Sali Sexहिंदी सेक्स स्टोरी

लखनऊ से जयपुर तक चुदाई का सफर

परेश की उत्तेजक आपबीती, जिसमें पड़ोस के शर्माजी की खूबसूरत साली नीली के साथ लखनऊ में शुरू हुई वासना की कहानी जयपुर तक चली। बाइक की सवारी से लेकर बेडरूम तक, चूत और गांड की ठुकाई के साथ इस जोशीले सेक्स अनुभव को पढ़ें।

हाय, मैं फिर से परेश। आज मैं आपको अपनी एक और आपबीती सुनाने जा रहा हूँ। मेरे पड़ोस में शर्माजी रहते हैं। उनके परिवार में उनकी माँ, उनकी बीवी और उनके दो बच्चे हैं। भाभीजी बहुत सुंदर और अच्छी हैं। एक बार उनके घर में कोई फंक्शन था। शर्माजी ने मुझसे कहा, “परेश, मेरी साली लखनऊ में रहती है। उसके पति वहाँ सरकारी नौकरी करते हैं और अभी आ नहीं सकते। तुम जाकर मेरी साली को ले आओ।” मैं उनकी साली से पहले कभी नहीं मिला था। खैर, मैं उसे लेने लखनऊ चला गया।

उनकी साली के घर पर मेरा बहुत स्वागत हुआ। शर्माजी की साली, नीली, सचमुच बहुत खूबसूरत थी। उसका कसा हुआ बदन, भरे हुए सीने, प्यारा-सा चेहरा और गोल-मटोल नितंब—उसकी शादी को अभी सिर्फ 6 महीने ही हुए थे। उसके पति वहाँ अच्छी सरकारी नौकरी में हैं। वो एक औसत कद-काठी के इंसान हैं और अपने काम में बहुत बिजी रहते हैं। उन्होंने हमारी वापसी की टिकट बुक कर दी, जो दो दिन बाद की थी। उसी दिन उन्हें ऑफिस के काम से दिल्ली जाना पड़ गया। उन्होंने कहा, “मुझे 3-4 दिन लगेंगे, आप लोग जयपुर चले जाना।” उस दिन मैं ट्रेन से आने की वजह से थक गया था और सो गया। रात 8 बजे नीली ने मुझे जगाया। मैं उठा, फ्रेश हुआ और हॉल में सोफे पर बैठ गया।

घर पर बस मैं और नीली थे। उसने कहा, “परेश जी, खाना खा लीजिए।” मैंने कहा, “अभी क्या जल्दी है? चलो थोड़ा घूमकर आते हैं। मुझे लखनऊ घुमा दो।” उसने कहा, “चलो।” फिर उसने पूछा, “आपको मोटरसाइकिल चलानी आती है क्या?” मैंने कहा, “हाँ।” तो उसने कहा, “मेरे पति की मोटरसाइकिल से चलते हैं।” मैंने उसके पति की बाइक निकाली। उसने जींस और टाइट टी-शर्ट पहन रखी थी। वो मेरे पीछे बाइक पर बैठ गई। हम बाजार में घूमे, दोनों ने थोड़ी शॉपिंग की और इधर-उधर टहलते रहे। एक जगह रास्ता खाली था। मैं तेजी से बाइक चला रहा था कि अचानक एक स्पीड ब्रेकर आ गया। मैंने जोर से ब्रेक लगाया तो नीली पूरी तरह मुझसे टकरा गई। उसके सीने का स्पर्श मेरी पीठ से हुआ। उसने कहा, “ऐसे क्या चला रहे हो?” मैंने कहा, “स्पीड ब्रेकर आ गया था। लेकिन अच्छा हुआ, तुम मेरे करीब तो आई। वरना मैं सुबह से तुम्हारे पास आने के बारे में सोच रहा था।” उसने कुछ नहीं कहा और मेरी कमर में हाथ डालकर मुझसे चिपककर बैठ गई।

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मेरी हिम्मत बढ़ी। मैं हर थोड़ी देर में ब्रेक लगाता और वो मुझसे और सट जाती। उसके सीने की गर्मी मैं अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था। करीब 10 बजे हम घर पहुँचे, कपड़े बदले, खाना खाया और फिर टीवी देखने लगे। हमारी ढेर सारी बातें होती रही।

रात करीब 1 बजे उसने कहा, “चलो, सोते हैं।” गर्मी का मौसम था। उसके घर के बेडरूम में AC था। उसने कहा, “आप बेडरूम में सो जाइए, मैं दूसरे कमरे में सो जाती हूँ।” मैंने कहा, “तुम भी यहीं सो जाओ।” उसने मना किया और दूसरे कमरे में जाकर सो गई। मैं सोने की कोशिश करने लगा, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। बार-बार नीली का गुलाबी हुस्न मेरी आँखों के सामने आ रहा था। करीब एक घंटे बाद अचानक मेरे कमरे का दरवाजा खुला और नीली अंदर आ गई। उसने कहा, “वहाँ बहुत गर्मी है, नींद नहीं आ रही।” मैंने कहा, “मैंने तो पहले ही कहा था।” उसने गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी, जिसमें से उसकी काली पैंटी और ब्रा साफ दिख रही थी। उसने कहा, “मैं बेड के किनारे बिस्तर लगाकर सो जाऊँगी।” मैंने कहा, “नहीं, तुम बेड पर सो जाओ। मैं कुछ भी नहीं करूँगा।” वो बेड के एक साइड पर सो गई और मैं दूसरी साइड पर।

