मेरी मुनिया उसका पप्पू-2

(Meri Muniya Uska Pappu-2)

“आ … वो… सु…. सु… सुम्मी…”

“ह्म्म…?”

“वो … दरअसल यह सब ठीक नहीं है… कोई आ जाएगा ? सुम्मी…. चलो अब चलते हैं…”

“ओहो… थोड़ी देर रुको ना !” मैंने आँखें बंद किए हुए ही कहा।

“नहीं मैं जा रहा हूँ… तुम्हें चलना हो तो चलो… नहीं तो मैं जा रहा हूँ…”

वो अचानक बेड से उठा और कमरे से बाहर जाने लगा। मैंने सोचा शायद मज़ाक कर रहा है। अभी वापस आकर मुझे अपने आगोश में ले लेगा।

मैं इसी तरह बेड पर पड़ी रही। एक हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी और एक हाथ से अपनी पेंटी के ऊपर से अपनी गीली चूत को सहला रही थी। अचानक मुझे अपने चेहरे पर गर्म साँसें महसूस हुई। मैं जानती थी वो जरूर आएगा। मैंने आँखे बंद किए हुए ही अपनी बाहें फैला दी। वो मेरे बाहों में आ गया और अपने होंठों को मेरे होंठों से लगा कर चूमने लगा।

मैंने उसे कस कर अपनी बाहों में भींच लिया। उसका एक हाथ मेरे बूब्स को दबाने लगा और एक हाथ मेरी पेंटी पर लगा कर मेरी चूत को मसलने लगा। मैंने महसूस किया उसने केवल अंडरवीयर ही पहना है। उसके लंड का अहसास मुझे पहली बार हुआ। मैंने हाथ बढ़ा कर अंडरवीयर के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ लिया। मेरा अंदाज़ा था वो 6 इंच से कम नहीं होगा। मोटा भी लग रहा था। मेरा तो मन कर रहा था जल्दी से इसे पकड़ कर खुद ही अपनी कुलबुलाती चूत में डाल लूँ।

वो अचानक बेड से उठा और कमरे से बाहर जाने लगा। मैंने सोचा शायद मज़ाक कर रहा है। अभी वापस आकर मुझे अपने आगोश में ले लेगा।

मैं इसी तरह बेड पर पड़ी रही। एक हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी और एक हाथ से अपनी पेंटी के ऊपर से अपनी गीली चूत को सहला रही थी। अचानक मुझे अपने चेहरे पर गर्म साँसें महसूस हुई। मैं जानती थी वो जरूर आएगा। मैंने आँखे बंद किए हुए ही अपनी बाहें फैला दी। वो मेरे बाहों में आ गया और अपने होंठों को मेरे होंठों से लगा कर चूमने लगा।

मैंने उसे कस कर अपनी बाहों में भींच लिया। उसका एक हाथ मेरे बूब्स को दबाने लगा और एक हाथ मेरी पेंटी पर लगा कर मेरी चूत को मसलने लगा। मैंने महसूस किया उसने केवल अंडरवीयर ही पहना है। उसके लंड का अहसास मुझे पहली बार हुआ। मैंने हाथ बढ़ा कर अंडरवीयर के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ लिया। मेरा अंदाज़ा था वो 6 इंच से कम नहीं होगा। मोटा भी लग रहा था। मेरा तो मन कर रहा था जल्दी से इसे पकड़ कर खुद ही अपनी कुलबुलाती चूत में डाल लूँ।

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अचानक मुझे अपने होंठों पर कुछ उसकी दाढ़ी सी चुभती महसूस हुई। पर सुमित का चेहरा तो बिल्कुल चिकना था? मैंने आँखें खोली तो मैंने देखा मेरी बाहों में सुमित नहीं कोई और है।

मैंने उसे जोर से धक्का देते हुए अपने ऊपर से उठाया और जोर से चिल्लाई “क…क… कौन हो तुम…? वो… वो… सुमित कहाँ है ?”

“अरे मेरी जान उस गांडू के पल्ले कुछ नहीं है जो तुम उसका इंतज़ार कर रही थी…?”

