प्यासी की प्यास बुझाई-1

(Pyasi Ki Pyas Bujhai-1)

यदि आपने मेरी कहानी पड़ोसन को गर्भवती किया पढ़ी हो तो आपको मेरे बारे में जानकारी हो गई होगी। मैंने आपके ईमेल पढ़े, मुझे बहुत अच्छा लगा कि आपको मेरी कहानी बहुत पसंद आई, आपके इन्हीं विचारों से प्रभावित होकर मैंने अपनी दूसरी कहानी “प्यासी की प्यास बुझाई” लिखने का फैसला किया है। मुझे आशा है कि आपको मेरी यह कहानी भी उतनी ही पसंद आएगी।

यह उन दिनों की बात है जब मैं स्नातिकी के दूसरे साल में था। जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि कॉलेज की उम्र ही बहुत सेक्स भावना वाली उम्र होती है। कोलेज में बहुत सारी सुन्दर लड़कियाँ थी जिन्हें देखकर मेरा लंड अक्सर खड़ा हो जाता था। लेकिन मैं आप सब लोगो को झूठी कहानी नहीं बताना चाहता इसलिए मैं यह नहीं कहूँगा कि उन दिनों मेरी कॉलेज में कोइ गर्लफ्रेंड थी।

यह बात सच है कि क्लास में बहुत सुन्दर लड़कियाँ थी लेकिन मेरी किसी से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी। मैं काफी शर्मीले मिजाज का लड़का हूँ शायद इसलिए ज्यादा लडकियों से बात नहीं करता था।

एक दिन दोस्तों में बात छिड़ी कि किस-किस ने सेक्स किया है?

तो दो-तीन दोस्तों ने कहा कि उन्होंने सेक्स किया है। जब उनसे पूछा गया कि तुमने लड़की को कैसे पटाया?

तो कहा कि कॉलेज की लड़कियों को ही पटा कर सेक्स किया उनके साथ !

लेकिन एक का जवाब सुनकर मैं तो ताज्जुब में पड़ गया। उसने बताया कि इन्टरनेट पर याहू पर चैट करके उसने एक लड़की की प्यास बुझाई।

मैंने एक दिन उससे बात ही बात में उसके सेक्स अनुभव के बारे में पूछ लिया। उसने बताया कि याहू पर चैट करके उसने लड़की की प्यास बुझाई। उसने मुझे बताया कि 22 की उम्र के बाद लड़कियाँ काफ़ी कामुक हो जाती हैं। उस उम्र में उन्हें अपनी चूत की प्यास बुझाने के लिये कोई ना कोई रास्ता बनाना ही होता है। बहुत सी लड़कियाँ बॉयफ़्रेन्ड बना लेती हैं, कुछ याहू पर चैट करके फ्रेंड बना कर कहीं मिलती है और कुछ दिनों बाद अपनी चूत की प्यास बुझा लेती हैं।

उसकी बातों से प्रभावित होकर मैंने भी याहू पर चैट करना शुरु कर दिया। एक-दो महीने तक तो किसी लड़की मुझे भाव ही नहीं दिया, बाद में मैंने लोगों से वॉयस-चैट करते सुना। फिर मैंने भी वहाँ वॉयस-चैट करना शुरु कर दिया। फिर क्या था- वहाँ काफी दोस्त बने और उनकी दोस्ती से थोड़ी बहुत लड़कियों के लिंक भी मुझे मिल गए। अब मैंने लड़कियों से भी बातें करना शुरु कर दिया, लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं हुई कि किसी से सेक्स के बारे में बात करूँ। यूँ तो लड़कियों की इच्छा भी सेक्स की बातें करनी की होती है लेकिन कमबख्तों की सहन-शक्ति इतनी ज्यादा होती है कि बर्दाश्त कर लेती हैं और हमारे बोलने का इन्तजार करती हैं। लेकिन मेरी हिम्मत ही नहीं हुई किसी से सेक्स के बारे में बात करने की।

वॉयस-चैट कर कर के मैं याहू के मुंबई-रूम में काफी प्रसिद्ध हो गया था। वहाँ लोगों को मेरी आवाज काफी पसंद आती है क्यूंकि मैं हमेशा एक्टिव रहता हूँ और लड़कियों को एक्टिव लड़के काफी पसंद होते हैं, जैसे कि हमेशा दूसरों को हँसाने और खुद खुश रहने वाले लड़के। ऐसे लड़कों पर लड़कियाँ जल्दी ही फ़िदा हो जाती हैं।

काफ़ी दिन बीत चुके थे, कोई सही सम्पर्क नहीं मिल रहा था। लेकिन कहते हैं न कि भगवान् के घर देर है, अंधेर नहीं !

