तलाकशुदा सुनन्दा की ठुकाई-2

(Gaand Chut Thukai Sunanda-2)

जैसे ही मैंने उसकी चूत से अपना मुँह हटाया उसने अपनी टाँगें मोड़ लीं। मैं उसकी उठी हुई टांगों के बीच बैठ गया। मैंने उसकी टाँगें अपने हाथ से उठा कर अपना लंड उसके चूत के मुँह में रखा जिस कारण उसके शरीर में झुरझुरी मच गई।

लंड को चूत के मुँह में रखते ही चूत की चिकनाहट के कारण अपने आप अन्दर जाने लगा। मैंने कस कर एक धक्का मारा तो लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुस गया।

गरमा-गरम चूत के अन्दर लंड की अजीब हालत थी।

अब मैं धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। उसकी चूत के घर्षण से मेरा लंड फूल कर और मोटा हो गया। मेरे हर धक्के पर वो
‘ऊऊफ़्फ़ आआह्हह ऊऊह’ की आवाजें निकालने लगी।

करीब बीस मिनट तक मैं उसके चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर करता रहा। फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और दनादन लंड को चूत में मूसल की तरह घुसाता रहा।

उसने मुझे कस कर बाँहों में जकड़ लिया, मैं समझ गया कि वो झड़ रही है और कराह रही थी।

पूरे कमरे में चुदाई की फ़चाफ़च-फ़चाफ़च की आवाजें गूंज रही थीं। मेरा लंड उसकी चूत को छेदता जा रहा था। कुछ देर बाद उसके झड़ने के कारण मेरा लंड बिल्कुल गीला हो चुका था और वो निढाल होकर लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी।

करीब 50-60 धक्कों के बाद मेरे लंड ने आखिर जोरदार फ़व्वारा निकाला और पूरा माल उसकी चूत में समा गया। जब तक लंड से एक-एक बूंद उसकी चूत में समाती रही, मैं धक्कों पर धक्के लगाता रहा।

आखिर में मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके बाजू में लेट गया। हम दोनों की सांसें तेज चल रही थीं। वो दाहिने करवट से लेटी हुई थी।
करीब 15-20 मिनट तक हम ऐसे ही लेटे रहे।

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थोड़ी देर बाद अचानक अपने लंड पर किसी के स्पर्श से मैंने आँखें खोलीं तो देखा कि सुनन्दा उससे खेल रही है और उसे खड़ा करने की कोशिश कर रही है।

मेरे आँख खोलते ही मुझे अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा। मैं समझ गया कि अब भी सुनन्दा की चाहत पूरी नहीं हुई तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैंने फिर से सुनन्दा की चूत में घुसा दिया।

इस बार मैंने लण्ड चूत पर रखा और धीरे-धीरे नीचे होने लगा और लण्ड चूत की गहराइयों में समाने लगा।

चूत बिल्कुल गीली थी, एक ही बार में लण्ड जड़ तक चूत में समा गया। अब मेरे झटके शुरु हो गए और सुनन्दा की सिसकारियाँ भी

सुनन्दा ‘आहह अअआआआहहह’ करने लगी। कमरा उसकी सिसकारियों से गूँज रहा था।

जब मेरा लण्ड उसकी चूत में जाता तो ‘फच्च-फच्च’ और ‘फक्क-फक्क’ की आवाज़ होती।

मेरा लण्ड पूरा निकलता और एक ही झटके में चूत में पूरा समा जाता। सुनन्दा भी चूतड़ हिला-हिला कर मेरा पूरा साथ दे रही थी।

मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी, अब तो सुनन्दा भी बुरी तरह हांफ़ने लगी थी, पर मेरी गति बढ़ती जा रही थी।

हम दोनों सर्दी के मौसम में पसीने से नहा रहे थे।

थोड़ी देर बाद वो बोली- मेरे को बाथरुम जाना है!

मैं सुनन्दा को उठाकर बाथरुम में ले गया। उसने अपना मुँह और चूत साफ़ की और बाद में मेरा लंड भी साफ़ किया। हम दोनों फ़्रेश हो गए।

मैंने सुनन्दा को चलने नहीं दिया, उसको गोद में उठाकर वापिस बिस्तर पर आ गया, वो बहुत खुश लग रही थी।

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दूसरे दिन मैं उसे मुम्बई घुमाने ले गया वापसी में मैंने कंडोम के पैकेट ले लिए। दोपहर में मैंने सुनन्दा को कुतिया की तरह होने को कहा।

वो समझ गई कि आज उसकी गांड फ़टने वाली है।

‘मालिक.. आप धीरे-धीरे डालिएगा!’

