जयपुर एक यादगार सफर

(Jaipur ek yadgar safar)

हेलो दोस्तो, मैं आदित्य सभी मुजे आदि कह कर बुलाते है राजस्थान के एक गांव का रहने वाला हु । यह कहानी मेरी सच्ची कहानी है जो आज से चार साल पहले घटित हुई।इस कहानी के सभी नाम कल्पनिक हैं ताकि किसी की असल जिंदगी पैट कोई प्रभाव न पड़े, मैं पहली बार लिख रहा हूँ कोई गलती हो तो माफ करना तो हुआ यूं कि मैंने कई कंपनियों में जॉब के लिए अप्लाई किया हुआ था जिसमे से जयपुर की एक कंपनी का इन्टरवियु के लिए कॉल आया जिसके लिए मुजे जयपुर जाना था मैं पहले कभी जयपुर गया नही था तो मेरे लिए वहाँ सब नया था । तो मेरे पापा ने बताया वहाँ मेरे दूर के एक ताऊ जी की लड़की शालिनी जॉब करती है वो रहती है तो उस से बात की तो उस ने बताया की जयपुर पहुंच के कॉल करना तुम्हें लेने आ जाउंगी तो सब सेट हो गया मेरा इंटरवियू से एक दिन पहले रविवार के दिन में सुबह की बस से जयपुर के लिए चल पड़ा 6 घण्टे का सफर था तो दोपहर के 1 बजे मैं जयपुर पहुँचकर शालिनी को कॉल किया तो उसने 10 मिनट में आने का कहकर फ़ोन काट दिया।

मैं शालिनी से पहले1-2 बार ही मिला हुआ था उसको जानता कम ही था स्वभाव के बारे में सो मैने उसका आने का इंतजार किया करीब आधे घंटे के बाद बस स्टॉप पे एक कार रुकी फिर शालिनी की कॉल आयी उसने पूछा तुम कहाँ पर हो मैं बाहर आ गयी हु मैन कहा मैं आता हूं बाहर में बाहर जाकर मिला हेलो किया और उसके साथ एक और लडक़ी भी आई थी जो उसकी फ्रेंड थी दिशा नाम मुजे बाद में पता चला उसको भी हेलो किया और कार में चल पड़े घर की तरफ 10 मिनट में घर पहुंच गए उनके पास थर्ड फ्लोर पे एक फ्लैट था जिसमे 2 रूम ओर एक बड़ा सा हॉल किचन था फिर शालु ने शालिनी जिसे शालु कहकर बुलाते थे ने अपनी 2 ओर फ्रेंड जो उनके साथ फ्लैट में रहती थी से मिलवाया जो नैनी ओर एक प्रिया थी, प्रिया के साथ मिलकर दिल को एक अलग ही फील हुआ वो देखते ही मन को भा गयी जैसे उसको देखना छोड़ू ही ना एक दम रुकुल प्रीत की जैसी पतले होट चेहरे पे एक प्यारी सी मुस्कान देखते ही जान निकाल देंने वाली।

