मेरे पुराने दोस्त की मम्मी की चुदाई उनके घर पर 1

(Mere purane dost ki mummy ki chudai unke ghar par)

हेलो दोस्तो मेरी कहानी पूरी तरह से ओरिजनल नही होती है जिन के साथ मेने सेक्स किया है उनकी पहचान छिपाने के लिए उनके नाम और जगह में चेंज कर देता हूं। इसलिए आप से विनती है कि सिर्फ कहानी पढकर उसका मजा लीजिये
कोई भी मुझे उनका नंबर या और कोई बात न पूछे आप सब से विन्रम निवेदन है और कहानी केसी मुझे जरूर बताएं।
तो दोस्तो मेने बताया था कि में अपने आफिस के काम की वजह से बहार जाता रहता हूं ऐसे ही एक बार मुझे दिल्ली आफिस के काम की वजह से 1 महीने के लिए जाना था।

एक दिन काम से फुरसत मिलते ही में मॉल में घूम रहा था में बचपन के दोस्त विनय से मिला वह दिल्ली में बस गया था आज बहुत सालो बाद मिला था हमने पुराने दिन याद किये और उसने घर चलने को कहा मगर उसी समय मेरे आफिस से कॉल आगया तो बाद में मिलने का वादा कर के में आफिस निकल गया एक दिन मुझे एक अज्ञात नंबर से फोन मिला और एक सेक्सी आवाज सुनाई दी, लेकिन मुझे बाद एहसास हुआ कि वह मेरे दोस्त की माँ जूही है। वह मुझे रविवार को दोपहर के भोजन के लिए घर आने के लिए कहा, शुरू में, मैं थोड़ा संकोच था बाद मेने उन्हें हामी भरी में बहुत खुश था कि बहुत सालो बाद आंटी से मिलने वाला था।

बचपन मे आंटी ने मेरे गाल खूब खिंचती थी तो में गुस्सा होता तो मेरे गाल पर पपी देकर मुझे मनाती थी मगर वो सब बचपन की बाद है आज तो उन से मिलने वाला था में उनके घर पहुच कर जब मैंने घंटी बजाई, आंटी ने दरवाजा खोला, मैं उसकी सुंदरता में इतना घो गया कि आंटी मुझे कब से आवाज देरी है मुझे मालूम ही नही परा थोड़ी देर में मुझे होश आया तो उन्होंने पूछा कहाँ खोगये थे मेने उनसे कहा आंटी आप को बहुत सालो के बाद देख रहा हु तो सदमे में था कि आज भी आप पहले जैसे ही सुंदर हो बिल्कुल भी नही बदली वो हल्का सा मुस्कुरा दी आंटी का फ़िगर 30-28-34 उन्हीने अपने आप को बहुत ही अच्छे तरीके से मेंटेन कर रखा था मेने बापिस ऊपर से नीचे उन्हें देख उन्होंने रेड रंग की सारी में ब्लैक ब्लाउज पहन रखा था इतनी उम्र के बाद भी वो कयामत लग रही थी फिर अंदर आकर मेने बात की साथ ही नीलू दीदी का पूछा तो उन्होंने कहा उसकी शादी होगई है वो अपने पति के साथ मुम्बई में रहती है फिर उन्होंने कहा तुम यहाँ बेठो में जब तक तुम्हारे लिए अच्छा सा खाना बनाकर लाती हु जब वो उठ कर चली तो उसकी गांड नागिन की तरह लहरा रही थी। उस को देख कर मेरा लंड पेंट में जंग के लिए तैयार हो रहा था तभी
दरवाज़े की घंटी बजती है ।ट्रिंग..ट्रिंग…

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आंटी: मोहित देखो तो कौन है। मुझे तो यकीन है कि आंटी यह अंकल और विनय है वह लिविंग रूम में आई और सामान को अंकल से ले लिया क्यो की वो आफिस से आकर थक चुका है मैंने देखा कि अंकल अब पहले जैसे नही रहे उनका एक बड़े पेट के साथ बहुत ही बुड्ढे लग रहे थे। मेने सोचा अंकल की किस्मत अछि हे जो उनके हाथ मे रस गुला मिठाई खाने को मिलती है रोज़ मगर उनकी हालत देखकर मुझे लगा वह बिस्तर में भी दम रखते होंगे क्या इतनी स्वीट मिठाई के सामने हम वही सोफे पर बैठ कर बाते करते हुये टीवी देख रहे थे जबकि आंटी भोजन के लिए तैयारी कर रही थी। आंटी ने अंकल से कहा जब तक मे खाना बनाऊ आप नहा लीजिये अंकल नहाने चल दिये और थोड़ी देर बाद अंकल नहाकर आये जब तक आंटी खाना पड़ोस रही थी।