मैंने कहा- चिंता मत करो सुनन्दा! मुझे भी तुम्हारी चिंता है!

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कह कर उसकी गांड पर थोड़ी क्रीम लगाई अपने लंड पर कण्डोम लगा लिया और गांड पर रखकर एक झटका मारा, आधा लंड घुस गया।

सुनन्दा की चीख निकल गई और वो सिसकारियां लेने लगी- मालिक निकाल लो…! मालिक बहुत दर्द है..!

मैं थोड़ी देर रुक गया। इसी बीच मैं उसके स्तन को सहलाता रहा। थोड़ी देर के बाद दर्द काफ़ी कम हो गया तो वो धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने को कहने लगी।

मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना चालू किए। उसे अब थोड़ा-थोड़ा मज़ा आने लगा।

वो ‘ओइ..मां..ओह..’ की आवाज़ करने लगी।

मैंने धीरे-धीरे धक्के मार-मार कर पूरा लंड अन्दर डाल दिया था।

वो कहने लगी- मालिक, अभी कितना बाहर है?

मैंने कहा- सुनन्दा पूरा का पूरा लंड तू अन्दर ले चुकी है!

तो वो पीछे मुँह करके आश्चर्य से मुझे देखकर कहने लगी- आप तो गांड मारने में बड़े माहिर हो…! एक मेरा पति था, जो मुझे ठीक तरह से चोदता भी नहीं और मुझे प्यासी छोड़ कर सो जाता था।

मैंने फ़ौरन कहा- यहाँ पति की बात करना मना है।

और मैं जोर से धक्के मारने लगा।

सुनन्दा भी समझ गई और ‘उइ..मां.. आह; करने लगी।

मैंने कहा- सुनन्दा, मैं छूटने वाला हूँ..!

तो सुनन्दा बोली- गांड में नहीं, मैं तुम्हारा रस अपनी चूत में लेना चाहती हूँ..!

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मैं रुक गया, मैंने गांड में से अपना लंड निकाला और सुनन्दा को सीधा कर कण्डोम उतार कर उसकी चूत में अपना लंड डाल कर तेज धक्के मारने लगा। सुनन्दा भी चूतड़ उछाल कर मेरा साथ देने लगी और जोश में आकर “आह…सीस” जैसी आवाज करने लगी।

सुनन्दा बोली- डार्लिंग, मैं भी छूटने की तैयारी में हूँ!

मैं जोरों से उसे चोदने लगा, मैंने सुनन्दा के होंठों पर एक जोरदार चुम्बन किया और तीन-चार गरम पिचकारियाँ सुनन्दा की चूत में छोड़ दीं, साथ में सुनन्दा भी झड़ गई।

हम दोनों साथ में झड़ गए थे, इसलिये सुनन्दा ने मुझे चूम लिया और ‘थैंक्स’ कहा।

सुनन्दा बोली- आज मैं बहुत खुश हूँ..! दो सालों के बाद लंड का साथ मिला है। अब मैं आपके बिना नहीं रह पाऊँगी मालिक..!

मैं सुनन्दा को प्यार भरी नजरों से देखता रहा, वो बोली- क्या देख रहे हो मालिक?

मैंने कहा- तुम्हें देख रहा हूँ..! कितनी खूबसूरत लग रही हो, काश एक साल पहले नौकरी पर लगते तुम मुझे मिली होती। तुमने आज मुझे बहुत मजा दिया है.. जा तेरे दो हजार माफ़.. पांच हजार और ले लेना जब भी जरुरत हो मुनीम से मैं बोल दूँगा!

मैं उसे रोज चार-पांच बार चोदता रहा।

पांच दिन में मैंने उसे 21-22 बार चोदा। वो भी दो साल बाद मालिक से हुई अपनी चुदाई से सन्तुष्ट थी।

कहानी अच्छी लगी या बुरी, प्लीज मुझे मेल जरूर कीजिए।

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