ओह… यह तो सुमित का दोस्त शमशेर था। मैं झट से उसकी गिरफ्त से दूर हो गई और बेड पर पड़े अपने कपड़ों को उठा कर अपने नंगे बदन को छुपाने लगी।

शमशेर मेरे पास आकर हँसते हुए बोला,“मेरी जान इतना क्यों शर्मा रही हो?”

मैं अपने कपड़े पहनना चाहती थी। पर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।

“प्लीज … शमशेर… मुझे जाने दो…. ?” मैंने उसका हाथ झटकते हुए कहा।

“देखो सिमरन, मैं तुम्हारे साथ कोई जोर ज़बरदस्ती नहीं करना चाहता !”

मेरे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। हे भगवान ! मैं कैसी मुसीबत में फंस गई। मैं जल्दी से जल्दी वहाँ से निकल जाना चाहती थी।

“सिमरन … देखो तुम भी जवान हो और मैं भी। मैं जानता हूँ तुम सुमित से प्रेम करती हो पर शायद तुम्हें पता ही नहीं वो किसी लड़की के साथ कुछ करने के काबिल ही नहीं है !”

“क… क्या मतलब?”

“ओह… मैं तुम्हारा दिल नहीं दुखाना चाहता पर यह सच है उसका खड़ा ही नहीं होता ! और वो…. वो…”

“प्लीज बताओ ना?” मुझे थोड़ा अंदेशा तो था पर विश्वास नहीं हो रहा था।

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“दरअसल वो लड़के के शरीर में एक लड़की है !”

“क्या मतलब?” मैंने हैरानी से उसकी ओर देखते हुए पूछा,“तुम कैसे जानते हो?”

“तुम क्या सोचती हो, वो रोज़ मेरे पास जलेबी खाने आता है?” उसके होंठों पर रहस्यमयी मुस्कान थी।

“ओह…” मुझे थोड़ा शक़ तो पहले भी था पर आज यह यकीन में बदल गया।

उसने आगे बढ़कर फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया और फिर अपनी बाहों में भर लिया। मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था।

“देखो सिमरन… मैं बहुत दिनों से तुम्हारे प्यार में पागल हुआ जा रहा हूँ। तुम भी जवान हो… क्यों अपने आप को तड़फा रही हो। आओ उस वर्जित फल को खाकर अपना जीवन धन्य कर लें !” उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरी पीठ और नितंबों पर हाथ फिराने लगा।

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मेरे सारे शरीर में सनसनाहट सी होने लगी थी। मेरी चूत तो फाड़कने ही लगी थी। इतनी गीली तो कभी नहीं हुई थी। रोमांच से मेरा सारा शरीर कांपने लगा था। मेरा मन दुविधा में था। मन कह रहा था कि यह गलत होगा पर शरीर कह रहा था इस आनंद के सागर में डुबकी लगा लो। मेरी एक सिसकारी निकल गई।

शमशेर ने मेरा सिर अपने हाथों में थाम लिया और अपनी होंठों को मेरे गुलाबी होंठों से लगा दिया।

आह… एक मीठा सा अहसास मेरी रगों में दौड़ने लगा। आज तक ऐसा रोमांच कभी नहीं महसूस हुआ था। अब मैंने भी उसे जोर से अपनी बाहों में कस लिया और उसके चुंबन का जवाब उसके होंठों को चूस कर देने लगी।

कोई 5 मिनट हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे। फिर हम बिस्तर पर आ गये। मैं बिस्तर पर लेट गई। मेरी आँखें अपने आप मुंदने लगी थी। उसने अपने होंठ मेरे अधरों से लगा दिए और अपना एक हाथों से मेरे कसे हुए उरोजों को मसलने लगा। मैं उसके स्पर्श के आनंद को शब्दों में नहीं बता सकती। मेरी सिसकारियाँ निकलने लगी। मेरे चुचूक तनकर भाले की नोक की तरह नुकीले हो गये थे। अब वो मेरे ऊपर आ गया और उसने मेरा एक चुचूक अपने मुँह में भर लिया।

