सगी बहन को चुदाई का मीठा दर्द दिया-1

 Sagi bahan ki chudai ka mitha dard diya-1

Chudai Dard, एक दिन तृष, त्रुती को वासना भरी नजरों से देख रहा था। तृष की पत्नी कुन्ध्ला यह सब देख रही थी। कुन्ध्ला बोली – क्योंजी, मुझसे मन भर गया क्या जो इस कच्ची कली को घूरते रहते हो। तृष बहुत दिनों से अपनी छोटी बहन त्रुती को भोगने की ताक में था। तृष एक जवान हट्टा कट्टा युवक था और अपनी पत्नी कुन्ध्ला और बहन त्रुती के साथ रहता था। त्रुती पढ़ाई के लिये शहर आई हुई थी और अपने भैया और भाभी के साथ ही रहती थी.

तृष के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। फ़िर कुन्ध्ला अपने पति का चुम्बन लेते हुए खिलखिलाकर हंस पड़ी। कुन्ध्ला ने तृष से कहा की वह त्रुती को चोदने में तृष की सहायता करेगी। पर इस शर्त पर वह भी त्रुती के साथ जो चाहे करेगी और तृष कुछ नहीं कहेगा। तृष तुरंत मान गया। अगले दिन सुबह कुन्ध्ला ने त्रुती को स्कूल नहीं जाने दिया और तृष से भी आफिस में फोन करवा दिया कि वह लेट आयेगा। कुन्ध्ला ने एक अश्लील किताब अपने बेडरूम में तकिये के नीचे रख दी और त्रुती से कहा कि वह किसी काम से बाहर जा रही है और दोपहर तक वापस आयेगी. जरा बेडरूम जमा देना।

जब त्रुती अन्दर गई तो कुन्ध्ला ने तृष से कहा। “डार्लिन्ग, जाओ, मजा करो। उसको अभी सिर्फ़ चोदना। गांड मत मारना। उसकी गांड बड़ी कोमल होगी। इसलिये लंड गांड में घुसते समय वह बहुत रोएगी और चीखेगी। मै भी उसकी गांड चुदने का मजा लेने के लिये और उसे संभालने के लिये वहां रहना चाहती हूं। इसलिये उसकी गांड हम दोनों मिलकर रात को मारेंगे।

तृष को आंख मार कर वह दरवाजा बन्द करके चली गई। पांच मिनिट बाद तृष ने चुपचाप जा कर देखा तो त्रुती अश्लील किताब देख रही थी। उन नग्न सम्भोग चित्रों को देख देख कर वह किशोरी अपनी गोरी गोरी टांगें आपस में रगड़ रही थी. उसका चेहरा कामवासना से गुलाबी हो गया था.

मौका देख कर तृष बेडरूम में घुस कर बोला – क्या पढ़ रही है?” त्रुती सकपका गई और किताब छुपाने लगी. तृष ने छीन कर देखा तो फोटो में एक औरत को तीन तीन जवान पुरुष चूत, गांड और मुंह में चोदते दिखे. तृष ने त्रुती को एक तमाचा रसीद किया और चिल्लाया “तो तू आज कल ऐसी किताबें पढ़ती है बेशर्म लड़की. तू भी ऐसे ही मरवाना चाहती है? तेरी हिम्मत कैसे हुई यह किताब देखने की? देख आज तेरा क्या हाल करता हूं।

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त्रुती बोली कि उसने पहली बार ऐसी किताब देखी है और वह भी इसलिये कि उसे वह तकिये के नीचे पड़ी मिली थी। तृष एक न माना और जाकर दरवाजा बन्द कर के त्रुती की ओर बढ़ा। उसकी आंखो में काम वासना की झलक देख कर त्रुती घबरा गई लेकिन तृष ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके कपड़े उतारना चालू कर दिया. पहले स्कर्ट खींच कर उतार दी और फिर ब्लाउज फाड़ कर निकाल दिया. अब लड़की के चिकने गोरे शरीर पर सिर्फ़ एक छोटी सफ़ेद ब्रा और एक पैन्टी बची।

उसके अर्धनग्न कोमल कमसिन शरीर को देखकर तृष का लंड अब बुरी तरह तन्ना कर खड़ा हो गया था. उसने अपने कपड़े भी उतार दिये और नंगा हो गया. उसके मस्त मोटे ताजे कस कर खड़े लंड को देख कर त्रुती के चेहरे पर दो भाव उमड़ पड़े. एक घबराहट का और एक वासना का। वह सहेलियों के साथ ऐसी किताबें अक्सर देखती थी. उनमें दिखते मस्त लण्डों को याद करके रात को हस्तमैथुन भी करती थी. कुछ दिनों से बार बार उसके दिमाग में आता था कि उसके हैम्डसम भैया का लंड कैसा होगा. आज सच में उस मस्ताने लोड़े को देखकर उसे डर के साथ एक अजीब सिहरन भी हुई।

तृष ने उसके अन्तर्वस्त्र भी उतार दिये। त्रुती पूरी नंगी थी. उसका गोरा गेहुवा चिकना कमसिन शरीर अपनी पूरी सुन्दरता के साथ तृष के सामने था। त्रुती को बाहों में भर कर तृष ने अपनी ओर खिंचा और अपने दोनो हाथों में त्रुती के मुलायम स्तन सहलाने लगा। फिर वह उन्हें जोर से दबाने लगा. वह दर्द से कराह उठी और रोते हुए बोली “भैया, दर्द होता है, इतनी बेरहमी से मत मसलो मेरी चूचियों को”.

