अंजू और माया की फुद्दी-1

(Anju Aur Maya Ki Fuddi-1)

प्रेषक : आशीष

आनन्द भैया कलकत्ता में जॉब करते थे। घर पर उनकी बीवी माया भाभी 35 साल की, उनकी बेटी 5 साल की, उनका बेटा 12 साल का, उनकी बहन अंजू 25 साल की और उनका छोटा भाई 20 साल का रहता था।

भैया कभी-कभी घर आ जाते थे। भाभी वैसे तो दिखने में कुछ खास नहीं थी पर अंजू जबरदस्त पटाखा थी, देख कर लंड खड़ा हो जाता था।

हम सब साथ रहते थे इस लिए कोई किसी पर शक नहीं करता था। भाभी को मैंने पहले ही मजाक करते-करते पटा लिया था।

जब बच्चे स्कूल जाते तो मौका देख कर हम लोग एक-दो बार चुदाई कर लिया करते थे। भाभी भी एकदम सैक्स की भूखी थीं क्योंकि भैया महीने में एक बार ही आते थे। मैं ही भाभी का असली सहारा था।

मैंने एक दिन भाभी को अपनी अंजू की चुदाई की आरज़ू बताई तो भाभी भड़क गईं। मैंने उन्हें समझाया कि अगर अंजू की शादी मेरे साथ हो जाये तो उन्हें भी मेरा साथ हमेशा मिलता रहेगा।

पहले तो वह नहीं मानी, आनाकानी करती रही पर फिर वो मान गईं, उन्होंने कहा- पहले तुम अंजू को पटाओ फिर काम और आसान हो जायेगा।

वो हम दोनों को अकेले मौका देने लगीं, भैया से भी बात चला दी। सब मुझे अपने होने वाले दामाद की नजर से देखने लगे।

मैंने भाभी से कहा- मैं अंजू को समझना चाहता हूँ, इसलिये अकेले में समय चाहिए।

भाभी ने कहा- लेकिन मेरे चोदू, कुछ उल्टा-सीधा नहीं करना।

मेरे मनाने पर वो मान गईं। योजना के मुताबिक भाभी ने हम दोनों एक दिन घर पर अकेले छोड़ दिया।

मैं इसी मौके की तलाश में था और अंजू भी शायद इसे मौके की तलाश में थी।

मैं अपने कमरे में बैठा था, अंजू पानी लाई मैंने उसे पकड़ कर अपने पास बिठाया। उसने कुछ नहीं कहा। हम साथ रहते थे, इसलिए शायद अलग बात नहीं लगी होगी। उसके बाद मैंने इधर-उधर की बात करते करते उसकी पीठ पर हाथ फेरा।

उसने कुछ नहीं कहा, मैं समझ गया लौंडिया तैयार है। उसका हुस्न गुलाबी-टॉप और जींस-स्कर्ट में गजब ढा रहा था। मैंने धीरे से उसके कानों पर चुम्बन किया। उसने अपनी आँखों को बंद कर लिया। फिर मैंने उसको अपनी गोद में लिटाया। वो कुछ नहीं बोली।

मैंने उसके होंठों को चूमा, उसने मेरा जबरदस्त साथ दिया, वो मेरे होंठों को चूसने-चाटने लगी। मैंने उसे पलंग पर लिटा दिया और उसके ऊपर से उसे चूमने लगा।

धीरे-धीरे मैंने उसके गोल-गोल मम्मों को दबाते हुए, उसकी जीभ से अपनी जीभ चाटने लगा। वो ‘उह-आह’ कर रही थी। मेरा साथ खूब मजे से दे रही थी। फिर मैंने उसके टॉप को ऊपर उठा कर खोल दिया। वो अपनी मैरून ब्रा में और कातिल लग रही थी।

मैंने धीरे से उसके कानों में कहा- जानम आज तो तुम गजब ढा रही हो।

वो बोली- तुम भी कुछ कम नहीं लग रहे हो पर जल्दी करो, वरना टुंचा आ जाएगा।

उसके छोटे भाई को सब टुंचा नाम से बुलाते थे।उसने मेरे लंड को मेरे पैंट के ऊपर से पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया।

मैं धीरे-धीरे चूमते हुए नीचे आने लगा मैंने उसके स्कर्ट को ऊपर उठाया वो बोलीं- क्या करते हो खोलोगे नहीं क्या?

मैंने स्कर्ट खोल कर हटा दिया दिया उसकी वो मैरून पैंटी और उस पर बने फूल और भी सैक्सी बना रहे थे। मैं धीरे-धीरे उसकी जांघों को चूमने लगा। उसने अपनी दोनों टाँगों को फैला दिया। मैंने धीरे से पैंटी एक साइड से हटा कर उसकी रसीली बुर को देखा एकदम साफ थी। मैं हैरान हो गया।

उससे पूछा तो उसने बताया- भाभी ने बताया कि तुम आज अकेले में मिलने वाले हो। कुछ बात करनी है, हमारी शादी के बारे में। मैं भी काफी दिनों से तुम्हें भैया बोलते-बोलते थक चुकी थी। मन तो करता था, रात को जब सब सो जायें तो तुम मुझे अकेले में लेकर चोदो पर रात को मैं उंगली डाल कर ही काम चला लेती थी। आज बड़े ही मुश्किल से मौका मिला है। हाथ से कैसे जाने देती।