थोड़ी देर में मुझे नींद आ गई। अचानक मेरी आँख खुली तो देखा कि वो मेरे करीब सोई हुई है। उसकी नाइटी उसके घुटनों से ऊपर चढ़ गई थी। उसकी गोरी, चिकनी जाँघें देखकर मेरा मन मचल उठा। मैंने उसे हाथ से पकड़ा और सहलाने लगा। दूसरा हाथ धीरे से उसके सीने पर रख दिया। उसके उभार गर्म थे। मुझे लगा कि वो जाग रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी नाइटी के ऊपर से उसके सीने पर घुमाने शुरू किए। उसने आँखें खोलकर सब देखा। मैंने उसकी नाइटी के आगे के बटन खोले और हाथ उसकी ब्रा के ऊपर फिराने लगा। अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ा और जोर से अपने सीने पर दबाने लगी। मैंने उसे बाहों में भर लिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। उसकी साँसें तेज चल रही थीं। उसने मेरे कपड़े उतार दिए, मैंने भी उसकी नाइटी उतार दी। काली ब्रा और पैंटी में वो कमाल लग रही थी। मैं उसे ऊपर से नीचे तक चूमता रहा। उसने मेरे शरीर को सहलाना जारी रखा। मैंने चूमते हुए उसकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। अब वो मेरे सामने पूरी तरह नग्न थी। उसके दूधिया बदन को देखकर मेरा जोश चरम पर पहुँच गया।

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मैंने एक हाथ से उसके उभार दबाए और दूसरे को मुँह में लिया। उसके उभार सख्त और गरम थे। उसने भी मेरे शरीर को चूमते हुए मेरे अंग को अपने मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे हम दोनों का जोश बढ़ता गया। मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी गोपनीय जगह को चूमने लगा। वो जोर-जोर से अपने पैर पटकने लगी और बोली, “अब देर मत करो, मुझे प्यार करो।” मैं भी तैयार था। मैंने अपना अंग उसकी गोपनीय जगह पर रखा और एक धक्का मारा। मेरा आधा अंग अंदर चला गया। उसने कहा, “तुम्हारा बहुत मोटा है, मेरे पति का इतना मोटा नहीं।” मैं उसके उभारों को मसलता रहा और उसके होंठों को चूमते हुए एक और धक्का मारा। मेरा पूरा अंग अंदर चला गया। वो जोर से चिल्लाई, “धीरे करो, दर्द हो रहा है।” मैं उसके होंठ चूमता हुआ 2-3 मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा। जब वो शांत हुई, मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। अब उसे भी मजा आने लगा। करीब 5 मिनट में उसने पानी छोड़ दिया। अब मेरा अंग उसमें आसानी से चलने लगा। वो भी अपनी कमर उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगी। करीब 20 मिनट की चुदाई में वो 4 बार झड़ चुकी थी। आखिरकार मेरा भी जवाब देने का वक्त आ गया। मैंने कहा, “मेरा पानी निकलने वाला है।” उसने कहा, “मैं भी झड़ने वाली हूँ।” हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैं उसके ऊपर 10 मिनट तक लेटा रहा। फिर हम दोबारा तैयार थे। उस रात मैंने उसे 5 बार प्यार किया और फिर हम सो गए।

दोपहर 2 बजे हम उठे और तैयार होकर मार्केट निकल गए। शाम को घर आए, खाना खाया और टीवी देखते रहे। रात 10 बजे मैंने उसे बाहों में लिया और चूमना शुरू कर दिया। उसने अपने कपड़े उतारे और मेरे भी उतार दिए। मैंने उसे चूमते हुए करीब आधे घंटे तक प्यार किया। फिर हमने TV पर एक XXX मूवी लगाई। उसमें एक लड़का एक लड़की की पीछे से चुदाई कर रहा था। मैंने कहा, “चलो, मैं तुम्हारी पीछे से करूँ?” उसने कहा, “मेरी फट जाएगी।” मैंने कहा, “कुछ नहीं होगा, थोड़ा-सा दर्द होगा। मेरे लिए करना पड़ेगा।” उसने कहा, “धीरे करना।” मैंने उसे घुटनों के बल बैठाया, उसकी पीछे थोड़ी क्रीम लगाई और अपने अंग को उस पर रखा। धीरे से थोड़ा अंदर डाला। उसकी पीछे बिल्कुल ताजा थी। मैं उसकी सील तोड़ रहा था। मैंने थोड़ा और धक्का दिया। मेरा अंग करीब 2 इंच अंदर गया। वो बोली, “रहने दो, दर्द हो रहा है।” मैंने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और एक जोरदार धक्का मारा। मेरा पूरा अंग उसकी पीछे चला गया। वो जोर से चीखी, उसकी आँखों में आँसू आ गए। मैं वहीँ रुक गया और उसके उभारों को दबाते हुए उसे सहलाता रहा। उसे जोश आने लगा और वो आगे-पीछे होने लगी। मैंने अपने अंग को अंदर-बाहर करना शुरू किया। अब उसे भी मजा आने लगा। मैं और वो इस नए तरीके का आनंद लेते रहे। उसने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ।” उसने कहा, “सारा पानी मैं पीना चाहती हूँ।” मैंने अपना अंग उसकी पीछे से निकाला और उसके मुँह में दे दिया। वो प्यार से उसे आम की तरह चूसने लगी। थोड़ी देर में मेरे अंग से ढेर सारा पानी निकला और उसने सारा पी लिया। उस रात भी मैंने उसे 5 बार प्यार किया। अगले दिन हम ट्रेन से जयपुर आ गए। वहाँ भी 7 दिनों में मैंने उसे 7-8 बार प्यार किया।