मामी के साथ बिताई एक रात बनी सुहागरात-1

Mami ke sath bitai ek raat bani suhagraat-1

Mami ki chudai ki kahani, मेरी उम्र 20 साल है. बात उन दिनों की है जब मेरे मामा जी की तबीयत खराब हो गयी थी और वो मुंबई के हॉस्पिटल में भरती थे. इधर मेरी मामी जी को गाँव से लाने का काम मुझे करना था इसलिए मैं गाँव चला गया. मामा की शादी अभी 2 बरस पहले ही हुई थी और शादी के कुछ ही महीने बाद से वो मुंबई में काम करने लगे थे. दो तीन महीने में एक दो दिन के लिए वो गाँव जाते थे. इधर बीमारी के वजह से वो तीन महीने से गाँव नहीं जा सके थे.

गाँव में पहुँचा तो नानी जी किसी रिश्तेदार के यहाँ गई हुई थी. रात में खाना खाने के बाद मैं मामी के कमरे में टीवी देखने लगा. नाना जी घर के बाहर बरामदे में सो गए. मामी जी के कमरे में एक ही पलंग था. जब मामी जी कमरे में सोने के लिए आई तो मैं उठकर बाहर जाने लगा. मामी जी ने कहा कि तुम भी अंदर ही सो जाओ. मैंने पूंछा कि आप कहाँ सोएंगी. वो बोली कि मैं नीचे ज़मीन पर सो जाउंगी. मैंने कहा कि नहीं, आप पलंग पर सो जाओ मैं नीचे सो जाता हूँ. वो बोली नहीं तुम पलंग पर सो जाओ. मैं नहीं माना और मज़ाक में बोला कि आप इसी पलंग पर सो जाओ, काफ़ी बड़ा तो है, दिक्कत नहीं होगी. पहले तो वो हँसी पर फिर बोली कि ठीक है, तुम दीवार के तरफ सरको मैं ऊपर ही आती हूँ. मैं दीवार के तरफ सरक गया और मामीजी ने लालटेन बिल्कुल धीमा करके मेरे बगल में आकर लेट गयी. लगभग आधा घंटा हम लोग बात करते हुए सो गये.

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अब तक मैं सिर्फ़ मामीजी को अपनी मामी के तरह ही देखता था. वो जबकि काफ़ी जवान थी, लगभग 21 – 22 साल की, पर मेरे मन में ऐसी कोई ग़लत भावना नहीं थी. लेकिन वहाँ मामीजी को अकेले में एक ही बिस्तर पर पाकर मेरे मन में अजीब सी हलचल मची हुई थी. मेरा लंड खड़ा था और दिमाग़ में सिर्फ़ मामी की जवानी ही दिख रही थी. किसी तरह मैं इन सब गंदी बातों से ध्यान हटाकर सो गया. लगभग आधी रात में मेरी नींद खुली और मुझे ज़ोर से पेशाब लगी थी. मैं तो दीवार के तरफ था और उतरने के लिए मामी के उपर से लाँघना पड़ता था. लालटेन भी बहुत धीमी जल रही थी और अंधेरे में कुछ साफ दिख नहीं रहा था. अंदाज़ से मैं उठा और मामीजी को लाँघने के लिए उनके पांव पर हाथ रखा. हाथ रखा तो जैसे करेंट लग गया. मामी जी की साडी उनके घुटनों के उपर सरक गयी थी और मेरा हाथ उनके नंगी जांघों पर पड़ा था. मामीजी को कोई आहट नहीं हुई और मैं झट से उठकर रूम के बाहर पेशाब करने चला गया. पेशाब करने के बाद मेरा मन फिर मामीजी के तरफ चला गया और लंड फिर से टाइट हो गया.

