हिटलर दीदी को वासना चढ़ी मुझे पढ़ते समय-3

(Hitler Didi Ko Vasna Chadhi Mujhe Padhate Samay-3)

दोस्तों मैंने एक वी आकार की फ्रेंच अंडरवियर पहनी हुई थी। अब तक मेरा लंड बहुत टेंशन में आ गया था और वो मेरी अंडरवियर के कोने पर आ गयी, जिसकी वजह से मेरी जांघो में बड़ी अजीब सी सरसराहट शुरू हो चुकी थी। फिर मैंने भी धीरे से उनका वो बूब्स जो मेरे उसी हाथ के पास था, मैंने उनके कुर्ते के ऊपर से उसको छु लिया जिसकी वजह से मुझे एकदम नरम मुलायम अंग का एहसास हुआ। फिर उसी समय उन्होंने एक बड़ी गहरी लंबी साँस भरी और एकदम अपने हाथ को मेरी अंडरवियर के ऊपर रख दिया, जिसमे की मेरा लंड क़ैद था। अब मेरा लंड उनके हाथ के पड़ते ही और भी सख़्त हो गया, मेरी आँखों में लाल डोरे उतर आए और बदन से गरमी भी निकलने लगी थी, उनकी साँसे भी अब धीरे धीरे बहुत तेज़ होने लगी थी। दोस्तों मुझे उनका वो चेहरा साफ नहीं दिख रहा था, क्योंकि वो औंधी सी पड़ी हुई थी, लेकिन उनकी एक आँख जो मुझे दिखाई दे रही थी वो अब भी बंद ही थी, उनके चेहरे पर उनके बाल भी पड़े हुए थे जो कंधों पर भी पड़े थे और वो बूब्स पर भी पड़े थे। अब मैंने हिम्मत करके उनके बालों को कंधे और बूब्स के ऊपर से हटाना शुरू किया, जिसकी वजह से में उनके चेहरे और बूब्स के दर्शन कर सकूँ, लेकिन वो अब भी अपनी आँखे बंद किए पड़ी थी।

अब मैंने देखा कि उसके चेहरे पर पसीने की कुछ बूंदे उभर आई थी, उसका चेहरा धीरे धीरे सुर्ख हो रहा था। अब मैंने और हिम्मत करते हुए उनका हाथ कोहनी से ऊपर तक सहलाने लगा था, लेकिन उन्होंने इसका कोई भी विरोध नहीं किया। फिर उसी समय मैंने किताब को बंद करके एक तरफ रख दिया और जो कुछ भी हो रहा था, उस पर में ज्यादा गौर करने लगा था। अब उन्होंने मेरा लंड जो उस समय खड़ा होकर करीब पाँच इंच का हो गया था, उसको अंडरवियर के ऊपर से सहलाना शुरू किया। फिर में भी अपने हाथ को उनकी बाह पर फेरते फेरते उनके चेहरे तक ले गया, मैंने तब महसूस किया कि वो अब तप रहा था। दोस्तों मैंने पहले एक दो बार सिर्फ़ उनके चेहरे को छुआ, लेकिन जब उनकी तरफ से कोई भी विरोध नहीं हुआ तब मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई और मैंने बड़े प्यार से उनके चेहरे और होठों पर अपने हाथ को फेरा और अब में उनके गले की तरफ बढ़ने लगा था, लेकिन बीच में मेरा लंड पकड़े हुए उनकी बाह आ रही थी और इसलिए में सिर्फ़ गले को ही छु सका जो की पसीजा हुआ था।

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फिर मैंने अपने हाथ को चेहरे से हटाकर सीधा उनके बूब्स पर रखा, जो बिना ब्रा के एकदम खुलापन महसूस कर रहे थे उन्हे कुर्ते के बाहर से महसूस करने के बाद मैंने गले में हाथ डाल दिया और में दोनों बूब्स को महसूस करने लगा था। अब उनकी साँसे और भी तेज़ हो गयी और लंड पर तेज़ी से प्रहार चल रहा था, मुझे हाथ गले में घुसाए रखने में थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी, क्योंकि दाव ठीक नहीं बैठ पा रहा था। अब वो मेरी परेशानी को ठीक तरह से समझ गयी और अब वो थोड़ा सा सीधी होकर लेट गई और वो अपनी आँखों को थोड़ा सा खोलकर मेरी तरफ देखने लगी, उनके देखने की वजह से मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी और उनका हाथ अब भी मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से पकड़े हुए था। अब उन्होंने मुझसे बहुत धीरे से कहा कि आराम से लेट जा और वो दोबारा करवट लेकर फिर से अपनी आँखों को बंद किए लेट गई, लेकिन में उनका वो इशारा बहुत अच्छी तरह से समझ गया। फिर इस वजह से में भी उनके कहते ही तुरंत उनके पास में उनकी तरफ करवट लेकर लेट गया। अब उनका हाथ बाहर निकल आया था मेरे लेटते ही उन्होंने मेरे सर को अपनी छाती से लगा लिया और मैंने उस गुदगूदे सीन से चिपककर अपना मुँह खोल दिया।