अब मुझे अपनी जांघों पर उसके तगड़े लंड का अहसास हुआ। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा। मैंने नारी सुलभ लज्जा के कारण अपने आप को बहुत रोकने की कोशिश की पर उसके लंड को पकड़ने के लोभ से अपने आप को ना रोक पाई।

मैंने अंडर वीयर के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ लिया और उसे मसलने लगी, मेरा मन करने लगा अब इसे अपनी चूत में ले ही लेना चाहिए।

अचानक शमशेर मेरे उपर से उठ खड़ा हुआ और उसने अपना अंडरवीयर उतार फेंका। अब उसका 6.5 इंच लंबा मोटा लंड मेरी आँखों के सामने था। उसका लाल टमाटर जैसा सुपारा किसी मशरूम जैसा लग रहा था। मैं आँखें फाड़े उसे देखती ही रह गई। मेरा मन उसे चूम लेने को करने लगा था। पर शर्म के मरे मैं ऐसा नहीं कर सकी।

“सिमरन इसे चूम कर नहीं देखोगी?” उसने अपने हाथ से लंड को हिलाते हुए कहा।

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“नहीं मुझे शर्म आती है।”

“मेरी जान एक बार लेकर तो देखो…. सारी शर्म और झिझक मिट जाएगी।”

वो अपने घुटनों के बल खड़ा था। उसके लंड का सुपारा मेरी आँखों के सामने था। उसका आकर्षक रूप मेरे मन को विचलित करने लगा था। वो थोड़ा सा आगे झुका तो मैंने एक हाथ से उसका लंड पकड़ लिया। मेरी नाजुक अंगुलियों का स्पर्श पाते ही वो झटके से मारने लगा जैसे कोई अड़ियल घोड़ा काठी डालने पर उछल पड़ता है। उसके सुपारे पर प्री-कम की बूँद ऐसे चमक रही थी जैसे कोई सफेद मोती हो। मैंने उसके सुपारे को चूम लिया।

उसकी खुशबू और प्री कम के स्वाद ने पता नहीं मेरे ऊपर क्या जादू सा कर दिया कि मैं उसे मुँह में लेकर चूसने लगी। शमशेर की तो आहें ही निकलने लगी थी। उसने मेरा सिर पकड़ लिया और हौले-हौले मेरे मुँह में अपना लंड ठेलने लगा। अब मेरी भी शर्म और झिझक खुल गई थी। मैं मज़े से उसका लंड चूसती रही, कभी उसे मुँह में ले लेती कभी उसे बाहर निकाल कर उस पर अपनी जीभ फिराती…. कभी उसकी गोटियाँ सहलाती।

कुछ देर बाद जब मेरा मुँह दुखने लगा तो मैंने उसका लंड बाहर निकाल दिया।

मेरी चूत में तो इस समय भूचाल सा आ गया था। मुझे लगने लगा था कि उसमें तो जैसे आज आग ही लग गई है। अब उसने मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरी पेंटी उतार दी। मुझे शर्म तो आ रही थी पर मैंने अपने कूल्हे ऊपर करके पेंटी उतारने में उसकी मदद की। आपको बता दूँ कि मैं अपनी चूत के बाल कैंची से ट्रिम करती हूँ। कोई बाल सफा क्रीम या रेज़र इस्तेमाल नहीं करती। इसीलिए मेरी चूत की फाँकों और आस पास की त्वचा बिकुल गोरी है।

मेरी इस रसभरी को देख कर वो बोला,“हू लाला… सिमरन… तुम्हारी मुनिया तो मक्खन मलाई है यार…?” कहते हुए उसने मेरी चूत पर एक चुम्मा ले लिया।

मेरा मन भी कर रहा था कि कह दूँ,”तुम्हारा पप्पू भी बहुत प्यारा है।” पर शर्म के मरे में कुछ नहीं बोल पाई ! बस एक मीठी सीत्कार मेरे मुंह से निकल गई।

कहानी जारी रहेगी।

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