अजनबी से दोस्ती, प्यार और चुदाई-1

Ajnabi Se Dosti, Pyar Aur Chudai-1

दोस्तो, मेरा नाम सिद्धार्थ है। मैं हिसार, हरियाणा का रहने वाला हूं। मैं hotsexstory.xyz नियमित पाठक हूँ।
मैं भी अन्तर्वासना पर अपनी कहानी लिखने चाहता था। लेकिन तब तक मैंने कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था और मैं कोई झूठी कहानी इस साइट पर नहीं लिखना चाहता था इसलिए मैंने कोई कहानी नहीं लिखी।

आज जो मैं कहानी आपको बताने जा रहा हूं वो कहानी मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है।

कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बारे में बताना चाहूंगा। मेरी हाइट 5 फीट 7 इंच है, रंग गेहुँआ हैं और दिखने में समान्य शरीर का मालिक हूँ। मेरे लिंग का आकार 6 इंच है जो किसी भी लड़की को संतुष्ट करने के लिए काफी है।
मैं एक अच्छे परिवार से सम्बन्ध रखता हूँ। पापा का बिजनेस है और माँ हाउसवाइफ है।

तो चलिए आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं कहानी पर आता हूँ।

2 साल पहले की बात है। पापा ने मुझे बिजनेस के काम से दिल्ली जाने को बोला क्योंकि उनकी कोई अर्जेंट मीटिंग थी इसलिए वो नहीं जा सकते थे। तो मैंने भी जाने के लिए हां कर दी। लेकिन मैं इससे पहले कभी दिल्ली नहीं गया था तो मैं अपने दोस्त अमित को अपने साथ चलने के लिए बोला क्योंकि वो वहाँ दिल्ली में कुछ साल रह चुका है। अमित भी चलने को तैयार हो गया।

हम दोनों अगले दिन ही दिल्ली के लिए निकल पड़े और हमें जिस स्थान पर जाना था, पहुंच गए और कुछ देर में हमने अपना काम निपटा लिया।

मैं पहले कभी दिल्ली नहीं आया था तो मैंने अमित को बोला- यार, तू दिल्ली रह चुका है, चल मुझे भी घुमा दे।
अमित बोला- ठीक है।
फिर हमने मेट्रो पकड़ी और सबसे पहले हम अक्षरधाम मंदिर गये।

उसके बाद हम इंडिया गेट गए। वहाँ थोड़ा बहुत घूमे तो काफी थक गए थे।
फिर हम पास में एक रेस्तरां में गये। वहाँ हमने खाने का आर्डर किया।

अमित के पीछे वाली टेबल पर 2 खूबसूरत लड़कियाँ बैठी हुई थी. एक ने काली ड्रेस पहन रखी थी और दूसरी ने लाल। दोनों ही लड़कियां क्या कमाल की थी। रंग गोरा परफेक्ट फ़िगर। दोनों ही कयामत थी।

मैं उनकी तरफ ही देख रहा था तो अमित बोला- क्या देख रहा है?
मैं बोला- तेरे पीछे 2 बहुत ही ब्यूटीफुल लड़कियाँ बैठी है यार … देख तो सही!
अमित ने उनको देखा और बोला- चल मिलवा के लाता हूं।
मैं बोला- क्यू मजाक कर रहा है यार?
अमित बोला- मैं सच बोल रहा हूं.

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और अमित उठ के चल दिया उनके पास।
मैं उसे देख रहा था।

अमित उस रेड ड्रेस वाली लड़की को जाकर हाय बोला।
उस लड़की ने भी उसको हय में जवाब दिया।
अमित बोला- पहचाना मुझे?
वो लड़की बोली- क्यों नहीं … हम एक ही क्लास में जो थे।

तब मुझे पता चला ये अमित की कोई क्लासमेट थी इसलिए ही वो मुझे उनसे मिलवाने को बोल रहा था।

फिर अमित ने मुझे भी वहीं बुलाया और मेरा भी इंट्रो उससे करवाया।
रेड वाली का नाम काजल था और ब्लैक वाली का नाम परी।

