अर्जुन से करवाया अपनी चूत का उद्घाटन

Arjun se karwaya apni chut ka udghatan

आप सभी की तरह मेरी भी इच्छा थी कि मैं भी अपनी कहानी आप लोगों के सामने रखूँ।

मैं गया, बिहार की रहने वाली हूँ।

बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में पढ़ाई करती थी।

मैं पढने में बहुत अच्छी थी और मेरी ही क्लास में एक अर्जुन नाम का एक लड़का भी पढ़ता था, वो भी मेरी तरह पढ़ने में बहुत अच्छा था।

क्लास में जब कभी टेस्ट होता तो कभी वो टॉप पर रहता तो कभी मैं।

इस तरह से हम दोनों में दोस्ती बढ़ती गई।

अर्जुन बहुत शांत स्वभाव का था।

हम दोनों एक-एक क्लास आगे बढ़ते गए और हमारी दोस्ती भी गहरी होती गई और धीरे-धीरे मैं उसे चाहने लगी।

मैं उसे पाने को बेताब रहती लेकिन वो मुझ से सिर्फ दोस्ती तक संबध रखता और मैं उसके आगे कि प्रतिक्रिया का हमेशा इंतजार करती मगर वो तो एकदम पत्थर दिल था।

मैँ आप लोगों की बता दूँ कि मुझे देखकर सभी लङके आहें भरते हैं, मेरी उस समय साईज 32-28-34 और मैं एकदम गोरी-चिट्टी थी।

लेकिन जिसके लिए मैं मरती थी वो कुछ करता ही नहीं था।

एक दिन मुझसे रहा नहीं गया और ट्यूशन ख़त्म होने के बाद मैं बोली कि चलो पार्क में घुमने चलते हैं, वो तैयार हो गया।

हम दोनों थोङी ही देर में पार्क मे पहुँच गये। थोड़ी देर बैठने के बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे प्रपोज कर दिया और मैं खुद ही उसे पकङ कर किस करने लगी।

वो अचानक इस तरह मेरे किस करने से हड़बड़ा गया।

पर था तो आख़िर लड़का, जल्दी ही संभल कर वो मुझे पकङ कर जोरों से चूमने लगा।

हम दोनों एक-दूसरे को लगभग १० मिनिट तक यूँही चूसते रहे।

उस दिन मेरी लाईफ का सबसे खुशी का दिन था और मैं खुशी से रोने लगी।

पार्क में लगभग 30 मिनट बिताने के बाद हमलोग वहाँ से चल दिए।

धीरे-धीरे दशहरा नजदीक आ गया और नवरात्र के दिन मेरी पूरी फैमली का घूमने का प्लान बना, शाम सात बजे का।

मैने मम्मी से बोला कि मैं घुमने नहीं जाऊँगी।

वो मान गयीं और इधर मैने अर्जुन को फोन कर दिया कि वो मेरे घर पर शाम 8 बजे आ जाए।

मैँ बहुत खुश थी और 8 बजने का इंतजार करने लगी।

लगभग 7 बजे मेरे घरवाले घूमने निकल पङे और मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा।

मैने बाथरुम में जा कर अपने चूत के बाल हटाए और अपनी उंगली से ही अपनी चूत की आग को थोड़ा शांत किया।

फिर मैं अच्छे से नहाई और नहाने के बाद अपने रुम में बड़े आईने के सामने खङी होकर अपने आप को निहारने लगी। कभी आगे, कभी पीछे तो कभी अपनी चूत पर हाथ रखकर।

मन ही मन मैं बहुत खुश थी। मैं बताना चाहूंगीं कि उस समय मैं पूरी कयामत लग रही थी, मेरी गुलाबी चूत उसमे सबसे खास थी।

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मैं पूरी तरह सज-धज कर तैयार होने लगी। काली ब्रा और गुलाबी पैंटी के ऊपर मैने काली नाइटी पहनी।

लगभग सवा आठ बजे मेरे घर की डोर-बेल बजी और मैं खुशी से उछल पङी।

मैं दौङ कर दरवाजा खोलने गई और खोलते ही अर्जुन को अंदर खींच लिया और जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया। उफ़!! उस दिन अर्जुन भी क्या लग रहा था।

हम दोनो एक-दूसरे को 5 मिनट तक चूसते रहे, वो बोला – क्या लग रही हो मेरी जान।

मैं बोलीं – अर्जुन, हमलोग के पास 10 बजे तक टाइम है, प्लीज मेरी प्यास बुझा दो।

इतना कहते ही वो मुझ पर टूट पङा और वो मेरी चुची को दबाने लगा और मेरी नाइटी उसने कब उतार दी मुझे पता भी नहीं चला।

मैं धीरे-धीरे बहुत गरम हो गई वो मेरे साथ क्या-क्या कर रहा था मुझे कुछ पता ही नहीं चल रहा था।

फिर जब उसने मेरी चूत में अपनी उंगली डाली तो मैं बस पागल हो गई और बोलने लगी – अर्जुन, जल्दी कुछ करो।

बस इतना सुनते ही उसने मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया और वो भी अपने सारे कपड़े उतारने लगा।

उसने जैसे ही अपनी चड्डी उतारी मैं डर गयी। उसका लण्ड 6 से 7 लम्बा था और मैं बोली – अर्जुन, रहने दो मुझे कुछ नहीं करना है।

लेकिन वो तो अब तक पागल हो चूका था और वो मेरी चूत में जबरदस्ती लण्ड डालने लगा।

मेरे लाख मना करने के बाद भी आखिरकार वो कामयाब हो गया और जैसे ही उसने एक धक्का दिया, मैं रो पड़ी और मेरी चूत से खून निकाल गया, मैं खून देखकर डर गई।

लेकिन वो नहीं माना और वो अपनी स्पीड बढाते गया। धीरे-धीरे दर्द के साथ मुझे भी मज़ा आने लगा।

मैं भी जन्नत में खोने लगी, अचानक मैंने अपना दम तोङ दिया और मैं झङ गई।

2 मिनट बाद अर्जुन बोला – मैं झडने वाला हुँ और वो मेरी चूत के ऊपर झड गया और वो मेरे ऊपर 5 मिनिट लेटा रहा।

फिर हम दोनों ने जाकर एक-दूसरे को नहलाया।

दोस्तो, मेरी सच्ची चुदाई पसंद आई तो आप मुझे जरुर बताँए –