उसकी बातें सुन कर मैं डर गया शायद अंजू पहले से चुदी-चुदाई लड़की है। यह मुझे फँसाने की साजिश है।

मैंने सोचा कि अभी तो चोद लेते हैं साली को, बाद में शादी से मुकर जायेंगे।

मैं तेजी से उसकी बुर चाटने लगा। उसने अपनी पैंटी खुद ही उतार कर फेंक दी और मेरे बालों को पकड़ कर मेरा मुँह अपनी बुर में दबाने लगी।

वो ‘उह आह आह आह’ करने लगी। थोड़ी देर में वो झड़ गई।

मेरा 6 इंच लम्बा लंड खड़ा हो गया था मैंने जैसे ही 3 इंच मोटा, 6 इंच लम्बा लंड उसके बुर में घुसेड़ा वो सड़ाक से उसमें चला गया और अंजू ने ‘उफ़’ भी नहीं की। मैं समझ गया कि साली बहन की लौड़ी पहले से खूब खाई खेली, ठुकी-ठुकाई थी और मुझे फँसाया जा रहा था।

मैंने भी ठान लिया था। दोनों ननद-भाभी को चोदने के बाद शादी से मना कर दूँगा, अगर कुछ हुआ तो कहानी बना दूँगा। मैंने उसकी बुर में अपना लंड थोड़ी देर अन्दर-बाहर किया। फिर उसे पीछे पलटने को कहा कि डॉगी स्टाइल में करेंगे।

वो मान गई।

मैं मौका देख उसकी गाण्ड में अपना लंड घुसाने लगा। वो तड़पने लगी मैंने शादी की बात कह कर मना लिया।

वो शांत हो गई। थोड़ी देर बाद मैंने धक्का लगाना शुरू किया। साली की गाण्ड बड़ी टाइट थी। मजा आ रहा था। वो ‘आह-आह’ कर रही थी। थोड़ी देर झटके मारने के बाद मैंने अपना लंड निकाला।

वो बोली- गाण्ड में बहुत दर्द हो रहा है।

मैं बोला- कोई बात नहीं जान मजा भी तो आता है।

फिर मैंने तकिया उसकी गाण्ड के नीचे रखा। और उसकी दोनों टाँगों को अपने कंधे पर रख कर झटका देने लगा।

वो बोली- छोड़ो ! मैं झड़ने वाली हूँ।

मैं नहीं माना, लगातार पेलता रहा। वो ‘आह-आह’ करके झड़ गई। मैं पेलता रहा, वो रुकने को बोलती रही, मैं नहीं रुका। मैं तेज होता गया।

मैंने पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ, कहाँ झडूं?

वो बोली- इस बार माल खाने की बारी मेरी है। तुमने तो मेरा माल का मजा ले लिया है। मुझे भी तो अपना माल चखने दो।

मैंने उसके मुँह में अपना लौड़ा दे दिया। उसके मुँह में कुछ देर झटके देने के बाद उसके मुँह में ही मैं झड़ गया। उसने सारा माल पी लिया। मेरे लिए यह ताज्जुब की बात थी। कोई लड़की पहली बार में लंड मुँह में लेने से मना करती है और माल पीना तो काफी चुदाई के बाद ही होता है। पर अंजू सब कर रही थी जिससे मुझे यकीन हो गया दाल में कुछ काला है।

थोड़ी देर रुक कर वो मेरा लंड फिर चूसने लगी। जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ। वो मुझ पर चढ़ कर अपनी बुर में मेरा लंड घुसा कर झटके मारने लगी। जैसे मुझे चोद रही हो।

मैंने माया भाभी को भी चोदा था, जो दो बच्चों की माँ थी पर वो भी इतनी बड़ी चुद्दकड़ नहीं थी।

मैं अंजू को फिर लिटा कर चोदने लगा। मैंने धक्का लगाना शुरू किया थोडी देर बाद उसकी दोनों टाँगों को अपने कंधे पर रख कर झटका देने लगा हम दोनों एक बार फिर झड़ गए।

मैंने पूछा- मजा आया?

वो बोली- बड़े दिनों बाद असली मजा आया।

मैंने पूछा- बड़े दिनों बाद से क्या मतलब?

वो बात को घुमा गई, बोली- काफी टाइम हो गया है, शायद भाभी आने वाली होगीं। हमें कपड़े पहन लेना चाहिए।

जैसे ही हमने कपड़े पहने, भाभी आ गईं। मानो वे छुप कर हमारी चुदाई लीला देख रही थीं।

उनने पूछा- समझ लिया एक-दूसरे को?

इसके पहले मैं कुछ कहता, अंजू बोलीं- आशीष भैया बहुत ही अच्छे हैं।

घर पर सब खुश थे और मैं टेंशन में एक अकेला था कि एक चुदी-चुदाई लड़की के चक्कर में जिन्दगी भर के लिए फँसने वाला जो था।

कहानी अगले भाग में समाप्त होगी !

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