ऋचा की रंगीन चूत 2

Richa ki rangeen chut-2

उसकी चूत फूल कर संतरे जितनी हो गयी थी।

झांट बिलकुल नहीं थी और बिलकुल टाइट चूत थी।

ऐसा लग रहा था जैसे कि वो आज तक नहीं चुदी थी।

फिर दूसरे हाथ से मैंने उसका ब्लाउज खोला।

दोनों बूबे ऐसे बाहर निकले जैसे पिंजरे से आजाद हुए हो।

उसका पल्लू मैंने हटाया और उसके बूबे चूसने शुरू किये वोह करहने लगी और बोली – आज मुझे मत छोड़ना।

आज तो मुझे ऐसे चोदो कि ज़िन्दगी भर याद रहे।

मैंने उसका पेटीकोट नीचे किया और वोह पूरी नंगी थी।

उसने मेरी शर्ट के बटन खोले और फिर मेरा लोअर नीचे किया मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया।

उसने मेरा लंड पकड़ा और कहने लगी – यह बहुत बड़ा है मेरी चूत में कैसे आएगा।

मैंने उसे कहा – ऋचा, तू चिंता न कर बस इसे चूसना शुरू कर।

उसने कहा – ना ना, यह तो गन्दा होता है चूसते नहीं है।

मैंने साइड में पड़ी चॉकलेट उठाई और खोल कर अपने लंड पर लगा दी और बोला – चॉकलेट तो खा ले।

उसने मेरे लंड चूसना शुरू किया और मैंने भी उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी।

हम दोनों 69 की पोजीशन मैं आ गए।

15 मिनट तक चूसने के बाद मैंने उसके मुँह में अपना सार माल गिरा दिया।

उसने सब कुछ निगल लिया और चूसना चालू रखा।

5 मिनट मैं मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।

अब वोह बोली – और मत तडपाओ, बस अब चोद दो।

मैंने वेसिलीन ली और अच्छी तरह से उसकी चूत के अन्दर बाहर लगा दी।

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फिर अपने लंड को भी अच्छी तरह से पोत दिया और अपना सूपाड़ा उसकी चूत पर रखा और धक्का दिया।

उसकी चूत बहुत टाइट थी इसलिए लंड केवल आधा इंच ही अन्दर गया।

वोह चिल्ला उठी और कहें लगी – मुझ से नहीं होगा, प्लीज बाहर निकाल लो।

मैंने उसकी बात नहीं सुनी और उसे चूमने लगा और बूबे दबाने लगा।

थोड़ी देर मैं उसका दर्द कम हुआ और मैंने फिर धक्का मारा।

इस बार लंड 2 इंच चला गया।

उसकी चूत से खून की धर बह निकली और 3-4 मिनट तक नहीं रुकी।

उसे पता नहीं चला मगर दर्द उसे होता रहा।

वोह रोने लगी और मुझसे कहने लगी – प्लीज, निकाल लो वरना मैं मर जाउंगी।

मैंने लंड थोडा सा निकाला तो उसे थोड़ी राहत मिली।

करीब 5 मिनट तक में लंड अन्दर बाहर करता रहा।

उसे थोडा आराम मिला।

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फिर मैंने एक और धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर चला गया।

वोह बहुत बुरी तरह चिल्लाने लगी।

मैंने उसे चूमना शरू कर दिया और बूबे दबाने लगा।

वो रोने लगी मगर 5 मिनट मैं उसका दर्द कुछ कम हुआ।

खून अभी भी निकल रहा था।

मैंने थोड़ी सी बर्फ उसकी चूत पर लाकर रखी खून निकलना बंद हो गया।

फिर मैंने लंड अन्दर डाला और चोदना शुरू कर दिया।

उसे भी मज़ा आने लगा।

वोह चिल्लाने लगी – आहा अह आहा अहा आहा अह्ह्ह्ह अहह।

मैंने उसके बाल खोले और कहा कि घोड़ी बन जा।

फिर मैंने उसके बालों को लगाम की तरह पकड़ा और लंड डालकर चोदता रहा।

15 मिनट बाद मैंने उसे उठने को कहा।

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फिर मैं लेट गया और उसे अपने लंड पर बैठने को कहा।

वोह मेरे लंड पर बैठ गयी।

थोड़ी देर तक इस तरह उसे मैंने चोद और फिर उसका पानी छुट गया।

पूरा बिस्तर खून, मुठ और उसके चूत के पानी से गिला हो चूका था।

मैंने उसे चूत में लंड डाले-डाले ही गोद में उठाया और सोफे पर उल्टा लिटा दिया और पीछे से ही लंड डाल दिया।

10 मिनट चोदने के बाद मेरा मुठ निकला और पूरा मुठ उसकी चूत में छोड़ दिया।

उसकी चूत से मुठ टपकने लगा।

मैंने उसे अपनी बाँहों मैं उठाया और बड़े वाले बिस्तर पर लिटा दिया।

वो और मैं नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।

3 घंटे बाद मैं उठा तो देखा की ऋचा अभी भी सोई हुई थी सोते हुए बिलकुल अप्सरा लग रही थी।

उसकी चूत अभी भी सूजी हुई थी।

मैंने उसकी चूत को थोड़ी देर तक चाटा।

वो जग गयी और कपड़े पहनने के लिए उठी मगर उससे चला नहीं गया।

मैंने उसे लेटे रहने को कहा।

2 दिन तक मैंने उसे खूब चोदा और वोह भी बहुत मजे से चुदी।

3 दिन बाद जब माँ वापिस आई तो मैंने माँ को बोल दिया की ऋचा का पैर फिसल गया था इसलिए वो कुछ दिन काम नहीं कर पायेगी।

उसके बाद से जब भी हमें मौका मिलता हम जम कर चुदाई करते।

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