एक दिन मुझे एक लड़की ने भाव दे ही दिया। उसका नाम अंजलि था, उसकी उम्र 26 साल थी। वह मुंबई के अँधेरी में रहती थी। मैं आपको बता दूँ कि अँधेरी बहुत ही सभ्रान्त क्षेत्र है, वहाँ सब धनी लोग रहते हैं। उनमें से ही अंजलि भी थी जो काफी अमीर थी और दिखने में अच्छी-अच्छी हिरोइनों को भी पीछे छोड़ दे, ऐसी थी वह।

मैं वॉयस-चैट कर रहा था, शायद अंजलि को मेरी आवाज बहुत पसंद आई, तो उसने मुझे व्यक्तिगत संदेश भेज कर कहा- आपकी आवाज और बोलने का स्टाइल बहुत प्रभावी है।

मुझे बहुत अच्छा लगा पर मैंने सिर्फ धन्यवाद करके बात खत्म करनी चाही लेकिन वह तो मुझसे दूरगामी सम्बन्ध बनाना चाहती थी, उसने मुझसे से और बातें पूछी जैसे नाम, पता और वगैरा-वगैरा। फिर वह चली गई।

अगले दिन वह फिर मिली। इस बार मैंने उससे खुल कर बात की और बीच-बीच में मजाक भी कर देता था। मुझे ऐसा लग रहा था कि वह धीरे-धीरे मुझे पसंद कर रही है। तो मैं भी उसका इशारा समझ कर उसे पसन्द करने लगा। अब हम रोज मिलने लगे और बातें भी गहरी होने लगी।

जैसे कि मैंने आप लोगो को बताया है कि मैं काफी शरमीले मिजाज का था इसलिए उससे कभी सेक्स के बारे में बात नहीं की, बस सामान्य बातें किया करता था।

फिर एक दिन उसने मुझसे बात ही बात में कहा- सुनील, मेरा पेट बहुत दुख रहा है।

तो मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उसने बताया नहीं और विषय बदल दिया। लेकिन मेरे बार बार पूछने पर उसने बताया- मेरे पीरीयड चल रहे हैं और इन दिनों पेट काफी दुखता है।

यूँ तो मुझे पीरीयड के बारे में पूरी जानकारी थी लेकिन उसके सामने मैं भोला बन गया जैसे कुछ मुझे मालूम ही नहीं, मैंने उससे पूछा- यह क्या होता है?

तो उसने कहा- बुद्धू ! यही तो वह चीज है जिससे बच्चा पैदा होता है।

अब मैं समझ गया कि इसके मन में अन्तर्वासना जाग गई है जो आज जम कर फ़ूटेगी।

मैंने उससे कहा- बच्चा ऐसे थोड़े ही पैदा होता है, वह तो जब आदमी और औरत की शादी होती है तो पैदा होता है।

तो उसने हंसकर जवाब दिया- शादी के बाद जब सुहागरात होती है तो बच्चा पैदा होता है।

तब मैंने पूछा- सुहागरात में लोग क्या करते हैं?

तो उसने जवाब दिया- मूवीज़ नहीं देखते हो क्या ?

मैंने कहा- देखता हूँ ! लेकिन मूवीज़ में तो इतना ही दिखाते है कि पति पत्नि एक दूसरे को चूमते हैं, बाकी कुछ नहीं दिखाते।

उसने कहा- तुम पूरे के पूरे बुद्धू ही हो।

उसने कहा- सुहागरात को पति और पत्नी सेक्स करते हैं, तब बच्चा पैदा होता है।

मैंने उसकी कामवासना को अब भांप लिया था और उससे भोला बनकर ही बात कर रहा था। वह धीरे-धीरे खुलने लगी।

मैंने पूछा- सेक्स कैसे करते हैं?

तो वह हँसने लगी और कहा- बाद में बताऊँगी।उस दिन मेरे कई बार कहने पर भी उसने मुझे नहीं बताया और चली गई।

फिर वह दो दिन के बाद आई तो फिर मैंने उससे पूछा- सेक्स कैसे करते हैं?