फिर शालु ने मेरा बैग लेते हुए कहा तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए ज्यूस या चाय ला देती हूं पूछा क्या पियोगे मैंने कहा अभी नही पहले मैं फ्रेश होऊंगा फिर मैं अपने कपड़े बदलने रूम में चला गया ओर कपड़े बदल फ्रेश होने चला गया हॉल में सब बैठे थे गपे मार रहे थे मैं उनके पास पहुंचा तो शालु ने कहा आजा बैठ जा वो चाय बनाने चली गयी फिर हम सब ने चाय पी ओर बाते करते करते शाम हो गयी पता ही नही चला दिशा ने कहा कही बाहर चलते है घूमने साथ मे डिनर भी बाहर ही कर आएंगे सब राजी हो गए शाम करीब 7 बजे घूमने गए और 10 बजे तक डिनर कर के आ गए हम घुमने गए से घर पहुंचने तक मैन नोटिस किंया प्रिया का एक्सप्रेशन सबसे अलग ही था एक दम केअरिंग जैसे हम बहुत पुराने फ्रेंड हो सबको गुड़ नाईट बोला तब प्रिया की और देखा तो उसके चेहरे पे एक हल्की सी मुस्कान ओर आंखे जैसे कुछ कहना चाह रही हो और मैं पढ़ नही पा रहा हूँ मैं सोने के लिए चला गया एक रूम में ओर वो सब दूसरे रूम में बैठे थे मैं उसके बारे में सोचता सोचता लेट गया और मेरी आँख लग गयी रात को करीब 1 बजे रूम में कुछ आहट सुनाई दी मैन देखा तो वो प्रिया आयी थी मुझसे बोली आपको कोई परेशानी नही तो यहां सो सकती हूं कहा वहाँ सभी एक बेड पर सौ नही पा रहे थे मुजे नींद नही आई तो यह जगह देखने आ गयी।

मैन कहा कोई बात नही अगर आपको कोई एतराज नही तो मुजे कोई परेशानी नही होगी तो सच बताऊ यारो वो यहाँ सो तो गयी पर उसने मेरी नींद उड़ा दी वो बेड पर मेरी तरफ पीठ करके सो गई उसने हाफ निक्कर ओर एक लूज़ सी टी शर्ट सी पहने हुए थी मैं उसे ही देखे जा रहा था इतने में उसने अपना मुंह मेरी तरफ किया बोली आपको नींद नही आ रही मैं बोला नही कुछ सोच रहा था यू ही तो हम दोनों बातें करने लग गए पहले उसने अपने ओर अपनी फैमली के बारे में बताया और फिर मैंने इस तरह बाते करते करते उसने मेरी गर्लफ्रैंड के बारे में पूछ लिया तो मैने कहा मैं गाँव से हु ओर वहाँ मुझे ऐसी कोई मिली ही नही जिसे …… फिर उस से पूछा तुम्हारा तो उसने बात काटते हुए कहा फिलहाल मैं अपबी पढ़ाई और काम पर ध्यान देना चाहती हु तो इस बारे में कभी सोचने का टाइम ही नही मिला इसी तरह बात करते करते कब 1 घंटा निकल गया पता ही नही चला और नींद भी हमसे कोसो दूर थी शायद इस रात को कुछ और ही मंजूर था मैं उसकी आँखों मे देखने लगा उसने भी बिना नजर हटाये पूछा क्या देख रहे हो मैं बोला काश ये रात कभी खत्म ही ना हो तो बोली ऐसा क्या मिल गया आज मैं बोला तुम ओर फिर हम काफी देर तक एक दूसरे को देखते रहे उसकी साँसे तेज हो गयी और एक मदहोसी का आलम छा गया और उसने एक दम से आगे होकर मुजे किस कर दिया फिर मैंने भी उसके हॉट पे एक छोटा सा किस कर दिया ओर ओर वो मेरे ऊपर आ गयी और मेरे पेट पे बैठ कर मुजे गंदी तरह जगह चूमने लग गयी इस तरह हम एक दूसरे में किस करते करते कब खो गए और वो मेरे गाल गले गर्दन पे किश किये जा रही थी और मैं उसे ओर इस तरह मैंने उसकी टी शर्ट निकाल दी।

