मेरी हिंदी कि पूरी कहानी-1

Meri Hindi Chudai Ki Poori Kahnai-1

मेरा राघव अभी एक नेशनल बैंक में हाई पोस्ट पर पि.ओ. हूं. २१ साल में ग्रेजुएशन करने के तुरंत बाद मेरा प्रोबेशनरी ऑफिसर में सिलेक्शन हो गया. ३ महीने की इंडक्शन ट्रेनिंग के बाद एक ब्रांच में नौकरी लगी, एक बड़ी सिटी में. इस ब्रांच में टोटल २७ स्टाफ हे. Meri Hindi Chudai Ki Poori Kahnai.

जिनमें सात फीमेल थी. जिन में से तिन अनमैरिड थी और चार मैरिड ओरते थी. उन चार मैरिड औरतों में से एक ने मुझे स्टार  में ही वार्न कर दिया कि अगर मैं शादी करना चाहता हूं, तभी किसी अनमैरिड लड़की से फ्रेंडशिप करु… उसने कहा कि मैं डायरेक्ट पि.ओ. हूं. तो अनमैरिड गर्ल मैरिज के लिए ही दोस्ती करेंगी तुम्हारे साथ इस बात का ख्याल रखना.

उसका कहना एकदम ठीक ही था. अपनी नौकरी के दौरान मैने देखा कि कई लड़कियों ने पी.ओ. को फंसा कर उनसे दोस्ती की और फिर शादी भी उनके साथ कर ली. मैंने उस औरत की बात में मान ली और मैंने उससे कहा कि अभी चार पांच साल मेरा शादी करने का कोई इरादा नहीं है. लेकिन उस औरत की मेरे साथ मेरी बढ़िया दोस्ती हो गई. वह एक चार पांच साल की बेटी की मां थी. उसके साथ साथ  दूसरी मेरिड औरतों से भी मेंरी धीरे धीरे अच्छी दोस्ती हो गई थी.

वह पहली वाली औरत मुझे घर पर भी बुलाने लगी और १ महीने में मेरा लौड़ा उसकी बुर में घुस गया. वह २५-३६ साल की एक गदराई औरत थी. मैं उससे पहले भी एक औरत को, जो मेरी मां की उमर की थी उसको सालों से चोद रहा था वह भी अपने ही गांव में.

यह मेरी पहली पोस्टिंग थी सिर्फ ६ महीने के लिए. इन छह महीनों के दौरान हमने खूब मस्ती से पेट भर कर चुदाई की और हर बार उसके घर में मैने उसे ठोका था. ६ महीने के बाद मेरी नई पोस्टिंग आ गई… उसने मुझे अपने घर पर खाने के लिए बुलाया, मैं उसके और उसकी बेटी के लिए बढ़िया गिफ्ट लेकर गया. डिनर के समय उसका हस्बैंड भी साथ था … उस औरत ने मुझे रिक्वेस्ट किया कि मैं ब्रांच मैनेजर बन कर दोबारा उस ब्रांच में आऊं.

अगले दिन ही जोइनिंग टाइम लेकर में अपने नेटिव आ गया. मां और बहन ने मेरी शादी के लिए जिद की. लेकिन मैंने कहा कि अभी तीन चार साल शादी नहीं करुंगा. मैंने कहा कि गुड़िया (मेरी छोटी बहन का नाम गुडिया हे. उसकी उमर १९ साल थी.) की शादी होने के बाद में अपनी शादी के बारे में देखूंगा. मेरी बहन ने तो नहीं लेकिन मेरी मां ने बहुत पूछा तो मैंने अपनी बैंक वाली औरत के साथ सेक्स  लाइफ के बारे में बता दिया तब मां ने कहा,

“बेटा संभल कर रहना, जो लड़की, औरत तेरा डंडा ( लौड़ा ) एक बार अंदर ले लेगी वह तुझे नहीं छोड़ेगी”

मैं मेरी माँ के मुह से यह बात सुन कर खुश हुआ और सरप्राइस भी हुआ. मैंने मेरी माँ  के दोनों कंधे कॉफ़ी जोर से पकड़ कर कहा,

“मैंने  तेरी बुर में तो लौड़ा नहीं डाला, फिर तुझे कैसे मालूम?”