फिर कुछ देर हमारी बातें हुई और खाना खाया। जाते टाइम अमित ने काजल से उसका कांटेक्ट नंबर ले लिया। फिर वो दोनों निकल गए और हम दोनों वापिस हिसार के लिए निकल गए।
जाते टाइम मैं अमित को बोला- यार, वो परी मुझे बहुत पसंद आ गयी है, कुछ करके बात करवा उससे?
अमित बोला- चल मैं करता हूं कुछ।

उसने अगले दिन काजल से परी का नंबर ला के दिया। मैंने परी का नंबर सेव किया और उसे व्हाट्सएप पर हाय का मैसेज किया।
शाम को परी का मैसेज आया- हू इज दिस? ( कौन हो आप)
मैं- सिद्धार्थ, कल रेस्टोरेंट में मिले थे।

परी- हां, याद आया। लेकिन आपके पास मेरा नंबर कैसे आया।
मैं- वो काजल से लिया है।
पारी- क्यों?
मैं- आपसे बात करने के लिए, आपसे दोस्ती करने के लिए।
परी- ठीक है। आप अमित के दोस्त हो इसलिए। वरना मैं अनजान लोगों से बात नहीं करती।
मैं- थैंक्स।

फिर कुछ दिन तक हमारी बातें होती रही और हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए।

इस दौरान जब भी दिल्ली का काम होता तो मैं ही जाता था और मैं और परी मिल लेते थे। कभी मूवी कभी कुतुबमीनार, कभी लोटस टेम्पल, कभी लाल किला।
अब आलम ऐसा हो गया था कि उससे बात किये बिना मुझे चैन नहीं मिलता था और न ही उसे।

फिर जनवरी का महीना था, मेरा जन्मदिन आने वाला था।
परी बोली- बताओ क्या चाहिये गिफ्ट में?
मैं बोला- कुछ नहीं।
वो बोली- चुपचाप बता दो … नहीं तो कभी बात नहीं करूँगी।

तब मैं बोला- मैं इतनी बार दिल्ली तुमसे मिलने आया। तो मैं चाहता हूं तुम इस बार हिसार आओ मेरे जन्मदिन पर।
परी बोली- यार, ये तो बहुत मुश्किल है।
मैं बोला- तो ठीक है, रहने दो, कोई बात नहीं।
वो भी कुछ नहीं बोली।

मैंने सोचा कि शायद नहीं आ पाएगी क्योंकि एक लड़की को घर से बाहर निकलना मुश्किल होता है। इतना दूर आना तो कुछ ज्यादा ही मुश्किल होगा।

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फिर मेरे जन्मदिन से पहली रात हम दोनों बात कर रहे थे तो ठीक 12 बजे उसने मुझे बर्थडे विश किया।
और फिर हम सो गए।

सुबह मैं क्लास लगा कर घर आया ही था कि परी का कॉल आया- क्या कर रहे हो?
मैं- आया हूं अभी क्लास से!
परी- ठीक है, एक काम करो जल्दी से बस स्टैंड आ जाओ, मैं हिसार पहुंचने वाली हूं।
मैं- अचानक कैसे हिसार?
परी- तुमने पहली बार कुछ मांगा और मैं ना देती तो बहुत बुरा लगता मुझे।
मैं- ठीक है मैं आता हूँ, फिर बात करते हैं।

फिर मैं बस स्टैंड गया। कुछ देर में बस आयी और हम दोनों मिले।
मैं उसे एक रेस्टोरेंट ले गया जिसमें अलग केबिन बने हुए थे कपल के लिए। फिर हमने खाना आर्डर किया और कुछ देर बातें करते रहे।

मैंने परी को यहाँ आने के लिए थैंक्स बोला और उसे वापस दिल्ली वाली बस में भेज दिया क्योंकि उसको वापिस घर भी पहुंचना था शाम तक।
रात को हमारी बात हुई. मुझे लगा ये सही मौका है परी को प्रोपोज़ करने का!

