लड़के ने बस में मेरी चूत गी ली की और घर आके चोदा-3

Ladke Ne Bus Mein Meri Chut Gili Ki 3

मेरे हाथ कॉप रहे थे, मैंने मोबाइल सामने बिस्तर पर फेक दिया. मेरे मोबाइल फेकते ही मेरा मोबाइल बज उठा, मैंने उसको उठा कर देखा तो काल उसी लड़के की थी, उसने काल बैक कि थी.  मैंने काल बजने दी, अजीब दुविधा में थी. सोचती रही कि क्या करू कि क्या न करू तब तक मेरा मोबाइल अपने आप बजना बंद हो गया. मोबाइल मेरे हाथ में ही था कि उसने दोबारा काल किया, इस बार मैंने धड़कते दिल से कॉल उठा ली. मैंने मोबाइल कान पर लगा लिया और उधर से ‘हाय’ कि आवाज़ आयी, आवाज़ बड़ी खुश्की भरी थी. मैं चुप रही.फिर उसने कहा,’ मैं जानता हूँ कि यह काल अपने की है’.

मैंने रुक कर पुछा,’कौन है’?

उसने हलके हॅसते हुये कहा,’ आपको मालूम है की मैं कौन हूँ.’
उसकी आवाज़ में शरारत थी. अब तक मैंने अपनी बदहवासी पर काबू कर लिया था, मैंने सपाट और तलक लहजे में कहा,’ क्या चाहिए मुझ से? मैं एक औरत हूँ और तुमसे बहुत बड़ी. कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या’?                                                          “Bus Mein Meri Chut Gili Ki”

उसने तपाक से कहा,’ आप मेरी गर्लफ्रेंड हो ऑंटी जी.’

मैंने भी तुरंत उसे डपटते कहा,’ मुझे आंटी वांटी मत कहो’.

उस पर उसने कहा,’ आप, अपने आप को बड़ी समझती हो इसलिए आपको आदर में मैंने आपको आंटी कहा.’

लड़का तेज था, तपाक से जवाब दे रहा था, मैंने उसको छेड़ते हुए कहा,

‘तुमको आदर यही दिखाना था, बस में आदर नहीं दिखा सकते थे ‘?

‘आप जो है और मुझे जो लगती है मैं उसका आदर करता हूँ, आपकी उम्र का नहीं’.

‘मैं क्या हूँ? मैं क्या लगती हूँ?’

‘आप में एक सेक्स अपील है. जो मुझे और किसी औरत में नहीं दिखाई देता’.

मैंने शरारत भरे अंदाज़ में उससे कहा, ‘तुम मेरी सेक्स अपील के बारे में क्या जानते हो? तुमने तो सिर्फ मेरे बम्स को ही नोचा है’?

‘आपकी गदराई चूतरो को छु कर ही मुझे बाकि सबका अंदाज़ा लगा गया है’. इसके साथ ही मुझे चूमने की आवाज़ सुनायी दी.

मैंने पूछा, ‘ यह क्या है’?                                                                            “Bus Mein Meri Chut Gili Ki”

उसने कहा, ‘ किस था मेरी नयी गर्लफ्रेंड के लिए.’

मैंने हॅसते हुए कहा, ‘ तुम मुझे अपनी गर्लफ्रेंड कह रहे हो! मैं एक शादी शुदा १३ साल की बच्ची की माँ हूँ!’

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उस पर उसने बेफिक्री से कहा,’ छोड़िये इन बातो को , आप मेरी दिलरुबा हो’.

मैंने बात टालते हुये उससे पुछा, ‘आज तुम क्यों नहीं आये’?

उसने सवाल मुझ पर ही दाग दिया ‘आपने मुझे मिस किया’?

मैंने तेजी से जवाब दिया,’नहीं! पागल हो क्या?’

उधर से उसने तंज लेते हुये कहा, ‘ अच्छा? फिर मुझे काल क्यों किया’?

मैंने भी कह दिया, ‘तुमने नंबर दिया था इसलिए काल मैंने किया था’.

