किरण आंटी की गाण्ड मारी-2

(Kiran Aunti Ki Gand Mari-2)

Aunty Hot, खैर मैं आगे बढ़ा !

फिर मैंने दो-चार बार धक्का लगाया और हमें काफ़ी अच्छा लगा। मैं फिर धक्का लगाने लगा।

एक दिन मैंने उसकी गाण्ड में अपना आधा लण्ड भी डाल दिया उसे काफ़ी दर्द हुआ और १० दिन तक उसने मुझे छूने नहीं दिया। लेकिन ज्यादा दिनों तक वह खुद को रोक नहीं पाई। फिर उसकी आदत हो गई। अब मैं अराम से अपना पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में डालकर उसे चोदता। मुझे तो काफ़ी मजा आता पर उसकी प्यास शांत नहीं हो पा रही थी।

मेरा वीर्य भी निकलना शुरु हो गया। एक दिन उसकी बड़ी बहन ने हमें पकड़ लिया और फिर मैं उसे कभी नहीं चोद पाया।

आंटी ने कहा- बस बहुत हो गया ! मैं अभी आई !

वह उठी और जाने लगी। उनकी मैक्सी पीछे से चूतड़ के नीचे पूरी तरह भीग चुकी थी, फर्श भी गीला था। लोहा पूरी तरह गर्म हो चुका और हथौड़ा भी तैयार था। मैं उनके पीछे चल दिया, वे बाथरुम में घुसी पर दरवाजा बंद नहीं किया। मैं पहुँचा तो देखा- वह पेशाब के लिए मैक्सी उपर उठा कर बैठी थी और अपनी बुर में उंगली डाल-निकाल रही थी।

मैं उनके पीछे जाकर बैठ गया और अपनी उंगली उनकी गाण्ड में डाल दी, फिर अंदर-बाहर करने लगा। वह उत्तेजना में आवाजें निकालने लगी और अपनी गाण्ड उठाकर डॉगी स्टाइल में हो गई। फिर मैंने उनकी जांघों को फैलाया और अपनी जीभ से उनकी बुर चाटने लगा।

आनंद से उनका बदन ऐंठने लगा, आवाज ऊंची हो गई। वे जोर जोर से अपनी गाण्ड मेरे चेहरे पर मारने लगी, काबू करना मुश्किल हो रहा था तो मैंने अपना लोअर और चढ्ढी उतार फेंकी फिर मैंने उनकी चोटी को घोड़े की लगाम की तरह पकड़ी और उनकी गाण्ड में अपना लण्ड सटाया और चोटी को जोर से खीचा। वह दर्द की वजह से पीछे हटी और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में तेजी से घुस गया। वह चिल्लाई- अरे हरामी ! जानता नहीं कि बहुत दिनों से किसी ने मेरी गाण्ड नहीं मारी है ! आराम से नहीं कर सकता क्या !

फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरु किए। उन्हें आनंद आने लगा तो मैंने स्पीड बढ़ा दी। वह गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी। फच्च-फच्च की आवाजें आ रही थी। वे आह ! आहऽऽ आउच ! पेल दे ! फॉड़ दे ! चोद दे ! छोड़ना मत साले ! करके चिल्ला रही थी।

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मैं चरम पर पहुँच गया तो वे बोली कि वह झड़ने वाली है।

मैंने अपनी पूरी ताकत समेटी और स्पीड बढ़ा दी, वह झड़ गई। मैंने दो तीन इतने जोर के धक्के लगाए कि मानो मेरा लण्ड उनके मुँह से निकल आएगा।

मैं तेजी के साथ झड़ा और उनकी गाण्ड अपने गर्म लावे से भर दी। मैं उसी के ऊपर निढाल होकर लेट गया। हम कुत्ते की तरह हाँफ रहे थे। वह सीधी हुई और मेरा माथा चूमकर बोली- आज कई सालों बाद किसी ने इतनी मस्त चुदाई की है ! जी करता है कि तेरा लण्ड चूम लूँ।

मैंने कहा- तो चूम लो !

ला ! तू भी क्या याद करेगा कि किसी मादरचोद से पाला पड़ा़ है ! पर पहले एक कप चाय हो जाए ! यह बोलकर वह उठी और किचन में चली गई। मैंने अपना लण्ड साफ किया, कपड़े पहने और उसके पीछे हो लिया। हम दोनों बातें करने लगे।

बातों बातों में उन्होंने मुझे बताया कि उनके ताऊ का बेटा जो करीब उसकी ही उम्र का था, एक बार जाड़े में उसके यहाँ रहने आया। चूंकि उसके लिए सोने की कोई अलग से व्यवस्था नहीं थी इसलिए मैंने उसे अपने बगल में जगह दे दी। उसकी पैर फेंककर सोने की आदत थी। वह मेरे उपर अपना पैर डाल देता। मैंने कई बार उसका पैर अपने ऊपर से हटाया, उसे जगाया और कहा भी ठीक से सोए।

उसने कहा कि वह कोशिश करेगा !

पर कर न सका। फिर मेरी भी आदत हो गई। हम एक ही रजाई में चिपककर सोने लगे। एक दिन मैंने नींद में अपनी गाण्ड पर किसी कड़ी वस्तु का दबाव पाया। मेरी नींद खुल गई। मुझे लगा कि उसने अपनी जेब में कुछ रखा है और मैंने पलटकर उस चीज को पकड़ लिया। वह उसका औजार था। मैंने उसे खींचा तो मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया। पर तब तक उसकी नींद खुल चुकी थी। उसने पूछा- क्या हुआ?

