कड़ाके की सर्दी में मौसी और मामीजी को सरसो के खेत में पेला–5

Kadake ki shardi me mausi aur mamiji ko sarso ke khet me pela-5

वहां पर साल ओढ़कर बैठी हुई थी।
मैं– लो मामीजी,अब आप यहां बैठकर फोन चला लो।
अब मामीजी हमारे पास बैठ गई।तभी मै मौसी की साल हटाने लगा तो मौसी ने मुझे रोक लिया– यार तू पागल हो गया है क्या? मैं भाभी के सामने ये सब नहीं करवा सकती?
मामीजी– हां मै भी इससे ये ही कह रही थी
मैं–अरे मौसी,अब आपको इसमें क्या दिक्कतें है? वैसे भी हम सबको सबकुछ पता है ही सही।
मौसी– फिर भी यार थोड़ी लाज शर्म तो रखनी ही पड़ती है।
मैं– छोड़ो मौसी ये लाज शर्म।
तभी मैंने मौसी को फिर से सरसो के पत्तो पर गिरा दिया और उनकी टांगो को फिर से फोल्ड कर दिया। अब मैंने तुरंत लंड मौसी की चूत में सेट कर दिया और मौसी को झमाझम बजाने लगा।थोड़ी देर तो मौसी ने शर्म के मारे कुछ नहीं किया लेकिन फिर थोड़ी देर में ही मौसी ने साल उतारकर फेंक दी। अब मौसी फिर से पूरी नंगी हो चुकी थी। अब मैं मामीजी के सामने मौसी को नंगी करके बजा रहा था।

ना तो मैंने कभी ऐसा सोचा था ना कभी मौसी और मामीजी ने कभी ऐसा सोचा होगा। मैं मौसी की चूत में ज़ोर ज़ोर से लंड डाल रहा था। अब मौसी फिर से सिसकारियां भरने लगी।
मौसी– ऊंह आह आह ओह ऊंह। आह आईईईई।
मैं– ओह मामीजी, कड़ाके की सर्दी में मौसी को चोदने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा है।
मामीजी– हां अच्छी तरह से चोद ले तेरी मौसी को।
मैं– तो आप भी आ जाओ ना मामीजी।साथ में बहुत ज्यादा मज़ा आयेगा।
मामीजी– नहीं,नहीं मै तो नहीं। तू तो तेरी मौसी को ही बजा लेे। वैसे भी तू मुझे तो बजाता ही रहता है।
मैं– हां लेकिन साथ की बात अलग है।
मेरा लन्ड मौसी की चूत में लगातार अंदर बाहर हो रहा था।मौसी बुरी तरह से सरसो के खेत में चुद रही थी। इधर मै मामीजी को भी ललचाने की कोशिश कर रहा था।
मैं– आ जाओ ना मामीजी। क्यों शरमा रही हो? तीनो खूब मज़ा लेंगे।
मामीजी– नहीं।

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मैं झामझम मौसी की चूत में लंड ठोक रहा था। अब मैं मामीजी को लपकने की फिराक में था।तभी मैंने मौसी को छोड़ा और मामीजी के ऊपर चढ गया।मामीजी झट से सरसो में गिर पड़ी। तभी मैंने मामीजी के होंठो पर धावा बोल दिया और बुरी तरह से मामीजी के होंठो को चूमने लगा। मैं पागल कुत्ते की तरह मामीजी के होंठो को चूसने में लग गया। मामीजी मुझे दुर धकलेेने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसमें वो सफल नहीं हो रही थी।
होंठो को चूसकर मैंने मामीजी की साल उनके जिस्म से अलग कर सरसो में फेंक दी और तुरंत मामीजी के स्वेटर को भी खोल दिया। अब मैं मामीजी के बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा। अब मामीजी चू चू मै मै करने लगी।
मामीजी– ऊंह। आहाहाईईई आईईईई धीरे धीरे दबा।
मैं– मै तो ज़ोर ज़ोर से ही दबाऊंगा साली रण्डी।
मामीजी– आईईईई बहुत दर्द हो रहा है।
मैं– कोई बात नही साली।

फिर मैंने थोड़ी देर मामीजी के बूब्स को बुरी तरह से दबाया। अब मैंने मामीजी के ब्लाउज को बिना खोल ऊपर सरका दिया और उनके बड़े बड़े चिकने बूब्स को बाहर निकाल लिया। अब मैं मामीजी के नंगे बूब्स को दोनों हाथों से दबाकर कसने लगा। अब मामीजी दर्द से बुरी तरह करहाने लगी।
मामीजी– आईईईई आईईईई ओह धीरे धीरे दबा कुत्ते।
मैं– चुप रहे कुत्ती।
मामीजी को बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। मैं मामीजी के बूब्स को बुरी तरह से दबाए जा रहा था।फिर मैंने मामीजी के बूब्स को बहुत देर तक दबाया।
अब मैं सीधा नीचे आ गया और मामीजी के पेटीकोट में हाथ डालकर उनकी पैंटी को खोल लिया और मौसी को दे दी। अब मैंने तुरंत मामीजी की टांगो को फोल्ड कर दिया और उनकी चमचमाती हुईं चूत में लंड सेट कर दिया।