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फिर बूब्स को में अपने मुँह से छेड़ने लगा और अपना एक हाथ मैंने उनके कूल्हों पर रख दिया, उसी हाथ को में धीरे धीरे कूल्हों की दरार में ले गया। दोस्तों उस समय वो पेंटी भी नहीं पहनी थी, जिसकी वजह से मुझे उनके कूल्हों का भी पूरा मस्त मज़ेदार एहसास हुआ और अब उनका हाथ मेरी निक्कर के बटन को खोलने में लगा था, लेकिन उससे पहले मैंने अपने ही हाथ से उसको खोल दिया। फिर उसके बाद उन्होंने चेन को खोलकर निक्कर को एकदम ढीला कर दिया और मैंने भी थोड़े से अपने कुल्ले ऊपर उठाकर उनकी निक्कर को नीचे करने में मदद कि। अब उनका हाथ सीधा मेरी अंडरवियर के अंदर चला गया और वो मेरे लंड से खेलने लगी थी, मेरा लंड भी उनके हाथ का स्पर्श पाकर फुकार मारने लगा। अब मैंने उनके कूल्हों से अपने हाथ को हटाकर उनके कुर्ते के अंदर डाल दिए और में उनकी कमर और पेट से होते हुए सीधे बूब्स तक पहुँच गया, निप्पल को मैंने ज़ोर से दबा दिया जिसकी वजह से उनके मुहं से हल्की सी चीख भी निकल गयी और अब उन्होंने धीरे से अपनी आँख को खोला, लेकिन में तब भी नहीं डरा। अब उन्होंने मुझसे अपने बड़े ही मादकता वाले अंदाज़ से कहा कि प्लीज थोड़ा आराम से कर तुझे इतनी भी क्या जल्दी है? में क्या कहीं भागी जा रही हूँ?

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फिर मैंने उनके मुहं से यह बात सुनकर पहले से ज्यादा अपनी बड़ी हुई हिम्मत की वजह से अब तुरंत उनका वो कुर्ता खीचकर उनके गले तक ऊपर कर दिया, जिसकी वजह से मुझे वो द्रश्य दिखा, जिसको देखकर में अब भी सोच रहा था कि जैसे में कोई सपना देख रहा हूँ। दोस्तों मुझे उनके साथ इतना सब कुछ कर लेने पर भी बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था। दोस्तों उनके दोनों बूब्स अब एकदम नंगे और कबूतर की तरह आजाद ख़ुशी से झूम रहे थे, वो एकदम गोरे गोरे और क्रिकेट की गेंद से कुछ ज्यादा बड़े एकदम गोलमटोल थे और उसके दोनों निप्पल जो थोड़े से मुलायम और ऊँचे उठे हुए थे। अब वो एकदम जोश में आ गये, में उन्हे देखते ही पागल हो गया और अब में उन दोनों बूब्स को बारी बारी से चूसने लगा और काटने भी लगा था, जिसकी वजह से वो भी एकदम मस्त हो गई थी और उन्होंने मुझे अपनी तरफ खीचकर अपने बदन से चिपका लिया। दोस्तों उनका वो कुर्ता जो अभी तक भी उनके गले में ही था वो अब भी हमारे बदन के बीच में आ रहा था और इसलिए मैंने उसी समय उन्हे इशारा करके कहा कि आप इसको भी उतार दो। फिर उन्होंने मेरे कहने पर तुरंत बैठकर उस अपने कुर्ते को उतार दिया, उठकर बैठने पर मुझे उनकी पूरी गोरी चिकनी कमर और हिलते हुए बूब्स दिखाई पड़े जो इस क्रिया में एकदम प्राक्रतिक तरीके में हिल रहे थे।

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