जब मैंने बताया तो वह हंस पड़ा।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उसने कहा कि तू इतनी बड़ी हो गई पर तुझे इतनी छोटी सी बात नहीं पता।

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फिर उसने कहा- ऐसा हो जाता है, तेरी चिपक कर सोने की आदत नहीं है न, इसलिए तुझे अजीब लगा।

मैंने सोचा- सामान्य बात है, फिर मैंने ध्यान नहीं दिया।

मुझे भी अब अच्छा लगने लगा। एक दिन उसने रात अपना लण्ड मेरी गाण्ड से सटाकर कुछ धक्के लगाए तो मैंने कोइ विरोध नहीं किया। फिर क्या ! उसे हरी झण्डी मिल गई और वह चालू हो गया। वह रोज धक्के लगाता। वह मेरी चड्डी में हाथ डालकर मेरी गाण्ड व बुर सहलाने लगा। मुझे भी अच्छा लगने लगा। अब वह मेरी चड्डी उतारकर मेरी गाण्ड मारने लगा। पर जब वह वह मेरी बुर में धक्का लगाता तो मुझे ज्यादा आनंद आता। इसलिए मैं बार बार उसका लण्ड अपने बुर में सटाती और उसे धक्का लगाने को कहती। वह कुछ देर तक करता फिर गाण्ड मारने लगता।

खैर ये सब चलता रहा जब तक वह वापस नहीं चला गया। वह चला तो गया पर मुझे बुरी लत लगा गया। मेरी हवस बढ़ती गई। पहले मैंने उँगली डालना शुरु किया फिर मोमबत्ती फिर न जाने क्या क्या। मेरी झिल्ली भी फट चुकी थी।

दो साल बाद ताऊ के यहाँ शादी पड़ी। हम वहाँ गए। चूंकि गाँव का इलाका था इसलिए हमें खेत में जाना पड़ता।

एक दिन दोपहर में मैं फ्रेश होने निकली और गन्ने के एक खेत में घुस गई। जब मैं करके उठी तो पीछे से किसी ने मेरा मुँह जोर से बंद कर दिया। सामने ताऊ का लड़का आ गया और उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे कर दिया फिर मेरी पैन्टी के उपर से ही मेरी बुर चाटने- चूसने लगा।

मुझे अपनी गाण्ड पर किसी हथौड़े जैसे लण्ड का दबाव महसूस हो रहा था। मैं बहुत दिनों से चुदवाना चाहती थी इसलिए प्रतिरोध नहीं किया तो उन्होंने मुझे छोड़ दिया। फिर मेरी पैन्टी उतार दी और मुझे टाँगें फैलाने को कहा।

मैंने वैसा किया तो एक ने मेरी बुर और दूसरे ने गाण्ड चाटनी शुरु कर दी। शीघ्र ही मैं झड़ गई।

फिर एक ने पीछे से और दूसरे ने आगे से डालना शुरु किया। थोड़ा दर्द हुआ पर जल्दी सब ठीक हो गया। दोनों ने मुझे जमकर चोदा। मेरी दो साल की प्यास मिटा दी। हम वहाँ एक हफ़्ते रुके, इस दौरान मैंने ६ बार चुदाई करवाई।

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आंटी की कहानी सुनकर मैं फिर उत्तेजित हो गया। मैंने उनके पास पहुँच कर उनको अपनी बाहों में भर लिया, उनसे चूमा-चाटी करने लगा। मैंने गैस बुझा दी और आंटी से कहा- चाय बाद में पियूंगा, पहले मैं दूध पियूंगा।

वह मुस्कराई।

मैं उन्हें उनके बेडरुम में ले आया और बिस्तर पर लिटा दिया और फिर मैक्सी उतार दी। पूरा मैदान साफ था। मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके और उनके ऊपर लेट गया। मैं उनके होठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। वे पूरी तरह लाल हो गए।

फिर मैं नीचे सरका और चूचियों पर टूट पड़ा। बारी बारी से दोनो चूचियाँ मुँह में भरकर चूसने लगा। दोनों एकदम कड़ी होकर सीधी तन गई। आंटी का बुरा हाल था। उनकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी। वे आह आउच कर रही थी। उनकी साँसें काफ़ी तेज चल रही थी।

फिर उन्होंने कहा- अब मेरी बारी !

वह मेरी छाती पर बैठ गई और मेरा लण्ड चूसने लगी। उनकी बुर लगातार मेरे सीने पर पानी छोड़ रही थी। चिकनाई के कारण उनकी गाण्ड आगे पीछे सरक रही थी। मैंने उनकी जाँघ पकड़ कर उन्हें अपनी ओर खींचा और उसकी बुर को ठीक अपने मुँह पर ला दिया और चाटने लगा। काफी देर तक हम यह करते रहे और फिर पहले मैं तेजी से झड़ा बाद में वो।

हम निढाल होकर उसी तरह पड़े रहे। उनकी बुर मेरे मुँह पर और मेरा लण्ड उनके मुँह में पड़ा रहा।

बाद में मैं उठा, खुद साफ किया और घर चला आया। फिर जितने दिन मैं पानी के लिए उनके यहाँ गया, रोज दो बार उन्हें चोदा। वह पूरी तरह मेरी कायल हो चुकी थी।

जब भी मैं अपनी छत पर अकेला होता तो वह आंगन में आ जाती और मुझे अपनी गाण्ड, बुर चूचियाँ दिखाती। वह मेरे सामने हस्तमैथुन भी करती थी।

बाद में मैंने उनकी बेटी नेहा को भी चोदा। फिर माँ बेटी साथ-साथ चुदाने लगी। यह मेरी आप बीती है, इसके बारे में फ़िर कभी लिखूंगा।

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