मैंने सोचा की मामी तो सो रही है, अगर मैं भी थोड़ा हाथ फेर लूं तो उनको मालूम नहीं पड़ेगा. और अगर वो जाग गयी तो सोचेगी कि मैं नींद में हूँ और कुछ नहीं कहेंगी. दोबारा पलंग पर आने के बाद मैं मामी के बगल में लेट गया. मामीजी अब भी निश्चिंत भाव से सो रही थी. मैंने लालटेन बिल्कुल बुझा दी जिससे कि कमरे में घुप अंधेरा हो गया. लेटने के बाद मैं मामी के पास सरक कर अपना एक हाथ मामीजी के पेट पर रख दिया. थोड़े इंतजार के बाद जब देखा कि वो अब भी सो रही थी मैंने अपना हाथ थोडा उपर सरकाया और उनके ब्लाउस के उपर तक ले गया. उनकी एक चुची की आधी गोलाई मेरे उंगलियों के नीचे आ गयी थी. धीरे धीरे मैंने उनकी चुची दबाना शुरू किया और कुछ ही देर में उनकी वो पूरी चुची मेरे हांथों में थी. मुझे ब्लाउस के उपर से उनकी ब्रा फील हो रही थी पर निपल कुछ मालूम नहीं पड़ रहा था.

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मामीजी अब भी बेख़बर सो रही थी और मेरा लंड एकदम फड़फड़ा रहा था. सिर्फ़ ब्लाउस के उपर से चुची दबाकर मज़ा नहीं आ रहा था. मैंने सोचा कि अब असली माल टटोला जाए और अपना हाथ उठा कर मामीजी की जाँघ पर रख दिया. मेरा हाथ मामी की साड़ी पर पड़ा. पर मुझे मालूम था की थोडा नीचे हाथ सरकाउं तो जाँघ खुली मिलेगी. मैंने हाथ नीचे सरकाया मामी की नंगी जांघ मेरे स्पर्श में आ गयी क्या नरम गरम जाँघ थी मामी की। तभी मेरा स्पर्श पाकर मामीजी ने थोड़ी हलचल की और फिर शांत हो गयी.

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मैं भी थोड़ा देर रुक कर फिर अपना हाथ उपर सरकाने लगा. साथ में साड़ी भी उपर होते जा रही थी. मामीजी फिर से कुछ हिली पर फिर शांत हो गयी. मेरा मन अब मेरे बस में नहीं था और मैंने अपना हाथ मामी के दोनो जांघों के बीच में ले जाने की सोची. पर मैंने पाया कि मामी की दोनो जाँघ आपस में उपर सटे हुए थे और उनकी बुर तक मेरी उंगलियाँ नहीं पहुँच सकती थी. फिर भी मैंने अपना हाथ उपर सरकाया और साथ में मेरी उंगली दोनो जांघों के बीच में घुसाने की कोशिश की. मामी फिर से हिली और नींद में ही उन्होने अपना एक पैर घुटनों से मोड़ लिया जिससे उनकी जांघें फैल गयी.

मौके का फ़ायदा उठाकर मैं भी अपना हाथ उनके जांघों तक ले गया और जब की मेरा अंगूठा अब मेरे मामी के बुर के उपरी उभार पर था, मेरी पहली उंगली मामी के जांघों के बीच उनकी पैंटी के थ्रू बुर के असली पार्ट पर थी. मामी की बुर की गर्माहट मेरी उंगली पर महसूस हो रही थी और कुछ कुछ गीलापन भी था. मेरा दिल अब ज़ोरो से धड़क रहा था. मेरा हाथ मामी के बुर पर था और कमरे में बिल्कुल अंधेरा था. मैंने सोचा कि अब क्या करूँ. मामी की बुर तो उनकी पैंटी से ढकी है और पैंटी में हाथ तो डाला तो वो ज़रूर जाग जाएँगी.

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फिर भी मैं नहीं माना और मैंने सोचा कि धीरे से अपनी एक उंगली उनकी पैंटी के साइड में से अंदर डालूं. मैंने धीरे से अपनी उंगली मोड़ी और उनकी जांघों के बीच में पैंटी को थोड़ा खीच कर एक उंगली अंदर डाल दी. मेरी उंगली उनकी बुर के फोल्ड्स पर पहुँच गयी और मैंने पाया कि उनकी बुर एकदम गीली थी जिससे मेरी उंगली का टिप उनके बुर के मुहाने के अंदर आसानी से घुस गया. मैंने अपनी उंगली धीरे धीरे से मामी के बुर में हिलाने लगा और तीन चार बार हिलाने पर ही मामी जी एक झटके से जाग गयी. मैं तो एकदम से सन्न रह गया और सोचा कि अब तो मरा.

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