मां ने कहा : बेटा मां और बहन की बुर तो तेरे डंडे को कभी मिलेंगे नहीं लेकिन सपना काकी ( सपना काकी हमारे पड़ोस में रहती थी ) को भूल गया साली, कुतिया,  रंडी बाज पाच छे साल से मुझसे चुदवा रही है लेकिन उसका मन अभी तक नहीं भरा हे. तूने जब से उसे पेलना शुरू किया है उसके दो बच्चे हो गए, तेरा है या उसके घर वाले का कुत्तिया को यह भी नहीं मालूम हे. कल भी आई थी और आज सुबह भी, जा उसके घर जा के उसकी प्यास को तेरे डंडे से पलके बुझा दे.

मैंने मां के कंधे को पकडे रखा, मैं सोच रहा था कि मेरी और सपना की चुदाई की बात किसी को भी नहीं मालूम, लेकिन नहीं मेरी मां इस बात को जानती है और शायद मेरी बहन और मेरे बाबू जी भी जानते हो…

“गुड़िया और बाबूजी को भी मालूम है क्या मैं सपना चोदता हूं?”

माँ ने सर ना में हीलाया.

मैंने एक हाथ मां के कंधे पर रखते हुए दूसरे हाथों से उसके चिकने गोरे गोरे गालों को सहलाते हुए कहा,

“मां, जब से मेरे लवडे में जवानी आई, यह तो तेरे ही बूर में घुसकर तुझे चोदना चाहता था.. लेकिन एक दिन सपना चाची ने मुझे चुपके से मुठ मारते देख लिया था और मेरे लवडे को अपनी बुर का रस पिलाया..  लेकिन में इस मस्त जवानी को कभी नही भुला”

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यह बोलते हुए मैंने मां की एक चूची को झटके से मसल दिया. मा ने मेरा हाथ हटाया और खड़ी हो गई.

“छि बेटा, ऐसा सोचना भी पाप है, तुम यही रहो मैं सपना को भुला देती हूं, उससे ही तेरा डंडा ठंडा करो और उसकी बुर को शांत कर दो.”

वह जाने लगी लेकिन मैंने पीछे से जोर से दोनों हाथों से जकड़ लिया.                             “Hindi Chudai Ki Poori Kahnai”

मैने कहा : माँ, तुम नहीं बोलोगी तो नहीं चोदूंगा, लेकिन एक बार मेरे लोड़े को अपनी नंगी जवानी और अपना बुर दिखा दो.

वह ना ना करके मना करती रही मैं जिद करता रहा प्लीज़ माँ प्लीज़ एक बार सिर्फ एक बार में और कभी नहीं कहूँगा.

कभी चूचो को मसलता था, कभी नंगे बेली को, कभी अपने लवडे को चुतड पर रगड़ता.. आखिर वह मेरे जिद के सामने मेरे सामने नंगी होने के लिए मान गयी लेकिन एक  कंडीशन पर की मैं अपने कपड़े नहीं उतरूंगा. उस वक्त दिन के ११ बज रहे थे, घर में हम दोनों ही थे. और किसी और के हमारे घर पर आने का कोई चांस नहीं था. मैंने ब्लाउज के बटन पर हाथ लगाया तो वह दूर हट गई.

“तुम दूर रहो मैं खुद निकालती हूं”…

मैं खड़ा हुआ देखता रहा, पहले आंचल नीचे गिराया फिर साड़ी का फिल्ड खोला और साड़ी नीचे गिर गई. वह अब ब्लैक पेटीकोट और वाइट ब्लाउज में थी. मैंने सोचा अब वह ब्लाउज खोलेगी, लेकिन नहीं माँ ने झटके से पेटिकोट का नाड़ा खींचा और पेटीकोट कमर से खुल कर नीचे गिर गया. कमर के नीचे अब मेरी माँ मेरे सामने नंगी खड़ी थी.                                            “Hindi Chudai Ki Poori Kahnai”

कहानी जारी है……

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