कुछ देर बात करने के बाद मैं परी को बोला- परी, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, आई लव यू।
परी बोली- कितनी देर लगा दी ये बोलने में। मैं कब से ये सुनने के लिए इन्तजार कर रही थी।
उसने भी मुझे आई लव यू बोला।

यहाँ से हमारे लव स्टोरी स्टार्ट हुई। उस रात हमने देर रात तक बात की।
और फिर कुछ ही दिनों में हम सेक्स चैट पर आ गए। वो भी अब मुझसे पूरी खुल चुकी थी। मन ही मन हम एक दूसरे को अपना पति-पत्नि मान चुके थे।

एक दिन हम सेक्स चैट कर रहे थे। तो मैंने उसे बोला- परी यार, कब तक ऐसे चैट करेंगे, अब नहीं रहा जाता।
तो बोली- मुझे डर लगता है … कहीं कुछ हो न जाये।
मैं बोला- कुछ नहीं होगा मेरी जान। प्रोटेक्शन के साथ ही करेंगे।

उसके मन में फिर भी डर था लेकिन मेरे मनाने पर मान गयी।

तो मैंने अगले शनिवार को मिलने का तय किया और मैंने एक अच्छे होटल में रूम बुक कर लिया। मार्किट से मैंने कंडोम खरीद लिये।

आखिर वो दिन आ ही गया जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार था। लेकिन मैं उसको सरप्राइज देना चाहता था। मैंने रास्ते से गुलाब के फूल की बहुत सारी पंखुड़ियां ली और कुछ मोमबत्ती ली। फिर मैं दिल्ली के लिए निकल गया।

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दोपहर के 12 बजे के करीब दिल्ली पहुंचा। हम कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर मिले। कुछ देर वहीं बैठ कर बातें की।

फिर हम होटल की तरफ चल दिये। होटल पहुंच कर हमने चेक इन किया। बहुत अच्छा रूम था, साफ सफाई भी अच्छी थी और वेल डेकोरेटेड था।
रूम पर पहुंचते ही मैंने उसको ज़ोर से गले लगा लिया।

5 मिनट हम ऐसे ही एक दूसरे के गले लगे रहे, फिर मैंने हरकत की और उसकी गर्दन पर चुम्बन किया।
वो बोली- रुको मुझे वाशरूम जाना है।

वो वाशरूम गयी तो मैंने बाहर से वाशरूम का दरवाजा बंद कर दिया क्योंकि मैंने उसके लिए एक सरप्राइज सोचा था।
मैंने जल्दी से जो गुलाब की पंखुड़ियां लाया था उससे बिस्तर पर दिल बनाया और बाकी पंखुड़ियां बिछा दी।

इतनी में परी ने दरवाजा खटकाया।
मैं बोला- 2 मिनट रुको जान, तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है।
वो बोली- ठीक है।

फिर मैंने रूम में मोमबत्ती जलायी जो मैं साथ लाया था और कंडोम तकिए के नीचे रख दिये।
पूरी तैयारी हो चुकी थी।

मैंने परी को बोला- जान मैं दरवाजा खोल रहा हूं लेकिन तुम अपनी आंखों को बंद रखना।
वो बोली- क्यों?
मैं बोला- यार, जितना बोला उतना कर न।
वो बोली- ठीक है. मैंने कर ली आंखें बंद, अब खोलो जल्दी।

मैंने दरवाजा खोला, उसने आंखें बंद कर रखी थी। मैंने उसकी आँखों के आगे हाथ रखा और उसे वाशरूम से बाहर निकाला।

फिर मैंने उसकी आंखों के आगे से हाथ हटाया।
उसने आंखें खोली ओर मेरा सरप्राइज देख कर बहुत खुश हुई, उसने मुझे अपने गले लगा लिया और खुशी के मारे उसकी आँखों में आँसू आ गए थे।

मैं बोला- क्या हुआ जान? रो क्यों रही हो?
वो बोली- मुझे नहीं पता था कि तुम मेरे लिए इतना बड़ा सरप्राइज तैयार करोगे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि कोई मुझे इतना प्यार करेगा।
मैंने उसको बोला- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, अपनी जान से भी ज्यादा।
वो बोली- सिद्धार्थ, मैं तुम्हें पाकर धन्य हो गयी।

मैं बोला- बस बात ही करोगी या प्यार भी करोगी?
वो फिर शर्माते हुए बोली- सब कुछ तुम्हारा ही हैं, तुम जैसे चाहो जितना चाहो प्यार करो। मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी।

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