मौसी– भाभी,आज तो ये हम दोनों को बुरी तरह से चोदने के प्लान में है।
मामीजी– हां दीदी।
अब मैंने ज़ोर से मामीजी की चूत में लंड ठोक दिया तभी मामीजी चीख पड़ी।
मामीजी– आईईईई आईईईई ओह।
अब मैंने मामीजी के हॉल में दूसरा ज़ोर का झटका दे मारा।तभी मामीजी बुरी तरह से बिलख उठी।उन्हें बहुत ज्यादा दर्द होने लगा। अब मैं मामीजी को अच्छी तरह से चोदने लगा।
मामीजी– आईईईई आईईईई आईईईई ओह आह आह आईईईई।
अब मामीजी के ऊपर नीचे और ऊपर दोनो तरफ से हमला हो रहा था। नीचे से खेत की मिट्टी उन्हें चुभ रही थी और ऊपर से मेरा लंड उनकी जान निकाल रहा था। खैर मै मामीजी को अच्छी तरह से बजा रहा था।मुझे मामीजी को बजाने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।
मामीजी– आईईईई आईईईई ऊंह आह आह आईईईई।बहुत दर्द देता है तेरा लौड़ा।

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मैं–मज़ा भी बहुत देता है मामीजी।
मामीजी– हां साले तू तो यही कहेगा।
मैं– मज़ा देता है तभी तो बार बार चुदाई करवाने का मन करता है।
मेरा लन्ड मामीजी की चूत को बुरी तरह से खोद रहा था।कुछ ही देर में मामीजी के चेहरे पर पसीना आ गया। अब कड़क सर्दी में भी मामीजी पसीने से लथपथ हो चुकी थी। इधर मौसी अब साल ओढ़कर फिर से बैठ चुकी थी लेकिन मैंने उनकी साल फिर से उतार फेंकी।
मौसी– क्या है यार ओढ़ने दे ना? बहुत सर्दी लग रही है?
मैं– तो थोड़ी सी तो रुको मौसी, मै लंड की गर्मी दे रहा हूं ना।
मौसी– पहले भाभी को तो दे दे।

मैं– हां दे ही रहा हूं।
मेरा लन्ड मामीजी को बुरी तरह से चोद रहा था।
मामीजी– आईईईई ऊंह आहा। आईईई आईईईई ओह। आह आईईईई।
मैं– आह बहुत मज़ा आ रहा है मामीजी।
मामीजी– ओह साले कुत्ते धीरे धीरे चोद।
मैं– ओह रण्डी, साली मै तो बुरी तरह से ही चोदूंगा।
मामीजी दर्द से बुरी तरह झल्ला रही थी। मैं मामीजी को ताबड़तोड़ तरीके से चोद रहा था।मामीजी को अब दिन में तारे नज़र आने लगे थे। तभी मामीजी की चूत में खलबली मच गई और उनकी चूत में से भयंकर सर्दी में गरमा गरम लावा फुट पड़ा।मेरा लन्ड मामीजी के लावे में पूरा भीग चुका था।
मैं– ओह मामीजी मज़ा आ गया।

अब मेरे लन्ड के हर एक शॉट के साथ सरसो में फ़ाच फाच्छ फ़ाच्छ फ़छ की ज़ोर ज़ोर से आवाज़ गूंजने लगी।मुझे मामीजी को चोदने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। मैं मामीजी को अभी भी बहुत अच्छी तरह से बजा रहा था। अब तक मै मामीजी को बुरी तरह से चोद चुका था।उनका जिस्म पसीने से लथपथ हो चुका था। अब मैंने मामीजी का स्वेटर खोला फिर तुरंत मामीजी का ब्लाउज भी खोल फेंका। अब मामीजी ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी।
अब मैंने मामीजी का नाड़ा खोल उनके पेटीकोट और साड़ी को एकसाथ खोल फेंका। अब मामीजी कड़ाके की सर्दी में सरसो के खेत में पूरी नंगी हो चुकी थी।तभी मामीजी मौसी के सामने शरमा गई और उन्होंने आंखे बंद कर ली।
अब मैंने मामीजी की टांगो को फैला दिया और उनकी चूत में फिर से लंड ठोक दिया। अब मैं मामीजी को फिर से बजाने लगा। धीरे धीरे मामीजी शरम छोड़कर सिसकारियां भरने लगी।
मामीजी– ऊंह आह आह आईईईई आईईईई ऊंह आह आह।
मैं– अब बोलो मामीजी कैसा लग रहा है?
मामीजी– बहुत कमीना है तू? मेरी ननद के सामने मुझे ही चोद रहा है।

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मैं– सिर्फ आपको ही नहीं मामीजी, आपकी ननद को भी चोद रहा हूं।
अब मेरी बात सुनकर मामीजी चुप हो गई। मैं मामीजी की चूत में आनंद में डूब रहा था।मेरा लन्ड मामीजी की चूत के परखच्चे उड़ा रहा था।मामीजी बुरी तरह से चुद रही थी। मामीजी के नंगे जिस्म पर सरसो के पत्ते और मिट्टी बहुत बुरी तरह से चुभ रही थी लेकिन मेरे लन्ड के नीचे मामीजी नतमस्तक थी।वो चुपचाप चूत चुदवा रही थी।तभी मामीजी फिर से पानी पानी हो गई और उनका पूरा गौरा चिकना जिस्म पसीने से लथपथ हो गया।
कहानी जारी रहेगी………..
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