मेरे जवाब पर उसने बड़े आहिस्ता से कहा,’ मैं आज यह जानने के लिए नहीं आया की आप मुझे मिस करती हो या नहीं. मेरा ख्याल सही था, मेरी दिलरुबा मुझे मिस करती है.’ यह कह कर वो बच्चो की तरह हॅसने लगा.                                                   “Bus Mein Meri Chut Gili Ki”

मैंने बात टालते हुये उससे पुछा, ‘आज तुम क्यों नहीं आये’?

उसने सवाल मुझ पर ही दाग दिया ‘आपने मुझे मिस किया’?

मैंने तेजी से जवाब दिया,’नहीं! पागल हो क्या?’

उधर से उसने तंज लेते हुये कहा, ‘ अच्छा? फिर मुझे काल क्यों किया’?

मैंने भी कह दिया, ‘तुमने नंबर दिया था इसलिए काल मैंने किया था’.

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मेरे जवाब पर उसने बड़े आहिस्ता से कहा,’ मैं आज यह जानने के लिए नहीं आया की आप मुझे मिस करती हो या नहीं. मेरा ख्याल सही था, मेरी दिलरुबा मुझे मिस करती है.’ यह कह कर वो बच्चो की तरह हॅसने लगा.                                       “Bus Mein Meri Chut Gili Ki”

मैं बात कर रही थी और बात किस तरफ जा रही है मुझे कोई भी ख्याल नहीं था, मैं बस उससे बात कर के मस्ती लेने लगी थी. हमारी आगे को बात चीत कुछ इस तरह से हुयी.

मैं: ‘तुम क्या करना चाहते हो’?

वोह: ‘मैं मिलना चाहता हूँ और आपको बाँहों में लेना चाहता हूँ’.

मैं: ‘ तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो? तुमको तो मुझे ज्यादा सेक्सी और जवान लड़की मिल जायेगी’.

वोह: ‘मुझे लड़किया अच्छी नहीं लगती मुझे मैच्योर औरते पसंद है’.

मैं: ‘कितनी मैच्योर औरतो को अब तक जानते हो’?

वोह: ‘ किसी भी को नहीं , केवल फंतासी में महसूस किया है. आज तक मैं इतने करीब से किसी को भी नहीं जाना है , जितना मैंने आपको जाना है और किया है’

मैं: ‘सुनो, मैं तुमसे नहीं मिलूंगी, समझे? मेरी खुशहाल शादीशुदा ज़िन्दगी है और उसको मैं तुम्हारे लिए ख़राब नहीं करूंगी’.

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वोह: ‘ठीक है. मैं आपके हाँ का इंतज़ार करूंगा’.

मैं: ‘कोई बात नहीं, तुम काल आ रहे हो’?

वोह: ‘कहाँ? तुम्हारे घर’?

मैं: ‘ नहीं बेवकूफ! बस पर’.

वोह: ‘ बिलकुल! चूतरो की मालिश के लिए तैयार रहना’.

हम दोनों ही इस बात पर हॅसने लगे.

वोह: ‘ सुनो कल पैंटी मत पहनना’.

मैं: ‘क्या’!!!

वोह: ‘ ओह हो! कल साडी के अंदर पैंटी मत पहनना’!                                                             “Bus Mein Meri Chut Gili Ki”

मैं: ‘पागल हो क्या’!

यह कह कर मैंने मोबाइल काट दिया.

