मरीज का मोटा लंड पकड़ कर खुद मरीज बन गई-3

(Mareej Ka Mota Lund Pakad Kar Khud Mareej Ban Gai-3)

फिर मैंने बड़ी मुश्किल से किसी को पैसे देकर एक बोतल बियर मंगाई थी, आज में उसका पूरी तरह से स्वागत करना चाहती थी। फिर में शाम चार बजे से ही अपने सच्चे प्यार के लिए तैयार होकर बैठ गयी और फिर मैंने हल्का सा श्रंगार करके पर्फ्यूम लगाया और फिर एक पारदर्शी ब्रा-पेंटी के ऊपर नया रेशमी गाउन पहन लिया, उस गुलाबी पतले गाउन को पहनना और नहीं पहनना बराबर था।
“Mareej Ka Mota Lund”

अब बाहर से मेरा एक-एक अंग साफ नजर आ रहा था और बिस्तर पर सफेद रेशमी चादर बिछा दिया और पूरे कमरे में स्प्रे चारों तरफ कर दिया और कुछ रजनी गंधा की अगरबत्ती को पलंग के सिरहाने पर रख दिया। फिर करीब छेबजे तक तो में एकदम बेताब पागल हो चुकी थी और बार-बार घड़ी को देखती हुई में चहल कदमी कर रही थी। फिर छे बजकर दस मिनट पर दरवाजे की घंटी बजी, तब में दौड़कर दरवाजे पर चली गयी। अब में चाबी के छेद से देखकर ही दरवाजा खोलना चाहती थी, क्योंकि कोई और हुआतो मुझे इस रूप में देखकर पता नहीं वो क्या सोचे? अब उसको देखकर मैंने दरवाजा खोलकर तुरंत उसका एक हाथ पकड़कर उसको अंदर खींच लिया।
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अब में झट से दरवाज़ा बंद करके उसके साथ अच्छे से लिपट गयी थी और उसको चूमते हुए मैंने उसका पूरा मुँह भर दिया था और उसको बोली कि कहाँ चले गये थे? क्या तुम्हे मेरी एक बार भी याद नहीं आई? तब उसने कहा कि में यहीं था, लेकिन में जानबूझ कर ही आपसे मिलना नहीं चाहता था, कहाँ आप और कहाँ में? चाँद और सियार की जोड़ी कभी अच्छी नहीं लगती। तभी मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया और उसको बोली कि खबरदार जो मुझसे दूर जाने की भी बात तुमने सोची, अगर जाना ही था तो मेरे जीवन में तुम आए ही क्यों? हलचल पैदा करके भागने की सोच रहे थे और अब मुझे यह आप-आप कहना छोड़ो, तुम्हारे मुँह से तुम और तू अच्छा लगेगा।

अब उसने कहा, लेकिन मेरी बात तो सुनिए, तब मैंने उसको कहा कि बैठ जाओ और यह बात कहकर मैंने उसको धक्का देकर सोफे पर बैठा दिया। अब मैंने मन ही मन निर्णय कर लिया था कि इतना सब होने के बाद अब में इशान से कोई शरम नहीं करूँगी और में निर्लज होकर अपनी बात मनवा लूँगी।फिर में उठी और मैंने फ्रिज से बियर की बोतल को निकालकर उसका ढक्कन खोल लिया औरफिर एक काँच के गिलास में निकालकर उसके पास आ गई। दोस्तों उस गिलास में उफनता हुआ झाग मेरे जज्बातों का उदाहरण पेश कर रहा था।           “Mareej Ka Mota Lund”

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अब में उसको सटकर बैठ गयी और गिलास को मैंने उसके होंठो से लगा दिया, तब उसने मेरी तरफ देखते हुए मेरे हाथों से एक घूँट पी लिया। अब में उस गिलास को उसके हाथों में पकड़ा कर खड़ी हो गयी और उसको बोली कि तुम्हें मेरे यह बहुत अच्छे लगते थे ना? और मैंने अपने बूब्स की तरफ इशारा किया और उसके होंठो के बिल्कुल पास आकर पूछा कि खोलकर नहीं देखना चाहोगे? अब इससे पहले कि वो कुछ कहे मैंने खड़े होकर एक झटके में अपने गाउन को शरीर से अलग कर दिया। अब वो एकटक मेरे बूब्स की तरफ देख रहा था, में उसके पास आकर अपने दोनों पैरों को फैलाकर उसकी गोद में बैठ गयीऔर उसके सर को पकड़कर मैंने अपने एक बूब्स पर दबा दिया था।                           “Mareej Ka Mota Lund”

फिर मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा कि ब्रा भी खोल दो, लेकिन उसको कोई हरकत करता नहीं देखकर मैंने खुद ही अपनी ब्रा को अपने शरीर से अलग कर दिया था। अब में आज इतनी उत्तेजित थी की जरूरत पड़ने पर इशान से सेक्स भी करने को तैयार थी। फिर मैंने उसको कहा कि देखो ये तुम्हारे होंठो के लिए कितने बेताब है और यह कहकर मैंने उसके होंठो से अपने निप्पल सटा दिए। अब पहले तो वो थोड़ा सा झिझक गया और फिर धीरे से उसके होंठ खुले और अब मेरा एक निप्पल उसके मुँह में प्रवेश कर गया।