उसने नीचे कुछ नही पहना था उसके स्तन एक दम गोल ओर सुडौल थे ऊपर से उनपर छोटे छोटे गुलाबी निप्पल एक दम जैसे दूध के भरे गुब्बारे के जैसे दिल कर रहा था अभी निचोड़ लू सारा दूध इनका ओर मैं उन्हें चूमने लगा और उनकी निप्पल को जीभ से टटोलने लगा ओर बड़ी बड़ी दोनो स्तनों को चूमने चाटने लगा अब उसने मेरी बनियान निकाल दी और मेरे सीने पर किस करने लग गयी और किस करते करते नीचे चली गई और मेरे लोअर को नीचे करने लगी और मेरा लंड निकल कर कुछ देर उसे लालच भरी नजरों से देखने लगी मैन यहाँ आने से पहले ही सारे बाल साफ किये थे जिस से लंड का एक अलग ही विकराल रूप में दिख रहा था ओर उसके सिरे पर जीभ लगा दी उस वक़्त का नजारा एक अलग ही अहसास दिलाने वाला था मैं एक अलग ही दुनिया मे था जीभ फिराते फिराते ऐसे उसने मेरे पूरे लंड को ऊपर से नीचे तक जीभ से चाटकर एक दम गिला कर दिया ओर धीरे धीरे पूरा अपने मुंह मे समा लिया जो कि उसके गले मे लग रहा था पर फिर भी वो आगे पीछे कर ओर आगे लेना चाह रही थी काफी देर करने के बाद वो थक गई तो मैंने उसको बेड पर गिराकर एक दम नंगी कर दिया और उसने पेंटी भी नही पहनी थी।

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सिर्फ ऊपर के कपडे ही पहने थे उसकी चुत देखकर लग रहा था जैसे एक दम न्यू हो इसका उद्धघाटन होना बाकी हो उसने भी बाल साफ किये हुए थे पर बिल्कुल छोटे छोटे बाल थे ऐसा लग रहा था था जैसे हफ्ता भर हो गया हो सफाई किये उसकी चूत मानो फूल की पंखुड़िया जैसी थी एक दम नर्म हल्का सा उभार बहुत ही सुंदर लग रही थी मैंने उसकी चूत पे हाथ लगाया तो प्रिया एक दम से सिहर उठी फिर मैंने उसपे किस किया और हाथ से पंखुड़िया खोल कर देखने लगा तो अंदर का नजारा अलग ही थ एक दम गुलाबी, देखकर दिल कर रहा था जैसे खा जाऊ ओर फिर मैंने उसपे जीभ फिराई चुमने लगा और उनका रसपान करने लगा प्रिय का शरीर अकड़ रहा था अब वो मेरी तरफ पलट गई और उसने भी मेरा लंड अपने मुंह मे ले लिया और ओर ऊपर नीचे होने लग गयी इस तरह मैं नीचे लेटा हुआ था और वो मेरे ऊपर आकर मेरा लंड चाट रही थी।

नीचे मैं उसकी चूत अब हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे और बाहर की दुनिया से अलग थलग अपने कामक्रीड़ा में लीन थे हमे बिल्कुल भी अहसास नही था कि कोई हमे देख रहा है या नही एक अलग ही दुनिया मे थे मैं आने चरम पर था इधर उसके शरीर मे भी अकड़न का अहसास हो रहा था इस तरह दोनो एक साथ ही रसखलित हो गए और कुछ देर यूँ ही पड़े रहे जैसे कोई हमारी जान निकाल ले गया हो बिल्कुल बेजान सा महसूस हो रहा था और दोनों की साँसे तेज चल रही थी कुछ देर बाद मुजे कुछ बाहर हलचल का अहसास हुआ तो हम एक दम से अलग होकर अपनी अपनी चदर में लेट गए मैंने समय देखा 3 बज चुके थे थोड़ी देर इन्तेजार करने के बाद देखा तो उसको नींद आ चुकी थी चरम आनंद मिलने के बाद जो नींद आती हैं वैसी नींद कभी नही आती मैन उसे उठाना सही नही समझा और फिर मैं भी सो गया सुबह क्या हुआ उसका मैं आपको अगले पार्ट में लिखूंगा

माफी चाहूंगा कहानी थोड़ी लंबी जरूर है अभी इसमे अनेक पात्र ओर जुड़ेंगे जिसके वजह से एक बारी में लिखना असम्भव है