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तृष तो वासना से पागल था. त्रुती का रोना उसे और उत्तेजित करने लगा. उसने अपना मुंह खोल कर त्रुती के कोमल रसीले होंठ अपने होंठों में दबा लिये और उन्हें चूसते हुए अपनी बहन के मीठे मुख रस का पान करने लगा. साथ ही वह उसे धकेलता हुआ पलंग तक ले गया और उसे पटक कर उसपर चढ़ बैठा. झुक कर उसने त्रुती के गोरे स्तन के काले चूचुक को मुंह में ले लिया और चूसने लगा. उसके दोनों हाथ लगातार अपनी बहन के बदन पर घूंम रहे थे. उसका हर अंग उसने खूब टटोला.

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मन भर कर मुलायम मीठी चूचियां पीने के बाद वह बोला. “बोल त्रुती रानी, पहले चुदवाएगी, या सीधे गांड मरवाएगी?” आठ इंच का तन्नाया हुआ मोटी ककड़ी जैसा लम्ड उछलता हुआ देख कर त्रुती घबरा गई और याचना करने लगी. “भैया, यह लंड मेरी नाजुक चूत फ़ाड़ डालेगा, मै मर जाऊंगी, मत चोदो मुझे प्लीऽऽऽज़ . मैं आपकी मुठ्ठ मार देती हूं”

तृष को अपनी नाज़ुक किशोरी बहन पर आखिर तरस आ गया. इतना अब पक्का था कि त्रुती चुदने को मन ही मन तैयार थी भले ही घबरा रही थी. उसे प्यार से चूमता हुआ तृष बोला. “इतनी मस्त कच्ची कली को तो मैं नहीं छोड़ने वाला। चोदूंगा भी और गांड भी मारूंगा। पहले तेरी प्यारी रसीली चूत को चूस लूं मन भर कर, कब से इस रस को पीने को मै मरा जा रहा था।

त्रुती की गोरी गोरी चिकनी जान्घे अपने हाथों से तृष ने फ़ैला दीं और झुक कर अपना मुंह लाल – लाल कोमल गुलाब की कली सी चूत पर जमा कर चूसने लगा. अपनी जीभ से वह उस मस्त बुर की लकीर को चाटने लगा.

चाटने के साथ तृष उसकी चिकनी बुर का चुंबन लेता जाता. धीरे धीरे त्रुती का सिसकना बंद हो गया. उसकी बुर पसीजने लगी और एक अत्यन्त सुख भरी मादक लहर उसके जवान तन में दौड़ गई. बुर से मादक सुगन्ध वाला चिपचिपा पानी बह रहा था जैसे कि अमृत का झरना हो. उस शहद को वह प्यार से चाटने लगा. उसकी जीभ जब त्रुती के कड़े लाल मणि जैसे क्लाईटोरिस पर से गुजरती तो त्रुती मस्ती से हुमक कर अपनी जान्घे अपने भाई के सिर के दोनों ओर जकड़ कर धक्के मारने लगती. कुछ ही देर में त्रुती एक मीठी चीख के साथ झड़ गई. उसकी बुर से शहद की मानों नदी बह उठी जिसे तृष बड़ी बेताबी से चाटने लगा. उसे त्रुती की बुर का पानी इतना अच्छा लगा कि अपनी छोटी बहन को झड़ने के बाद भी वह उसकी चूत चाटता रहा और जल्दी ही त्रुती फ़िर से मस्त हो गई.

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तृष अब त्रुती को चोदने के लिये बेताब था. वह उठा और रसोई से मक्खन का डिब्बा ले आया. थोड़ा सा मक्खन उसने अपने सुपाड़े पर लगाया और त्रुती को सीधा करते हुए बोला. “चल छोटी, चुदने का समय आ गया.” त्रुती घबरा कर उठ बैठी. उसे लगा था कि अब शायद भैया छोड़ देंगे पर तृष को अपने बुरी तरह सूजे हुए लंड पर मक्खन लगाते देख उसका दिल डर से धड़कने लगा. तृष उसकी टांगें फ़ैला कर उन के बीच बैठ गया. थोड़ा मक्खन त्रुती की कोमल चूत में भी चुपड़ा. फिर अपना टमाटर जैसा सुपाड़ा उसने अपनी बहन की कोरी चूत पर रखा और अपने लंड को एक हाथ से थाम लिया.

तृष को पता था कि चूत में इतना मोटा लंड जाने पर त्रुती दर्द से जोर से चिल्लाएगी. इसलिये उसने अपने दूसरे हाथ से उसका मुंह बन्द कर दिया. वासना से थरथराते हुए फिर वह अपना लंड अपनी बहन की चूत में पेलने लगा. सकरी कुंवारी चूत धीरे धीरे खुलने लगी और त्रुती ने अपने दबे मुंह में से दर्द से रोना शुरु कर दिया. कमसिन छोकरी को चोदने में इतना आनन्द आ रहा था कि तृष से रहा ना गया और उसने कस कर एक धक्का लगाया. सुपाड़ा कोमल चूत में फच्च से घुस गया और त्रुती छटपटाने लगी.

आगे की कहानी अगले भाग में देखे।

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