित को सब कुछ बहुत अच्छी तरह से समझा दिया जिसको वो समझ भी चुका था और जब में उसके घर पर गया तो अमित ने मुझे देखकर अपनी मम्मी के सामने एक झूठा बहाना बनाया और कहने लगा कि में दो घंटे बाद आ जाऊंगा कहकर वो तुरंत बाहर चला गया.

अब नेहा उसकी बात को सुनकर बहुत खुश होकर मेरी गोदी में आकर बैठ गई अब तो हम दोनों के सामने खुला मैदान था हमे रोकने देखने वाला उस समय पूरे घर में कोई भी नहीं था. आज हम दोनों अपनी मर्जी में मालिक थे और अपनी मर्जी का कोई भी काम कर सकते थे, हमे किसी से डरने की जरूरत नहीं थी. अब मैंने जल्दी से आगे बढ़कर उसकी टी-शर्ट को ऊँचा उठा दिया और अब ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा और निप्पल को निचोड़ने लगा.

नेहा भी उस वक़्त का बहुत इंतज़ार कर रही थी और वो मुझसे कुछ भी नहीं बोली बस सिसकियाँ लेती रही और में अपने काम में लगा रहा. अब मैंने आंटी की टी-शर्ट को उतार दिया और उसके बाद ब्रा को भी उतार दिया, वाह क्या मस्त बूब्स थे एकदम नरम नरम, गोरे गोरे बहुत मोटे में तो उसे ज़ोर से मसलने लगा.

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फिर वो बोली कि प्लीज आह्ह्ह्हह्ह थोड़ा धीरे से करो मेरे राजा आईईईई मैंने अपना हाथ उनके बूब्स पर थोड़ा ढीला कर दिया, वाह क्या निप्पल थी एकदम लाल रंग की और अंगूर के दाने जैसी. वो बिल्कुल कड़क हो गयी थी और अब मैंने उसकी स्कर्ट को भी उतार दिया.

मैंने देखा कि उसने आज सफेद कलर की पेंटी पहन रखी थी. उसकी गोरी भरी हुई जाँघ को देखकर में तो एकदम पागल हो गया था और में उनको मसलने लगा. फिर कुछ देर सहलाने के बाद अब वो भी पूरी तरह से जोश में आकर चुदाई के लिए तैयार हो गयी थी. अब आंटी ने मेरी टीशर्ट को भी उतार दिया और पेंट को भी उतार दिया वो अब मेरी अंडरवियर के ऊपर से लंड को सहलाने लगी और मेरा लंड तो पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया था और लंड का टोपा अंडरवियर से बाहर निकल आया अब मैंने आंटी की पेंटी को भी उतार दिया और उनकी चूत एकदम चिकनी और उस पर एक भी बाल ना था.

अब वो बिल्कुल नंगी होकर मेरी गोदी में बैठी हुई थी उसके दोनों कूल्हों के बीच मेरा 6 इंच का लंड फनफना रहा था. में पीछे से अपनी एक उंगली को उसकी चूत में डाल रहा था और एक हाथ से उसके बूब्स को भी दबा रहा था. अब वो पूरी तरह से कामुक हो गयी थी और मुहं से आवाज़ निकल रही थी आहहह्ह्ह उईईईई माँ मर गई, उसकी साँसे अब तेज चल रही थी और मैंने उसको खड़ा कर दिया और उसके गुलाबी मुलायम गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठो को अपने मुहं में डाल दिया और चूसने लगा.

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उसने अपनी जीभ को मेरे मुहं के अंदर डाल दिया था और में अब उसकी जीभ को और होंठो को चूस रहा था. करीब 15 मिनट तक मैंने उसके होंठो को बहुत मज़े लेकर चूसा. अब मैंने उसको अपने हाथों में उठाया और बेडरूम में ले गया और उसको बेड पर बैठा दिया. उसने तुरंत मेरा लंड पकड़कर अपने मुहं में डाल लिया और चूसने लगी.

अब मेरे मुहं से आवाज़ निकल गई अहहह्ह्ह उहहह्ह्ह हाँ चूसो मेरी रानी पूरा चूस डालो, इतने में हमारे प्लान के मुताबिक अचानक से अमित भी वहां पर आ गया. फिर अमित को वहां पर देखकर नेहा एकदम से घबरा गयी और ठंडा मौसम होने के बाद भी उसके माथे से पसीना बहने लगा था. उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था और तुरंत उसने मेरा लंड अपने मुहं से बाहर निकाल दिया. वो अमित को अपनी अजीब सी डरी सहमी सी नजर से देखने लगी थी.

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