विधवा भाभी को चोद कर माँ बनाया फिर मम्मी ने अबॉरशन करवाया

दोस्तों मेरा नाम पायल है। मैं एक अभागन विधवा हूं, और इसी का फायदा उठाकर मेरा देवर मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाया और फिर मुझे प्रेग्नेंट किया। जब मेरा पेट बड़ा होने लगा और मेरी माहवारी रुक गई तो मेरी सास ने मेरा अबॉर्शन करवाया। यह कहानी आपको आज मैं HotSexStory.xyz पर लिख रही हूं। यह मेरी सच्ची कहानी है और यह मेरी पहली कहानी है। यह कहानी में इसलिए लिख रही हूं ताकि मैं अपने मन की बात को आपके सामने कह सकूं और मुझे जो गलती हुई है जो बदनामी हुई है उसका भी पश्चाताप कर सकूं। इसलिए आपके सामने आज मैं कहानी लिख रही हूं।

यह कहानी आज से 5 साल पहले की है। मेरा छोटा देवर राजू जो मेरे से चार-पांच साल ही छोटा होगा। जबसे पति का देहांत हुआ था मुझे देखने वाला कोई नहीं था क्योंकि मेरे मायके में भी सब लोग गरीब थे तो मैं ससुराल में ही रह गई थी मेरा एक छोटा सा बेटा था मैं उसी के सहारे अपनी जिंदगी जी लेना चाहती थी पर कई बार ऐसा होता है दोस्तों की जो आप सोचो वह पूरा नहीं होता है और जिंदगी में कई सारे ऐसी दिक्कत आ जाती है। मेरे साथ जो दिक्कत आई वह तो सर पर पहाड़ रख लेने जैसा है।

एक तो विधवा ऊपर से प्रेग्नेंट आप खुद सोचिए लोगों को पता चल जाए तो क्या सोचेंगे यहां तक यह बात डॉक्टर को भी पता चलता है तो फिर वह गालियां देने लगती है तो लोग क्या कहेंगे। यह सब कैसे हुआ अब मैं आपको अपने शब्दों के माध्यम से आपके सामने पेश कर रही हूं।

लोग बहुत चतुर होते हैं अपनी बातों में फंसा लेते हैं और सामने वाले को पता भी नहीं चलता है यही मेरे साथ हुआ था। मेरे नादानी का फायदा उठाया गया क्योंकि मैं बहुत भोली भाली सीधी सादी औरत हूँ। ऐसा मैं कभी नहीं चाहती थी कि मेरे साथ मैं दूसरे को खुश करने के चक्कर में अपनी इज्जत को दांव पर लगा दी।

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जब मेरा कोई सहारा नहीं रहा तो मुझे लगता था कि मेरा देवर मेरी मदद करेगा। इसीलिए मैं अपने देवर से ज्यादा घुलने मिलने लगी अपनी बात भी बता दे अपने दुख बताते अपने सुख में शेयर कर दें और मेरा कोई सा भी नहीं। मेरे साथ जो थी वह मेरे से चलने लगी थी जब से उनके बेटे का देहांत हुआ सच तो यह है दोस्तों की यह तो ऊपर वाले की मर्जी है, कौन चाहता है दुख काटना।

धीरे धीरे मेरा देवर मेरी तरफ आकर्षित होने लगा मैं देखने में ज्यादा सुंदर थी भी नहीं, फिर भी वह मेरे पीछे पड़ा रहता था कई ऐसे मर्द होते हैं जिनको सुंदरता से कोई लेना देना नहीं होता उनको एक औरत मिले बस खेलने के लिए देदे यानी कि चोदने के लिए दे दे।

मेरा देवर भी मेरे इर्द-गिर्द घूमने लगा कभी वह मेरी चूचियों को दबा देता कभी मेरी चूतड़ पर हाथ रख देता कभी मेरे छाती को सहला देता कभी मेरे बाल को पकड़ लेता। मैं यह बात किसी को कह भी नहीं सकती थी क्योंकि यह कहने लायक बात भी नहीं है अगर मैं यह बात किसी को कहती तो वह उल्टा ही मुझे कहते कि तेरा ही कुछ होगा तुम ही कुछ बन रही होगी सामने तभी वह बढ़ता है।

पर जब मैं चुप रहे तो इसी का फायदा उठाकर मेरा देवर और भी मेरे करीब आने लगा और धीरे-धीरे वह अपने बाहों में भरने लगा तो दोस्त मैं भी तो औरत हूं मेरे सीने में भी प्यार है मेरे में भी वासना है। मुझे भी चोदने का मन करता है मैं भी चाहती हूं कि मेरी चूचियां कोई दवाई मेरे निप्पल को कोई दबाये मुझे किस करें मेरी गांड मारे। ऐसा मुझे पहले नहीं लगता था लेकिन जब से वह मुझे छोड़ने लगा तब से मेरा भी मन धीरे-धीरे करने लगा दोस्त।