ऐसा लग रहा था को वह आज मुझे मेरे प्रश्न का उत्तर देने ही आई है। उसने मेरे बार बार जोर देने पर बताया- जब आदमी औरत की चूत में लण्ड डालता है तो वही सेक्स कहलाता है।

उसका ऐसा जवाब सुनकर मैं तो हैरान हो गया। अब मुझे पता चल गया कि अब वक्त आ गया है कि इससे खुल कर बात की जाये क्योंकि वह अब पूरी तरह खुल चुकी थी। फिर मैने उससे पूछा- तुम्हें यह सब कैसे मालूम?

तो उसने बताया- मेरी शादी हो चुकी है और मैं सुहागरात मना चुकी हूँ।

उस दिन उसने सच्चाई का खुलासा किया, इससे पहले उसने मुझे कभी नहीं बताया कि वह शादी-शुदा है।

उसने बताया कि कम उम्र में ही उसके घर वालो नें उसकी शादी कर दी थी 21 वर्ष की आयु में ही उसकी शादी हो चुकी थी। उसने यह भी बतया कि शादी के डेढ़ साल बाद उसके पति को दुबई में नौकरी मिल गई और वह वहाँ चला गया।

मैंने उससे पूछा- आपकी कोई औलाद है?

तो उसने कहा- नहीं।

मैंने कहा उससे- आपने कहा कि सुहागरात के बाद बच्चा होता है तो आपको क्यों नहीं हुआ?

तो उसने कहा- ऐसा नहीं होता है, जब बच्चा होना होता है तभी होता है। और कुछ-कुछ आदमी के वीर्य पर भी निर्भर होता है।

मैंने उससे उसकी सुहागरात के बारे में पूछा, मैंने कहा- सुहागरात को आपने भी फिल्मों की तरह अपने पति को दूध पिलाया होगा?

तो उसने कहा- हाँ, पिलाया था लेकिन किसी जानवर का नहीं औरत का दूध पिलाया था। और मेरे पति ने भी अपना दूध मुझे पिलाया।

तो मैंने अनजान बनकर पूछा- मैंने सुना है औरत दूध अपने बच्चों को पिलाती है, लेकिन एक आदमी कैसे कभी किसी को दूध पिला सकता है?

तो उसने कहा- जब तुम्हारी शादी हो जाएगी तो तुम भी अपनी बीवी को दूध पिलाना सीख जाओगे।

मैं जिद करने लगा, मैंने कहा- प्लीज़ बताओ ना कैसे आदमी दूध पिलाता है?

तो वह तैयार हो गई और बताया कि सुहागरात को जब वह दूध लेकर अपने पति के पास गई तो उनके पति ने पहले दूध पीया, फिर उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया जैसे किसी अजगर ने किसी इंसान को जकड़ लिया हो। बहुत छुड़ाने पर भी उसके पति ने उसे नहीं छोड़ा।

उसने बताया कि वह एकदम से कामुक हो गया था क्यूंकि उसे दोस्तों ने शादी के पहले काफ़ी ब्लू फिल्में दिखाई थी तो वह भी ब्लू फिल्मों के तरीके अपनाने लगा।

उसने बताया कि पहले तो वह मुझे चूमता रहा, फिर उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और अपने सारे कपड़े उतार दिए। जैसे ही उसने अपना अण्डरवीयर निकाला तो उसका 5 इंच का लण्ड निकल बाहर आ गया। लण्ड ज्यादा मोटा नहीं था और ज्यादा लम्बा भी नहीं था, इसे औसत लण्ड कह सकते हैं। उसने पहले कभी लण्ड नहीं देखा था इसलिए काफी घबराई हुई थी। फिर उसके पति ने उसके कपड़े उतारने शुरू किए और एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए। फिर वह उसके स्तनों के साथ खेलने लगा, उन्हें जोर-जोर से मसलने लगा और चूमने लगा। फिर उसने अपना लण्ड मुँह में लेने के लिए कहा, उसने इसका प्रतिकार किया लेकिन बाद में मजबूरन ले ही लिया। वह लण्ड को धीरे-धीरे चाटने लगी फिर दो-तीन मिनट के बाद उसके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी और पूरा वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया।

और इस तरह उसके पति ने उसे दूध पिलाया और उसने अपना दूध अपने पति पिलाया।

फिर मैंने उससे पूछा- आगे क्या हुआ?

शेष कहानी अगले भाग में !

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