जब मैंने मोबाइल बिस्तर पर फेका तब तक मैं इतनी गीली हो चुकी थी की अनायास मेरा हाथ चूत पर चला गया और उसी हालत में मेरी उसकी हुयी बात को याद करते हुये मैं मास्टरबेट करने लगी. मेरी उंगलियां मेरी गीली चूत के अंदर बहार हो रही थी और मैं अपनी क्लिट को भी बेरहमी से रगड़ रही थी. मैं लड़के की हिम्मत के बारे में सोंच रही थी, जो मुझसे २० साल छोटा था लेकिन बड़े अधिकार से मुझ से बिना पैंटी के साडी पहनने के लिए कह रहा था ताकि वोह भरी बस में खुले आम मेरे चूतरो से और मस्ती ले सके. सेक्स की इस असीम चाहत से मैं रोमांचित हो उठी और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. मैं बिस्तर पर पड़े पड़े उसी के बारे में और उससे हुयी बातो के बारे में सोचती रही. मैंने उसका नंबर अपने मोबाइल में, एक लड़की के नाम सेव कर लिया. तब मुझे ध्यान आया की अभी तक न मैंने अपना नाम उसे बताया था न उसने ही अपना नाम मुझे बताया था. Meri Chut Gili Ki

अगले दिन जब मैं अपनी बेटी को छोड़ने के लिए तैयार हुयी तब मुझे कल वाली उसकी बात ध्यान में आयी. मैंने शीशे में अपने आपको घूरा और मैंने अपनी साडी पेटीकोट उठा कर एक झटके में पैंटी उतार दी. मैं जब बाहर निकली तो बिना पैंटी के मुझे बड़ा अजीब लग रहा था. लग रहा था मेरी चूत भरे बाज़ार नंगी होगयी है और मेरी झांघो के बीच वोह रगड़ी जा रही है.मैं अंदर ही अंदर बहुत उतेजित भी थी और सोंच भी रही थी, हे भगवान! मैं यह क्या कर रही हूँ! वह भी एक २० साल के प्रेमी के लिए! मैं जब बस स्टॉप पर पहुँची वह लड़का वहाँ पहले से ही खड़ा था. उसने जीन्स और टी शर्ट पहने हुयी थी, हमारी आँखे मिली और हमने नज़र घुमा ली, जैसे हम दोनों एक दुसरे को नहीं जानते .
हमेशा की तरह मैं हैंडल पकड़ कर खड़ी होगयी और वोह लड़का धक्का देता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा होगया. उसने फ़ौरन मेरी कमर के नीचे हाथ रख कर मेरी पैंटी को महसूस करने की कोशिश की. जब उसको इसका एहसास हो गया की आज मैंने उसके कहने पर पैंटी नहीं पहनी है तब उसने मेरे चूतरो को थप थपा दिया, जैसे वोह मुझे धन्यवाद दे रहा हो. बिना पैंटी के जब उसके हाथ मेरे चूतरो के ऊपर पड़े मैं बिना दांत भीचे नहीं रह पायी. आज पहली बार उसके उद्वेलित हाथो की गर्मी मेरे चूतरो पर सिर्फ साडी के ऊपर से महसूस कर रही थी.                                                                                               “Meri Chut Gili Ki”

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मैंने थोड़े पैर और फैला दिया और जैस मुझे उम्मीद थी उसका कड़ा लंड मेरे चूतरो की दरार से रगड़ खाने लगा. आज वह अपना लंड वही रगड़ रहा था और मेरे चूतरो को मसल भी रहा था,मैं बिलकुल अलग दुनिया में पहुँच गयी थी, उस भीड़ भरी बस में मैं वासना के उस सागर का सुख ले रही थी जो मेरी शादी के १८ साल बाद भी अभी तक मुझसे महरूम था. पुरे रास्ते उसका लंड मेरे चूतरो पर रगड़ता रहा और मेरी चूत भी आज कुछ ज्यादा गीली हो गयी थी. आज मैं पैंटी नहीं पहने थी , मेरी चूत का पानी बहकर मेरी जांघो पर आगया था. जब उसका स्टॉप आया वोह उतरने के लिए आगे आया और जाते जाते धीरे से मुझे ‘थैंक्स , कॉल मी’ कहते हुये आगे बढ़ गया. मैं मूर्ति की तरह वैसे ही वैसे खड़ी रही.

मैं जैसे तैसे घर पहुँची और घुसते ही रुमाल से मैंने अपनी बहती हुयी चूत को पोंछा और उसको मोबाइल लगा दिया.

वोह: ‘हाय दिलरुबा!’

मैं: ‘हम्म्म’.

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