1 दिन की बात है घर में कोई नहीं था सब लोग संबंधी के यहां शादी में गए थे तो मैं और मेरा देवर ही घर पर था। रात को वह मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे चूमने लगा मेरे चूचियों को दबाने लगा मेरे बूब्स को सहलाने लगा। मैं भी उस के चूर्ण को संभाल नहीं पाई और मैं भी अपने आप को सौंप दी।

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मैं अपने देवर के लंड को चूसने लगी वह भी मेरी चूत को चाटने लगा धीरे धीरे प्यार परवान चढ़ा मेरे चूतड़ को सह लाते हुए मेरी चूचियों को मसलते हुए मेरे होंठ को चूसते हुए मेरे मुंह में अपना जीभ डालते हुए मुझे ऐसा पागल बना दिया कि मैं चोदने को आतुर हो गई। फिर क्या था दोस्त हूं मैं सफेद साड़ी खोल कर फेंक दे अपने ब्लाउज खोल दे अपनी पेंटी उतार दे और सौंप दिया अपने देवर को।

उसने अपना मोटा लंड निकाला और मेरी चूत पर लगाकर जोर से धक्के दे दिया उसका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया बहुत दिन बाद मुझे लंड मिला था तुम्हें भी मजे लेने लगे अपने गांड को घुमाने लगे अपनी चुचियों को खुद से दबाने लगी अपने खुद को खुद के दांत से काटने लगे अपने देवर को चूमने लगे और अपने सीने से उसे लगाने लगी।

बर्दाश्त नहीं कर पाई बसना में बह गई मेरी कामुकता जाग गई मेरी अंतर्वासना कामुक हो गई और मैं सब कुछ दे दी। उसने मुझे धक्के दे देकर चोदा कभी मुझे कुटिया बनाकर चोदा तो कभी मुझे लिटा कर चोदा कभी खड़े होकर चोदा कभी बैठा कर चोदा। मैं उस दिन पानी पानी हो गई थी मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ने लगी थी मैं पागल होने लगी थी अब यह सब अच्छा लगने लगा था मुझे क्योंकि मेरे जिस्म को भी इसकी जरूरत थी।

पूरी रात उसने मुझे चोदा। मैं भी चुदवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। और फिर रोजाना जब भी समय मिले जब मेरे साथ कहीं घर से बाहर जाए जब नहाने जाए तभी मेरा देवर मुझे चोद देता था कभी खड़े-खड़े कभी लिटाके कैसे भी करके दिन में एक बार चुद ही जाते थे।

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यह सिलसिला 1 महीने तक चला दूसरे महीने मेरा मेंस नहीं आया मेरी महावारी रुक गई। मुझे डर लगने लगा कि अब मैं क्या करूं पर मैं किसी से कुछ बोल भी नहीं सकती थी देवर को बोली तो बोला कि मैं भाग जाऊंगा बदनामी हो जाएगी। एक दिन मैं अपने देवर को कह रही थी कि टेबलेट लाकर मुझे दे दो पर सुना नहीं पर यह बात मेरी सास को समझ आ गई क्योंकि उसे लगा कि मेरी मेंस 1 महीने से नहीं हुई है।

और मेरा पेट भी बड़ा होने लगा था दे दे देते तो सांसे एक दिन आकर बोले कि तेरे पेट में कहीं बच्चा तो नहीं है मैं कुछ नहीं बोल पाई क्योंकि यह घर की बात थी बताती भी क्या। फिर उसने मुझे मारा और फिर पूछने लगी कि किसका है यह बच्चा तो मैं बता दूं आपके ही लाडले का है उसने ही मुझे चोदा है किसी और ने नहीं मुझे चोदा मैं नहीं पटाई उसको उसने मुझे बहलाया।

इस तरह से बात उजागर हो गई दोस्तों और फिर मेरे साथ अपने जान-पहचान के डॉक्टर के यहां से मेडिसिन लाई और मुझे खिलाई तब मेरा अबॉर्शन हुआ। तो मैं यह कहूं कि दोस्तों के जब आपको कभी मौका मिले किसी और को चोदने का तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि कोई गलती ना हो अगर आप किसी को आराम से चोद सकते हैं तो चोद लीजिए। अन्यथा आपका भी मुश्किल में ना फंसे मैं तो यही कहूंगी।

आपको यह मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी जरूर बताएं यह कहानी कम एडवाइस ज्यादा है इसलिए इस बात का ध्यान जरूर रखें दोस्तों।

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