आंटी के बदन से आती खुसबू और उनके हिलते बॉब्स मुझे अच्छे लग रहे थे। दोपहर के भोजन के बाद आंटी ने अंकल को कहा आज पड़ोस में कोई पोग्राम है तो आप को मुझे वहां जाना चाहिए अंकल चेंज कर के आये तो आंटी भी चेंज करने गई । मगर मुझे नही मालूम था कि उनके और मेरे दोस्त के कमरे में कामन बाथरूम था मुझे जोर से पेशाब आई तो में बाथरूम गया मगर लगता था कि आंटी दरवाज़ा बंद करना भूल गई, और वह अपनी चुद को सेविंग कर रहीं थी। आंटी: वो मुझे चिलाकार कहा ये क्या बतमीजी है अंदर आने से पहले देखना तो चाहिए मेने उनसे माफी मांगी मगर उसके बदन को देखकर मुझे जाने का मूड नही हो रहा था मगर आंटी अपने एक हाथ अपने बॉब्स पर रखा जो कि उसके आधे हिस्से को भी नहीं ढंक पा रहे थे। तथा दूसरा हाथ अपनी चुद पर रखा आंटी के कहा मोहित तुम्हारे पीछे कपड़े परे है उनको पास करना आंटी के शब्द मेरे दिमाग में नहीं आ रहे और मैंने उन्हें लगातार देखा और मेरा लंड पेंट में फटने को तैयार था।

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आंटी ने मुझे चिल्लाकर मुझे थप्पड़ मारा, और मुझे बाथरूम से चले जाने को कहा में वहा से चला गया मगर थोरे दिन बाद मुझे विनय का कॉल आया कि वो और उसके पापा उनके दोस्त की शादी है तो बाहर है और आंटी को कुछ मार्गेट का काम है तो तेरे पास टाइम है तो उनको मेरी गाड़ी से मार्किट ले जाऊ हूं में भी फ्री था तो उनके घर चला गया और आंटी कौं चलने को कहा में आंटी से नजर नही मिला पा रहा था गाड़ी चलाते समय मैंने जान बूझकर नहीं कुछ अचानक ब्रेक लगाए, ट्रैफिक के कारण जब भी उसका बॉब्स मेरी पीठ को छू रहा होता है और मेरी लंड अपनी औकात में आने लगा एक बार जोर से मुझे ब्रेक लगाने पड़ा आंटी ने हाथ मेरी जांघ पर रख लिया और दर्पण में उसकी मुस्कराहट देखी, तब उसने अपना हाथ तुरंत उठा लिया और माफी माँगी। मैं जानता हूँ कि आंटी ने मेरा कठोर लंड को महसूस किया होगा, मगर ये क्या थोड़ी देर में बूंदा बांदी शुरू होगई जब मैं मार्किट के पास पहुचे की जोर दार बारिश शुरू हो जाती है और हम सड़क के बीच में हैं और पूरी तरह से भीग गए।

मेने कहा आंटी क्या हम वापिस घर चले या अभी भी आप को मार्किट चलना है। क्योंकि आंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी तो उन्होंने घर ही चलने को कहामें उनके घर पहुच गया मगर मेरे पास कपड़े नही थे तो आंटी ने कहा विनय के कमरे में जाकर उसके कपड़े पहन लो में जब विनय के कमरे में गया तो कोई भी पेंट मुझे फिट नही आरही थी तो मैने वहां से बरमुंडा पहन कर बाहर आया तो आंटी के कमरे में जाने लगा मगर में अभी भी थोड़ा डर रहा था कि कही में वहां जाऊं,और आंटी मुझे थप्पड़ मार देगी मेने सोचा मुझे चिल्लायेगी मगर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्यो की में कहा वहां ज्यादा दिन रहने वाला था। मेने हिम्मत कर के उनके कमरे में प्रवेश की तो देखा कि आंटी ने सिर्फ साड़ी उतारी थी मुझे देख कर आंटी के होंठों पर मुस्कान है।
भाग 2 में जारी रहेगा

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