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अब वो अपनी जीभ से मेरे निप्पल के आगेके हिस्से को अपनी जीभ से गुदगुदाने लगा था। अब उसके यह सब करने की वजह से मेरेमुँह से आहह्ह्ह ऊह्ह्ह्हह प्लीज जैसी आवाजे निकलने लगी थी। फिर में उसी समय जोश में आकर उसके बालों में अपना हाथ फैरते हुए बड़बड़ाने लगी थी और में अब उसके दूसरे हाथ को अपने दूसरे बूब्स पर रखकर बूब्स को दबाने भी लगी थी। फिर कुछ देर के बाद उसने मेरे दूसरे निप्पल को अपने मुहं में भरकर उसको चूसना शुरू कर दिया। अब उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर लगातार घूम रहे थे और उसका वो स्पर्श इतना हल्का था मानो शरीर पर कोई रुई फैर रहा हो।                “Mareej Ka Mota Lund”

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फिर कुछ देर के बाद उसने अपना मुँह उठाते हुए कहा कि मेडम अब भी सम्भल जाइए, अब भी वक्त है, मुझमे और आपमे जमीन-आसमान का फर्क है। अब में उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत ही एक झटके से उठीऔर अपने शरीर से मैंने आखरी कपड़ा भी उतार दिया और में उसको कहने लगी कि देखो इसकी एक झलक पाने के लिए कई लोग बैचेन रहते है और आज में खुद तुम्हारे सामने बिल्कुल बेशरम होकर नंगी खड़ी हूँ और तुम मुझसे दूर भागे जा रहे हो। फिर मैंने उसका एक हाथ पकड़कर उसको उठा दिया और खीचते हुए अपने बेडरूम में ले गयी। अब में उसको पलंग केपास खड़ा करके उसके कपड़ों पर टूट पड़ी थी, कुछ ही देर में वो भी मेरी ही हालत में आ गया था।                          “Mareej Ka Mota Lund”

फिर में उसको धीरे से धक्का देकर बिस्तर पर लेटाकर उसके ऊपर चढ़कर बैठ गयी। अब में उसके शरीर के एक-एक अंग को चूमने, चाटने लगी थी औरमैंने उसके निप्पल को अपने दाँतों से हल्के से काट भी दिया था। अब मैंने उसके होंठो से अपने होंठ रगड़ते हुए अपनी जीभ को उसके मुँह में डाल दिया और वो भी मेरी जीभ को चूसने लगा था। अब मेरे हाथ उसके लंड पर घूम रहे थे, मैंने अपना पूरा ध्यान उसके लंड की तरफ कर दिया था और फिर सबसे पहले मैंने उसके लंड को चूमा और फिर उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी। अब उसके लंड का आकार पहले से ज्यादा बढ़कर लंबा और मोटा हो गया था। उसका आकार देखकर एक बार तो में सिहर गयी थी कि यह दानव तो आज मेरी चूत को फाड़कर ही रख देगा और यह बहुत ही शैतान है, क्योंकि इसने मुझे ऐसा रोग लगाया है कि अब यह मेरा नशा बन गया है। फिर बहुत देर तक हम दोनों एक दूसरे के बदन से खेलते रहे, में उसकी तरफ देखकर बोली कि आज में अपना कौमार्या तुम्हें भेंट कर रही हूँ, मेरे पास इससे महँगी चीज कोई नहीं है, प्लीज़ आज मुझे एक लड़की से पूरी औरत बना दो।

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फिर मैंने उसको सीधा लेटाकर उसका खड़ा लंड अपनी चूत के मुँह पर रखकर थोड़ा सा ज़ोर लगाया, लेकिन अनाड़ी होने की वजह से और मेरी चूत का आकार छोटा होने की वजह से उसका लंड अंदर नहीं जा सका था। अब मैंने दोबारा से अपनी कमर को उठाकर उसके लंड को अपने हाथों से पकड़कर अपनी चूत के खुले मुहं परसेट किया और अपने शरीर को ज़ोर से नीचे किया, लेकिन दोबारा से उसका लंड फिसल गया।अब मैंने झुंझला कर उसकी तरफ देखा और बोली कि कैसे आदमी हो? तब से में कोशिश कर रही हूँ और तुम चुपचाप पड़े हुए हो, क्या हो गया है तुम्हें?
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अब आख़िर उसने अपनी झिझक को ख़त्म करके मुझे बिस्तर पर पटक दिया था और फिर मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करके उसने सबसेपहले मेरी चूत को चूम लिया। फिर मैंने खुश होकर उसको कहा कि हाँ यह हुआ ना मेरेशेर, मसल दो आज तुम मुझे मेरी पूरी गरमी को निकाल दो। फिर बड़ी देर तक मेरी गीली चूत पर अपनी जीभ को फैरने अच्छी तरह से चूत को चूसने चाटने के बाद वो उठगया। दोस्तों में तो उसकी जीभ से ही एक बार झड़ चुकी थी, उसने उसी समय मेरे दोनों पैरों को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और अपने लंड को मेरी टपकती रसभरी चूतके मुहं पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया।                     “Mareej Ka Mota Lund”

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